इस पृष्ठ पर ‘पृथ्वी एक तंत्र – ऊर्जा, द्रव्य और जीवन’ अध्याय के चिंतन, सोचिए और बताइए, अभ्यास तथा खोज-आधारित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं।
प्रश्न-उत्तर
चिंतन कीजिए
1अरब सागर के जल के गर्म होने से भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अरब सागर का जल गर्म होने पर वाष्पीकरण बढ़ता है और वायुमंडल में अधिक जलवाष्प पहुँचती है। इससे दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें अधिक नमी ग्रहण कर सकती हैं और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना बढ़ जाती है। अत्यधिक तापमान मानसूनी परिसंचरण को अस्थिर करके वर्षा का वितरण अनियमित भी बना सकता है।
2यदि किसी बड़े वन क्षेत्र को हटा दिया जाए तो उस क्षेत्र की नदी के प्रवाह पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है?
वन हटाने से वर्षाजल का भूमि में अंतःस्यंदन घटता है और सतही अपवाह बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप वर्षा के समय नदी में अचानक बाढ़ आ सकती है तथा मृदा अपरदन से गाद जमा हो सकती है। भूजल पुनर्भरण कम होने के कारण शुष्क मौसम में नदी का प्रवाह भी घट सकता है।
3यदि हिमानियाँ और ध्रुवीय बर्फ तेजी से पिघलती रहीं तो भारत के तटीय शहरों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है?
हिमानियों और ध्रुवीय बर्फ के तेजी से पिघलने पर समुद्र-स्तर बढ़ेगा। इससे मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे तटीय शहरों में बाढ़, तटीय अपरदन तथा भूमि के जलमग्न होने का खतरा बढ़ सकता है। खारा जल भूजल और कृषि भूमि में प्रवेश कर सकता है तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित होना पड़ सकता है।
4वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से महासागरीय प्लवक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का कुछ भाग महासागर में घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाता है, जिससे समुद्री जल की अम्लता बढ़ती है। यह विशेष रूप से कैल्सियम कार्बोनेट का कवच बनाने वाले प्लवकों को हानि पहुँचा सकता है। प्लवकों की संख्या घटने से समुद्री खाद्य शृंखला, कार्बन चक्र और महासागरीय पारितंत्र प्रभावित हो सकते हैं।
प्रश्न-उत्तर
सोचिए और बताइए—पृष्ठ 258
1दिए गए वेबपृष्ठ का अवलोकन कीजिए और समझिए कि हरितगृह गैसों की मात्रा सतही ताप को किस प्रकार प्रभावित करती है।
सिमुलेशन से पता चलता है कि हरितगृह गैसों की मात्रा बढ़ने पर वे पृथ्वी से निकलने वाले अधिक अवरक्त विकिरण को अवशोषित करके उसका कुछ भाग पुनः सतह की ओर भेजती हैं। इससे अंतरिक्ष में ऊष्मा का निष्कासन कम होता है और सतही तापमान बढ़ता है। इन गैसों की मात्रा घटने पर अधिक ऊष्मा अंतरिक्ष में निकल जाती है और सतह अपेक्षाकृत ठंडी रहती है। प्राकृतिक मात्रा में हरितगृह गैसें पृथ्वी को जीवन के अनुकूल गर्म रखती हैं। PhET Greenhouse Effect Simulation
प्रश्न-उत्तर
सोचिए और बताइए—पृष्ठ 261
2शीतल पर्वतीय समीर कृषि कार्यों, विशेषतः फसलों और मृदा के लिए किस प्रकार लाभदायक होती है?
रात में पर्वतीय ढलानों की ठंडी और सघन वायु नीचे घाटी की ओर बहती है। यह शीतल पर्वतीय समीर फसलों तथा मृदा का तापमान कम करती है, जिससे वाष्पीकरण और पौधों का जल-हानि कम होती है। इसके फलस्वरूप मृदा में नमी अधिक समय तक बनी रहती है और ठंडी जलवायु पसंद करने वाली फसलों की वृद्धि में सहायता मिलती है।
3भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जल की गर्म सतह का क्या होता है? इस संचलन का उस क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?
भूमध्य रेखा का गर्म सतही जल महासागरीय धाराओं द्वारा ध्रुवों की ओर बढ़ता है। आगे बढ़ते हुए यह जल आसपास के वायुमंडल को ऊष्मा देता है, ठंडा और अधिक सघन होकर नीचे डूबने लगता है। यह संचलन भूमध्यरेखा से उच्च अक्षांशों तक ऊष्मा पहुँचाता है, जिससे तटीय क्षेत्रों का तापमान, वर्षा, मौसम और जलवायु प्रभावित होते हैं।
प्रश्न-उत्तर
सोचिए और बताइए—पृष्ठ 263
4वैश्विक तापमान में वृद्धि से महासागरों में घुली CO₂ का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका समुद्री जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
गर्म जल में गैसों को घोलकर रखने की क्षमता कम होती है। इसलिए महासागरों का तापमान बढ़ने पर घुली हुई CO₂ का कुछ भाग वायुमंडल में वापस जा सकता है। तापवृद्धि और CO₂-संतुलन में परिवर्तन प्लवकों के प्रकाश संश्लेषण, प्रवाल भित्तियों तथा समुद्री खाद्य शृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है। गर्म जल में घुलित ऑक्सीजन भी कम हो सकती है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट बढ़ता है।
प्रश्न-उत्तर
सोचिए और बताइए—पृष्ठ 265
5यदि जैव-भू रासायनिक चक्र बाधित हो जाए अथवा रुक जाए तो पृथ्वी पर पादपों और जंतुओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उदाहरण सहित समझाइए।
जैव-भू रासायनिक चक्र जल, कार्बन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे आवश्यक पदार्थों को जीवों तथा पर्यावरण के बीच पुनः उपलब्ध कराते हैं। इनके बाधित होने पर पोषक तत्त्वों की कमी, खाद्य शृंखलाओं का विघटन और पारितंत्र का असंतुलन होगा। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन चक्र रुकने पर पौधों को उपयोगी नाइट्रोजन यौगिक नहीं मिलेंगे। इससे प्रोटीन निर्माण और पौधों की वृद्धि घटेगी। पौधों पर निर्भर शाकाहारी तथा उनके बाद मांसाहारी जंतु भी भोजन की कमी से प्रभावित होंगे।
प्रश्न-उत्तर
क्या होगा यदि
1यदि प्रकाश संश्लेषण रुक जाए, तो पृथ्वी पर क्या होगा?
प्रकाश संश्लेषण रुकने पर पौधे अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और वायुमंडल में ऑक्सीजन की पुनःपूर्ति बंद हो जाएगी। कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगेगी। पहले पौधे तथा उन पर निर्भर शाकाहारी जीव प्रभावित होंगे और बाद में मांसाहारी जीव भी समाप्त होने लगेंगे। अंततः खाद्य शृंखलाएँ टूट जाएँगी और पृथ्वी पर अधिकांश जीवन का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
प्रश्न-उत्तर
सोचिए और बताइए—पृष्ठ 266
6चर्चा कीजिए कि मानवीय गतिविधियाँ वायुमंडल में हरितगृह गैसों की मात्रा किस प्रकार बढ़ाती हैं। हरितगृह गैसों के बढ़ते उत्सर्जन को रोकने के लिए आप अपने स्तर पर क्या करेंगे?
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का दहन वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ाता है। वनोन्मूलन से CO₂ का अवशोषण घटता है। धान की खेती, पशुपालन और कूड़े के अपघटन से मीथेन निकलती है, जबकि नाइट्रोजन उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ता है।
अपने स्तर पर मैं सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता दूँगा। बिजली और ईंधन की बचत करूँगा, ऊर्जा-कुशल उपकरणों का प्रयोग करूँगा, अनावश्यक वस्तुओं की खपत घटाऊँगा तथा वस्तुओं का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करूँगा। मैं पेड़ लगाऊँगा, भोजन और पानी की बर्बादी रोकूँगा तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करूँगा।
प्रश्न-उत्तर
अभ्यास प्रश्न
1पारितंत्र में जैव-भू-रासायनिक चक्रों की भूमिका का वर्णन करने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त विकल्प चुनिए।
विकल्प
- (i) समस्त जीवों को प्रत्यक्ष रूप से भोजन उपलब्ध कराना।
- (ii) जैविक और अजैविक घटकों के मध्य आवश्यक पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करना।
- (iii) सजीवों के उपयोग के लिए नए तत्त्वों का निर्माण करना।
- (iv) जीवों से प्रदूषक और विषाक्त पदार्थों को हटाना।
सही विकल्प है—(ii) जैविक और अजैविक घटकों के मध्य आवश्यक पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करना।
व्याख्या
जैव-भू-रासायनिक चक्र जल, कार्बन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे पदार्थों को जीवमंडल, वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल के बीच पुनर्चक्रित करते हैं। इससे आवश्यक पोषक तत्त्व जीवों को बार-बार उपलब्ध होते रहते हैं।
2निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प पृथ्वी के गर्म होने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है?
विकल्प
- (i) सौर विकिरण शीघ्रता से कार्बन डाइऑक्साइड द्वारा अवशोषित हो जाता है, जो इसे ऊष्मा के रूप में निर्मुक्त करती है।
- (ii) वायुमंडल के सूक्ष्म कण आगामी सौर विकिरण को अवशोषित करते हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को गर्म करते हैं।
- (iii) पृथ्वी की सतह सौर विकिरण का अवशोषण करती है, जो पुनः विकिरित होता है और हरितगृह गैसों द्वारा रोक लिया जाता है।
- (iv) पृथ्वी का वातावरण बादलों द्वारा परावर्तित सौर विकिरण से ही गर्म होता है।
सही विकल्प है—(iii) पृथ्वी की सतह सौर विकिरण का अवशोषण करती है, जो पुनः विकिरित होता है और हरितगृह गैसों द्वारा रोक लिया जाता है।
व्याख्या
पृथ्वी की सतह सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को अवशोषित करके उसे अवरक्त विकिरण के रूप में उत्सर्जित करती है। हरितगृह गैसें इस ऊष्मा के एक भाग को रोककर पृथ्वी का ताप बढ़ाती हैं।
3स्पष्ट कीजिए कि जलवायु परिवर्तन जल चक्र को किस प्रकार प्रभावित करता है। उदाहरणों द्वारा दर्शाइए।
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने से समुद्रों, नदियों और मिट्टी से वाष्पीकरण तेज हो जाता है। वायुमंडल में अधिक जलवाष्प पहुँचने से कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा, बाढ़ और तूफान बढ़ सकते हैं, जबकि वर्षा के बदलते वितरण से अन्य क्षेत्रों में सूखा पड़ सकता है। हिमनदों तथा ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से नदियों के प्रवाह और समुद्र-स्तर में परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए, हिमालयी हिमनदों के तेजी से पिघलने पर आरंभ में नदी-प्रवाह बढ़ सकता है, परंतु बाद में जल की उपलब्धता घट सकती है।
4वर्णन कीजिए कि एल्बिडो किस प्रकार पृथ्वी की सतह के ताप और इसकी जलवायु को प्रभावित करता है।
किसी सतह द्वारा परावर्तित सौर विकिरण के अनुपात को एल्बिडो कहते हैं। बर्फ, हिम और बादलों जैसी हल्के रंग की सतहों का एल्बिडो अधिक होता है। ये अधिक सौर विकिरण परावर्तित करके सतह को ठंडा रखती हैं। महासागर, वन और गहरी मिट्टी का एल्बिडो कम होता है, इसलिए वे अधिक ऊर्जा अवशोषित करके गर्म होती हैं। बर्फ पिघलने पर नीचे की गहरी भूमि या जल दिखाई देने लगता है, जो अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। इससे ताप और बढ़ता है तथा बर्फ और तेजी से पिघलती है।
5पर्वतीय और घाटी समीर किस प्रकार बनती हैं? मान लीजिए दो पर्वत हैं—एक घास से आच्छादित है और दूसरा बंजर चट्टानों से। क्या दोनों पर्वतीय समीरोें के ताप भिन्न होंगे? यदि ऐसा है तो किस प्रकार?
दिन में पर्वतीय ढलानें तेजी से गर्म होती हैं। उनके संपर्क की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और घाटी से ठंडी वायु ढलान की ओर बहती है। इसे घाटी समीर कहते हैं। रात में ढलानें ठंडी हो जाती हैं और ठंडी, सघन वायु नीचे घाटी की ओर बहती है। इसे पर्वतीय समीर कहते हैं।
दोनों पर्वतों की समीरोें का ताप भिन्न होगा। बंजर चट्टानें दिन में तेजी से गर्म और रात में तेजी से ठंडी होती हैं। इसलिए वहाँ से आने वाली रात की पर्वतीय समीर अधिक ठंडी हो सकती है। घास तापमान के उतार-चढ़ाव को कम करती है, इसलिए घास वाले पर्वत की समीर अपेक्षाकृत कम ठंडी होगी।
6आप पवन, तूफान और वर्षा जैसी मौसमी परिघटनाओं के साक्षी रहे हैं। वायुमंडल की कौन-सी परत इनके लिए उत्तरदायी है और इन परिघटनाओं के होने का प्रमुख कारण क्या है?
पवन, बादल, वर्षा और तूफान जैसी अधिकांश मौसमी परिघटनाएँ वायुमंडल की सबसे निचली परत क्षोभमंडल में होती हैं। इस परत में वायु और लगभग समस्त वायुमंडलीय जलवाष्प उपस्थित होती है।
इन परिघटनाओं का प्रमुख कारण पृथ्वी की सतह का सूर्य द्वारा असमान रूप से गर्म होना है। इससे विभिन्न स्थानों पर ताप और वायुदाब में अंतर उत्पन्न होता है। वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है। जलवाष्प ऊपर उठकर ठंडी होती है और संघनित होकर बादल तथा वर्षा उत्पन्न करती है। अत्यधिक दाब-अंतर से तेज पवन और तूफान बन सकते हैं।
7नाइट्रोजन चक्र में होने वाली प्रक्रियाओं की व्याख्या कीजिए। यदि नाइट्रोजन का चक्रण नहीं हो तो पृथ्वी पर जीवन किस प्रकार प्रभावित होगा?
नाइट्रोजन चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण: जीवाणु और बिजली वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी यौगिकों में बदलते हैं।
- नाइट्रीकरण: जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट में बदलते हैं।
- अवशोषण: पौधे मिट्टी से नाइट्रेट ग्रहण करके प्रोटीन बनाते हैं।
- स्थानांतरण: भोजन के माध्यम से नाइट्रोजन पौधों से जंतुओं में पहुँचती है।
- अमोनीकरण: अपघटक मृत जीवों और उत्सर्जी पदार्थों को अमोनिया में बदलते हैं।
- विनाइट्रीकरण: जीवाणु नाइट्रेट को पुनः वायुमंडलीय नाइट्रोजन में बदलते हैं।
यह चक्र न होने पर पौधों को प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल बनाने के लिए उपयोगी नाइट्रोजन नहीं मिलेगी। पौधों की वृद्धि रुकने से खाद्य शृंखलाएँ और जीवन प्रभावित होंगे।
8वनोन्मूलन का पृथ्वी के ऑक्सीजन और कार्बन चक्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है? वनोन्मूलन के अन्य परिणाम क्या हैं?
वनोन्मूलन से प्रकाश संश्लेषण करने वाले वृक्षों की संख्या घटती है। इसलिए वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा ऑक्सीजन का उत्पादन कम हो जाता है। काटे गए पेड़ों को जलाने या उनके अपघटन से संचित कार्बन पुनः CO₂ के रूप में वायुमंडल में पहुँचता है। इससे हरितगृह प्रभाव और वैश्विक तापमान बढ़ते हैं।
वनोन्मूलन के अन्य परिणाम हैं—जैव विविधता और जीवों के आवास का नाश, मृदा अपरदन, भूमि की उर्वरता में कमी, मरुस्थलीकरण, भूजल पुनर्भरण में कमी तथा जल चक्र का असंतुलन। सतही अपवाह बढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
9उपयुक्त चित्र से उस पथ की व्याख्या कीजिए जिससे कार्बन पुनः वायुमंडल में जाता है। इस चित्र का आरंभ आप पादपों द्वारा वायुमंडलीय CO₂ के उपयोग से कर सकते हैं।
पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा वायुमंडलीय CO₂ ग्रहण करके कार्बनिक भोजन बनाते हैं। भोजन के माध्यम से यह कार्बन शाकाहारियों और फिर मांसाहारियों तक पहुँचता है। पौधे, जंतु और सूक्ष्मजीव श्वसन द्वारा इसका कुछ भाग पुनः CO₂ के रूप में वायुमंडल में छोड़ते हैं। मृत जीवों तथा अपशिष्ट पदार्थों का अपघटन भी CO₂ मुक्त करता है। कुछ कार्बन लंबे समय में जीवाश्म ईंधनों में संचित हो जाता है। लकड़ी और जीवाश्म ईंधनों के दहन से यह कार्बन फिर वायुमंडल में पहुँचता है। महासागर भी वायुमंडल से CO₂ का आदान-प्रदान करते हैं।
10वायुमंडल में CO₂ की अधिकता को अवांछनीय क्यों माना जाता है, जबकि पादपों को इसकी आवश्यकता होती है?
पादपों को प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होती है, परंतु वायुमंडल में इसकी अत्यधिक मात्रा पर्यावरण के लिए हानिकारक है। CO₂ एक हरितगृह गैस है, जो पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण को अवशोषित करके वायुमंडल का ताप बढ़ाती है। इसकी अधिकता से वैश्विक ऊष्मण, जलवायु परिवर्तन, हिमनदों का पिघलना, समुद्र-स्तर में वृद्धि और चरम मौसमी घटनाएँ बढ़ सकती हैं। अतिरिक्त CO₂ समुद्री जल में घुलकर महासागरीय अम्लीकरण भी करती है। अतः जीवन के लिए इसकी संतुलित मात्रा आवश्यक है।
11पृथ्वी की सतह से ऊष्मा का क्षय किस प्रकार होता है? इसकी क्या सार्थकता है?
पृथ्वी की सतह अवशोषित सौर ऊर्जा को मुख्यतः लंबी तरंगों वाले अवरक्त विकिरण के रूप में उत्सर्जित करती है। ऊष्मा का स्थानांतरण चालन, संवहन तथा जल के वाष्पीकरण से भी होता है। उत्सर्जित अवरक्त विकिरण का कुछ भाग हरितगृह गैसों द्वारा अवशोषित होकर पुनः पृथ्वी की ओर भेजा जाता है और शेष अंतरिक्ष में चला जाता है।
ऊष्मा का यह क्षय पृथ्वी के ऊर्जा-संतुलन को बनाए रखता है। यदि पृथ्वी ऊष्मा बाहर न छोड़े, तो उसका ताप लगातार बढ़ता जाएगा। यदि सारी ऊष्मा तुरंत अंतरिक्ष में चली जाए, तो पृथ्वी जीवन के लिए अत्यधिक ठंडी हो जाएगी।
12यदि पृथ्वी गोलाकार न होकर एक तश्तरी के समान चपटी होती, तब सौर विकिरण और ताप के पैटर्न किस प्रकार भिन्न होते?
गोलाकार पृथ्वी पर सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा के पास लगभग सीधी और ध्रुवों के पास तिरछी पड़ती हैं। इसलिए विभिन्न अक्षांशों पर सौर ऊर्जा और ताप अलग-अलग होते हैं। यदि पृथ्वी एक सपाट तश्तरी जैसी होती और उसका समतल भाग सूर्य की ओर रहता, तो अधिकांश सतह पर किरणें लगभग समान कोण से पड़तीं। इससे अक्षांशों के अनुसार ताप का वर्तमान अंतर बहुत कम हो जाता। भूमध्यरेखीय और ध्रुवीय जलवायु पट्टियाँ वर्तमान रूप में नहीं बनतीं। किनारों की स्थिति, पृथ्वी के झुकाव और घूर्णन के अनुसार वहाँ फिर भी कुछ असमान ताप उत्पन्न हो सकता था।
13कल्पना कीजिए कि पृथ्वी पर वायुमंडलीय ताप बढ़ जाता है। यह किस प्रकार हिममंडल, जलमंडल और जैवमंडल को प्रभावित करेगा?
वायुमंडलीय ताप बढ़ने पर हिममंडल में हिमनद, हिमचादरें और समुद्री बर्फ तेजी से पिघलेंगी। इससे बर्फ पर निर्भर जीवों के आवास नष्ट होंगे।
जलमंडल में समुद्री जल का तापीय प्रसार और बर्फ का पिघलना समुद्र-स्तर बढ़ाएगा। वाष्पीकरण, वर्षा, महासागरीय धाराओं और जल की उपलब्धता में परिवर्तन होगा। गर्म जल में घुलित ऑक्सीजन घट सकती है।
जैवमंडल में जीवों के आवास, प्रवास, प्रजनन और खाद्य शृंखलाएँ प्रभावित होंगी। कुछ प्रजातियाँ नए क्षेत्रों की ओर जाएँगी, जबकि अनुकूलन न कर पाने वाली प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ेगा।
14व्याख्या कीजिए कि पृथ्वी का वायुमंडल इसका ताप जीवन के लिए उपयुक्त बनाए रखने में किस प्रकार सहायता करता है।
वायुमंडल सूर्य से आने वाली ऊर्जा को पृथ्वी तक पहुँचने देता है, परंतु हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के बड़े भाग को ओजोन परत रोकती है। पृथ्वी की सतह द्वारा उत्सर्जित अवरक्त विकिरण का कुछ भाग जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें अवशोषित कर पुनः सतह की ओर भेजती हैं। इस प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव से पृथ्वी अत्यधिक ठंडी नहीं होती।
वायुमंडलीय परिसंचरण भी ऊष्मा को गर्म क्षेत्रों से ठंडे क्षेत्रों की ओर वितरित करता है। इस प्रकार वायुमंडल दिन-रात के तापांतर को नियंत्रित करता है और पृथ्वी पर तरल जल तथा जीवन के लिए उपयुक्त ताप बनाए रखता है।
15पृथ्वी के विभिन्न मंडलों के मध्य अंतःसंबंधों का वर्णन कीजिए। उदाहरण सहित समझाइए कि ये मंडल किस प्रकार एक सूक्ष्म संतुलन में कार्य करते हैं।
पृथ्वी के वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल, हिममंडल और जैवमंडल के बीच पदार्थ तथा ऊर्जा का निरंतर आदान-प्रदान होता है। पौधे स्थलमंडल से जल और खनिज तथा वायुमंडल से CO₂ लेकर प्रकाश संश्लेषण करते हैं। वे ऑक्सीजन और जलवाष्प वायुमंडल में छोड़ते हैं। वर्षा वायुमंडल से जल को स्थल और जलमंडल तक पहुँचाती है। हिममंडल पृथ्वी के एल्बिडो और समुद्र-स्तर को प्रभावित करता है।
किसी एक मंडल में परिवर्तन अन्य मंडलों को भी प्रभावित करता है। जैसे वनोन्मूलन से CO₂ बढ़ती है, तापवृद्धि होती है, बर्फ पिघलती है और जल चक्र बदलता है। इसलिए सभी मंडल सूक्ष्म संतुलन में मिलकर पृथ्वी पर जीवन बनाए रखते हैं।
प्रश्न-उत्तर
खोज जारी है…
1नए उपकरण वैज्ञानिकों को इस ग्रह का वास्तविक समय में निरीक्षण करने तथा जलवायु, पारितंत्रों और मानवीय गतिविधियों के बीच छिपे हुए संबंधों को उजागर करने में सहायता करते हैं। ये उपकरण बदलते ग्रह के विषय में कौन-सी नई खोजों को उजागर करेंगे और वे भूमंडलीय ऊष्मण एवं जलवायु परिवर्तन को समझने की हमारी क्षमता को कैसे बढ़ाएँगे?
उपग्रह, ड्रोन, स्वचालित मौसम केंद्र, महासागरीय बुआ, सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियाँ पृथ्वी के तापमान, हिमनदों, समुद्र-स्तर, वनों, प्रदूषण और हरितगृह गैसों का वास्तविक समय में निरीक्षण कर सकती हैं। ये उपकरण वैज्ञानिकों को हिम-पिघलन की गति, महासागरीय धाराओं में परिवर्तन, वनोन्मूलन, सूखे और चरम मौसमी घटनाओं के नए पैटर्न खोजने में सहायता करेंगे।
दीर्घकालीन और सटीक आँकड़ों से जलवायु प्रतिरूप अधिक विश्वसनीय बनेंगे। इससे भविष्य के तापमान, वर्षा, बाढ़ और सूखे का बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए प्रभावी नीतियाँ बनाई जा सकेंगी।
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