कक्षा 9 हिंदी · गंगा · अध्याय 3

संवादहीन

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 संवादहीन का सारांश, व्याख्या, शब्दार्थ, NCERT प्रश्न उत्तर, भाषा-अभ्यास और वीडियो समाधान।

वीडियो पाठसारांशव्याख्याशब्दार्थसंपूर्ण प्रश्नोत्तर
लेखक / कवि
शेखर जोशी
पुस्तक
गंगा
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ
45–61
विधा
गद्य
अध्याय 3 के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री

ताई और उनके तोते मिट्ठू के आत्मीय संबंध के माध्यम से यह कहानी अकेलेपन, पलायन और मनुष्य के जीवन में सच्चे संवाद की आवश्यकता को सामने लाती है।

देखिए और समझिए

वीडियो पाठ

NCERT Hindi Tutor के वीडियो से अध्याय समझिए, फिर नीचे दिए गए नोट्स और प्रश्नोत्तर से दोहराव कीजिए।

अध्याय को समझें

सारांश, व्याख्या और महत्वपूर्ण अध्ययन-बिंदु

आपकी तैयार की गई अध्ययन सामग्री को विषयानुसार उसी क्रम में व्यवस्थित किया गया है।

1. लेखक परिचय — शेखर जोशी

शेखर जोशी हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार हैं। उनका जन्म 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था। उनकी कहानियों में ग्रामीण जीवन, शहरी मध्यवर्ग, मजदूरों का संघर्ष और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— कोसी का घटवार, दाज्यू, हलवाहा, साथ के लोग, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर आदि। उनका निधन 2022 में हुआ।

2. पाठ का केंद्रीय भाव

“संवादहीन” एक वृद्ध ग्रामीण स्त्री ताई के अकेलेपन और उसके तोते मिट्ठू के साथ बने भावनात्मक संबंध की कहानी है। ताई का परिवार शहर चला गया है और वह बड़े, सूने घर में अकेली रह गई हैं। ऐसे में मिट्ठू उनके जीवन में संवाद, सहारा और ममता का केंद्र बन जाता है।

कहानी में केवल मनुष्य और पक्षी का संबंध नहीं दिखाया गया है, बल्कि यह भी दिखाया गया है कि आधुनिक जीवन में पलायन, अकेलापन और संवाद की कमी ने बुजुर्गों के जीवन को कितना कठिन बना दिया है।

3. कहानी का सरल सारांश

ताई गाँव के बीच बने बड़े घर में अकेली रहती थीं। कभी यह घर परिवार, नौकर-चाकर, गाय-ढोर और चहल-पहल से भरा रहता था, लेकिन समय बदल गया। बेटे-बहू शहर चले गए, बेटियाँ अपने घर बस गईं और ताई अकेली रह गईं। घर का सूनापन उन्हें भीतर से काटने लगता था।

एक दिन गनपत ताई के लिए एक प्यारा पहाड़ी तोता ले आया। ताई ने उसका नाम मिट्ठू रखा। अब ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरसने लगी। जो ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में आलस करती थीं, वही मिट्ठू के लिए दाल-भात बनातीं, रोटी बचाकर रखतीं और उसके लिए हरी मिर्च तथा अमरूद का ध्यान रखतीं।

मिट्ठू बहुत समझदार था। वह ताई के सिखाए शब्द जल्दी सीख लेता था— “राम राम”, “सीताराम”, “हर हर गंगे” आदि। ताई उससे बातें करतीं और वह अपनी बोली में उत्तर देता। ताई जब थककर कहतीं, “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” तो मिट्ठू कहता— “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” इस तरह मिट्ठू ताई के अकेले जीवन का सहारा बन गया।

कभी-कभी दोनों में नोक-झोंक भी होती थी। मिट्ठू शरारत करता, दाना-पानी उलट देता और ताई गुस्से में कहतीं— “मर जा!” तो मिट्ठू भी वही शब्द दोहराने लगता। फिर दोनों में मान-मनौवल हो जाती।

एक बार गाँव के लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे। ताई भी जाना चाहती थीं, लेकिन मिट्ठू की चिंता उन्हें परेशान कर रही थी। अंत में जगन मास्टर की पत्नी ने मिट्ठू को अपने पास रखने की जिम्मेदारी ले ली। ताई दुखी मन से मिट्ठू को छोड़कर कुंभ-स्नान के लिए चली गईं।

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्हें पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर दया आती थी। उन्होंने मिट्ठू को कुछ देर के लिए पिंजरे से बाहर निकाला। धीरे-धीरे मिट्ठू बाहर आने लगा। एक दिन उसने खुले रोशनदान से बाहर की दुनिया देखी और उड़ गया। जगन मास्टर बहुत परेशान हुए।

ताई के लौटने का समय निकट था। गाँववालों को डर था कि मिट्ठू के न मिलने पर ताई को गहरा सदमा लगेगा। इसलिए गनपत एक वैसा ही दूसरा तोता ले आया। जगन मास्टर ने उसे “राम राम”, “सीताराम”, “हर गंगे” सिखाने की बहुत कोशिश की, पर वह चुप रहा।

जब ताई कुंभ-स्नान से लौटकर जगन मास्टर के घर पहुँचीं, तो उन्होंने सोचा कि मिट्ठू उन्हें देखकर बोल उठेगा। लेकिन नया तोता चुपचाप इधर-उधर देखता रहा। ताई अपने मिट्ठू को पुकारती रह गईं। कहानी अंत में यह संकेत देती है कि असली संवाद केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आत्मीयता और संबंध से बनता है।

4. मुख्य पात्रों का परिचय

ताई

ताई कहानी की मुख्य पात्र हैं। वे वृद्ध, अकेली और भावुक स्त्री हैं। परिवार के दूर चले जाने से उनका जीवन सूना हो गया है। मिट्ठू के आने के बाद उनमें फिर से जीवन के प्रति रुचि जागती है। वे मिट्ठू को बेटे की तरह प्यार करती हैं।

विशेषताएँ: ममतामयी, अकेली, संवेदनशील, धार्मिक, भावुक और प्रेमपूर्ण।

मिट्ठू

मिट्ठू एक पहाड़ी तोता है। वह ताई के लिए केवल पक्षी नहीं, बल्कि संवाद का साथी है। वह ताई की बातों को दोहराता है और उनके अकेलेपन को कम करता है। उसका उड़ जाना स्वतंत्रता की चाह का प्रतीक है।

विशेषताएँ: चंचल, समझदार, मधुर बोलने वाला, ताई का सहारा और स्वतंत्रता का प्रतीक।

जगन मास्टर

जगन मास्टर आदर्शवादी और स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति हैं। वे किसी जीव को पिंजरे में बंद देखना उचित नहीं मानते। करुणा और नैतिकता के कारण वे मिट्ठू को पिंजरे से बाहर आने का अवसर देते हैं। लेकिन यही आदर्शवादी निर्णय कहानी में समस्या पैदा कर देता है।

विशेषताएँ: करुणामय, सिद्धांतवादी, स्वतंत्रता-प्रेमी, नैतिक विचारों वाले।

गनपत

गनपत ने ही ताई को मिट्ठू लाकर दिया था। बाद में मिट्ठू के उड़ जाने पर वही वैसा दूसरा तोता लाने का उपाय सुझाता है। वह व्यावहारिक सोच वाला व्यक्ति है।

5. शीर्षक “संवादहीन” की सार्थकता

इस कहानी का शीर्षक “संवादहीन” बहुत सार्थक है। बाहर से देखने पर ताई और मिट्ठू के बीच बहुत संवाद दिखाई देता है— “राम राम”, “सीताराम”, “कटेगी” आदि। लेकिन कहानी का गहरा अर्थ यह है कि ताई का परिवार उनसे दूर हो गया है और उनके जीवन में असली मानवीय संवाद समाप्त हो चुका है।

मिट्ठू उनके अकेलेपन को भरता है, पर वह भी अंत में उड़ जाता है। नया तोता आकार में मिट्ठू जैसा है, पर उसमें वह आत्मीय संवाद नहीं है। इसलिए यह कहानी जीवन के मौन, अकेलेपन और संवाद की कमी को प्रकट करती है।

6. कहानी के मुख्य विषय

1. अकेलापन

ताई का बड़ा घर कभी लोगों से भरा रहता था, पर अब सूना खंडहर जैसा हो गया है। यह बुजुर्गों के अकेलेपन को दिखाता है।

2. पलायन

बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहर चले गए। यह ग्रामीण समाज में हो रहे पलायन की समस्या को दिखाता है।

3. मनुष्य और पक्षी का संबंध

ताई और मिट्ठू का संबंध केवल मालिक और पक्षी का नहीं, बल्कि माँ और बच्चे जैसा है।

4. स्वतंत्रता

जगन मास्टर मिट्ठू को पिंजरे से मुक्त करना चाहते हैं। मिट्ठू का उड़ जाना बताता है कि हर जीव स्वतंत्रता चाहता है।

5. आदर्श और यथार्थ का द्वंद्व

जगन मास्टर का आदर्श था कि पक्षी को पिंजरे में बंद रखना गलत है। लेकिन यथार्थ यह था कि मिट्ठू ताई के जीवन का सहारा था। इसलिए उनके आदर्शवादी कार्य से ताई का भावनात्मक संसार टूट जाता है।

7. महत्वपूर्ण पंक्तियों की व्याख्या

“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?”

यहाँ “नैया” से ताई अपने जीवन की कठिन यात्रा की बात कर रही हैं। वे सोचती हैं कि अकेले वृद्धावस्था का जीवन कैसे कटेगा।

“ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।”

परिवार से दूर होने के कारण ताई के भीतर जो प्रेम और ममता बची थी, वह मिट्ठू पर केंद्रित हो गई। मिट्ठू उनके लिए पुत्र जैसा बन गया।

“कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!”

यह मिट्ठू का उत्तर ताई को जीवन जीने का सहारा देता है। यह संवाद ताई के अकेलेपन में आशा पैदा करता है।

“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”

इसका अर्थ है कि मिट्ठू के उड़ते ही जगन मास्टर बहुत घबरा गए। उनकी सारी समझ और आदर्शवाद उस समय व्यावहारिक कठिनाई में बदल गया।

8. महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
ढोरपालतू पशु
तकाजाआवश्यकता, माँग
कुशाग्रतीव्र बुद्धि वाला
पौ फटनासुबह होना
अचकचानाचौंक जाना
निहालबहुत प्रसन्न
सत्ताप्रभुत्व, अधिकार
अतलबहुत गहरा
रोबीलाप्रभावशाली
तनुक मिजाजजल्दी नाराज़ होने वाला
वियोगबिछड़ना
साँकलदरवाजे की जंजीर
टोहखोज, पता लगाना
देहरीदरवाजे की चौखट
मिजाजस्वभाव
प्रायश्चितगलती का पश्चाताप करने का कर्म
कौतूहलवशउत्सुकता के कारण
मशगूलकिसी काम में लगा हुआ
अर्जनकमाना, प्राप्त करना
एवजीबदले में आया हुआ
आग्नेयआग जैसा
जूनसमय, वेला

9. कहानी की भाषा-शैली

इस कहानी की भाषा सरल, भावपूर्ण और लोक-जीवन से जुड़ी हुई है। इसमें ग्रामीण बोलचाल के शब्दों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे— “कैसे नैया पार लगेगी”, “हर हर गंगे”, “राम राम सीताराम” आदि। कहानी में संवाद, पुनरुक्ति, चित्रात्मकता और भावुकता का प्रभावशाली प्रयोग है।

10. कहानी का सौंदर्य

चित्रात्मकता: मिट्ठू का डाल से डाल पर उड़ना दृश्य को जीवंत बना देता है। संवादात्मकता: ताई और मिट्ठू के संवाद कहानी को रोचक बनाते हैं। पुनरुक्ति: “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” जैसे प्रयोग भाव को गहरा बनाते हैं। लोकधर्मी भाषा: कहानी में ग्रामीण जीवन की सहज भाषा है। करुणा: ताई का अकेलापन पाठक के मन को छूता है।

11. कहानी का संदेश

कहानी हमें सिखाती है कि बुजुर्गों को केवल भोजन और घर की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें संवाद, अपनापन और भावनात्मक सहारे की भी आवश्यकता होती है। पशु-पक्षी भी संवेदनशील होते हैं और स्वतंत्रता हर जीव का स्वाभाविक अधिकार है। लेकिन किसी भी आदर्श को अपनाते समय उससे जुड़े मानवीय पक्ष को भी समझना जरूरी है।

12. परीक्षा उपयोगी बिंदु

ताई का अकेलापन कहानी का मुख्य आधार है।

मिट्ठू ताई के लिए संवाद और ममता का केंद्र है।

जगन मास्टर करुणा और स्वतंत्रता के प्रतीक हैं।

मिट्ठू का उड़ जाना स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है।

नया तोता यह बताता है कि केवल रूप समान होने से आत्मीय संबंध नहीं बनता।

कहानी आधुनिक जीवन में संवादहीनता, पलायन और बुजुर्गों की उपेक्षा को उजागर करती है।

शीर्षक “संवादहीन” जीवन के मौन और संबंधों की कमी का प्रतीक है।

अभ्यास और पुनरावृत्ति

संपूर्ण प्रश्नोत्तर और भाषा-अभ्यास

प्रश्न, उत्तर, तर्क, काव्य-बोध, व्याकरण तथा गतिविधियाँ मूल अध्ययन सामग्री के क्रम में दी गई हैं।

मौलिक अध्ययन-मार्गदर्शिका: NCERT Hindi Tutor · ncerthinditutor.com

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

(क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता

उत्तर

सही उत्तर है— (ख) ममता और स्नेह।

तर्क

ताई मिट्टू को केवल एक तोता नहीं मानती थीं, बल्कि वह उनके अकेलेपन का साथी और ममता का केंद्र बन गया था। ताई उसके लिए दाल-भात बनाती थीं, रोटी बचाकर रखती थीं और उसके खाने-पीने का विशेष ध्यान रखती थीं। इससे स्पष्ट होता है कि ताई और मिट्टू का संबंध ममता और स्नेह से भरा हुआ था।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

(क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता

उत्तर

सही उत्तर है— (घ) करुणा और नैतिकता।

तर्क

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्हें पिंजरे में बंद मिट्टू को देखकर बेचैनी होती थी। वे उसे कुछ देर खुली हवा में आने का अवसर देकर अपने मन का प्रायश्चित करना चाहते थे। इससे उनकी करुणा और नैतिक सोच प्रकट होती है।

3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

(क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

उत्तर

सही उत्तर है— (ग) स्वतंत्रता की चाह।

तर्क

मिट्टू जब खुले रोशनदान से बाहर की दुनिया देखता है, तो वह उड़ जाता है। यह घटना बताती है कि हर जीव के भीतर स्वतंत्र रहने की स्वाभाविक इच्छा होती है। इसलिए मिट्टू का उड़ जाना स्वतंत्रता की चाह को प्रस्तुत करता है।

4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद

उत्तर

सही उत्तर है— (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव।

तर्क

ताई के बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहरों में बस गए थे और बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गई थीं। बड़े घर में ताई अकेली रह गई थीं। उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख यही अकेलापन और संवाद का अभाव था।

5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

(क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता

उत्तर

सही उत्तर है— (ग) अकेलापन।

तर्क

कहानी में ताई के माध्यम से वृद्ध लोगों के अकेलेपन को दिखाया गया है। परिवार के लोग दूर चले जाते हैं और बुजुर्ग अपने ही घर में अकेले रह जाते हैं। यह आज के समाज की एक बड़ी विसंगति है।

मेरी समझ मेरे विचार

1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर

इस वाक्य में ताई अपने जीवन की ‘नैया’ की बात कर रही हैं। यहाँ ‘नैया’ का अर्थ जीवन की कठिन यात्रा से है। ताई बूढ़ी हो चुकी थीं और उनके परिवार के लोग उनसे दूर जा चुके थे। बड़े घर में वे अकेली रह गई थीं। अकेलेपन और बुढ़ापे की कठिनाइयों को देखकर वे चिंतित होकर कहती हैं— “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?”

वे यह बात इसलिए कह रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब जीवन का बाकी समय अकेले कैसे कटेगा। उनके पास बात करने और सहारा देने वाला कोई अपना नहीं था। बाद में मिट्टू उनके जीवन में सहारा बनता है।

2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

इस वाक्य में ताई के घर-परिवार और संपत्ति के बिखर जाने की घटना की ओर संकेत किया गया है। पहले ताई का घर भरा-पूरा था। घर में बेटे-बहू, बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर और खेती-बाड़ी सब कुछ था। लेकिन समय के साथ बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहर चले गए और बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गईं।

जब घर और कारोबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा, तो खेती-बाड़ी और काम-काज धीरे-धीरे दूसरों के हाथों में चला गया। इस प्रकार ताई का पुराना वैभव समाप्त हो गया और वे अकेली रह गईं।

3. “ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।” क्यों?

उत्तर

ताई के परिवार के लोग उनसे दूर हो चुके थे। उनके जीवन में अपनापन, बातचीत और प्रेम की कमी हो गई थी। ऐसे समय में गनपत उनके लिए मिट्टू नाम का तोता ले आया। मिट्टू ताई से बातें करता था, उनके सिखाए शब्द दोहराता था और उनके अकेलेपन को कम करता था।

इसीलिए ताई के भीतर जो ममता अपने परिवार के लिए बची थी, वह सब मिट्टू पर बरस पड़ी। वे मिट्टू को बच्चे की तरह प्यार करने लगीं। उसके लिए दाल-भात बनातीं, रोटी बचाकर रखतीं और उसके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखतीं।

4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर

इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्टू के आने के बाद ताई के जीवन में नया उत्साह आ गया था। पहले ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में भी आलस करती थीं, लेकिन मिट्टू के लिए वे बहुत सक्रिय हो गईं।

ताई अब मिट्टू की पसंद और जरूरतों का ध्यान रखने लगी थीं। वे जानने लगी थीं कि कहाँ हरी मिर्चें तैयार हैं और किस पेड़ पर अमरूद बचे हैं। इससे पता चलता है कि ताई में ये परिवर्तन आए—

उनके जीवन में फिर से रुचि और उत्साह आया।

वे मिट्टू के प्रति बहुत जिम्मेदार हो गईं।

उनका अकेलापन कुछ कम हो गया।

उनकी ममता और देखभाल की भावना मिट्टू पर केंद्रित हो गई।

वे पहले से अधिक सजग और सक्रिय हो गईं।

5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले, सिद्धांतवादी और करुणामय व्यक्ति थे। वे किसी को कष्ट पहुँचाना नहीं चाहते थे और दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते थे।

कहानी में बताया गया है कि पिंजरे में बंद मिट्टू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी। वे सोचते थे कि किसी पक्षी को पिंजरे में बंद रखना ठीक नहीं है। इसी कारण उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद करके मिट्टू के पिंजरे का दरवाजा खोल दिया, ताकि वह कुछ देर खुली हवा में आ सके।

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि जगन मास्टर के मन में जीवों के प्रति करुणा थी। वे नैतिकता और स्वतंत्रता को महत्त्व देते थे। हालांकि उनका निर्णय व्यावहारिक रूप से कठिनाई पैदा कर देता है, क्योंकि मिट्टू उड़ जाता है और ताई के जीवन का सहारा छिन जाता है।

6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है – ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक प्रतीत होता है।

ताई का परिवार उनसे दूर जा चुका था। बहू-बेटे शहर में बस गए थे और बेटियाँ अपनी-अपनी गृहस्थी में रम गई थीं। बड़े घर में ताई अकेली रह गई थीं। उनके जीवन में बातचीत और अपनापन समाप्त हो गया था। मिट्टू के आने से उनके जीवन में फिर से संवाद शुरू हुआ। वे उससे बातें करती थीं और मिट्टू भी उनकी बातों का उत्तर देता था।

लेकिन जब मिट्टू उड़ जाता है और उसकी जगह लाया गया नया तोता चुप रहता है, तब ताई फिर से संवादहीन हो जाती हैं। नया तोता रूप में मिट्टू जैसा था, पर उसमें ताई से जुड़ा भावनात्मक संवाद नहीं था। इसलिए शीर्षक ताई के अकेलेपन और संवाद के अभाव को सबसे गहराई से व्यक्त करता है।

7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर

ताई के बड़े घर को सूना खंडहर इसलिए कहा गया होगा क्योंकि अब उसमें पहले जैसी चहल-पहल नहीं रह गई थी। पहले यह घर परिवार, नौकर-चाकर, गाय-ढोर, उत्सवों और लोगों की आवाजाही से भरा रहता था। लेकिन समय के साथ बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ अपने घर बस गईं और नौकर-चाकर भी चले गए।

घर आकार में बड़ा था, लेकिन उसमें अपनापन और जीवन की रौनक नहीं बची थी। वहाँ केवल ताई और मिट्टू ही रह गए थे। इसलिए वह घर जीवंत घर न रहकर एक सूने खंडहर जैसा लगने लगा था। यह शब्द ताई के अकेलेपन और घर की वीरानी को प्रकट करता है।

मेरे प्रश्न

1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया। प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?

उत्तर

उपयुक्त प्रश्न है— प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

कारण: दिए गए उत्तर में ताई के अकेलेपन को सहारा देने वाले के बारे में बताया गया है। इसलिए प्रश्न क इस उत्तर के लिए सही है। प्रश्न ख का उत्तर होगा— गनपत ने ताई को मिट्टू भेंट में दिया था।

2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था? प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

उत्तर

उपयुक्त प्रश्न है— प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

कारण: दिए गए उत्तर में बताया गया है कि ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था। इसलिए प्रश्न ख इस उत्तर के लिए उपयुक्त है। प्रश्न क गलत है क्योंकि उसमें “लौटने के बाद” कहा गया है, जबकि मिट्टू ताई के लौटने से पहले ही उड़ गया था।

3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?

उत्तर

उपयुक्त प्रश्न है— प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

कारण: गाँववाले जानते थे कि ताई मिट्टू से बहुत प्रेम करती थीं। उन्हें डर था कि मिट्टू के उड़ जाने की सच्चाई जानकर ताई को गहरा दुख होगा। इसलिए प्रश्न क सही है। प्रश्न ख गलत है, क्योंकि गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश नहीं थे, बल्कि चिंतित थे।

4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

उत्तर

उपयुक्त प्रश्न है— प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

कारण: दिए गए उत्तर में शीर्षक ‘संवादहीन’ का अर्थ और भाव स्पष्ट किया गया है। इसलिए प्रश्न ख इस उत्तर के लिए सही है। प्रश्न क गलत है क्योंकि कहानी का शीर्षक अनुपयुक्त नहीं, बल्कि बहुत सार्थक है।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर

जब मैं अपने घर या परिवार से दूर होता हूँ, तो मुझे अपने परिवार के सदस्यों की चिंता होने लगती है। मन में बार-बार यही विचार आता है कि घर पर सब ठीक होंगे या नहीं। कभी-कभी घर की सुरक्षा, छोटे भाई-बहन, माता-पिता या पालतू पशु की चिंता भी परेशान करती है।

ऐसे समय में मन पूरी तरह शांत नहीं रह पाता। बाहर होते हुए भी ध्यान बार-बार घर की ओर चला जाता है। जैसे ताई मिट्टू की चिंता में बार-बार खिड़की-दरवाजे देखती थीं, वैसे ही हम भी अपने प्रिय लोगों और वस्तुओं के प्रति जिम्मेदारी महसूस करते हैं। इससे पता चलता है कि प्रेम और अपनापन मनुष्य को भीतर से जोड़कर रखते हैं।

2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर

हाँ, मैं मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। वे भी प्रेम, दुख, डर, खुशी और अपनापन महसूस करते हैं। भले ही वे मनुष्यों की तरह भाषा में अपनी बात न कह सकें, लेकिन अपने व्यवहार से अपनी भावनाएँ प्रकट कर देते हैं।

मेरे अनुभव में, हमारे घर के पास एक कुत्ता रहता था। जब भी हम उसे रोटी देते थे, वह पूँछ हिलाकर हमारे पास आ जाता था। यदि हम कुछ दिन उसे नहीं देखते थे, तो वह हमें देखकर बहुत खुश होता था। एक बार वह बीमार था, तब वह चुपचाप बैठा रहता था और खाना भी कम खाता था। उसके व्यवहार से साफ पता चलता था कि वह भी सुख-दुख महसूस करता है।

इसी तरह कहानी में मिट्टू भी ताई की आवाज पहचानता था, उनकी बातों का उत्तर देता था और उनके जीवन का साथी बन गया था। इससे स्पष्ट होता है कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं।

3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शकल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर

मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना पूरी तरह उचित नहीं था। गाँववालों का उद्देश्य ताई को दुख से बचाना था, इसलिए उनकी भावना गलत नहीं थी। वे जानते थे कि ताई मिट्टू से बहुत प्रेम करती थीं और उसके उड़ जाने की बात सुनकर उन्हें बड़ा सदमा लग सकता था।

लेकिन किसी को झूठे भ्रम में रखना सही उपाय नहीं माना जा सकता। सच छिपाने से कुछ समय के लिए दुख कम हो सकता है, पर बाद में सत्य सामने आने पर दुख और अधिक बढ़ सकता है। ताई मिट्टू को केवल उसकी सूरत से नहीं पहचानती थीं, बल्कि उसके बोलने, व्यवहार और अपनापन से पहचानती थीं। इसलिए नया तोता देखकर वे समझ सकती थीं कि वह उनका मिट्टू नहीं है।

इसलिए बेहतर होता कि गाँववाले ताई को धीरे-धीरे और संवेदनशील ढंग से सच्चाई बताते। ऐसा करने से ताई को दुख तो होता, पर वे अपने लोगों के सहारे उस दुख को सह पातीं।

4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर

हाँ, मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ है कि मैंने सोचा कुछ और था, लेकिन हुआ कुछ और। एक बार मैंने परीक्षा में बहुत मेहनत से तैयारी की थी। मुझे लगा था कि प्रश्न-पत्र बहुत आसान आएगा और मैं सभी प्रश्न जल्दी हल कर लूँगा। लेकिन परीक्षा में कुछ प्रश्न अलग ढंग से पूछे गए थे। पहले तो मैं घबरा गया, क्योंकि मेरी अपेक्षा कुछ और थी।

फिर मैंने शांत होकर प्रश्नों को दोबारा पढ़ा और जो समझ आया, उसे लिखना शुरू किया। उस अनुभव से मुझे यह सीख मिली कि केवल अपनी अपेक्षाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जीवन में कभी-कभी परिस्थिति हमारी सोच से अलग होती है, इसलिए हमें धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए।

ताई ने भी सोचा था कि मिट्टू उन्हें देखकर बोल उठेगा, पर नया तोता चुप रहा। इससे उन्हें बहुत दुख हुआ होगा।

5. “मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर

हाँ, प्राणी सचमुच पिंजरे या सीमित वातावरण में रहने के आदी हो सकते हैं। जब कोई पक्षी या पशु लंबे समय तक बंद जगह में रहता है, तो वह बाहर की दुनिया से डरने लगता है। उसे खुला वातावरण अनजान लगता है और वह अपनी पुरानी जगह को ही सुरक्षित समझने लगता है।

मैंने कई बार देखा है कि पिंजरे में पाले गए पक्षी पिंजरा खुला होने पर भी तुरंत बाहर नहीं निकलते। वे पहले डरते हैं, इधर-उधर देखते हैं और फिर धीरे-धीरे बाहर आते हैं। इसी प्रकार घर में पाले गए कुछ पशु भी बाहर खुली जगह में जाने से घबराते हैं, क्योंकि वे घर के वातावरण के आदी हो चुके होते हैं।

मिट्टू भी लंबे समय से पिंजरे में रह रहा था। इसलिए जब जगन मास्टर ने पिंजरा खोला, तो उसने तुरंत बाहर आने की इच्छा नहीं दिखाई। लेकिन जब उसने रोशनदान से बाहर की दुनिया देखी, तो उसके भीतर स्वतंत्रता की इच्छा जागी और वह उड़ गया। इससे पता चलता है कि आदत प्राणी को रोक सकती है, पर स्वतंत्रता की चाह पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

कहानी का सौंदर्य

नीचे दिए गए विशेष बिंदुओं के लिए कहानी से अन्य उदाहरण लिखे गए हैं—

विशेष बिंदुअर्थकहानी से एक और उदाहरण
चित्रात्मकता / दृश्य बिंबशब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र बनाना।“बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता, उछल-कूद मचाता मिट्ठू उत्तर देता।”
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने और पात्रों के विचार-भाव प्रकट करने के लिए संवादों का प्रयोग।“मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?”
पुनरुक्तिशब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता।“मर जा! मर जा! मर जा!”
अतिशयोक्तिकिसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना।“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
लोकधर्मी भाषाग्रामीण, सहज और बोलचाल की भाषा।“मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!”
प्रश्नोत्तर शैलीपात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना।“ताई के लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?” / “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?”

कहानी का अंत

आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

उत्तर

मेरे अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को दुखांत और यथार्थवादी अंत दोनों श्रेणियों में रखा जा सकता है।

यह अंत दुखांत इसलिए है क्योंकि ताई का प्रिय मिट्ठू उड़ चुका था। उसकी जगह जो नया तोता लाया गया था, वह ताई को पहचानता नहीं था और न ही उनकी अपेक्षा के अनुसार बोलता था। ताई उसे पुकारती रह गईं, लेकिन उनके अकेलेपन का असली साथी अब उनके पास नहीं था।

यह अंत यथार्थवादी भी है क्योंकि जीवन में कई बार ऐसा होता है कि खोए हुए संबंधों की जगह कोई दूसरा व्यक्ति या वस्तु नहीं ले सकता। ताई और मिट्ठू के बीच जो आत्मीयता थी, वह केवल बोलने से नहीं, बल्कि प्रेम और लंबे साथ से बनी थी।

नया अंत: मैं इस कहानी का अंत इस प्रकार करना चाहूँगा कि कुछ दिनों बाद असली मिट्ठू फिर गाँव लौट आए। वह ताई के आँगन में आकर “राम राम सीताराम” बोले। ताई उसे देखकर बहुत खुश हो जाएँ। लेकिन इस बार ताई उसे पिंजरे में बंद न करें, बल्कि खुले आँगन में रहने दें। मिट्ठू कभी पेड़ पर बैठता, कभी ताई के पास आ जाता। इस अंत से प्रेम और स्वतंत्रता दोनों का सम्मान होता।

विषयों से संवाद

1. “अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।” कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर

कहानी में जगन मास्टर की पत्नी का नाम न देकर उसे ‘मास्टराइन’ या ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। ऐसा इसलिए किया गया होगा क्योंकि कहानी का मुख्य केंद्र ताई, मिट्ठू और जगन मास्टर हैं। मास्टराइन सहायक पात्र हैं, इसलिए लेखक ने उन्हें व्यक्तिगत नाम न देकर सामाजिक पहचान से प्रस्तुत किया है।

इससे ग्रामीण समाज की एक सच्चाई भी सामने आती है कि कई बार स्त्रियों की पहचान उनके अपने नाम से नहीं, बल्कि पति के नाम या संबंध से होती है। ‘मास्टराइन’ शब्द भी इसी सामाजिक पहचान को दिखाता है। लेखक ने शायद जानबूझकर ऐसा किया है ताकि पाठक समाज में स्त्रियों की पहचान के इस रूप पर विचार कर सकें।

2. “गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे”

(क). ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए— इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?

उत्तर

कुंभ-स्नान हिन्दू धर्म का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इसमें लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। माना जाता है कि कुंभ-स्नान से मन की शुद्धि होती है और पुण्य प्राप्त होता है। यह आयोजन आस्था, परंपरा और भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

पिछली बार बड़ा कुंभ आयोजन महाकुंभ 2025 के रूप में प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इसकी तिथि 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक थी।

अगला प्रमुख कुंभ आयोजन उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2027 में हरिद्वार अर्धकुंभ और 2027 में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के रूप में होगा। नासिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों का उल्लेख हाल की रिपोर्टों में भी किया गया है।

(ख). मान लीजिए ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।

उत्तर

ताई हमारे मोहल्ले में रहती होतीं, तो वे कुंभ-स्नान के लिए पहले अपने पड़ोसियों और गाँववालों के साथ जाने की तैयारी करतीं। वे अपने साथ एक छोटा-सा झोला रखतीं, जिसमें कपड़े, तौलिया, प्रसाद, पूजा की सामग्री, पानी की बोतल और थोड़ा भोजन होता।

सबसे पहले वे घर की देखभाल का प्रबंध करतीं। उन्हें मिट्ठू की चिंता होती, इसलिए वे किसी भरोसेमंद पड़ोसी से कहतीं कि उनके लौटने तक मिट्ठू को दाना-पानी देते रहें। इसके बाद वे गाँव के अन्य यात्रियों के साथ बस या ट्रेन से प्रयागराज के लिए निकलतीं। टिकट पहले से करवा लिया जाता ताकि यात्रा में परेशानी न हो।

रास्ते में लोग भजन गाते, बातें करते और कुंभ-स्नान के महत्व पर चर्चा करते। प्रयागराज पहुँचकर वे किसी धर्मशाला या शिविर में ठहरतीं। सुबह जल्दी उठकर वे संगम पर स्नान के लिए जातीं। वहाँ बहुत भीड़, साधु-संत, भजन-कीर्तन, दुकानों की आवाजें और श्रद्धा का वातावरण होता। स्नान के बाद ताई पूजा करतीं, प्रसाद चढ़ातीं और फिर अपने साथियों के साथ वापस घर लौट आतीं।

(ग). आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाज़ें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?

उत्तर

हमारे नगर में दशहरा मेला बहुत उत्साह से मनाया जाता है। मेले में दूर-दूर से लोग आते हैं। मैदान रंग-बिरंगी रोशनियों, झंडियों और दुकानों से सजा होता है। बच्चे खिलौने, गुब्बारे और झूलों को देखकर बहुत खुश होते हैं।

देखने में मेला बहुत सुंदर लगता है। जगह-जगह मिठाइयों, खिलौनों, चाट-पकौड़ी और कपड़ों की दुकानें लगी होती हैं। बड़े-बड़े झूले और रामलीला का मंच सबका ध्यान आकर्षित करते हैं। सुनने में ढोल, भजन, दुकानदारों की आवाजें, बच्चों की हँसी और लाउडस्पीकर की घोषणाएँ सुनाई देती हैं। सूँघने में जलेबी, समोसे, चाट और अगरबत्ती की सुगंध वातावरण को और आनंदमय बना देती है। छूने में खिलौनों, कपड़ों और मेले की वस्तुओं का अनुभव अलग ही उत्साह देता है। स्वाद में जलेबी, चाट, पकौड़ी और गोलगप्पे मेले का आनंद बढ़ा देते हैं।

मेले में श्रद्धा और उत्साह दोनों दिखाई देते हैं। लोग रावण-दहन देखकर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश ग्रहण करते हैं।

सृजन

1. “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।” अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

उत्तर

ताई के बहू-बेटों ने शायद रोज़गार, बच्चों की पढ़ाई, बेहतर सुविधाओं और अच्छे भविष्य की आशा में गाँव छोड़ा होगा। गाँव में खेती-बाड़ी और पुराने कारोबार से जीवन चलाना कठिन होता जा रहा होगा। शहर में नौकरी, अस्पताल, स्कूल और अन्य सुविधाएँ अधिक थीं, इसलिए उन्होंने शहर जाने का निर्णय लिया होगा।

गाँव छोड़ते समय उनके मन में कई भाव आए होंगे। वे सोचते होंगे कि पुराना घर, खेत, पड़ोसी और अपने लोग पीछे छूट जाएँगे। उन्हें ताई की चिंता भी हुई होगी, लेकिन उन्होंने सोचा होगा कि शहर जाकर वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे और परिवार का भविष्य बेहतर होगा।

अपने घर को छोड़ने के लिए उन्होंने मन को समझाया होगा कि यह निर्णय मजबूरी और भविष्य की भलाई के लिए है। उन्होंने शायद यह भी सोचा होगा कि वे समय-समय पर गाँव आते रहेंगे। लेकिन धीरे-धीरे शहर की व्यस्तता में वे गाँव और ताई से दूर होते चले गए।

2. “वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की।” ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।

संकेत– प्रारंभ कीजिए— “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”

उत्तर

एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। ताई आँगन में बैठी थीं। उनकी आँखें अब भी मिट्ठू को खोजती रहती थीं। अचानक आम के पेड़ पर एक तोता आकर बैठा और बोला— “राम राम! सीताराम!”

ताई चौंककर उठीं। उनकी आँखों में चमक आ गई। वे बोलीं, “मिट्ठू! मेरे लाल, तू आ गया?” मिट्ठू फड़फड़ाकर नीचे आया और पिंजरे के पास बैठ गया। पिंजरे में बैठा नया तोता चुपचाप उसे देखने लगा।

मिट्ठू ने नए तोते को देखकर अपनी गर्दन टेढ़ी की और बोला— “कौन रे? चुप क्यों?” नया तोता कुछ नहीं बोला। मिट्ठू फिर बोला— “राम राम कहो, सीताराम कहो!” ताई हँस पड़ीं। बहुत दिनों बाद उनके घर में हँसी गूँजी।

जगन मास्टर भी वहाँ आ गए। उन्होंने ताई से माफी माँगी। ताई ने कहा, “मास्टर, गलती तुम्हारी नहीं थी। उड़ना तो इसके स्वभाव में है।” उस दिन ताई ने मिट्ठू को पिंजरे में बंद नहीं किया। उन्होंने आँगन में एक खुला आसन बना दिया। अब मिट्ठू जब चाहता उड़ता और जब चाहता ताई के पास लौट आता। ताई का घर फिर से संवाद से भर गया।

3. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए— “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि”। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

मैंने अपने दादाजी से पूछा कि जब वे मेरी उम्र के थे, तब वे समय कैसे बिताया करते थे। उन्होंने बताया कि उनके समय में मोबाइल, टीवी और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ नहीं थीं। बच्चे अधिकतर बाहर खेलते थे। वे कबड्डी, खो-खो, गिल्ली-डंडा और पतंगबाजी खेलते थे।

दादाजी ने बताया कि वे सुबह जल्दी उठते थे और घर के छोटे-मोटे कामों में मदद करते थे। स्कूल पैदल जाते थे और रास्ते में दोस्तों के साथ बातें करते थे। पढ़ाई के बाद वे खेतों में भी जाते थे और परिवार की मदद करते थे। रात को घर के बड़े लोग कहानियाँ सुनाते थे। त्योहारों पर पूरा गाँव मिलकर उत्सव मनाता था।

उनके अनुभव सुनकर मुझे लगा कि पहले लोगों के बीच आपसी बातचीत और अपनापन अधिक था। आज हमारे पास सुविधाएँ तो बहुत हैं, लेकिन परिवार और बुजुर्गों के साथ बैठकर बात करने का समय कम होता जा रहा है।

4. “मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!” मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

व्याकरण की बात

1. आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो।

मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननाअपनी प्रशंसा स्वयं करनारोहन हर समय अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनता रहता है।
हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के औरकथनी और करनी में अंतर होनाकुछ लोगों की बातें अलग और काम अलग होते हैं, सच ही कहा है— हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और।
ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम वस्तुइतने बड़े परिवार के लिए यह खाना ऊँट के मुँह में जीरा है।
बिल्ली के गले में घंटी बाँधनाकठिन काम करने का साहस करनासबने गलती देखी, पर बिल्ली के गले में घंटी बाँधने को कोई तैयार नहीं हुआ।
नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चलीबहुत गलतियाँ करने के बाद धर्म/सज्जनता दिखानाजो हमेशा झूठ बोलता था, वही आज ईमानदारी की बात कर रहा है; यह तो नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली वाली बात है।
आस्तीन का साँपछिपा हुआ शत्रुउसने अपने मित्र को धोखा देकर आस्तीन का साँप होने का प्रमाण दिया।
साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटेऐसा उपाय जिससे दोनों ओर लाभ होशिक्षक ने ऐसा समाधान निकाला कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।
तोते उड़ जानाघबरा जानाकठिन प्रश्न-पत्र देखकर विद्यार्थियों के तोते उड़ गए।
घोड़े बेचकर सोनागहरी नींद सोनापरीक्षा खत्म होते ही वह घोड़े बेचकर सो गया।
भैंस के आगे बीन बजानामूर्ख व्यक्ति को समझाने का व्यर्थ प्रयासजो सुनना ही नहीं चाहता, उसे समझाना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है।

ध्वन्यात्मकता शब्दों से

2. ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

ध्वन्यात्मक शब्दकिस ध्वनि का आभासवाक्य
खट-खटदरवाजा खटखटाने की आवाजरात में दरवाजे पर खट-खट की आवाज आई।
छम-छमपायल की आवाजनर्तकी की पायल छम-छम बज रही थी।
झर-झरपानी गिरने की आवाजपहाड़ से झरना झर-झर बह रहा था।
टप-टपबूँदें गिरने की आवाजछत से बारिश का पानी टप-टप गिर रहा था।
भौं-भौंकुत्ते के भौंकने की आवाजगली में कुत्ता भौं-भौं कर रहा था।
म्याऊँ-म्याऊँबिल्ली की आवाजबिल्ली म्याऊँ-म्याऊँ करती हुई दूध माँग रही थी।
कुकड़ूँ-कूँमुर्गे की आवाजसुबह होते ही मुर्गा कुकड़ूँ-कूँ करने लगा।
सरसराहटपत्तों या हवा की हल्की आवाजहवा चलते ही पेड़ों में सरसराहट होने लगी।
गड़गड़ाहटबादलों या भारी वाहन की आवाजबादलों की गड़गड़ाहट सुनकर बच्चे डर गए।
खनखनाहटधातु/चूड़ियों की आवाजमाँ की चूड़ियों की खनखनाहट सुनाई दी।

शब्द-युग्म

3. पाठ में से चुने गए शब्द-युग्मों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए— वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार

शब्द-युग्मअर्थवाक्य-प्रयोग
वक्त-बेवक्तसमय-असमयमिट्ठू वक्त-बेवक्त दाना माँगने लगता था।
नियम-सिद्धांतनियम और आदर्शजगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांतों पर चलने वाले व्यक्ति थे।
शादी-ब्याहविवाह संबंधी कार्यक्रमगाँव में शादी-ब्याह के अवसर पर बहुत चहल-पहल रहती है।
तीज-त्योहारपर्व और उत्सवपहले ताई के घर में तीज-त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते थे।

खोजबीन शब्दों की

दिया गया अनुच्छेद— “ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”

उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए—

पूछा गयाउत्तर
ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक हैढीली
ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा हैपसीना-पसीना होना
ऐसा शब्द जो एक क्रिया हैपुकारते / सँभालते / रहे
ऐसा शब्द जो एक संज्ञा हैबाग / पेड़ / डाल / पंख
ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम हैवह / अपने
ऐसा शब्द जो एक विशेषण हैढीली / दूसरे
ऐसा शब्द जो एक कारक हैसे / में / पर
ऐसा शब्द जो एक कर्ता हैमिट्ठू / वह

अर्थ के आधार पर वाक्य

अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।

वाक्य का भेदकहानी से उदाहरणकारण
1. विधानवाचक वाक्यताई और मिट्ठू गाँव के बड़े घर में रह गए थे।इसमें एक सामान्य कथन किया गया है।
2. निषेधवाचक वाक्यमिट्ठू ने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।इसमें कार्य न होने का भाव है।
3. प्रश्नवाचक वाक्यभगवान! कैसे नैया पार लगेगी?इसमें प्रश्न पूछा गया है।
4. विस्मयादिबोधक वाक्यये गए! वो गए!!इसमें आश्चर्य और अचानक घटना का भाव है।
5. आज्ञावाचक वाक्यराम-राम कहो, सीताराम कहो।इसमें कहने का आग्रह/आदेश है।
6. इच्छावाचक वाक्यजीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!इसमें शुभकामना और इच्छा प्रकट की गई है।
7. संदेहवाचक वाक्यताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।इसमें अनिश्चितता और संदेह का भाव है।
8. संकेतवाचक वाक्यजब खेती-बाड़ी नहीं, कारोबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!इसमें एक बात दूसरी स्थिति पर निर्भर है।

गतिविधियाँ

1. कहानी के रंग

समूहों को अलग-अलग भावनाएँ — दुख, स्नेह, आजादी — दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

इस गतिविधि को समूहों में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है—

भावनामूक अभिनय का दृश्यअभिनय के संकेत
दुखताई का सूने घर में अकेले बैठना और मिट्ठू को याद करनाताई उदास चेहरा बनाएँ, खाली पिंजरे को देखें, आँखें पोंछें।
स्नेहताई का मिट्ठू को दाना-पानी देना और उससे बातें करनाताई प्यार से पिंजरे के पास जाएँ, दाना दें, मुस्कुराएँ, मिट्ठू की ओर हाथ बढ़ाएँ।
आजादीमिट्ठू का पिंजरे से बाहर आना और रोशनदान से उड़ जानामिट्ठू बने विद्यार्थी पंख फड़फड़ाने का अभिनय करें, पहले डरें, फिर खुले आसमान की ओर उड़ने का संकेत दें।

इस मूक अभिनय से कहानी के तीन मुख्य भाव स्पष्ट होंगे— ताई का अकेलापन, ताई-मिट्ठू का स्नेह और मिट्ठू की स्वतंत्रता की चाह।

2. पंखों की योजना

छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?

उत्तर

अगर मुझे मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिलता, तो मैं सबसे पहले पहाड़ों की ओर जाता। वहाँ से मैं ऊँचे-ऊँचे पर्वत, नदियाँ, जंगल और बादलों को पास से देखता। मुझे प्रकृति बहुत सुंदर लगती है, इसलिए मैं खुले आकाश में उड़कर उसका आनंद लेना चाहता।

इसके बाद मैं अपने देश के प्रसिद्ध स्थानों को देखता— हिमालय, गंगा नदी, रेगिस्तान, समुद्र और ऐतिहासिक इमारतें। उड़ने से मैं दुनिया को ऊपर से देख पाता और समझ पाता कि प्रकृति कितनी विशाल और सुंदर है।

मैं यह भी देखना चाहता कि अलग-अलग जगहों पर लोग कैसे रहते हैं। इससे मुझे नए अनुभव मिलते और दुनिया को समझने का अवसर मिलता।

3. “पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही”

अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।

उत्तर

मैंने अपने घर की महिलाओं से उनकी भोजन संबंधी पसंद के बारे में पूछा। मुझे पता चला कि वे परिवार के सभी सदस्यों की पसंद का ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी पसंद का भोजन बहुत कम बनाती हैं।

मेरी माँ को खिचड़ी, कढ़ी-चावल और हल्का भोजन पसंद है, लेकिन वे अक्सर बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की पसंद का खाना पहले बनाती हैं। दादी को पूरी-सब्जी और मीठा दलिया पसंद है, पर उनकी पसंद का भोजन महीने में केवल एक-दो बार ही बनता है।

इससे मुझे समझ आया कि घर की महिलाएँ कई बार अपनी जरूरतों और रुचियों को पीछे रखकर परिवार की पसंद को प्राथमिकता देती हैं। हमें उनके पसंदीदा भोजन का भी ध्यान रखना चाहिए और महीने में कुछ दिन उनकी पसंद का खाना अवश्य बनाना चाहिए।

मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा

1. उत्तर — तोता

पहेली: हरा रंग, लाल चोंच, मीठी बोली इसकी पहचान। जो सिखाओ, वही दोहराए, बताओ कौन है यह मेहमान?

उत्तर

तोता

2. उत्तर — ताई

पहेली: बड़े घर में अकेली रहती, मिट्ठू से करती प्यार। ममता से उसका ध्यान रखती, बताओ कौन है यह किरदार?

उत्तर

ताई

3. उत्तर — कुंभ

पहेली: नदियों के तट पर मेला लगता, लाखों-करोड़ों लोग हैं आते। श्रद्धा से सब स्नान करते, पुण्य कमाकर घर को जाते।

उत्तर

कुंभ

4. उत्तर — पिंजरा

पहेली: लोहे की छोटी-सी दुनिया, जिसमें पक्षी रहता बंद। दरवाजा खुल जाए अगर, तो मिल जाए खुला गगन।

उत्तर

पिंजरा

5. उत्तर — कमरा

पहेली: चार दीवारों का एक स्थान, जहाँ बैठते, पढ़ते इंसान। दरवाजा-खिड़की इसमें होते, बताओ इसका क्या है नाम?

उत्तर

कमरा

6. उत्तर — गंगा

पहेली: भारत की पावन नदी कहलाती, श्रद्धा से सब इसमें नहाते। हर-हर कहकर नाम पुकारें, मोक्षदायिनी इसे बताते।

उत्तर

गंगा

भाषा संगम

1. इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर

‘तोता’ के लिए कुछ अन्य भाषाओं में शब्द इस प्रकार लिखे जा सकते हैं—

भाषा‘तोता’ के लिए शब्द
अंग्रेज़ीParrot
भोजपुरीसुग्गा
अवधीसुग्गा
हरियाणवीतोता
राजस्थानीसुआ / तोतो
मैथिलीसुगा
मगहीसुग्गा

2. “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखिए।

उत्तर

यदि मातृभाषा हिंदी मानी जाए, तो वाक्य यही रहेगा—

वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।

यदि इसे सरल बोलचाल की हिंदी में लिखें—

पता नहीं वह कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता लेकर आया था।

यदि इसे भोजपुरी शैली में लिखें—

ऊ जाने कहाँ से एगो प्यारा-सा पहाड़ी सुग्गा ले आइल रहे।

इस प्रकार यह गतिविधि हमें बताती है कि भारत की अलग-अलग भाषाओं में एक ही वस्तु के लिए अलग-अलग शब्द मिलते हैं। इससे भाषाओं की विविधता और सुंदरता समझ में आती है।