कक्षा 9 हिंदी · गंगा · अध्याय 2

क्या लिखूँ?

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? का सारांश, व्याख्या, शब्दार्थ, NCERT प्रश्न उत्तर, भाषा-अभ्यास और वीडियो समाधान।

वीडियो पाठसारांशव्याख्याशब्दार्थसंपूर्ण प्रश्नोत्तर
लेखक / कवि
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पुस्तक
गंगा
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ
30–44
विधा
गद्य
अध्याय 2 के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री

यह विचारप्रधान और हास्य-व्यंग्यपूर्ण निबंध लेखन की प्रक्रिया, विषय-वस्तु, शैली, अनुभव और समाज-सुधार के प्रश्नों को रोचक ढंग से समझाता है।

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सारांश, व्याख्या और महत्वपूर्ण अध्ययन-बिंदु

आपकी तैयार की गई अध्ययन सामग्री को विषयानुसार उसी क्रम में व्यवस्थित किया गया है।

1. लेखक परिचय

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक, कवि और हास्य-व्यंग्यकार थे। उनका जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उन्होंने निबंध, कहानी, कविता और आलोचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन, समाज-सुधार, लोकजीवन और साहित्यिक विचारों का सुंदर समन्वय मिलता है।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने, अश्रुदल, शतदल, झलमला, त्रिवेणी आदि।

2. पाठ का परिचय

“क्या लिखूँ?” एक आत्मपरक और विचारप्रधान निबंध है। इसमें लेखक ने निबंध लिखने की प्रक्रिया को रोचक ढंग से समझाया है। लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखना है— “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज-सुधार”।

लेखक इन दोनों विषयों पर आदर्श निबंध लिखना चाहता है, ताकि वह नमिता और अमिता को निबंध-लेखन का रहस्य समझा सके। इसी बहाने लेखक निबंध लिखने की कठिनाइयों, सामग्री-संग्रह, रूपरेखा, शैली, अनुभव, भाव और विचारों पर चर्चा करता है।

3. पाठ का सारांश

लेखक कहता है कि उसे आज निबंध लिखना ही पड़ेगा। वह अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के विचारों का उल्लेख करता है। गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। जब मन में भावों का आवेग उठता है, तब कोई भी विषय उन भावों को व्यक्त करने का माध्यम बन सकता है। वे कहते हैं कि जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूंटी काम दे सकती है, वैसे ही भाव व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त हो सकता है।

लेकिन लेखक अपने बारे में कहता है कि उसने ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं किया है। उसे निबंध लिखने के लिए सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। इस बार उसे दो लड़कियों—नमिता और अमिता—के लिए आदर्श निबंध लिखना है। नमिता “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर निबंध चाहती है और अमिता “समाज-सुधार” विषय पर निबंध चाहती है।

लेखक सोचता है कि पहले निबंध-शास्त्र के आचार्यों की राय जान ली जाए। उसे पता चलता है कि निबंध छोटा होना चाहिए, उसमें सामग्री और शैली का ध्यान रखना चाहिए। निबंध लिखने से पहले सामग्री एकत्र करनी चाहिए, मनन करना चाहिए और रूपरेखा बनानी चाहिए। लेकिन लेखक के पास न समय है, न पुस्तकालय, न विश्वकोश। उसे अपने ज्ञान के आधार पर ही लिखना है।

लेखक निबंध की रूपरेखा बनाने में भी कठिनाई महसूस करता है। वह ए.जी. गार्डिनर और शेक्सपीयर का उदाहरण देता है कि बड़े-बड़े लेखकों को भी शीर्षक या नाम रखने में कठिनाई होती थी। फिर लेखक शैली पर विचार करता है। उसे बताया गया है कि भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए। लेकिन वह हास्यपूर्ण ढंग से कहता है कि मास्टर होने के कारण उसे अपनी विद्वता दिखाने के लिए लंबे और कठिन वाक्य लिखने चाहिए।

इसके बाद लेखक अंग्रेजी निबंधकार मॉन्टेन की पद्धति की चर्चा करता है। मॉन्टेन ने अपने निबंधों में वही लिखा जो उन्होंने देखा, सुना और अनुभव किया। उनके निबंधों में लेखक की सच्ची अनुभूति और भावों की स्वाभाविक अभिव्यक्ति होती है। लेखक इस पद्धति को अपनाने का निर्णय करता है।

लेखक को अमीर खुसरो की एक कहानी याद आती है। एक बार चार महिलाओं ने उनसे अलग-अलग विषयों—खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल—पर कविता सुनाने को कहा। खुसरो ने एक ही पद में चारों विषयों को मिला दिया। लेखक भी इसी पद्धति से अपने दोनों विषयों—“दूर के ढोल सुहावने” और “समाज-सुधार”—को एक ही निबंध में शामिल करने का निश्चय करता है।

फिर लेखक “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का अर्थ समझाता है। वह कहता है कि ढोल की आवाज पास बैठे लोगों को कर्कश लग सकती है, लेकिन दूर बैठे व्यक्ति को वही आवाज मधुर और आनंददायक लगती है। दूर से व्यक्ति वास्तविक कठिनाई या कठोरता को नहीं देख पाता, इसलिए उसे वस्तु अधिक सुंदर लगती है।

इसी आधार पर लेखक युवाओं और वृद्धों की तुलना करता है। युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं, क्योंकि वे जीवन-संघर्ष से दूर होते हैं। वृद्ध अतीत को सुंदर मानते हैं, क्योंकि वे अपने बीते दिनों की स्मृतियों में सुख देखते हैं। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं—युवा भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं और वृद्ध अतीत को वर्तमान में देखना चाहते हैं।

इसी असंतोष के कारण समाज में सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। लेखक कहता है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा समय नहीं आया जब सुधार की आवश्यकता न रही हो। बुद्ध, महावीर, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे अनेक सुधारकों ने समाज को नई दिशा दी। समाज में दोष भी आते रहते हैं और सुधार भी होते रहते हैं। इसलिए जीवन प्रगतिशील है।

अंत में लेखक बताता है कि आज का युवा भविष्य का सपना देखता है, पर वही युवा वृद्ध होकर अतीत के गौरव का सपना देखेगा। इस प्रकार भविष्य और अतीत दोनों दूर के ढोल की तरह सुहावने लगते हैं।

4. केंद्रीय भाव / मुख्य विचार

इस निबंध का मुख्य भाव यह है कि निबंध लेखन केवल विषय पर तथ्य लिखना नहीं है, बल्कि लेखक के अनुभव, विचार, भाव और शैली की सच्ची अभिव्यक्ति है। लेखक यह भी समझाता है कि दूर की वस्तु प्रायः आकर्षक लगती है, क्योंकि हम उसकी वास्तविक कठिनाइयों को नहीं जानते। इसी कारण युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं और वृद्ध अतीत को सुखद समझते हैं। वर्तमान की कमियों के कारण समाज-सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

5. पाठ के प्रमुख बिंदु

निबंध लेखन के लिए भाव, विचार, सामग्री और शैली आवश्यक हैं।

ए.जी. गार्डिनर के अनुसार मनोभाव विषय से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

लेखक को निबंध लिखने में परिश्रम, सोच और मनन की आवश्यकता पड़ती है।

आदर्श निबंध के लिए सामग्री-संग्रह, रूपरेखा और शैली का ध्यान रखना चाहिए।

मॉन्टेन की निबंध पद्धति अनुभव और स्वाभाविक अभिव्यक्ति पर आधारित है।

“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का अर्थ है—दूर की वस्तु वास्तविकता से अधिक आकर्षक लगती है।

युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं, वृद्ध अतीत को सुखद मानते हैं।

वर्तमान से असंतोष समाज-सुधार का कारण बनता है।

समाज में दोष और सुधार दोनों निरंतर चलते रहते हैं।

जीवन प्रगतिशील है, इसलिए सुधार की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

6. शीर्षक “क्या लिखूँ?” की सार्थकता

पाठ का शीर्षक “क्या लिखूँ?” अत्यंत उपयुक्त है। लेखक निबंध लिखने बैठता है, पर उसके सामने यह समस्या है कि वह क्या लिखे और कैसे लिखे। वह विषय, सामग्री, रूपरेखा, शैली और विचारों पर लगातार सोचता है। पूरा निबंध इसी दुविधा और विचार-प्रक्रिया पर आधारित है। इसलिए शीर्षक पाठ की मूल समस्या और लेखक की मानसिक स्थिति को स्पष्ट करता है।

7. “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का भाव

इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो वस्तु, व्यक्ति, स्थिति या समय हमसे दूर होता है, वह हमें अधिक आकर्षक और सुंदर दिखाई देता है। परंतु जब हम उसके पास जाते हैं, तो उसकी कठिनाइयाँ और वास्तविकता समझ में आती है।

उदाहरण: दूर से किसी बड़े शहर का जीवन बहुत आकर्षक लगता है, पर वहाँ रहने पर भीड़, प्रदूषण, खर्च और तनाव जैसी समस्याएँ सामने आती हैं।

8. निबंध लेखन के लिए आवश्यक बातें

इस पाठ के अनुसार निबंध लिखते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए—

1. विषय चयन

जिस विषय पर निबंध लिखना है, उसे स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।

2. सामग्री-संग्रह

विषय से संबंधित तथ्य, उदाहरण, अनुभव और विचार इकट्ठे करने चाहिए।

3. मनन

सामग्री को केवल जमा करना पर्याप्त नहीं है; उस पर विचार करना भी जरूरी है।

4. रूपरेखा निर्माण

निबंध लिखने से पहले मुख्य बिंदुओं की योजना बना लेनी चाहिए।

5. शैली निर्धारण

भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली होनी चाहिए।

6. भाव-विस्तार

मुख्य विचार को उदाहरणों और तर्कों के साथ विस्तार देना चाहिए।

7. समापन

निबंध का अंत प्रभावशाली और विषय के अनुसार होना चाहिए।

9. पाठ में निबंध लेखन की दो प्रमुख पद्धतियाँ

1. शास्त्रीय पद्धति

इसमें सामग्री-संग्रह, रूपरेखा, शैली और क्रमबद्ध विचारों पर अधिक जोर दिया जाता है।

2. मॉन्टेन की अनुभवात्मक पद्धति

इसमें लेखक अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए विषयों को स्वाभाविक ढंग से लिखता है। इसमें सच्ची अनुभूति और व्यक्तिगत विचारों का महत्व अधिक होता है।

10. महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
स्फूर्तिउत्साह, प्रेरणा, उमंग
आवेगमन का तेज भाव, उतावली
यथार्थवास्तविकता, सत्य
उत्थितउत्पन्न हुआ, उठा हुआ
रहस्यगुप्त बात, मर्म
विज्ञजानकार, विद्वान
सम्मतिराय, सहमति
अनुसंधानखोज, जाँच-पड़ताल
विश्वकोशअनेक विषयों की जानकारी देने वाला ग्रंथ
दुर्बोधकठिन, जो आसानी से समझ में न आए
गांभीर्यगंभीरता, गहराई
गुत्थीउलझन, कठिनाई
अज्ञनासमझ, ज्ञानहीन
पद्धतितरीका, प्रणाली
पाश्चात्यपश्चिमी
आख्यायिकाकहानी या वृत्तांत
उदात्तमहान, श्रेष्ठ
अभिव्यक्तिभावों या विचारों को प्रकट करना
अनुसरणपीछे चलना, अनुकरण करना
समावेशशामिल करना
संध्याशाम का समय
अंकितचित्रित, लिखा हुआ
कोलाहलशोर
विषादउदासी
कलरवमधुर ध्वनि
कर््कशकठोर, तीखी ध्वनि
प्रमोदआनंद
क्रांतिबड़ा परिवर्तन
अतीतबीता हुआ समय
वर्तमानअभी का समय
भविष्यआने वाला समय
प्रगतिशीलआगे बढ़ने वाला

11. पाठ में आए प्रमुख साहित्यकार और व्यक्तित्व

नामपरिचय
ए.जी. गार्डिनरअंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार
मॉन्टेनफ्रांसीसी निबंधकार, अनुभवात्मक निबंध पद्धति के लिए प्रसिद्ध
शेक्सपीयरअंग्रेजी साहित्य के महान नाटककार
बाणभट्टसंस्कृत के प्रसिद्ध गद्यकार
श्रीहर्षसंस्कृत के प्रसिद्ध कवि
अमीर खुसरोप्रसिद्ध कवि, संगीतज्ञ और साहित्यकार
सेनापतिहिंदी साहित्य के कवि
बुद्धदेवबौद्ध धर्म के प्रवर्तक और समाज-सुधारक
महावीर स्वामीजैन धर्म के 24वें तीर्थंकर
कबीरसंत कवि और समाज-सुधारक
गुरु नानकसिख धर्म के संस्थापक
राजा राममोहन रायसामाजिक सुधारक
स्वामी दयानंदआर्य समाज के संस्थापक
महात्मा गांधीराष्ट्रपिता और महान समाज-सुधारक

12. पाठ की भाषा-शैली

इस निबंध की भाषा सरल, रोचक, व्यंग्यपूर्ण और विचारप्रधान है। लेखक ने पाठकों से सीधे संवाद करने वाली आत्मपरक शैली अपनाई है। निबंध में हास्य, व्यंग्य, उदाहरण, तर्क और साहित्यिक संदर्भों का सुंदर प्रयोग हुआ है।

भाषा-शैली की विशेषताएँ—

आत्मपरक शैली

संवादात्मक शैली

हास्य-व्यंग्य का प्रयोग

उदाहरणों की सहायता

साहित्यिक और सांस्कृतिक संदर्भ

सरल परंतु प्रभावशाली भाषा

विचारों की क्रमबद्ध प्रस्तुति

13. पाठ से मिलने वाली शिक्षाएँ

लेखन केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि अनुभव और विचारों की अभिव्यक्ति है।

अच्छा निबंध लिखने के लिए तैयारी, सोच और अभ्यास जरूरी है।

दूर की वस्तु हमेशा वास्तविकता से अधिक सुंदर लग सकती है।

वर्तमान की समस्याओं को समझकर ही सही सुधार किए जा सकते हैं।

समाज-सुधार हर युग की आवश्यकता है।

युवा और वृद्ध दोनों की दृष्टि अलग-अलग होती है; दोनों को एक-दूसरे को समझना चाहिए।

जीवन में परिवर्तन और सुधार निरंतर चलते रहते हैं।

14. महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और उनका भाव

1. “असली वस्तु है हैट, खूंटी नहीं।”

भाव

यहाँ हैट से लेखक के भावों का संकेत है और खूंटी से विषय का। लेखक कहना चाहता है कि निबंध में विषय से अधिक महत्वपूर्ण लेखक के मनोभाव होते हैं।

2. “दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”

भाव

दूर से कोई वस्तु सुंदर और आकर्षक लगती है, पर पास जाने पर उसकी वास्तविकता समझ में आती है।

3. “तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक।”

भाव

युवा बदलाव चाहते हैं और भविष्य को सुंदर मानते हैं, जबकि वृद्ध अपने अतीत को श्रेष्ठ मानते हैं और पुरानी बातों को बचाना चाहते हैं।

4. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”

भाव

समाज में हर समय कुछ न कुछ कमियाँ रहती हैं। इसलिए हर युग में सुधार की जरूरत होती है।

15. व्याकरण संबंधी बातें

1. समास

दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने संक्षिप्त शब्द को समास कहते हैं।

उदाहरण: निबंध + रचना = निबंध-रचना अर्थ: निबंध की रचना

पाठ से कुछ सामासिक शब्द

सामासिक शब्दसमास-विग्रहसमास का प्रकार
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष
जीवन-संग्रामजीवन का संग्रामतत्पुरुष
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष
भाव-विस्तारभाव का विस्तारतत्पुरुष

2. उपसर्ग

जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में लगकर नया शब्द बनाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।

उदाहरण: दुर् + बोध = दुर्बोध अन + आदि = अनादि

पाठ से उदाहरण

शब्दउपसर्गमूल शब्द
दुर्बोधदुर्बोध
अनादिअन्आदि
असंतोषसंतोष
अनुसंधानअनुसंधान
अभिव्यक्तिअभिव्यक्ति
समावेशसम्आवेश

3. प्रत्यय

जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में लगकर नया शब्द बनाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।

उदाहरण: सुधार + क = सुधारक कठिन + आई = कठिनाई

पाठ से उदाहरण

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
सुधारकसुधार
कठिनाईकठिनआई
सुंदरतासुंदरता
मधुरतामधुरता
वास्तविकतावास्तविकता
कर्कशताकर्कशता

16. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न

1. “क्या लिखूँ?” पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य निबंध लेखन की प्रक्रिया को समझाना है। लेखक बताता है कि निबंध लिखने के लिए विषय, सामग्री, रूपरेखा, शैली, अनुभव और विचारों की आवश्यकता होती है।

2. लेखक को कौन-कौन से दो विषयों पर निबंध लिखना था?

उत्तर

लेखक को नमिता के लिए “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और अमिता के लिए “समाज-सुधार” विषय पर निबंध लिखना था।

3. ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए क्या आवश्यक है?

उत्तर

ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति आवश्यक है। जब मन में भावों का आवेग उठता है, तो लेखक किसी भी विषय पर अपने भाव व्यक्त कर सकता है।

4. लेखक मॉन्टेन की पद्धति क्यों अपनाना चाहता है?

उत्तर

लेखक मॉन्टेन की पद्धति इसलिए अपनाना चाहता है क्योंकि उसमें लेखक अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए विचारों को स्वाभाविक ढंग से लिखता है। यह पद्धति सच्ची अनुभूति और व्यक्तिगत भावों पर आधारित है।

5. समाज-सुधार की आवश्यकता हर युग में क्यों रहती है?

उत्तर

समाज में समय-समय पर नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं। इन्हीं दोषों को दूर करने के लिए नए सुधारों की आवश्यकता होती है। इसलिए समाज-सुधार की प्रक्रिया हर युग में बनी रहती है।

17. बहुत संक्षिप्त पुनरावृत्ति

“क्या लिखूँ?” निबंध में लेखक ने निबंध लिखने की कठिनाइयों और प्रक्रिया को रोचक ढंग से बताया है। लेखक दो विषयों—“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज-सुधार”—को मिलाकर निबंध लिखता है। वह बताता है कि दूर की वस्तु आकर्षक लगती है और वर्तमान से असंतोष के कारण समाज में सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है। पाठ लेखन-कला, अनुभव, विचार और समाज-सुधार का सुंदर समन्वय है।

अभ्यास और पुनरावृत्ति

संपूर्ण प्रश्नोत्तर और भाषा-अभ्यास

प्रश्न, उत्तर, तर्क, काव्य-बोध, व्याकरण तथा गतिविधियाँ मूल अध्ययन सामग्री के क्रम में दी गई हैं।

मौलिक अध्ययन-मार्गदर्शिका: NCERT Hindi Tutor · ncerthinditutor.com

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. "हैट टॉगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?

(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर

सही विकल्प — (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना

तर्क

यहाँ ‘हैट’ लेखक के मन के भावों का प्रतीक है और ‘खूँटी’ विषय का प्रतीक है। लेखक कहना चाहता है कि निबंध लिखने में विषय से अधिक महत्वपूर्ण लेखक के मन के भाव और विचार होते हैं। जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है, वैसे ही अपने भावों को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय माध्यम बन सकता है। इसलिए विकल्प (क) सबसे उपयुक्त है।

2. "उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?

(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर

सही विकल्प — (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

तर्क

मानटेन की निबंध-लेखन पद्धति में लेखक वही लिखता है जो उसने देखा, सुना और अनुभव किया होता है। ऐसे निबंधों में बनावटीपन नहीं होता, बल्कि लेखक की सच्ची अनुभूति, सच्चे भाव और स्वाभाविक अभिव्यक्ति होती है। इसलिए लेखक भी इस पद्धति को अपनाकर अनुभव-आधारित स्वच्छंद लेखन करना चाहता है। इसलिए विकल्प (घ) सही है।

3. "तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद..." यह तुलना किस पर आधारित है?

(क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर

सही विकल्प — (घ) अभिलाषा और अनुभव

तर्क

तरुण भविष्य को सुंदर मानते हैं क्योंकि उनके मन में इच्छाएँ, सपने और अभिलाषाएँ होती हैं। वे आने वाले समय को उज्ज्वल समझते हैं। दूसरी ओर वृद्ध अपने अनुभवों के आधार पर अतीत को सुखद मानते हैं। वे बीते समय की स्मृतियों में सुख पाते हैं। इसलिए यह तुलना अभिलाषा और अनुभव पर आधारित है। अतः विकल्प (घ) सही है।

4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?

(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर

सही विकल्प — (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए

तर्क

अमीर खुसरो की कहानी में चार स्त्रियाँ उनसे खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल पर कविता सुनाने को कहती हैं। अमीर खुसरो अपनी प्रतिभा से चारों विषयों को एक ही पद्य में जोड़ देते हैं। लेखक इस कहानी का उल्लेख इसलिए करता है क्योंकि वह भी दो विषयों — “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज-सुधार” — को एक ही निबंध में शामिल करना चाहता है। इसलिए विकल्प (ख) सही है।

5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?

(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर

सही विकल्प — (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

तर्क

लेखक के अनुसार मनुष्य जाति के इतिहास में ऐसा कोई समय नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो। समाज में नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उन्हें दूर करने के लिए नए-नए सुधारों की आवश्यकता पड़ती रहती है। इसलिए समाज-सुधार हर युग में आवश्यक है। अतः विकल्प (क) सही है।

मेरी समझ मेरे विचार

1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तर

ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। जब मन में उमंग, स्फूर्ति और आवेग उत्पन्न होता है, तब लेखक किसी भी विषय पर लिख सकता है। उनके अनुसार विषय अधिक महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि लेखक के मन के भाव अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

लेकिन लेखक अपने बारे में कहता है कि उसे ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं हुआ है। उसे निबंध लिखने के लिए सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है और परिश्रम करना पड़ता है। वह बिना तैयारी के आसानी से निबंध नहीं लिख पाता।

इस प्रकार गार्डिनर भावों के स्वाभाविक आवेग को निबंध लेखन का आधार मानते हैं, जबकि लेखक निबंध लेखन में सोच, तैयारी, मनन और परिश्रम को आवश्यक मानता है।

2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर

लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, लेकिन उनकी असंतुष्टि के कारण अलग-अलग हैं।

तरुणों की असंतुष्टि का कारण यह है कि वे भविष्य को अधिक सुंदर और उज्ज्वल मानते हैं। वे नए सपने देखते हैं, परिवर्तन चाहते हैं और वर्तमान व्यवस्था को अधूरा समझते हैं। उन्हें लगता है कि आने वाला समय वर्तमान से बेहतर हो सकता है। इसलिए वे वर्तमान से संतुष्ट नहीं होते और क्रांति या बदलाव का समर्थन करते हैं।

वृद्धों की असंतुष्टि का कारण यह है कि वे अपने अतीत को सुखद और गौरवपूर्ण मानते हैं। वे बीते हुए समय की स्मृतियों में आनंद पाते हैं और वर्तमान की तुलना अपने पुराने समय से करते हैं। उन्हें लगता है कि पहले का समय अधिक अच्छा, सरल और मूल्यवान था। इसलिए वे अतीत को वर्तमान में लाना चाहते हैं।

इस प्रकार तरुण भविष्य के कारण वर्तमान से असंतुष्ट हैं, जबकि वृद्ध अतीत की स्मृतियों के कारण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।

3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तर

नमिता लेखक से “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है। अमिता लेखक से “समाज-सुधार” विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है।

इन विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को कई कठिनाइयाँ आईं। पहली कठिनाई यह थी कि “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर पाँच पेज लिखना लेखक को कठिन लग रहा था। उसे लगता था कि यह विषय छोटा है और इस पर इतना विस्तार कैसे किया जाए।

दूसरी कठिनाई “समाज-सुधार” विषय को लेकर थी। समाज-सुधार बहुत व्यापक विषय है। इस पर अनादि काल से चर्चा होती रही है और बड़े-बड़े विद्वानों के विचार भी अलग-अलग रहे हैं। इसलिए लेखक सोचता है कि इतने बड़े विषय को पाँच पेज में कैसे लिखा जाए।

तीसरी कठिनाई यह थी कि लेखक के पास सामग्री-संग्रह के लिए समय नहीं था। न उसके पास विश्वकोश था, न कोई विशेष ग्रंथ और न ही पुस्तकालय जाने का अवसर। उसे अपने ही ज्ञान और अनुभव के आधार पर निबंध लिखना था।

चौथी कठिनाई रूपरेखा बनाने की थी। लेखक यह तय नहीं कर पा रहा था कि इन विषयों की रूपरेखा कैसे बनाई जाए।

अंत में लेखक अमीर खुसरो की पद्धति से प्रेरणा लेकर दोनों विषयों को एक ही निबंध में मिलाकर लिखने का निर्णय करता है।

4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

उत्तर

निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने के लिए कई युक्तियाँ सुझाई हैं। उनके अनुसार निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि छोटे निबंध में सुंदरता और प्रभाव बना रहता है। निबंध के दो प्रमुख अंग बताए गए हैं— सामग्री और शैली।

आचार्यों के अनुसार निबंध लिखने से पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्र करनी चाहिए। विषय पर विचार करना चाहिए और मनन करना चाहिए। निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए, ताकि विचार क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए जा सकें। भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य एक-दूसरे से जुड़े हुए होने चाहिए।

मैं किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले सबसे पहले विषय को अच्छी तरह समझता/समझती हूँ। फिर उससे जुड़े मुख्य बिंदु लिखता/लिखती हूँ। उसके बाद उदाहरण, तथ्य और अपने विचार इकट्ठे करता/करती हूँ। फिर भूमिका, मुख्य भाग और उपसंहार की रूपरेखा बनाता/बनाती हूँ। अंत में सरल और स्पष्ट भाषा में निबंध लिखता/लिखती हूँ।

5. मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

उत्तर

निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की बहुत उपयोगिता होती है। केवल पुस्तक से प्राप्त जानकारी से निबंध प्रभावशाली नहीं बनता। जब लेखक किसी विषय को स्वयं देखता है, लोगों से सुनता है और अपने जीवन में अनुभव करता है, तब उसके विचार अधिक सच्चे और प्रभावशाली बनते हैं।

देखने से लेखक को विषय की वास्तविक स्थिति समझ में आती है। सुनने से उसे दूसरों के विचार, अनुभव और दृष्टिकोण पता चलते हैं। अनुभव करने से लेखक विषय को भीतर से समझता है और अपने भावों को स्वाभाविक रूप से व्यक्त कर पाता है।

ऐसे निबंधों में बनावटीपन नहीं होता। उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति, निजी विचार और आत्मीयता दिखाई देती है। इसलिए मानटेन की पद्धति निबंध लेखन को अधिक स्वाभाविक, रोचक और प्रभावशाली बनाती है।

विधा से संवाद — निबंध लिखने की कला

1. दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए।

विषय — प्रेरणा, रूपरेखा निर्माण, शैली निर्धारण, विषय चयन, सामग्री संग्रह, लेखन और समापन

उत्तर

निबंध लेखन की कला

निबंध लेखन एक ऐसी कला है जिसमें लेखक अपने विचारों, अनुभवों और भावनाओं को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है। अच्छा निबंध लिखने के लिए सबसे पहले किसी विषय का चयन करना आवश्यक होता है। विषय ऐसा होना चाहिए जिसके बारे में लेखक कुछ जानता हो या जानना चाहता हो।

विषय चयन के बाद लेखक को प्रेरणा मिलती है। प्रेरणा से उसके मन में विचार उत्पन्न होते हैं। इसके बाद विषय से संबंधित सामग्री का संग्रह किया जाता है। सामग्री में तथ्य, उदाहरण, अनुभव और विचार शामिल होते हैं।

इसके बाद निबंध की रूपरेखा बनाई जाती है। रूपरेखा से यह तय होता है कि निबंध में पहले क्या लिखा जाएगा, फिर क्या लिखा जाएगा और अंत में क्या लिखा जाएगा। निबंध की शैली भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए।

अंत में लेखक निबंध का लेखन करता है। निबंध में भूमिका, विषय-विस्तार और समापन होना चाहिए। समापन में मुख्य विचार को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए। इस प्रकार विषय चयन, प्रेरणा, सामग्री-संग्रह, रूपरेखा, शैली, लेखन और समापन—ये सभी अच्छे निबंध लेखन के आवश्यक चरण हैं।

2. अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?

उत्तर

मुझे निबंध लिखने का यह ढंग बेहतर लगता है—

विषय चयन → विचार-मंथन → सामग्री-संग्रह → रूपरेखा → लेखन → संशोधन → समापन

इस ढंग में सबसे पहले विषय चुना जाता है। फिर उस विषय पर मन में आए विचारों को लिखा जाता है। इसके बाद आवश्यक जानकारी और उदाहरण इकट्ठे किए जाते हैं। फिर निबंध की रूपरेखा बनाई जाती है और उसी के अनुसार लेखन किया जाता है।

मुझे यह ढंग इसलिए बेहतर लगता है क्योंकि इसमें संशोधन का भी चरण है। संशोधन करने से भाषा की अशुद्धियाँ सुधरती हैं, विचार स्पष्ट होते हैं और निबंध अधिक प्रभावशाली बनता है। इसलिए यह तरीका व्यवस्थित और उपयोगी है।

भाव-विस्तार

1. "जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।"

उत्तर

इस वाक्य का भाव यह है कि जो युवा जीवन की कठिनाइयों से अभी परिचित नहीं होते, उन्हें संसार बहुत सुंदर और आकर्षक लगता है। वे भविष्य के सपने देखते हैं और जीवन को आसान समझते हैं। लेकिन जब वे वास्तविक जीवन में संघर्ष, जिम्मेदारियाँ और समस्याएँ देखते हैं, तब उन्हें संसार की सच्चाई समझ में आती है। दूर से देखने पर जीवन सुंदर लगता है, पर पास जाकर उसकी कठिनाइयाँ दिखाई देती हैं।

2. "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।"

उत्तर

इस वाक्य का भाव यह है कि समाज में हर समय कुछ-न-कुछ कमियाँ रही हैं। समय बदलने के साथ नई समस्याएँ उत्पन्न होती रहती हैं। इसलिए हर युग में समाज-सुधार की आवश्यकता होती है। इतिहास में बुद्ध, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय और गांधी जी जैसे सुधारकों ने समाज को नई दिशा दी। सुधार की प्रक्रिया जीवन और समाज को आगे बढ़ाती है।

3. "आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।"

उत्तर

इस वाक्य का भाव यह है कि आज के युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं और परिवर्तन चाहते हैं। लेकिन समय बीतने पर वही युवा वृद्ध हो जाएँगे और अपने बीते हुए समय को अच्छा समझने लगेंगे। वे भी अपने अतीत की यादों में सुख खोजेंगे। इस प्रकार हर पीढ़ी को अपना अतीत प्रिय लगने लगता है। यही मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है।

4. "निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।"

उत्तर

इस वाक्य का भाव यह है कि निबंध बहुत लंबा होने पर उसका प्रभाव कम हो सकता है। छोटे निबंध में विचार स्पष्ट, संक्षिप्त और प्रभावशाली ढंग से रखे जा सकते हैं। लंबा निबंध कभी-कभी बोझिल और उबाऊ बन जाता है। यदि कम शब्दों में अच्छे विचार प्रस्तुत किए जाएँ, तो निबंध अधिक सुंदर और प्रभावपूर्ण बनता है। इसलिए छोटा और सारगर्भित निबंध अच्छा माना जाता है।

मेरा अनुभव

इस निबंध में लेखक को दो विषयों ("दूर के ढोल सुहावने होते हैं" और "समाज-सुधार") पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर

मुझे अपने विद्यालय, खेल, त्योहार, मित्र, परिवार और पर्यावरण जैसे विषयों पर लिखना सरल लगा, क्योंकि ये विषय हमारे जीवन से जुड़े होते हैं। इन पर लिखते समय अपने अनुभव और विचार आसानी से याद आ जाते हैं। लेकिन विज्ञान, राजनीति, समाज-सुधार या किसी महान व्यक्ति के जीवन जैसे विषयों पर लिखना थोड़ा कठिन लगता है। ऐसे विषयों के लिए सही जानकारी, उदाहरण और क्रमबद्ध विचारों की आवश्यकता होती है। इसलिए जिन विषयों का अनुभव हमें स्वयं होता है, उन पर लिखना सरल लगता है और जिनके लिए अधिक अध्ययन चाहिए, वे कठिन लगते हैं।

विषयों से संवाद

1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।

उत्तर

बुद्धदेव ने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। उन्होंने जाति-भेद और आडंबरों का विरोध किया।

महावीर स्वामी ने जैन धर्म के माध्यम से सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और संयम का उपदेश दिया। उन्होंने सभी जीवों के प्रति दया रखने की शिक्षा दी।

नागार्जुन बौद्ध दार्शनिक थे। उन्होंने समाज और धर्म को तार्किक दृष्टि से समझने की प्रेरणा दी।

शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और भारतीय संस्कृति को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया।

कबीर ने जाति-पाँति, अंधविश्वास और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया। उन्होंने ईश्वर-भक्ति, प्रेम और मानवता का संदेश दिया।

गुरु नानक ने समानता, सेवा, सत्य और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं।

2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर

हमारे समाज में कई व्यक्ति और संस्थाएँ समाज-सुधार के लिए कार्य करती हैं। कैलाश सत्यार्थी बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने और उनकी शिक्षा के लिए कार्य करते हैं। सुधा मूर्ति शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों की सहायता के लिए काम करती हैं। सुनीता नारायण पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करने के लिए प्रयास करती हैं।

संस्थाओं में प्रथम नामक संस्था बच्चों की शिक्षा के लिए काम करती है। हेल्पएज इंडिया बुजुर्गों की सहायता करती है। गूंज संस्था गरीबों को कपड़े और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराती है। कई स्थानीय संस्थाएँ भी दिव्यांगजनों, स्त्री-शिक्षा और पर्यावरण के लिए कार्य करती हैं।

3. आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।

उत्तर

यदि मुझे समाज-सुधार करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना चाहूँगा/चाहूँगी। मैं चाहता/चाहती हूँ कि हर बच्चे को अच्छी और समान शिक्षा मिले। इसके लिए मैं गरीब बच्चों को पढ़ाने, पुस्तकें बाँटने और जागरूकता अभियान चलाने का प्रयास करूँगा/करूँगी।

मैं स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल-बचत के लिए भी काम करना चाहूँगा/चाहूँगी। लोगों को प्लास्टिक का कम उपयोग करने, पेड़ लगाने और कूड़ा सही स्थान पर डालने के लिए प्रेरित करूँगा/करूँगी। इसके साथ ही मैं स्त्री-शिक्षा, बुजुर्गों के सम्मान और दिव्यांगजनों की सहायता के लिए भी लोगों को जागरूक करूँगा/करूँगी।

4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

उत्तर

भारतीय ज्ञान साहित्य में जीवन को संतुलित रखने पर बहुत बल दिया गया है। नैतिक जीवन हमें सत्य, ईमानदारी, दया और अनुशासन सिखाता है। आध्यात्मिक जीवन हमें मन की शांति, आत्मचिंतन और अच्छे विचारों की प्रेरणा देता है। व्यावहारिक जीवन हमें परिवार, समाज, शिक्षा और काम-काज में सही व्यवहार करना सिखाता है।

इन तीनों में संतुलन होना आवश्यक है। केवल आध्यात्मिकता या केवल भौतिक सफलता से जीवन पूर्ण नहीं बनता। यदि व्यक्ति नैतिक मूल्यों के साथ व्यावहारिक जीवन जीता है और मन की शांति भी बनाए रखता है, तो उसका जीवन सफल और सुखी बनता है।

सृजन

1. "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।

आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- "आम के आम गुठलियों के दाम।" अब आप इस लोकोक्ति और "जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास" विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।

उत्तर

आम के आम गुठलियों के दाम: जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास

“आम के आम गुठलियों के दाम” लोकोक्ति का अर्थ है—एक काम से दो लाभ होना। जैविक खाद बनाना भी इसी लोकोक्ति का अच्छा उदाहरण है। हम घर और विद्यालय में सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते, फल के छिलके और अन्य जैविक कचरे को फेंकने के बजाय खाद बनाने में उपयोग कर सकते हैं।

इससे कचरा भी कम होता है और पौधों के लिए अच्छी प्राकृतिक खाद भी मिलती है। जैविक खाद से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और रासायनिक खादों का उपयोग कम होता है। इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है और पौधे भी स्वस्थ बढ़ते हैं। इस प्रकार जैविक खाद बनाना हमारे लिए “आम के आम गुठलियों के दाम” जैसा उपयोगी कार्य है।

2. "जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"

आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न होता है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर

डायरी लेखन

दिनांक: 29 अप्रैल 2026

प्रिय डायरी,

आज मुझे एक पुराना अनुभव याद आ गया। पहले मुझे लगता था कि मंच पर भाषण देना बहुत आसान होता है। मैं सोचता/सोचती था कि वक्ता केवल कुछ पंक्तियाँ याद करके बोल देता है और सब उसकी प्रशंसा करते हैं। दूर से यह काम बहुत सरल और आकर्षक लगता था।

लेकिन जब विद्यालय में मुझे भाषण देने का अवसर मिला, तब मुझे पता चला कि यह काम आसान नहीं है। भाषण तैयार करना, उसे याद रखना, सही उच्चारण करना और सबके सामने आत्मविश्वास से बोलना कठिन था। मंच पर जाते ही मुझे घबराहट होने लगी।

उस दिन मुझे समझ आया कि दूर से जो काम आसान लगता है, पास जाकर उसकी कठिनाइयाँ समझ में आती हैं। सचमुच, “दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”

भाषा से संवाद

1. समास

निबंध में आए सामासिक शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए।

उत्तर
सामासिक पदसमास-विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष समास
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष समास
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष समास
विचार-समूहविचारों का समूहतत्पुरुष समास
जीवन-संग्रामजीवन का संग्रामतत्पुरुष समास
अतीतकालअतीत का कालतत्पुरुष समास
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष समास
निबंधकारनिबंध लिखने वालातत्पुरुष समास
विश्वकोशविश्व का कोशतत्पुरुष समास
नव-वधूनई वधूकर्मधारय समास
पीढ़ीगतपीढ़ी से संबंधिततत्पुरुष समास
धीरे-धीरेधीरे और धीरेअव्ययीभाव समास

उपसर्ग एवं प्रत्यय

1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर

उपसर्ग वाले शब्द

शब्दउपसर्गमूल शब्द
दुर्बोधदुर्बोध
अनादिअन्आदि
अनुसंधानअनुसंधान
असंतोषसंतोष
अभिव्यक्तिअभिव्यक्ति
समावेशसम्आवेश
प्रगतिशीलप्रगति
अनुकूलअनुकूल
अनुभवअनुभव
अस्पष्टस्पष्ट

प्रत्यय वाले शब्द

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
सुधारकसुधार
कठिनाईकठिनआई
सुंदरतासुंदरता
मधुरतामधुरता
कर्कशताकर्कशता
वास्तविकतावास्तविकता
गंभीरतागंभीरता
लज्जाशीललज्जाशील
प्रगतिशीलप्रगतिशील
सामाजिकसमाजइक

2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए—

1. निबंध लिखना बड़ी _____________ (कठिन ...) की बात है।

उत्तर

निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।

2. वर्तमान से दोनों को _____________ (...संतोष) होता है।

उत्तर

वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।

3. वाक्यों में कुछ _____________ (...स्पष्ट...) भी चाहिए, क्योंकि यह ____________ (...स्पष्ट...) या _____________ (...बोध...) गांभीर्य ला देती है।

उत्तर

वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।

3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। शब्द — मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज

उत्तर
मूल शब्दनए शब्द
मधुरमधुरता, मधुरमय, सुमधुर
सुधारसुधारक, सुधारना, सुधारवादी
सुंदरसुंदरता, सुंदरमय, सुसुंदर
गतिप्रगति, गतिशील, दुर्गति
समाजसामाजिक, समाजवाद, समाजसेवी

भाव एक शब्द अनेक

. पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए जिनके अर्थ मिलते-जुलते हैं तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

1. विचार — मनन — चिंतन

शब्दवाक्य
विचारहमें किसी भी विषय पर लिखने से पहले अच्छे विचार करने चाहिए।
मननपाठ पढ़ने के बाद उसके अर्थ पर मनन करना चाहिए।
चिंतनसमाज-सुधार जैसे विषय पर गंभीर चिंतन आवश्यक है।

2. सुहावने — मधुर — मनमोहक

शब्दवाक्य
सुहावनेदूर से ढोल की आवाज़ सुहावनी लगती है।
मधुरपक्षियों का कलरव बहुत मधुर होता है।
मनमोहकपहाड़ों का दृश्य बहुत मनमोहक था।

3. कठिनाई — गुत्थी — समस्या

शब्दवाक्य
कठिनाईलेखक को निबंध लिखने में कठिनाई हुई।
गुत्थीगणित का यह प्रश्न मेरे लिए गुत्थी बन गया।
समस्यासमाज में कई समस्याओं के लिए सुधार जरूरी है।

4. आनंद — उल्लास — प्रमोद

शब्दवाक्य
आनंदत्योहार पर सबको आनंद मिला।
उल्लासविद्यालय के वार्षिक उत्सव में बच्चों में उल्लास था।
प्रमोदविवाह समारोह में चारों ओर प्रमोद का वातावरण था।

गतिविधियाँ

1. अमीर खुसरो द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का संकलन कीजिए।

उत्तर

नीचे कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं—

अमीर खुसरो की पहेलियाँ

एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।

उत्तर

आकाश और तारे

बाला था जब सबको भाया, बड़ा हुआ कुछ काम न आया। खुसरो कह दिया उसका नाम, अर्थ करो नहीं छोड़ो गाँव।

उत्तर

दिया

श्याम रंग की है एक नारी, माथे ऊपर लागे प्यारी। जो नर इस अर्थ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।

उत्तर

भौं

मुकरी का उदाहरण

प्रश्न: वह आए तो मन हर्षाए, जाए तो मन दुख पाए। उत्तर: मेहमान

प्रश्न: दिन में सोए, रात में जागे, सबकी रखवाली को भागे। उत्तर: चौकीदार

ये रचनाएँ हास्य, मनोरंजन और चतुराई से भरी होती हैं। इनमें शब्दों का खेल और लोकजीवन की झलक मिलती है।

2. कक्षा में ‘युवा और वृद्ध — दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।

उत्तर

वाद-विवाद का विषय

युवा और वृद्ध — दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर

पक्ष में विचार

युवा पीढ़ी नई सोच, नई तकनीक और नए विचारों को जल्दी अपनाती है। वह समाज में परिवर्तन लाना चाहती है। युवाओं में ऊर्जा, उत्साह और जोखिम उठाने की क्षमता अधिक होती है। वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नए प्रयोग करते हैं।

विपक्ष में विचार

वृद्ध पीढ़ी के पास अनुभव और धैर्य होता है। वे परंपराओं और जीवन-मूल्यों को महत्व देते हैं। हर नई चीज सही नहीं होती, इसलिए वृद्ध लोग सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह देते हैं। उनके अनुभव से समाज को सही दिशा मिलती है।

निष्कर्ष

युवा और वृद्ध दोनों समाज के लिए आवश्यक हैं। युवाओं की ऊर्जा और वृद्धों का अनुभव मिलकर समाज को संतुलित और प्रगतिशील बना सकते हैं।

भाषा संगम

1. इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में लिखिए।

उत्तर
भाषा‘निबंध’ के लिए शब्द
अंग्रेजीEssay
फ्रेंचEssai
स्पेनिशEnsayo
अरबीMaqāla / مقال
फारसीMaqāla
जर्मनAufsatz

2. “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।” इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखिए।

उत्तर

यदि मातृभाषा हिंदी है, तो वाक्य इस प्रकार होगा—

निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।

अगर इसे सरल बोलचाल की हिंदी में लिखें—

निबंध लिखने से पहले उसके मुख्य बिंदु तय कर लेने चाहिए।

इस अध्याय में समास, उपसर्ग, प्रत्यय, भाव-समान शब्द और भाषा-संगम जैसे अभ्यास निबंध लेखन को अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने में सहायता करते हैं।