कक्षा 9 हिंदी · गंगा · अध्याय 1

दो बैलों की कथा

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 1 दो बैलों की कथा का सारांश, व्याख्या, शब्दार्थ, NCERT प्रश्न उत्तर, भाषा-अभ्यास और वीडियो समाधान।

वीडियो पाठसारांशव्याख्याशब्दार्थसंपूर्ण प्रश्नोत्तर
लेखक / कवि
प्रेमचंद
पुस्तक
गंगा
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ
3–29
विधा
गद्य
अध्याय 1 के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री

प्रेमचंद की यह प्रसिद्ध कहानी हीरा और मोती की मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता-प्रेम और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

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सारांश, व्याख्या और महत्वपूर्ण अध्ययन-बिंदु

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पाठ का संक्षिप्त परिचय

‘दो बैलों की कथा’ प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। इसमें हीरा और मोती नाम के दो बैलों के माध्यम से प्रेम, मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता, संघर्ष और अन्याय के विरोध की भावना को दिखाया गया है। कहानी में पशुओं को मानवीय भावनाओं से भरपूर दिखाया गया है। यह कहानी केवल दो बैलों की कथा नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और पशु के भावनात्मक संबंध, स्वतंत्रता की इच्छा और अत्याचार के विरोध का संदेश देती है।

मुख्य पात्र

हीरा – शांत, समझदार, सहनशील और धैर्यवान बैल। वह हर स्थिति में विवेक से काम लेता है।

मोती – साहसी, स्वाभिमानी और क्रोधी बैल। अन्याय देखकर वह तुरंत विरोध करता है।

झूरी – हीरा और मोती का मालिक। वह दोनों बैलों से बहुत प्रेम करता है।

गया – झूरी का साला। वह बैलों के साथ कठोर व्यवहार करता है।

छोटी लड़की – दयालु बालिका, जो बैलों को रोटियाँ खिलाती है और उन्हें भागने में सहायता करती है।

दढ़ियल व्यक्ति – कठोर स्वभाव वाला व्यक्ति, जो नीलामी में बैलों को खरीदता है।

पाठ का सारांश

झूरी के पास हीरा और मोती नाम के दो सुंदर, मजबूत और मेहनती बैल थे। दोनों बैलों में गहरी मित्रता थी। वे साथ खाते, साथ काम करते और एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। दोनों इतने आत्मीय थे कि बिना बोले ही एक-दूसरे की बात समझ जाते थे।

एक दिन झूरी ने उन्हें अपने साले गया के घर भेज दिया। बैलों को लगा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है। वे दुखी हो गए। नए घर में उन्हें अपनापन नहीं मिला। वहाँ उन्हें अच्छा चारा भी नहीं दिया गया। इसलिए रात में दोनों रस्सियाँ तोड़कर झूरी के घर लौट आए। झूरी उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और प्रेम से गले लगा लिया। गाँव के बच्चों ने भी उनका स्वागत किया।

लेकिन झूरी की पत्नी ने उन्हें नमकहराम और कामचोर कहा। बाद में गया फिर उन्हें अपने घर ले गया। इस बार गया ने उनके साथ बहुत कठोर व्यवहार किया। उसने उन्हें मारा और सूखा भूसा दिया। हीरा और मोती ने काम करने से इनकार कर दिया। मोती को अन्याय सहन नहीं हुआ और उसने हल लेकर भागने की कोशिश की। हीरा ने उसे समझाया कि मनुष्य पर आक्रमण करना उनका धर्म नहीं है।

गया के घर में एक छोटी लड़की थी। वह दयालु थी और चोरी-छिपे दोनों बैलों को रोटियाँ खिलाती थी। वह लड़की स्वयं भी दुखी थी, क्योंकि उसकी सौतेली माँ उसे मारती थी। इसलिए उसका हीरा और मोती से आत्मीय संबंध बन गया। एक दिन उसने बैलों की रस्सियाँ खोल दीं और उन्हें भाग जाने को कहा, क्योंकि घर में उनकी नाक में नाथ डालने की बात हो रही थी। बैल तुरंत नहीं भागे, क्योंकि उन्हें डर था कि लड़की पर दोष आएगा। तब लड़की ने शोर मचाकर सबको बताया कि बैल भाग रहे हैं, ताकि उस पर संदेह न हो।

हीरा और मोती भागते-भागते रास्ता भटक गए। रास्ते में उन्होंने मटर के खेत में चरकर भूख मिटाई। फिर उनका सामना एक शक्तिशाली साँड़ से हुआ। दोनों ने मिलकर साहस और एकता से उसका सामना किया और उसे हरा दिया। इससे उनकी मित्रता और संगठन-शक्ति का पता चलता है।

इसके बाद मटर के खेत के रखवालों ने उन्हें पकड़ लिया और काँजीहाउस में बंद कर दिया। वहाँ बहुत से पशु भूखे-प्यासे पड़े थे। हीरा ने दीवार तोड़ने की कोशिश की, ताकि सब पशु आजाद हो सकें। चौकीदार ने उसे मारा और बाँध दिया। फिर भी मोती ने हिम्मत नहीं छोड़ी। दोनों ने मिलकर दीवार तोड़ दी और कई पशु भाग निकले। पर हीरा बँधा रह गया, इसलिए मोती भी उसे छोड़कर नहीं गया। इससे मोती की सच्ची मित्रता सिद्ध होती है।

कुछ दिनों बाद दोनों बैल बहुत कमजोर हो गए। उन्हें नीलामी में एक कठोर दढ़ियल आदमी ने खरीद लिया। वह उन्हें हाँकता हुआ ले जा रहा था। रास्ते में अचानक उन्हें अपना पुराना गाँव और घर पहचान में आया। दोनों तेज़ी से भागकर झूरी के घर पहुँच गए और अपने थान पर खड़े हो गए। झूरी ने उन्हें देखकर प्रेम से गले लगा लिया।

दढ़ियल व्यक्ति उन्हें जबरदस्ती ले जाना चाहता था, लेकिन मोती ने उसे सींग दिखाकर भगा दिया। अंत में हीरा और मोती अपने असली घर में सुरक्षित रह गए। झूरी ने उन्हें खली, भूसा, चोकर और दाना दिया। कहानी के अंत में झूरी की पत्नी भी बदल जाती है और दोनों बैलों के माथे चूम लेती है।

मुख्य संदेश

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि प्रेम और अपनापन किसी भी जीव के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अन्याय और अत्याचार के सामने चुप रहना ठीक नहीं है। स्वतंत्रता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कहानी यह भी बताती है कि सच्ची मित्रता में साथी को संकट में अकेला नहीं छोड़ा जाता। हीरा और मोती की एकता, साहस और स्वाभिमान हमें जीवन में अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।

5. महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
निरापदसुरक्षित, जिसमें कोई खतरा न हो
सहिष्णुतासहनशीलता, क्षमा करने की भावना
विषादउदासी, दुख
पराकाष्ठाचरम सीमा, सबसे ऊँची अवस्था
कदाचित्शायद, संभवतः
पछाई / पछाँहपश्चिम दिशा या पश्चिमी प्रदेश से संबंधित
चौकससावधान, सतर्क
डीलशरीर की बनावट, कद-काठी
विग्रहझगड़ा, अलगाव, फूट
विनोदमनोरंजन, हँसी-मजाक
आत्मीयताअपनापन, घनिष्ठता
नाँदपशुओं को चारा-पानी देने का बर्तन
पगहा / पगहियापशु बाँधने की रस्सी
कनखियों से देखनातिरछी नजर से देखना
चरनीपशुओं को चारा-पानी देने का स्थान
गराँवबैल आदि के गले में पहनाई जाने वाली फंदेदार रस्सी
प्रतिवादविरोध में कही गई बात
ताकीदबार-बार चेतावनी देना
टिटकारपशुओं को चलाने के लिए की जाने वाली आवाज
तेवरक्रोधपूर्ण दृष्टि या भाव
थानपशुओं के बाँधने की जगह
बरकतवृद्धि, लाभ, प्रभाव
बेतहाशाबहुत तेजी से, घबराकर
व्याकुलघबराया हुआ, बेचैन
रगेदनाभगाना, खदेड़ना
तजुर्बाअनुभव
मल्लयुद्धकुश्ती
ग्रासकौर, निवाला
मेड़खेत की सीमा पर बना मिट्टी का घेरा
खुरपशुओं के पैर का निचला कठोर भाग
काँजीहाउसवह स्थान जहाँ आवारा या पकड़े गए पशु बंद किए जाते हैं
साबिकावास्ता, संबंध
तृप्तिसंतोष, पेट भरने का भाव
दहकआग की लपट, जलन
उजड्डपनअशिष्टता, असभ्यता
बूतासामर्थ्य, शक्ति
आजमाईपरीक्षा, जाँच
चेतहोश, सावधानी
डुग्गीछोटा बाजा
उन्मत्तमतवाला, बहुत उत्साहित
नीलामबोली लगाकर बेचना
अख़्तियारअधिकार, वश

6. कुछ महत्वपूर्ण मुहावरे और अर्थ

मुहावराअर्थ
दाँतों पसीना आनाबहुत अधिक कठिनाई होना
दिल काँप उठनाबहुत डर जाना
जल उठनाईर्ष्या या क्रोध से भर जाना
दिल में ऐंठकर रह जानामन में क्रोध या अपमान दबा लेना
खबर लेनादंड देना या मुकाबला करना
जी तोड़कर काम करनापूरी मेहनत से काम करना
गम खा जानाअपमान सहकर चुप रह जाना
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकठोर उत्तर देना
नौ-दो ग्यारह होनाभाग जाना
मन फीका करनानिराश हो जाना

अभ्यास और पुनरावृत्ति

संपूर्ण प्रश्नोत्तर और भाषा-अभ्यास

प्रश्न, उत्तर, तर्क, काव्य-बोध, व्याकरण तथा गतिविधियाँ मूल अध्ययन सामग्री के क्रम में दी गई हैं।

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मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता (ख) एकता और सहयोग (ग) गर्व और दंभ (घ) विद्रोह और क्रोध

उत्तर

(ख) एकता और सहयोग

तर्क

हीरा और मोती हमेशा एक-दूसरे का साथ देते हैं। वे साथ खाते हैं, साथ काम करते हैं और संकट में भी एक-दूसरे को अकेला नहीं छोड़ते। काँजीहाउस में जब हीरा बँधा रह जाता है, तब मोती भागने के बजाय उसके साथ रुकता है। इसलिए उनका संबंध एकता और सहयोग को दर्शाता है।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया। (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया। (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

तर्क

हीरा और मोती को लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। वे झूरी के घर को अपना घर मानते थे और उससे भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे। नए स्थान पर उन्हें अपनापन नहीं मिला, इसलिए वे दुखी और अपमानित महसूस करने लगे।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए (ग) अभिमान की रक्षा के लिए (घ) अपनापन पाने के लिए

उत्तर

(घ) अपनापन पाने के लिए

तर्क

हीरा और मोती झूरी के घर को अपना घर मानते थे। नए घर में उन्हें बेगानापन महसूस हुआ। वे केवल कष्टों से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने प्रिय मालिक झूरी और अपने पुराने घर के अपनापन को पाने के लिए रस्सी तोड़कर लौटे।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान (ख) अहिंसा (ग) पराधीनता (घ) अन्याय की रक्षा

उत्तर

(क) स्वाभिमान

तर्क

गया ने जब हीरा और मोती को डंडे से मारा, तो मोती को यह अन्याय और अपमान लगा। उसका क्रोध केवल गुस्सा नहीं था, बल्कि अपने सम्मान की रक्षा की भावना थी। इसलिए मोती का आक्रोश स्वाभिमान का द्योतक है।

5. कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

उत्तर

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

तर्क

लेखक ने हीरा और मोती को केवल पशु के रूप में नहीं दिखाया है। वे सोचते हैं, निर्णय लेते हैं, दुख-सुख समझते हैं और एक-दूसरे से भावनात्मक संबंध रखते हैं। ‘मूक-भाषा’ के माध्यम से लेखक ने उनमें मनुष्य जैसी चेतना, संवेदना और समझ दिखाई है।

6. 'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

उत्तर

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

तर्क

हीरा और मोती अन्याय और अत्याचार को चुपचाप स्वीकार नहीं करते। वे बंधन तोड़ते हैं, काँजीहाउस की दीवार गिराकर दूसरे पशुओं को भी मुक्त करते हैं और अपने सम्मान व स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हैं। इसलिए वे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली भारतीय जनता के प्रतीक माने जा सकते हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तर

हीरा और मोती ने नए मालिक गया के यहाँ काम करने से इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें वहाँ अपनापन और प्रेम नहीं मिला। उन्हें लगा कि उनके असली मालिक झूरी ने उन्हें बेच दिया है। गया ने उनके साथ कठोर व्यवहार किया, उन्हें डंडों से मारा और खाने के लिए सूखा भूसा दिया। झूरी उन्हें प्रेम से रखता था, लेकिन गया उन्हें केवल काम कराने वाली वस्तु समझता था। इसलिए बैलों ने अपने अपमान और अत्याचार के विरोध में काम करने से इनकार कर दिया।

2. "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

उत्तर

बैलों का घर लौट आना साधारण घटना नहीं थी, क्योंकि वे केवल पशु होते हुए भी अपने घर और मालिक के प्रति गहरा लगाव रखते थे। वे नया स्थान स्वीकार नहीं कर पाए और रात में रस्सी तोड़कर स्वयं झूरी के घर लौट आए। इससे पता चलता है कि पशुओं में भी प्रेम, स्मृति, अपनापन और स्वामिभक्ति जैसी भावनाएँ होती हैं।

झूरी ने भी उन्हें देखकर प्रेम से गले लगा लिया। गाँव के बच्चों ने उनका स्वागत किया और उन्हें पशु-वीर माना। इस घटना से मनुष्य और पशु के भावनात्मक संबंध का सुंदर चित्र मिलता है। इसलिए यह घटना गाँव के लिए महत्वपूर्ण थी।

3. "मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तर

हाँ, कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि अन्याय और अत्याचार को चुपचाप सहना सही नहीं होता। कहानी में हीरा और मोती कई बार संघर्ष करते हैं।

जब गया उन्हें मारता है और सूखा भूसा देता है, तब वे काम करने से इनकार कर देते हैं। यह उनका अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष था। जब छोटी लड़की उन्हें खोल देती है, तब वे गया के घर से भाग जाते हैं, क्योंकि वहाँ उनके साथ अन्याय हो रहा था। काँजीहाउस में भी हीरा और मोती दीवार तोड़ते हैं, ताकि वे स्वयं ही नहीं, दूसरे बंद पशु भी मुक्त हो सकें। रास्ते में शक्तिशाली साँड़ से बचने के लिए दोनों मिलकर उसका सामना करते हैं। इन घटनाओं से सिद्ध होता है कि जब अन्याय सीमा से बढ़ जाए, तब संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है।

4. "जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया..." हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तर

हीरा और मोती स्वतंत्रता और अपनापन दोनों भावनाओं से प्रेरित थे, लेकिन वे अपनापन से अधिक प्रेरित दिखाई देते हैं। वे गया के घर से इसलिए भागे क्योंकि वहाँ उन्हें प्रेम और अपनापन नहीं मिला। जब वे झूरी के घर लौटते हैं, तो बहुत खुश होते हैं। झूरी भी उन्हें गले लगाकर अपना प्रेम प्रकट करता है।

काँजीहाउस से मुक्त होने की इच्छा उनके स्वतंत्रता-प्रेम को दिखाती है, लेकिन कहानी के अंत में जब वे रास्ते में अपना पुराना घर पहचानते हैं, तो सारी कमजोरी भूलकर तेजी से झूरी के घर दौड़ते हैं। इससे स्पष्ट है कि उनके लिए स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने घर और मालिक का अपनापन सबसे अधिक महत्वपूर्ण था।

5. "बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर

हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है। यदि कोई व्यक्ति या जीव अन्याय को चुपचाप सहता रहता है, तो अत्याचारी का साहस और बढ़ जाता है। इसलिए अन्याय का विरोध करना आवश्यक है।

कहानी में हीरा और मोती ने गया का अत्याचार चुपचाप स्वीकार नहीं किया। जब उन्हें मारा गया और सूखा भूसा दिया गया, तो उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया। काँजीहाउस में भी उन्होंने केवल अपनी मुक्ति के लिए नहीं, बल्कि दूसरे पशुओं की मुक्ति के लिए भी दीवार तोड़ी। इससे पता चलता है कि अन्याय के सामने चुप रहने के बजाय साहस और समझदारी से उसका विरोध करना चाहिए।

6. "बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर

हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। यह बात कहानी की कई घटनाओं से स्पष्ट होती है—

दोनों हमेशा साथ रहते, साथ खाते और साथ काम करते थे। यदि एक नाँद से मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी मुँह हटा लेता था।

जब दोनों हल या गाड़ी में जोते जाते थे, तो हर एक चाहता था कि अधिक बोझ उसी की गरदन पर रहे। इससे उनके त्याग और सहयोग की भावना स्पष्ट होती है।

गया के घर में दोनों ने मिलकर काम करने से इनकार किया और अत्याचार का विरोध किया।

जब रास्ते में साँड़ से सामना हुआ, तो दोनों ने मिलकर उसका सामना किया और एक-दूसरे की सहायता की।

काँजीहाउस में जब हीरा बँधा रह गया, तब मोती उसे छोड़कर नहीं भागा। वह अपने मित्र के साथ ही रुका रहा। यह उनकी सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

7. "उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।" कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तर

कहानी में मालकिन और छोटी लड़की का व्यवहार आरंभ में एक-दूसरे से बहुत अलग दिखाई देता है। मालकिन हीरा और मोती को नमकहराम और कामचोर कहती है। वह उन्हें सूखा भूसा देने का आदेश देती है और उनके प्रति कठोर व्यवहार करती है। वह बैलों की भावनाओं को समझ नहीं पाती।

इसके विपरीत, छोटी लड़की दयालु और संवेदनशील है। वह स्वयं दुखी है, इसलिए बैलों का दुख समझती है। वह चोरी-छिपे उन्हें रोटियाँ खिलाती है और जब उसे पता चलता है कि बैलों की नाक में नाथ डाली जाएगी, तो वह उन्हें खोलकर भागने में सहायता करती है।

कहानी के अंत में मालकिन का व्यवहार बदल जाता है। जब हीरा और मोती संघर्ष करके वापस घर लौटते हैं, तो वह भी उनके माथे चूम लेती है। इससे पता चलता है कि मालकिन के मन में भी अंत में उनके प्रति प्रेम और सम्मान जाग जाता है, जबकि छोटी लड़की शुरू से ही उनके प्रति दयालु और प्रेमपूर्ण थी।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1. "उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ..." यदि आप उस छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

उत्तर

यदि मैं उस छोटी लड़की की जगह होता, तो मैं भी हीरा और मोती की सहायता करता। सबसे पहले मैं उन्हें प्यार से सहलाता, ताकि उन्हें लगे कि इस घर में भी कोई उनका दुख समझने वाला है। मैं चोरी-छिपे उन्हें रोटियाँ या थोड़ा-सा अच्छा चारा देता, क्योंकि वे कई दिनों से सूखा भूसा खाकर दुखी थे।

यदि मुझे पता चलता कि उनकी नाक में नाथ डालने की तैयारी हो रही है, तो मैं उनकी रस्सियाँ खोल देता और उन्हें चुपचाप भाग जाने को कहता। लेकिन मैं यह भी ध्यान रखता कि मेरे ऊपर दोष न आए। इसलिए मैं उसी लड़की की तरह शोर मचाकर कहता कि बैल भाग रहे हैं। इससे बैल भी बच जाते और लोग मुझ पर शक भी नहीं करते। मेरे विचार से असहाय और पीड़ित जीवों की मदद करना हमारा कर्तव्य है।

2. "दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर

हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी आगे बढ़ने से रोक देते हैं। कहानी में जब हीरा और मोती काँजीहाउस की दीवार तोड़ देते हैं, तो कई पशु वहाँ से भाग जाते हैं। लेकिन दोनों गधे वहीं खड़े रहते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहीं फिर से पकड़ न लिए जाएँ। उनके सामने आज़ादी का अवसर था, फिर भी वे भय के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाए।

ऐसा जीवन में भी होता है। कई बार विद्यार्थियों को उत्तर पता होता है, पर वे कक्षा में बोलने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि यदि उत्तर गलत हुआ तो सब हँसेंगे। इसी डर के कारण वे अवसर खो देते हैं। इसी प्रकार कई बच्चे प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते हैं, लेकिन संकोच के कारण नाम नहीं लिखवाते। बाद में उन्हें लगता है कि प्रयास करना चाहिए था।

इसलिए हमें डर और संकोच से बाहर निकलकर अवसर का उपयोग करना चाहिए। असफलता से डरने के बजाय प्रयास करना अधिक अच्छा है।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. "दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी... " क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर

मैं इस बात से कुछ हद तक सहमत हूँ। अच्छे मित्रों में अपनापन और खुलापन होता है। वे एक-दूसरे से मज़ाक करते हैं, हँसी-मज़ाक में हल्की नोक-झोंक भी होती है। इससे दोस्ती में सहजता और निकटता दिखाई देती है। कहानी में हीरा और मोती भी कभी-कभी सींग मिला लिया करते थे। यह लड़ाई नहीं थी, बल्कि उनके प्रेम और आत्मीयता का संकेत था।

लेकिन धौल-धप्पा या मज़ाक की भी एक सीमा होनी चाहिए। यदि किसी मित्र को बुरा लगे, चोट पहुँचे या अपमान महसूस हो, तो वह सही दोस्ती नहीं कहलाएगी। सच्ची दोस्ती में प्रेम, सम्मान और समझदारी भी जरूरी है। मेरे विचार से दोस्तों में मज़ाक होना अच्छा है, लेकिन ऐसा मज़ाक नहीं होना चाहिए जिससे किसी का मन दुखे।

2. "हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है..." आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तर

मेरे विचार से इस प्रसंग में हीरा की बात अधिक उचित है। हीरा कहता है कि गिरे हुए बैरी पर सींग नहीं चलाना चाहिए। यह बात दया, मर्यादा और मानवता का संदेश देती है। यदि शत्रु हार चुका है और अब वह हमला करने की स्थिति में नहीं है, तो उस पर फिर से वार करना ठीक नहीं है।

मोती की बात भी पूरी तरह गलत नहीं है, क्योंकि वह अन्याय करने वाले को फिर से उठने का अवसर नहीं देना चाहता। उसके अंदर स्वाभिमान और सुरक्षा की भावना है। वह चाहता है कि शत्रु दोबारा नुकसान न पहुँचा सके। लेकिन क्रोध में आकर अत्यधिक कठोरता दिखाना उचित नहीं है।

इसलिए मैं दोनों की भावनाओं को समझता हूँ, पर हीरा के विचार का समर्थन करता हूँ। संघर्ष करना आवश्यक है, लेकिन संघर्ष में भी मर्यादा और दया बनी रहनी चाहिए।

3. "हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर

हाँ, मैंने भी एक बार अपने मित्र के साथ मिलकर एक चुनौती का सामना किया था। हमारे विद्यालय में एक समूह-प्रस्तुति देनी थी। मेरे एक मित्र को मंच पर बोलने में बहुत डर लगता था। वह प्रस्तुति देने से पीछे हटना चाहता था। मैंने और मेरे दूसरे साथियों ने उसे अकेला नहीं छोड़ा। हमने उसके हिस्से को छोटा किया, उसे कई बार अभ्यास कराया और उसे विश्वास दिलाया कि गलती होने पर भी हम उसका साथ देंगे।

प्रस्तुति के दिन वह थोड़ा घबराया, लेकिन उसने अपना भाग अच्छे से बोल दिया। प्रस्तुति पूरी होने के बाद उसे बहुत खुशी हुई। उस दिन मुझे समझ में आया कि कठिन समय में मित्र का साथ बहुत जरूरी होता है। जैसे मोती ने हीरा को काँजीहाउस में अकेला नहीं छोड़ा, वैसे ही सच्चा मित्र संकट में साथ देता है।

कहानी की पड़ताल

चुनी गई कहानी: दो बैलों की कथा — प्रेमचंद

मुख्य बिंदुउत्तर
शीर्षक और लेखकदो बैलों की कथा — लेखक: प्रेमचंद
विषयदो बैलों, हीरा और मोती, की मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता-प्रेम और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष।
क्रिया/कार्यहीरा और मोती को झूरी के घर से गया के घर भेजा जाता है। वे नया स्थान स्वीकार नहीं करते, अत्याचार का विरोध करते हैं, रस्सी तोड़कर भागते हैं, काँजीहाउस की दीवार तोड़ते हैं और अंत में अपने असली घर लौट आते हैं।
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचारकहानी ग्रामीण परिवेश में घटित होती है, जहाँ बैल खेती और किसान-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उस समय समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और किसान-जीवन की कठिनाइयाँ दिखाई देती हैं। मुख्य विचार है— प्रेम, अपनापन, स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष।
चरित्र/पात्रहीरा, मोती, झूरी, गया, झूरी की पत्नी, छोटी लड़की, दढ़ियल आदमी, काँजीहाउस के पशु।
परिणामहीरा और मोती अनेक कष्टों और संघर्षों के बाद अपने प्रिय मालिक झूरी के घर लौट आते हैं। अंत में उन्हें अपनापन और सम्मान मिलता है। मालकिन भी उनके प्रति प्रेम दिखाती है।

निष्कर्ष: ‘दो बैलों की कथा’ में प्रेमचंद ने पशुओं के माध्यम से मनुष्य जैसी संवेदना, मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।

कहानी की रचना

प्रेमचंद की कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, भाषा, समय, समाज और घटनाओं के संकेत मिलने लगते हैं। ये संकेत आगे की कहानी को समझने में सहायता करते हैं।

संकेत/बिंदुकहानी से संकेत
मुख्य चरित्रों का संकेतप्रारंभ में गधे और बैल की तुलना की गई है। इसके बाद झूरी के दो बैलों हीरा और मोती का परिचय मिलता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि कहानी के मुख्य पात्र यही दोनों बैल हैं।
हीरा और मोती का स्वभावदोनों बैल सुंदर, मेहनती, चौकस और मजबूत बताए गए हैं। दोनों में गहरी मित्रता और भाईचारा है।
कहानी की भाषाभाषा सरल, मुहावरेदार और प्रभावशाली है। लेखक ने पशुओं की भावनाओं को मनुष्यों की तरह व्यक्त किया है।
ग्रामीण परिवेशकहानी में हल, गाड़ी, नाँद, चरनी, चारा, भूसा, खेत, मटर का खेत, थान आदि शब्दों से ग्रामीण और कृषि-प्रधान समाज का संकेत मिलता है।
कहानी का समय और समाजकहानी उस समय की ओर संकेत करती है जब समाज में किसान, पशु और खेती का गहरा संबंध था। साथ ही परोक्ष रूप से स्वतंत्रता और अत्याचार-विरोध की भावना भी दिखाई देती है।
मुख्य भावकहानी के आरंभ से ही सीधेपन, सहनशीलता, स्वाभिमान, प्रेम और अन्याय के विरोध का भाव दिखाई देता है।
आगे की घटनाओं का संकेतहीरा और मोती का आपसी प्रेम, नया स्थान स्वीकार न करना, रस्सी तोड़ना और संघर्ष करना — इन सबकी भूमिका कहानी के प्रारंभ में ही बन जाती है।

पशुओं के लिए कानून

1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

उत्तर

बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय भी दर्शाता है और अन्याय भी।

यह न्याय इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि हीरा और मोती मटर के खेत में घुसकर फसल खा रहे थे। खेत के रखवालों ने उन्हें पकड़ लिया और नियम के अनुसार काँजीहाउस में बंद कर दिया। यदि कोई पशु किसी दूसरे व्यक्ति की फसल को नुकसान पहुँचाता है, तो उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखना एक व्यवस्था हो सकती है।

लेकिन यह अन्याय इसलिए था क्योंकि काँजीहाउस में पशुओं के साथ बहुत कठोर व्यवहार किया गया। उन्हें पूरा दिन खाने को एक तिनका भी नहीं दिया गया। वहाँ कई पशु भूखे-प्यासे पड़े थे। हीरा और मोती के साथ दया और संवेदना का व्यवहार नहीं हुआ। पशु गलती कर सकते हैं, पर उन्हें भूखा रखना या मारना उचित नहीं है। इसलिए काँजीहाउस में बंद करना व्यवस्था की दृष्टि से न्याय था, पर वहाँ का अमानवीय व्यवहार अन्याय था।

2. यदि अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

उत्तर

यदि मुझे अवसर मिले, तो मैं बैलों की ओर से ये कानूनी अधिकार माँगूँगा—

पशुओं को समय पर पर्याप्त भोजन और साफ पानी मिलने का अधिकार हो।

पशुओं को अनावश्यक मारपीट, क्रूरता और कठोर दंड से बचाने का अधिकार हो।

पशुओं को सुरक्षित और स्वच्छ स्थान पर रखने का अधिकार हो।

पशुओं से उनकी क्षमता से अधिक काम न लिया जाए।

बीमार या घायल पशुओं को उपचार मिलने का अधिकार हो।

पशुओं को केवल वस्तु या संपत्ति न समझकर संवेदनशील जीव माना जाए।

यदि किसी पशु को काँजीहाउस में बंद किया जाए, तो उसके मालिक को सूचना दी जाए और पशु की उचित देखभाल की जाए।

3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

(संकेत– “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम... है। हमारे साथ अन्याय हुआ है...।”)

उत्तर

सेवा में, थानाध्यक्ष महोदय, स्थानीय थाना, ग्राम _______।

विषय: हमारे साथ हुए अन्याय की शिकायत के संबंध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी किसान के बैल हैं। हमारे साथ बहुत अन्याय हुआ है, इसलिए हम आपकी सहायता चाहते हैं।

हमें हमारे मालिक के घर से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। वहाँ हमारे साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार नहीं किया गया। हमें मारा गया, सूखा भूसा दिया गया और जबरदस्ती काम करवाने की कोशिश की गई। हमने किसी को नुकसान पहुँचाने की इच्छा से नहीं, बल्कि अत्याचार से बचने के लिए वहाँ से भागने का प्रयास किया।

बाद में हमें काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। वहाँ हमें पूरा दिन खाने को एक तिनका भी नहीं मिला। कई पशु वहाँ भूख और कमजोरी से पड़े थे। हमारे साथ मारपीट की गई और हमें मोटी रस्सियों से बाँध दिया गया। फिर हमें नीलाम कर दिया गया, जबकि हम झूरी के बैल थे और अपने घर लौटना चाहते थे।

अतः आपसे निवेदन है कि हमारे साथ हुए अन्याय की जाँच की जाए। पशुओं को मारने, भूखा रखने और जबरदस्ती बेचने वालों पर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही काँजीहाउस में बंद पशुओं के भोजन, पानी और सुरक्षा की उचित व्यवस्था कराई जाए।

धन्यवाद।

भवदीय, हीरा और मोती झूरी किसान के बैल ग्राम _______

हमारी धरोहर और संस्कृति

1. "वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!" कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदा ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

उत्तर

कहानी के अनुसार हीरा और मोती अत्याचार का विरोध तो करते थे, लेकिन वे अपनी मर्यादा नहीं छोड़ते थे। वे कभी भी गलत और अन्यायपूर्ण कार्य नहीं करना चाहते थे।

वे ये कार्य कभी नहीं करते थे—

वे कमजोर या गिरे हुए शत्रु पर आक्रमण नहीं करते थे।

वे स्त्री पर सींग नहीं चलाते थे।

वे अपने मित्र को संकट में अकेला छोड़कर नहीं भागते थे।

वे अपने स्वामी झूरी के प्रति विश्वासघात नहीं करते थे।

वे बिना कारण किसी मनुष्य को हानि नहीं पहुँचाना चाहते थे।

वे अन्याय का विरोध करते थे, लेकिन क्रूरता और अधर्म का रास्ता नहीं अपनाते थे।

2. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो!" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

उत्तर

हीरा के ये कथन भारतीय संस्कृति के कई श्रेष्ठ मूल्यों की ओर संकेत करते हैं। ये कथन बताते हैं कि संघर्ष करते समय भी मर्यादा, दया और धर्म का पालन करना चाहिए।

इन कथनों में ये भारतीय मूल्य दिखाई देते हैं—

दया और करुणा – गिरे हुए शत्रु पर वार न करना।

मर्यादा – क्रोध में भी अनुचित कार्य न करना।

अहिंसा की भावना – आवश्यकता से अधिक हिंसा न करना।

स्त्री-सम्मान – स्त्री पर आक्रमण न करना।

धर्म-पालन – सामने वाला गलत करे, फिर भी स्वयं गलत रास्ता न अपनाना।

क्षमा और संयम – विजय के बाद भी घमंड या निर्दयता न दिखाना।

3. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"

(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर
उपकरणप्रकारउपयोग
हलपारंपरिकखेत की जुताई करने के लिए
बैलपारंपरिकहल और गाड़ी खींचने के लिए
हँसियापारंपरिकफसल काटने के लिए
खुरपीपारंपरिकनिराई-गुड़ाई और घास निकालने के लिए
कुदालपारंपरिकमिट्टी खोदने और खेत तैयार करने के लिए
फावड़ापारंपरिकमिट्टी, खाद और अनाज उठाने के लिए
बैलगाड़ीपारंपरिकअनाज, चारा और सामान ढोने के लिए
ट्रैक्टरआधुनिकखेत की तेज़ जुताई और अन्य कृषि कार्यों के लिए
कल्टीवेटरआधुनिकमिट्टी को भुरभुरा करने और खरपतवार हटाने के लिए
सीड ड्रिलआधुनिकबीजों को उचित दूरी और गहराई पर बोने के लिए
हार्वेस्टरआधुनिकफसल काटने, दाने अलग करने आदि के लिए
थ्रेशरआधुनिकफसल से दाने अलग करने के लिए
स्प्रे मशीनआधुनिककीटनाशक और दवाइयों का छिड़काव करने के लिए
पानी का पंपआधुनिकसिंचाई के लिए पानी निकालने के लिए
ड्रिप सिंचाई यंत्रआधुनिककम पानी में पौधों की जड़ों तक पानी पहुँचाने के लिए

(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

उत्तर

भारत में बैल कृषि और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। वे केवल पशु नहीं, बल्कि किसान के साथी माने जाते हैं।

बैल इन कार्यों में सहायक होते हैं—

खेतों में हल खींचकर जुताई करने में।

बैलगाड़ी खींचकर अनाज, चारा, लकड़ी और सामान ढोने में।

कुएँ या रहट से पानी निकालने में।

गन्ना कोल्हू चलाने में।

ग्रामीण मेलों और परंपरागत आयोजनों में।

खेत से मंडी तक उपज पहुँचाने में।

छोटे किसानों के लिए ट्रैक्टर के स्थान पर कम खर्चीली शक्ति के रूप में।

शहरों और कस्बों में कभी-कभी सामान ढोने वाली गाड़ियों में।

अलग-अलग और साथ-साथ

1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

(संकेत - धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)

हीरा की विशेषताएँमोती की विशेषताएँ
धैर्यवानसाहसी
शांत स्वभाव कागुस्सैल
समझदारस्वाभिमानी
सहनशीलतेज और तुरंत प्रतिक्रिया करने वाला
विवेकीअन्याय का तुरंत विरोध करने वाला
मर्यादितमित्र के लिए समर्पित
संकट में सोच-समझकर निर्णय लेने वालाखतरे में भी पीछे न हटने वाला
मेहनतीमेहनती

2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

उत्तर

हीरा और मोती दोनों में मित्रता, मेहनत, स्वाभिमान और साहस जैसे समान गुण हैं। दोनों अपने मालिक झूरी से प्रेम करते हैं और अन्याय को स्वीकार नहीं करते।

लेकिन दोनों के स्वभाव में अंतर भी है। हीरा अधिक शांत, धैर्यवान और समझदार है। वह हर बात सोच-विचारकर करता है। मोती अधिक साहसी, गुस्सैल और तुरंत विरोध करने वाला है। जब मोती क्रोध में किसी पर आक्रमण करना चाहता है, तब हीरा उसे मर्यादा और धर्म की याद दिलाता है। जब हीरा संकट में बँधा रह जाता है, तो मोती अपनी मित्रता निभाते हुए उसे छोड़कर नहीं भागता।

इस प्रकार हीरा की समझदारी और मोती का साहस मिलकर दोनों को मजबूत बनाते हैं। वे एक-दूसरे की कमी पूरी करते हैं, इसलिए उनकी मित्रता आदर्श बन जाती है।

3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

(संकेत– क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)

उत्तर

हमारी कक्षा में सभी विद्यार्थियों की रुचियाँ, क्षमताएँ और स्वभाव अलग-अलग होते हैं। कुछ विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छे होते हैं, कुछ खेल में, कुछ चित्रकला या संगीत में, और कुछ बोलने या नेतृत्व करने में अच्छे होते हैं। हमें सभी के साथ सम्मान और सहयोग का व्यवहार करना चाहिए।

मैं अपने सहपाठियों से यह व्यवहार चाहता हूँ—

वे मेरी बात ध्यान से सुनें।

मेरी गलती पर मेरा मज़ाक न उड़ाएँ।

पढ़ाई में कठिनाई हो तो सहायता करें।

खेल में मुझे भी शामिल करें।

अलग रुचि या कमजोरी होने पर मुझे कम न समझें।

समूह-कार्य में सबको बराबर अवसर दें।

मेरे सहपाठी भी मुझसे यही चाहेंगे कि मैं उनके साथ सम्मान, सहयोग और मित्रता का व्यवहार करूँ। मुझे भी उनकी कमजोरियों पर हँसना नहीं चाहिए, पढ़ाई और खेल में उनका साथ देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद करनी चाहिए। इस प्रकार कक्षा में एकता, सहयोग और मित्रता का वातावरण बनता है।

4. "दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।" कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

उत्तर

मेरे विचार से हीरा और मोती आँखों, हाव-भाव, गर्दन हिलाने, पूँछ उठाने, सींग मिलाने और एक-दूसरे को चाटने-सूँघने के माध्यम से बातें किया करते होंगे। जब वे दुखी होते होंगे, तो शांत खड़े रहकर या नाँद से मुँह हटाकर अपनी भावना प्रकट करते होंगे। जब वे खुश होते होंगे, तो पूँछ उठाकर, उछलकर या सींग मिलाकर आनंद व्यक्त करते होंगे।

किसी संकट के समय वे कनखियों से एक-दूसरे को देखकर संकेत करते होंगे। जैसे भागना है या रुकना है, विरोध करना है या धैर्य रखना है—इन बातों को वे अपनी मूक-भाषा से समझ लेते होंगे। उनका आपसी प्रेम इतना गहरा था कि वे बिना बोले ही एक-दूसरे के मन की बात समझ जाते थे।

5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर

हम भी कई बार बिना बोले अपने विचार और भाव व्यक्त करते हैं। इसे संकेतों या भाव-भंगिमाओं की भाषा कहा जा सकता है।

कुछ उदाहरण—

कक्षा में चुप रहने का संकेत देने के लिए होंठों पर उंगली रखना।

सहमति बताने के लिए सिर हिलाना।

मना करने के लिए सिर को दाएँ-बाएँ हिलाना।

खुशी व्यक्त करने के लिए मुस्कुराना।

दुख या नाराज़गी दिखाने के लिए चेहरा उतार लेना।

किसी को बुलाने के लिए हाथ से इशारा करना।

खेल के मैदान में साथी को पास देने के लिए हाथ उठाना।

परीक्षा कक्ष में शिक्षक का केवल आँखों से अनुशासन का संकेत देना।

ट्रैफिक पुलिस का हाथ के संकेतों से वाहनों को रोकना या चलाना।

घर में माता-पिता का आँखों के इशारे से सावधान करना।

इससे स्पष्ट है कि संवाद केवल शब्दों से ही नहीं, बल्कि संकेतों, भावों और व्यवहार से भी होता है।

मार्ग खोजेंगे कैसे?

1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

उत्तर

हाँ, एक बार मैं बाजार में अपने परिवार से कुछ देर के लिए अलग हो गया था और रास्ता भूल गया था। पहले मैं घबरा गया, लेकिन फिर मैंने एक सुरक्षित स्थान पर खड़े होकर अपने आस-पास की जगहों को ध्यान से देखा। मुझे एक दुकान का नाम याद था, जिसके पास हम पहले आए थे। मैंने दुकानदार से विनम्रता से रास्ता पूछा और अपने परिवार को फोन किया। फिर मैं उसी दुकान के पास खड़ा रहा। कुछ देर बाद मेरे परिवार के लोग मुझे लेने आ गए।

इस घटना से मैंने सीखा कि रास्ता भूलने पर घबराना नहीं चाहिए। किसी विश्वसनीय व्यक्ति, दुकानदार, पुलिसकर्मी या शिक्षक जैसी सहायता लेनी चाहिए और सुरक्षित स्थान पर रुकना चाहिए।

2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।

(संकेत– ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)

उत्तर

यदि कोई व्यक्ति रास्ता भटक जाए, तो उसे समझदारी और सावधानी से काम लेना चाहिए। सबसे पहले उसे घबराना नहीं चाहिए और किसी सुरक्षित स्थान पर रुकना चाहिए। फिर अपने गंतव्य का पता लगाने के लिए उपलब्ध साधनों का उपयोग करना चाहिए।

भटकने पर ये उपाय किए जा सकते हैं—

मोबाइल में ऑनलाइन मानचित्र देखकर सही रास्ता पता किया जा सकता है।

पुलिसकर्मी, ट्रैफिक पुलिस या सुरक्षा कर्मी से सहायता लेनी चाहिए।

आसपास के स्कूल, अस्पताल, डाकघर, बैंक या सरकारी भवन में जाकर मदद माँगनी चाहिए।

सड़क पर लगे सूचना-पट, दिशा-सूचक बोर्ड और दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते पढ़ने चाहिए।

किसी विश्वसनीय दुकानदार या स्थानीय व्यक्ति से रास्ता पूछा जा सकता है।

अपने परिवार या परिचित व्यक्ति को फोन करके अपनी स्थिति बतानी चाहिए।

छोटे बच्चों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेले नहीं जाना चाहिए।

यदि मोबाइल में नेटवर्क न हो, तो पुलिस स्टेशन, स्कूल या सरकारी कार्यालय में जाकर सहायता लेनी चाहिए।

इस प्रकार धैर्य, सावधानी और सही सहायता से व्यक्ति सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच सकता है।

3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

उत्तर

हमारे विद्यालय में आपदा की स्थिति के लिए निकासी मार्ग का मानचित्र लगा हुआ है। उसे ध्यान से देखने पर पता चलता है कि हमारी कक्षा से बाहर निकलने के लिए सबसे निकट और सुरक्षित मार्ग कक्षा के मुख्य दरवाजे से होकर गलियारे की ओर जाता है। वहाँ से सीढ़ियों या निर्धारित निकासी मार्ग से विद्यालय के खुले मैदान या सभा-स्थल तक पहुँचा जा सकता है।

आपदा के समय हमें ये सावधानियाँ रखनी चाहिए—

घबराकर भागना नहीं चाहिए।

शिक्षक के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

लाइन बनाकर सुरक्षित निकासी मार्ग से बाहर निकलना चाहिए।

लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

धक्का-मुक्की नहीं करनी चाहिए।

निर्धारित खुले स्थान या सभा-स्थल पर जाकर खड़े होना चाहिए।

नोट: विद्यार्थी अपने विद्यालय के वास्तविक निकासी मानचित्र को देखकर अपनी कक्षा के अनुसार सही मार्ग लिखें, क्योंकि हर विद्यालय का निकासी मार्ग अलग हो सकता है।

सृजन

1. हीरा और मोती की दैनंदिनी कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।

कैसे लिखें-

"आज का दिन..." से आरंभ करें।

भावनाएँ लिखें (भय, गुस्सा, दर्द)।

अंत में आशा या संकल्प लिखें।

(संकेत- "आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।" )

उत्तर

आज का दिन मेरे जीवन का बहुत कठिन दिन रहा। आज मुझे और मेरे मित्र हीरा को पकड़कर काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। हम दोनों केवल भूख के कारण खेत में घुस गए थे, पर हमें ऐसा दंड मिला जैसे हमने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो।

काँजीहाउस में बहुत से पशु बंद थे। कोई भैंस थी, कोई बकरी, कोई घोड़ा और कुछ गधे भी थे। सबके चेहरे पर उदासी थी। किसी के सामने चारा नहीं था। भूख से मेरा पेट जल रहा था। हीरा भी बहुत थका हुआ था। मुझे डर भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था कि हम जैसे मेहनती पशुओं के साथ इतना अन्याय क्यों किया जा रहा है।

सबसे अधिक दुख इस बात का है कि झूरी यहाँ नहीं है। अगर वह होता, तो हमें कभी इस तरह भूखा-प्यासा नहीं रहने देता। हीरा ने हिम्मत दिखाकर दीवार तोड़ने की कोशिश की। उसे डंडे भी पड़े, पर उसने हार नहीं मानी। मुझे अपने मित्र पर गर्व है।

मैंने निश्चय किया है कि हम यहाँ चुपचाप नहीं मरेंगे। हम स्वयं भी मुक्त होंगे और जहाँ तक संभव होगा, दूसरे पशुओं को भी मुक्त करेंगे। मुझे विश्वास है कि एक दिन हम फिर अपने प्यारे घर और झूरी के पास अवश्य पहुँचेंगे।

2. आज के समाचार मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए। कैसे लिखें-

शीर्षक दें।

घटना का विवरण (कौन, कब, क्या हुआ)।

परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।

(संकेत- शीर्षक हो सकता है: "दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ")

उत्तर

दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ

ग्राम समाचार, स्थानीय संवाददाता। कल रात स्थानीय काँजीहाउस में एक अनोखी घटना घटी। हीरा और मोती नाम के दो बैलों ने काँजीहाउस की कच्ची दीवार तोड़कर कई बंद पशुओं को मुक्त कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, दोनों बैलों को खेत में घुसने के कारण पकड़कर काँजीहाउस में बंद किया गया था। वहाँ उन्हें पूरा दिन भोजन नहीं मिला। भूख और अन्य पशुओं की दयनीय स्थिति देखकर दोनों बैलों ने भागने की योजना बनाई। पहले हीरा ने दीवार तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन चौकीदार ने उसे डंडे मारे और बाँध दिया। बाद में मोती ने पूरी शक्ति लगाकर दीवार गिरा दी।

दीवार टूटते ही कई घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें बाहर निकल भागीं। कुछ गधे डर के कारण वहीं खड़े रहे। मोती ने अपने मित्र हीरा को छोड़कर भागना उचित नहीं समझा और उसके पास ही रुक गया।

सुबह काँजीहाउस के कर्मचारियों में खलबली मच गई। गाँव के लोगों ने इस घटना को बैलों की बहादुरी और मित्रता का अद्भुत उदाहरण बताया। कई लोगों का कहना है कि पशुओं के साथ दया और उचित देखभाल का व्यवहार होना चाहिए।

3. कहानी का नया अंत यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।

कैसे लिखें-

बैलों की नई जगह।

झूरी की स्थिति।

(संकेत- "हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।" )

उत्तर

यदि हीरा और मोती वापस झूरी के घर न लौटते, तो शायद कहानी का अंत कुछ अलग होता।

नीलामी के बाद दढ़ियल व्यक्ति उन्हें अपने गाँव ले गया। रास्ते में दोनों बहुत थके और दुखी थे। उन्हें बार-बार झूरी का घर याद आता था। वे सोचते थे कि अब शायद वे कभी अपने पुराने घर नहीं पहुँच पाएँगे। दढ़ियल व्यक्ति उन्हें बेचने के लिए आगे ले जा रहा था, पर रास्ते में एक बूढ़े किसान ने दोनों बैलों को देखा।

बूढ़े किसान को उनकी आँखों में दुख और थकान दिखाई दी। उसने दढ़ियल व्यक्ति से बैलों को खरीद लिया, लेकिन वह गया की तरह कठोर नहीं था। वह दयालु और गरीब किसान था। उसने दोनों को अच्छा चारा दिया, पानी पिलाया और उनके घावों पर दवा लगाई। धीरे-धीरे हीरा और मोती स्वस्थ होने लगे।

उधर झूरी अपने बैलों के बिना बहुत उदास रहने लगा। वह रोज़ उन्हें याद करता और कहता, “न जाने मेरे हीरा और मोती कहाँ होंगे!” उसे अपने बैलों से पुत्रों जैसा प्रेम था।

हीरा और मोती अब बूढ़े किसान के घर शांति से रहने लगे। वे मेहनत भी करते थे और किसान भी उनसे प्रेम करता था। फिर भी उनके मन में झूरी की याद बनी रही। कहानी का यह नया अंत हमें सिखाता है कि जहाँ प्रेम और दया मिलती है, वही घर जैसा लगने लगता है; लेकिन पुराने अपनापन की स्मृति कभी पूरी तरह मिटती नहीं।

4. चित्रकथा लेखन नीचे 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम दोनों वाक्य लिखिए।

कैसे लिखें-

हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।

क्रम का ध्यान रखें- बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।

उत्तर

चित्र 1: काँजीहाउस में बंद करना

घटनाक्रम: हीरा और मोती को पकड़कर काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। वहाँ कई पशु भूखे-प्यासे पड़े थे। संवाद: हीरा: “मोती, यह कैसी जगह है? यहाँ तो किसी को चारा भी नहीं मिला।” मोती: “हाँ हीरा, यहाँ से निकलने का उपाय सोचना होगा।”

चित्र 2: भागने की योजना

घटनाक्रम: रात में हीरा और मोती ने काँजीहाउस से निकलने की योजना बनाई। उन्होंने कच्ची दीवार को तोड़ने का विचार किया। संवाद: हीरा: “यदि यह दीवार टूट जाए, तो हम सब आज़ाद हो सकते हैं।” मोती: “चलो, पूरी ताकत लगाते हैं। केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए।”

चित्र 3: दीवार तोड़ना

घटनाक्रम: हीरा और मोती ने अपने सींगों से दीवार पर जोरदार चोटें कीं। बहुत प्रयास के बाद दीवार गिर गई। संवाद: मोती: “हीरा, हिम्मत मत हारना! दीवार कमजोर पड़ रही है।” हीरा: “बस थोड़ा और जोर लगाओ, सबकी मुक्ति निकट है।”

चित्र 4: आज़ादी

घटनाक्रम: दीवार टूटते ही कई पशु काँजीहाउस से बाहर भाग गए। हीरा बँधा रह गया, तो मोती उसे छोड़कर नहीं गया। संवाद: हीरा: “मोती, तुम भाग जाओ, अवसर हाथ से न जाने दो।” मोती: “नहीं मित्र, तुम्हें छोड़कर मैं आज़ाद नहीं हो सकता।”

भाषा से संवाद

मेरे शब्द

कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुसार लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

कहानी में से पाँच नए शब्द, उनके अनुमानित अर्थ और शब्दकोश के अनुसार अर्थ—

शब्दमेरे अनुसार अर्थशब्दकोश के अनुसार अर्थ
निरापदजिसमें कोई खतरा न होआपत्ति से रहित, सुरक्षित
विषाददुख या उदासीउदासी, अवसाद, मन का उचट जाना
पगहापशु बाँधने की रस्सीपशुओं को बाँधने की रस्सी
गराँवगले में बाँधने वाली रस्सीफंदेदार रस्सी, जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है
काँजीहाउसपशुओं को बंद करने की जगहवह बाड़ा जिसमें आवारा या पकड़े गए पशु बंद किए जाते हैं

भाषा गढ़ते मुहावरे

"लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।" "मन फीका करना" एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी टूटना होना आदि। 'दो बैलों की कथा' कहानी में कई मुहावरों का बहुत ही सुंदर और सटीक प्रयोग हुआ है। कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-

"झूरी के साले गया को घर तक गाड़ी ले जाने में दोनों को पसीना आ गया।"

"उसका चेहरा देखकर अंतर्मन से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।"

"झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।"

"मोती का दिल ऐंठकर रह गया।"

"आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा, देखूँ कैसे ले जाता है।"

"जो जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।"

"अगर ये भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सबक सिखा देते।"

"तो फिर क्यों कहते हो, मरना बुरा नहीं होता है?"

1. "झूरी के साले गया को घर तक गाड़ी ले जाने में दोनों को पसीना आ गया।"

मुहावरा: पसीना आ जाना अर्थ: बहुत कठिनाई होना या बहुत मेहनत लगना। नया वाक्य: कठिन गणित का प्रश्न हल करते-करते मेरे तो पसीने छूट गए।

2. "उसका चेहरा देखकर अंतर्मन से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।"

मुहावरा: दिल काँप उठना अर्थ: बहुत डर जाना। नया वाक्य: रात में अजीब आवाज़ सुनकर मेरा दिल काँप उठा।

3. "झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।"

मुहावरा: जल उठना अर्थ: क्रोध या ईर्ष्या से भर जाना। नया वाक्य: अपने भाई को नया खिलौना मिलते देखकर छोटा बच्चा जल उठा।

4. "मोती का दिल ऐंठकर रह गया।"

मुहावरा: दिल ऐंठकर रह जाना अर्थ: मन में दुख, क्रोध या अपमान की भावना दबा रह जाना। नया वाक्य: शिक्षक ने सबके सामने डाँटा, तो रोहित का दिल ऐंठकर रह गया।

5. "आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा, देखूँ कैसे ले जाता है।"

मुहावरा: खबर लेना अर्थ: दंड देना, मुकाबला करना या सबक सिखाना। नया वाक्य: यदि कोई छोटे बच्चों को परेशान करेगा, तो शिक्षक उसकी खबर लेंगे।

6. "जो जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।"

मुहावरा 1: जी तोड़कर काम करना अर्थ: पूरी मेहनत से काम करना। नया वाक्य: किसानों ने फसल उगाने के लिए जी तोड़कर काम किया।

मुहावरा 2: गम खा जाना अर्थ: अपमान या दुख सहकर चुप रह जाना। नया वाक्य: उसने मित्र की कटु बात सुनकर भी गम खा लिया।

7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”

मुहावरा: ईंट का जवाब पत्थर से देना अर्थ: कठोर व्यवहार का और अधिक कठोर उत्तर देना। नया वाक्य: हमें हर बार ईंट का जवाब पत्थर से नहीं देना चाहिए; कभी-कभी शांति से बात करना भी जरूरी होता है।

8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”

मुहावरा: नौ-दो ग्यारह होना अर्थ: भाग जाना। नया वाक्य: पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।

गतिविधियाँ

1. कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र "बाल-सभा ने निर्णय किया, दोनों पशुओं को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।" (क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। उसकी कल्पना से वह गीत लिखिए।

हीरा और मोती की प्रशंसा में गीत

हीरा-मोती वीर हमारे, गाँव-गाँव के प्यारे। बंधनों को तोड़ चले वे, साहस के उजियारे।

साथ निभाया हर संकट में, कभी न छोड़ा साथ। अन्यायों से लड़ते-लड़ते, चुना सच्चाई का पथ।

काँजीहाउस की दीवारें भी, इनसे टिक न पाईं। अपने संग कितने पशुओं को, आजादी दिलवाई।

झूरी के वे सच्चे साथी, प्रेम-धर्म निभाते। हीरा-मोती हमें सिखाते, मित्र कभी न छोड़ जाते।

(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।

हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र

अभिनंदन-पत्र

प्रिय हीरा और मोती,

हम गाँव की बाल-सभा की ओर से आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं। आपने अपनी मित्रता, साहस, स्वाभिमान और एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

आपने कष्ट सहकर भी हार नहीं मानी। गया के अत्याचार का विरोध किया, काँजीहाउस की दीवार तोड़ी और कई पशुओं को मुक्त कराया। आपने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा मित्र संकट में साथ नहीं छोड़ता और अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए।

आप दोनों ने अपने मालिक झूरी के प्रति प्रेम और अपनापन भी दिखाया। आपके घर लौट आने से पूरा गाँव प्रसन्न हो गया। हम सबको आप पर गर्व है।

हमारी बाल-सभा की ओर से आपको “पशु-वीर” की उपाधि दी जाती है।

धन्यवाद।

बाल-सभा ग्राम _______

2. बाल सभा में भाषण मान लीजिए कि आपके बाल-सभा में हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के इच्छुक सदस्य हैं। भाषण का विषय है- "पशुओं के अधिकार"। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

विषय: पशुओं के अधिकार

आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियो,

आज मैं आपके सामने “पशुओं के अधिकार” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

पशु भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं। वे बोल नहीं सकते, लेकिन उन्हें भी भूख, प्यास, दर्द, डर और प्रेम का अनुभव होता है। इसलिए हमें उनके साथ दया और संवेदना का व्यवहार करना चाहिए।

‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती के माध्यम से हमें यह समझ में आता है कि पशुओं में भी अपनापन, मित्रता और स्वाभिमान होता है। जब उनके साथ प्रेम किया गया, तो वे अपने मालिक झूरी के प्रति निष्ठावान रहे। लेकिन जब उनके साथ मारपीट और अन्याय हुआ, तो उन्होंने उसका विरोध किया।

पशुओं को भोजन, पानी, आराम और सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनसे उनकी शक्ति से अधिक काम नहीं लेना चाहिए। उन्हें मारना, भूखा रखना या घायल करना गलत है। यदि कोई पशु बीमार हो जाए, तो उसका उपचार करवाना चाहिए।

हमें यह भी याद रखना चाहिए कि पशु केवल हमारी जरूरतों को पूरा करने वाली वस्तु नहीं हैं। वे प्रकृति और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए हमें उनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

अंत में मैं कहना चाहूँगा— पशुओं से प्रेम करें, उनकी रक्षा करें और उन्हें भी सम्मान से जीने का अधिकार दें।

धन्यवाद।

3. शीर्षक इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

भागउपयुक्त शीर्षक
भाग 1हीरा-मोती का प्रेम और झूरी का घर
भाग 2गया के घर अत्याचार और विद्रोह
भाग 3स्वतंत्रता की राह और साँड़ से संघर्ष
भाग 4काँजीहाउस की दीवार और सच्ची मित्रता
भाग 5घर वापसी और सम्मान की जीत

मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-

1. हीरा

पहेली: नाम मेरा चमकता रत्न, पर मैं हूँ खेतों का धन। मोती मेरा सच्चा साथी, बताओ कौन हूँ मैं भाई?

उत्तर

हीरा

2. झूरी

पहेली: दो बैलों से करता प्यार, उनसे जुड़ा उसका संसार। देख उन्हें वह गद्गद हो जाए, नाम बताओ कौन कहलाए?

उत्तर

झूरी

3. मोती

पहेली: हीरा का मैं प्यारा यार, साहस मेरा सबसे खास। अन्याय देख क्रोध में आऊँ, मित्र को कभी न छोड़ पाऊँ।

उत्तर

मोती

4. गया

पहेली: झूरी का हूँ रिश्तेदार, पर बैलों से किया दुर्व्यवहार। सूखा भूसा, डंडे भारी, कौन हूँ मैं अत्याचारी?

उत्तर

गया

5. बैल

पहेली: खेतों में हल मैं खींचूँ, किसान का साथी कहलाऊँ। मेहनत से धरती उपजाऊँ, बताओ मैं क्या कहलाऊँ?

उत्तर

बैल

6. घर

पहेली: जहाँ मिले प्रेम और अपनापन, जहाँ मिटे दुख और थकान। हीरा-मोती लौटे जिस ओर, क्या है वह प्यारा स्थान?

उत्तर

घर

7. रस्सी

पहेली: बाँधती हूँ गले या पाँव, मुझसे रुक जाए पशु की चाल। हीरा-मोती ने मुझे तोड़ा, तब खुला आजादी का द्वार।

उत्तर

रस्सी

8. रोटी

पहेली: छोटी लड़की चुपके लाई, बैलों ने प्रेम से खाई। भूख न सही पूरी मिट पाई, पर मन को बहुत तसल्ली आई।

उत्तर

रोटी

भाषा संगम

"कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।" नीचे 'बैल' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है- बैल (हिंदी), गड्डु (संस्कृत), बॉल्द (पंजाबी), बेल (उर्दू), बोंद (कश्मीरी), हमो (सिंधी), बला (मराठी), बडद (गुजराती), बेल (कोंकणी), गोड़ (नेपाली), बलद (बांग्ला), गोंड, वलद (असमिया), रसा बलद (मणिपुरी), बलद (ओड़िया), एण्टु (तेलुगु), पांडु (तमिल), कळो (मलयालम), एरुथु (कन्नड़) इन शब्दों की सूची में 'बैल' शब्द के लिए किसी और भाषा में भी जानने हों तो उस भाषा में भी लिखिए। उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

‘बैल’ शब्द अन्य भाषाओं में

भाषा‘बैल’ के लिए शब्द
हिंदीबैल
संस्कृतवृषभः
पंजाबीबलद / बळद
उर्दूबैल
मराठीबैल
गुजरातीબળદ
बांग्लाবলদ
ओड़ियाବଳଦ
तेलुगुఎద్దు
तमिलகாளை
मलयालमകാള
कन्नड़ಎತ್ತು
अंग्रेज़ीOx / Bullock
भोजपुरीबरद / बलद
हरियाणवीबलद / बैल
राजस्थानीबैल / बलद

वाक्य: “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”

हिंदी में: कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।

अंग्रेज़ी में: Sometimes a stubborn ox is also seen.

भोजपुरी में: कबो-कबो अड़ियल बरद भी देखे के मिलेला।

सरल हिंदी में: कभी-कभी जिद्दी बैल भी दिखाई देता है।