कक्षा 9 · विज्ञान · Hindi माध्यम · प्रश्न-उत्तर

अध्याय 3: क्रियाशील ऊतक

नीचे अध्याय की गतिविधियाँ, चिंतन प्रश्न, अभ्यास और विद्यार्थी-अनुकूल विस्तृत उत्तर पढ़ें।

अन्वेषणहिंदी माध्यमप्रश्न-उत्तर
कक्षा
9
विषय
विज्ञान
पुस्तक
अन्वेषण
माध्यम
Hindi
अध्याय 3 के संपूर्ण प्रश्न-उत्तर

इस पृष्ठ पर ‘क्रियाशील ऊतक’ अध्याय के चिंतन, सोचिए और बताइए, पूर्णशक्तता, अभ्यास प्रश्न तथा खोज-आधारित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं।

प्रश्न-उत्तर

चिंतन कीजिए

1जैव प्रक्रमों और मानव कल्याण को समझने के लिए कोशिकाओं और ऊतकों का अध्ययन किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर:

कोशिकाएँ जीवन की मूल इकाइयाँ हैं और समान कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं। इनके अध्ययन से हमें वृद्धि, पोषण, श्वसन, परिवहन, गति, नियंत्रण तथा शरीर की मरम्मत जैसे जैव प्रक्रमों को समझने में सहायता मिलती है। ऊतकों की असामान्य वृद्धि से कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। यह ज्ञान रोगों के उपचार, अंग प्रत्यारोपण, ऊतक संवर्धन, नई औषधियों तथा उन्नत फसलों के विकास में भी उपयोगी है।

2पादपों और जंतुओं के ऊतक किस प्रकार भिन्न हैं और क्यों?

उत्तर:

अधिकांश पादप एक स्थान पर स्थिर रहते हैं, इसलिए उनमें सहारे और दृढ़ता के लिए कोशिका भित्ति तथा अनेक मृत ऊतक पाए जाते हैं। उनकी वृद्धि केवल विभज्योतक वाले निश्चित भागों में होती है। जंतु गतिशील होते हैं, इसलिए उनकी कोशिकाएँ अधिक लचीली होती हैं तथा उनमें गति, नियंत्रण और समन्वय के लिए पेशीय और तंत्रिका ऊतक विकसित होते हैं। दोनों की जीवन-शैली, पोषण और वृद्धि के तरीके अलग होने के कारण उनके ऊतक भी भिन्न होते हैं।

3बहुकोशिकीय जीवों में संगठन के विभिन्न स्तरों पर श्रम विभाजन किस प्रकार उनकी संरचना और कार्य से संबंधित है?

उत्तर:

बहुकोशिकीय जीवों में अलग-अलग कोशिकाएँ विशेष कार्यों के अनुकूल संरचना प्राप्त कर लेती हैं। समान कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, विभिन्न ऊतक मिलकर अंग और कई अंग मिलकर अंग तंत्र बनाते हैं। उदाहरण के लिए, पेशीय ऊतक गति कराता है, तंत्रिका ऊतक संदेश पहुँचाता है और हृदय रक्त पंप करता है। इस श्रम विभाजन से प्रत्येक भाग अपना कार्य कुशलता से करता है और पूरे जीव का समन्वित संचालन संभव होता है।

प्रश्न-उत्तर

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 33

1आपने देखा होगा कि नारियल के रेशे के तंतु कठोर और भंगुर होते हैं, जबकि धनिए के पर्णवृंत नरम और लचीले होते हैं। कारण जानने का प्रयास कीजिए।

उत्तर:

नारियल के रेशों में मुख्यतः दृढ़ोतक पाया जाता है। इसकी कोशिकाओं की भित्तियों में लिग्निन जमा होता है, जिससे वे मोटी, कठोर और मजबूत हो जाती हैं। इसकी अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं, इसलिए नारियल के रेशे भंगुर होते हैं। इसके विपरीत धनिए के पर्णवृंत में श्लेषोतक होता है। इसकी सजीव कोशिकाओं के कोनों पर पेक्टिन जमा होता है, जो सहारे के साथ लचीलापन भी देता है।

प्रश्न-उत्तर

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 34

2आपके विचार में मरुस्थल में रहने वाले पादपों की बाह्यत्वचा की बाहरी भित्ति की मोटी उपत्वचा (Cuticle) मरुस्थलीय पादपों के लिए लाभदायक एवं जलमग्न पादपों के लिए हानिकारक क्यों है?

उत्तर:

मरुस्थल में जल की कमी और तापमान अधिक होता है। वहाँ मोटी, मोमी उपत्वचा वाष्पोत्सर्जन को कम करके पौधे से जल की हानि रोकती है। इसलिए यह मरुस्थलीय पौधों के लिए लाभदायक है। जलमग्न पौधों को पानी की कमी नहीं होती और वे अपनी सतह से जल तथा गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। मोटी उपत्वचा इस आदान-प्रदान में बाधा डालेगी, इसलिए जलमग्न पौधों के लिए हानिकारक होगी।

3पादप की जड़ों द्वारा जल अवशोषित होने पर इसे जाइलम के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के विपरीत गति करनी होती है। जाइलम की ‘मृत’ कोशिकाएँ ऊपरी पत्तियों की सजीव कोशिकाओं के साथ मिलकर जल को गतिमान रखने के लिए किस प्रकार कार्य करती हैं?

उत्तर:

जाइलम की मृत वाहिकाएँ और वाहिनिकाएँ लंबी, खोखली तथा एक-दूसरे से जुड़ी नलिकाएँ बनाती हैं। इनमें कोशिकाद्रव्य न होने के कारण जल को ऊपर जाने में कम अवरोध मिलता है। पत्तियों के रंध्रों से वाष्पोत्सर्जन होने पर जाइलम में ऊपर की ओर खिंचाव उत्पन्न होता है। जल अणुओं के बीच संसंजन और जाइलम की भित्तियों से आसंजन के कारण जल का स्तंभ निरंतर बना रहता है और गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर चढ़ता है।

4यदि तने या पत्तियों की बाह्यत्वचा में रंध्र न हों तो आपके विचार में क्या होगा?

उत्तर:

रंध्र न होने पर पौधे में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का उचित गैसीय विनिमय नहीं हो पाएगा। कार्बन डाइऑक्साइड की कमी से प्रकाश-संश्लेषण और भोजन निर्माण प्रभावित होगा। वाष्पोत्सर्जन बहुत कम हो जाएगा, जिससे जड़ों से जल और खनिजों के ऊपर जाने वाला वाष्पोत्सर्जन खिंचाव कमजोर पड़ेगा। पौधे के तापमान का नियंत्रण और कुछ अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन भी प्रभावित होगा। परिणामस्वरूप पौधे की वृद्धि और जीवित रहने की क्षमता कम हो जाएगी।

प्रश्न-उत्तर

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 40

5नीचे दिया गया चित्र (चित्र 3.17) देखिए। भारत के शास्त्रीय और लोक नृत्यों की विभिन्न मुद्राओं का ध्यानपूर्वक अवलोकन कीजिए। क्या आप पहचान सकते हैं कि इन मुद्राओं में कौन-सी संधियाँ सम्मिलित हैं? साथ ही प्रत्येक संधि से किस प्रकार की गति संभव होती है?

उत्तर:

नृत्य मुद्राओं में कंधे और कूल्हे की कंदुक-खल्लिका संधियाँ हाथ-पैरों को आगे, पीछे, बगल और गोलाकार दिशा में घुमाती हैं। कोहनी और घुटने की कोर संधियाँ हाथ-पैरों को मोड़ने तथा सीधा करने में सहायता करती हैं। गर्दन की धुराग्र संधि सिर को दाएँ-बाएँ घुमाने और ऊपर-नीचे करने देती है। कलाई, अँगुलियों, टखनों और पैर की अँगुलियों की चल संधियाँ सुंदर हस्त-मुद्राएँ, संतुलन और लयबद्ध गति संभव बनाती हैं।

प्रश्न-उत्तर

एक कोशिका से पूर्ण जीव तक — पूर्णशक्तता

तालिका 3.6 पर आधारित उत्तर

(क)गाजर की फ्लोएम कोशिकाओं की विशेषताओं के संबंध में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

उत्तर:

प्रश्न (क). गाजर की फ्लोएम कोशिकाओं की विशेषताओं के संबंध में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

उत्तर: गाजर की फ्लोएम कोशिकाएँ सजीव होती हैं और उचित परिस्थितियाँ मिलने पर पुनः विभाजन की क्षमता प्राप्त कर सकती हैं। वे पहले निर्विभेदित होकर अविशेषीकृत कोशिकाओं का समूह बनाती हैं। बाद में पोषक तत्वों और वृद्धि हार्मोनों की उपस्थिति में ये पुनःविभेदित होकर जड़, प्ररोह और अंततः पूर्ण पौधा बना सकती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि गाजर की कुछ परिपक्व फ्लोएम कोशिकाएँ पूर्णशक्त या टोटीपोटेंट होती हैं।

(ख)तीनों में से किन संयोजनों में आपको सबसे अधिक और सबसे कम जैव मात्रा (Biomass) प्राप्त होगी? इस अवलोकन के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

उत्तर:

प्रश्न (ख). तीनों में से किन संयोजनों में आपको सबसे अधिक और सबसे कम जैव मात्रा (Biomass) प्राप्त होगी? इस अवलोकन के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

उत्तर: तालिका के अनुसार प्रकाश, वायु और पोषक तत्वों वाले तरल माध्यम के दूसरे संयोजन में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई, इसलिए इसमें सबसे अधिक जैव मात्रा मिलेगी। पहले और तीसरे संयोजन में भार कम हुआ, इसलिए इनमें कम जैव मात्रा प्राप्त होगी। पहले संयोजन में वायु का अभाव और ठोस माध्यम कोशिकीय श्वसन तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता को सीमित कर सकते हैं। तीसरे संयोजन में किसी अन्य आवश्यक कारक की कमी या प्रतिकूल दशा रही होगी।

नोट: पुस्तक में दूसरे और तीसरे संयोजन की लिखी परिस्थितियाँ समान हैं, लेकिन परिणाम अलग दिए गए हैं। इसलिए तीसरे संयोजन में कोई कारक छूट गया या मुद्रण संबंधी त्रुटि हुई प्रतीत होती है। दिए गए आँकड़ों से पहले और तीसरे में से ठीक-ठीक न्यूनतम जैव मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती।

(ग)क्या गाजर की कोशिकाओं के स्थान पर जंतु कोशिकाओं को संवर्धित करने पर समान परिणाम प्राप्त होंगे?

उत्तर:

प्रश्न (ग). क्या गाजर की कोशिकाओं के स्थान पर जंतु कोशिकाओं को संवर्धित करने पर समान परिणाम प्राप्त होंगे?

उत्तर: नहीं, सामान्यतः समान परिणाम प्राप्त नहीं होंगे। अनेक पादप कोशिकाएँ पूर्णशक्त होती हैं और उचित पोषक माध्यम तथा हार्मोन मिलने पर संपूर्ण पौधा बना सकती हैं। अधिकांश परिपक्व जंतु कोशिकाएँ इस प्रकार पूर्णशक्त नहीं होतीं। वे विशेष माध्यम में कुछ समय तक बढ़ या विभाजित हो सकती हैं, लेकिन सामान्यतः अकेली जंतु कोशिका से पूरा जंतु विकसित नहीं होता। जंतु कोशिका संवर्धन के लिए अधिक जटिल और नियंत्रित परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।

(घ)उपर्युक्त अध्ययन के किन्हीं दो व्यावसायिक अनुप्रयोगों के विषय में सोचिए और बताइए।

उत्तर:

प्रश्न (घ). उपर्युक्त अध्ययन के किन्हीं दो व्यावसायिक अनुप्रयोगों के विषय में सोचिए और बताइए।

उत्तर: इस अध्ययन के दो प्रमुख व्यावसायिक अनुप्रयोग हैं:

  1. तीव्र पौध उत्पादन: ऊतक संवर्धन द्वारा कम समय में एक उपयोगी पौधे से बड़ी संख्या में समान पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इसका उपयोग केला, आलू और सजावटी पौधों के उत्पादन में किया जाता है।
  2. रोगमुक्त और उन्नत पौधे: प्रयोगशाला में रोगमुक्त पौधे तथा अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और रोग-प्रतिरोध जैसी वांछित विशेषताओं वाली फसलें विकसित की जा सकती हैं।

प्रश्न-उत्तर

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

1विभज्योतकी ऊतक बार-बार विभाजित होते हैं। इनकी कोशिकाओं की कौन-सी विशेषताएँ इनके लिए ऐसा करना संभव बनाती हैं?

उत्तर:

(i) इनमें सुरक्षा के लिए मोटी भित्तियाँ होती हैं। (ii) इनमें पोषक तत्त्वों को संग्रहित करने वाली बड़ी रसधानियाँ होती हैं। (iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा एवं स्पष्ट केंद्रक होता है। (iv) वे कार्यात्मक रूप से विभेदित कोशिकाएँ हैं।

उत्तर: सही विकल्प — (iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा एवं स्पष्ट केंद्रक होता है।

व्याख्या: विभज्योतकी कोशिकाएँ छोटी, सक्रिय और अविभेदित होती हैं। उनकी पतली भित्तियाँ कोशिका-विभाजन को आसान बनाती हैं। सघन कोशिकाद्रव्य तथा बड़ा और स्पष्ट केंद्रक कोशिकीय गतिविधियों को तीव्र बनाए रखते हैं। इनमें बड़ी रसधानियाँ नहीं होतीं, क्योंकि इनका प्रमुख कार्य भंडारण नहीं बल्कि लगातार नई कोशिकाओं का निर्माण करना है।

2यदि कोई पादप पत्तियों से जड़ों तक भोजन परिवहन करने में असमर्थ है, तो ऐसा किस ऊतक की असामान्य प्रणाली के कारण होता है?

उत्तर:

(i) जाइलम (ii) फ्लोएम (iii) बाह्यत्वचा (iv) दृढ़ोतक

उत्तर: सही विकल्प — (ii) फ्लोएम

व्याख्या: फ्लोएम पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा निर्मित भोजन को जड़ों, तनों, फलों और पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है। इसलिए पत्तियों से जड़ों तक भोजन न पहुँच पाने का कारण फ्लोएम की असामान्य या क्षतिग्रस्त प्रणाली होगी। जाइलम का मुख्य कार्य जड़ों से जल और खनिजों का परिवहन करना है।

3जंतुओं के आंतरिक अंगों को आस्तरित करने वाले उपकला ऊतक प्रायः केवल एक या कुछ कोशिकाओं की मोटाई के क्यों होते हैं?

उत्तर:

(i) भोजन को प्रभावी रूप से संग्रहित करने के लिए (ii) अधिकतम दृढ़ता प्रदान करने के लिए (iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए (iv) घर्षण कम करने के लिए

उत्तर: सही विकल्प — (iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए।

व्याख्या: फेफड़ों, रक्त वाहिकाओं और आँतों जैसे अंगों में पदार्थों का शीघ्र विसरण, अवशोषण या विनिमय आवश्यक होता है। उपकला ऊतक की पतली परत गैसों, पोषक तत्त्वों और अन्य पदार्थों को कम दूरी तय करके तेजी से आर-पार जाने देती है। मोटी परत होने पर पदार्थों के आदान-प्रदान की गति धीमी हो जाती।

4आप चित्र में दिखाए गए अनुसार दो प्रकार से कूद सकते हैं—

उत्तर:
  • टाँग सीधी रखकर कूदना—घुटनों और टखनों को सीधा रखिए।
  • सामान्य रूप से कूदना—घुटनों और टखनों को स्वाभाविक रूप से मोड़िए।

दोनों बार कूदने में आपके टखने, घुटने और कूल्हे की स्थिति किस प्रकार भिन्न थी?

उत्तर: टाँग सीधी रखकर कूदने पर टखने, घुटने और कूल्हे लगभग सीधे रहते हैं। इसलिए पेशियाँ पर्याप्त बल उत्पन्न नहीं कर पातीं और शरीर को ऊपर उठाना तथा उतरते समय झटका सहना कठिन होता है। सामान्य रूप से कूदते समय टखने, घुटने और कूल्हे पहले मुड़ते और फिर तेजी से सीधे होते हैं। इससे अधिक बल उत्पन्न होता है, ऊँची छलाँग लगती है और उतरते समय संधियाँ झटके को अवशोषित करती हैं।

5जब आप अपने घुटने और टखने मोड़ते हैं, तो किस प्रकार की संधि का उपयोग होता है?

उत्तर:

(i) कंदुक-खल्लिका (ii) कोर (iii) धुराग्र

उत्तर: सही विकल्प — (ii) कोर संधि

व्याख्या: कोर संधि दरवाजे के कब्जे की तरह मुख्यतः एक तल में गति करती है। यह शरीर के भाग को मोड़ने और सीधा करने देती है। घुटना और टखना मुख्यतः इसी प्रकार की गति करते हैं। कंदुक-खल्लिका संधि कई दिशाओं में, जबकि धुराग्र संधि घूर्णन गति की अनुमति देती है।

6अभिकथन–कारण

उत्तर:

विकल्प

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है। (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, किंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है। (iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है। (iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।

I. अभिकथन—उपकला फेफड़ों में गैस विनिमय के लिए अधिक उपयुक्त है।

कारण— इसमें लंबी कोशिकाओं की अनेक परतें होती हैं, जो विसरण की गति को धीमा कर देती हैं।

उत्तर: सही विकल्प — (iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।

व्याख्या: फेफड़ों की वायुकोषिकाओं में पतली और चपटी उपकला कोशिकाओं की केवल एक परत होती है। इससे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का तेजी से विसरण हो पाता है। लंबी कोशिकाओं की अनेक परतें विसरण को धीमा कर देंगी, इसलिए दिया गया कारण असत्य है।

II. अभिकथन—हृद पेशी बिना थके निरंतर संकुचन कर सकती है।

कारण— हृद पेशी कोशिकाओं में अधिक संख्या में माइटोकॉन्ड्रिया और प्रचुर मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है।

उत्तर: सही विकल्प — (i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं तथा कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या: हृद पेशियाँ जीवनभर लयबद्ध रूप से संकुचित होती रहती हैं। उनमें अधिक माइटोकॉन्ड्रिया होने से लगातार ऊर्जा प्राप्त होती है। प्रचुर रक्त आपूर्ति से उन्हें ऑक्सीजन और पोषक पदार्थ मिलते रहते हैं। इसलिए वे सामान्य परिस्थितियों में बिना थके लगातार कार्य कर सकती हैं।

III. अभिकथन—कंडराएँ एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ती हैं और संधि की गति को संभव बनाती हैं।

कारण— कंडराएँ सुदृढ़ संयोजी ऊतक से बनी होती हैं, जो पेशी से अस्थि तक बल का संचरण करती हैं।

उत्तर: सही विकल्प — (iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।

व्याख्या: कंडराएँ पेशियों को अस्थियों से जोड़ती हैं, न कि एक अस्थि को दूसरी अस्थि से। अस्थि को अस्थि से जोड़ने का कार्य स्नायु करते हैं। कारण सत्य है, क्योंकि कंडराएँ पेशी के संकुचन से उत्पन्न बल को अस्थि तक पहुँचाकर उसकी गति संभव बनाती हैं।

IV. अभिकथन—कोर संधि में गति मुख्यतः एक तल में होती है।

कारण— अस्थियों के सिरे सभी दिशाओं में सर्पी गति करने हेतु आकारित होते हैं।

उत्तर: सही विकल्प — (iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।

व्याख्या: कोर संधि में गति मुख्यतः एक ही तल में होती है, जैसे कोहनी और घुटने का मुड़ना तथा सीधा होना। इसकी अस्थियों के सिरे सभी दिशाओं में सर्पी गति के लिए नहीं, बल्कि एक निश्चित दिशा में नियंत्रित गति के लिए बने होते हैं।

7ग्राफ संबंधी प्रश्न

उत्तर:

तालिका 3.7 के आँकड़ों का प्रयोग करके X-अक्ष पर वृक्ष की आयु तथा Y-अक्ष पर वृक्ष का व्यास और वार्षिक वलयों की संख्या दर्शाइए।

ग्राफ बनाने के निर्देश

  • X-अक्ष: सागवान के वृक्ष की आयु (वर्ष)
  • Y-अक्ष: वृक्ष का व्यास (cm) और वार्षिक वलयों की संख्या
  • दोनों आँकड़ा-समूहों के लिए अलग-अलग रंग या रेखाओं का प्रयोग कीजिए।

वृक्ष के व्यास के निर्देशांक

(5, 4), (10, 8), (20, 24), (25, 28), (30, 32), (40, 40)

वार्षिक वलयों के निर्देशांक

(5, 5), (10, 10), (20, 20), (25, 25), (30, 30), (40, 40)

सागवान के वृक्ष की आयु, व्यास और वार्षिक वलयों का ग्राफ

(i) समय के साथ तने के व्यास के संदर्भ में ग्राफ का विश्लेषण कीजिए और अपने निष्कर्ष साझा कीजिए।

उत्तर: ग्राफ से स्पष्ट है कि वृक्ष की आयु बढ़ने के साथ तने का व्यास भी बढ़ता है। पाँच वर्ष की आयु में व्यास 4 cm था, जो 40 वर्ष की आयु में बढ़कर 40 cm हो गया। फिर भी व्यास की वृद्धि प्रत्येक अवधि में समान नहीं रही। 10 से 20 वर्ष के बीच वृद्धि अधिक तेज थी। इससे पता चलता है कि वृक्ष की मोटाई आयु के साथ बढ़ती है, लेकिन वृद्धि-दर पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

(ii) सागवान के वृक्ष के व्यास और निर्मित वार्षिक वलयों के बीच क्या संबंध है?

उत्तर: वार्षिक वलयों की संख्या वृक्ष की आयु के बराबर है, क्योंकि सामान्यतः प्रत्येक वर्ष एक नया वृद्धि वलय बनता है। वलयों की संख्या बढ़ने के साथ तने का व्यास भी बढ़ता है। अतः दोनों में सकारात्मक संबंध है। लेकिन व्यास और वलयों की संख्या हमेशा समान अनुपात में नहीं बढ़ते, क्योंकि प्रत्येक वलय की चौड़ाई वर्षा, तापमान, पोषण और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।

(iii) तने की परिधि में वृद्धि के लिए कौन-सा विशेषीकृत ऊतक उत्तरदायी है और यह कहाँ स्थित होता है?

उत्तर: तने की परिधि या मोटाई में वृद्धि के लिए पार्श्व विभज्योतक उत्तरदायी होता है। यह तने और जड़ की पार्श्व सतह के अनुदिश वलय के रूप में स्थित होता है। संवहन एधा जाइलम और फ्लोएम के बीच पाया जाता है। इसकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजित होकर अंदर और बाहर की ओर नई कोशिकाएँ बनाती हैं, जिससे तने का व्यास बढ़ता है और वार्षिक वृद्धि वलय बनते हैं।

8हाथी द्वारा वृक्ष की छाल उखाड़ना

उत्तर:

एक वन में देखा गया कि एक हाथी ने अपनी भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए एक वृक्ष की छाल को बुरी तरह उखाड़ दिया, क्योंकि छाल पोषक तत्त्वों का समृद्ध स्रोत होती है।

(i) छाल उखड़ने से वृक्ष का/के कौन-सा/से कार्य बाधित होता/होते हैं?

उत्तर: छाल वृक्ष के अंदरूनी ऊतकों को यांत्रिक क्षति, जल की हानि, अत्यधिक तापमान, परजीवियों और रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों से बचाती है। छाल उखड़ने पर यह सुरक्षात्मक कार्य बाधित हो जाता है। क्षतिग्रस्त स्थान से अधिक जल निकल सकता है तथा कवक, जीवाणु और कीट आसानी से तने के भीतर प्रवेश कर सकते हैं। इससे वृक्ष के सूखने या संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है।

(ii) छाल उखड़ने के बाद वृक्ष के तने को और क्षति होने पर पादप का कौन-सा ऊतक प्रभावित होगा?

उत्तर: छाल के नीचे स्थित फ्लोएम ऊतक प्रभावित होगा। फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को जड़ों, तने और अन्य भागों तक पहुँचाता है। यदि क्षति और अधिक गहरी हो जाए, तो पार्श्व विभज्योतक अर्थात संवहन एधा भी प्रभावित हो सकता है, जिससे तने की मोटाई में वृद्धि और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत बाधित होगी।

(iii) यदि छाल के नीचे के ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएँ, तो वृक्ष का कौन-सा कार्य बाधित होगा?

उत्तर: छाल के नीचे स्थित फ्लोएम के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर पत्तियों में बना भोजन जड़ों और अन्य भागों तक नहीं पहुँच पाएगा। इससे जड़ों को ऊर्जा और पोषण मिलना बंद हो सकता है। यदि क्षति और गहरी होकर जाइलम तक पहुँच जाए, तो जड़ों से पत्तियों तक जल और खनिजों का परिवहन भी बाधित हो जाएगा। परिणामस्वरूप वृक्ष कमजोर होकर सूख सकता है।

(iv) उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं? यदि आपके पूर्वानुमानों में परिवर्तन हो, तो उत्तर में क्या अंतर आएगा?

उत्तर: हमने यह पूर्वानुमान लगाया है कि केवल बाहरी छाल हटने पर सुरक्षा प्रभावित होगी और गहरी क्षति होने पर फ्लोएम भी नष्ट होगा। यदि क्षति केवल ऊपरी सतह तक सीमित हो, तो भोजन का परिवहन चलता रहेगा और वृक्ष घाव की मरम्मत कर सकता है। यदि क्षति पूरे तने के चारों ओर फ्लोएम या जाइलम तक पहुँच जाए, तो क्रमशः भोजन अथवा जल का परिवहन रुक सकता है और वृक्ष की मृत्यु भी हो सकती है।

9आम्रपाली ने देखा कि आम के एक नवोद्भिद पौधे का तना मानसून की हवाओं में लचीला होकर मुड़ जाता है, किंतु टूटता नहीं। इस लचीलेपन के लिए कौन-सा ऊतक उत्तरदायी है? यदि विद्यमान ऊतक को दृढ़ोतक से प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर:

आम के युवा तने के लचीलेपन के लिए श्लेषोतक उत्तरदायी होता है। इसकी सजीव कोशिकाओं के कोनों पर पेक्टिन जमा होने से यह सहारे के साथ लचीलापन प्रदान करता है। यदि इसे दृढ़ोतक से बदल दिया जाए, तो लिग्निनयुक्त मोटी भित्तियों के कारण तना अधिक कठोर और दृढ़ हो जाएगा। वह हवा में आसानी से नहीं मुड़ेगा और तेज हवा का दबाव पड़ने पर लचीला रहने के स्थान पर टूट सकता है।

10गन्ने की कलमों द्वारा पुनरुद्भवन

उत्तर:

सोहन ने गन्ना उगाने के लिए दो प्रकार की कलम—‘क’ और ‘ख’—का प्रयोग किया। कुछ सप्ताह बाद प्रकार ‘ख’ में अंकुर निकले, लेकिन प्रकार ‘क’ में अंकुरण नहीं हुआ।

(i) प्रकार ‘ख’ की कलम ने गन्ने के रूप में क्यों वृद्धि की, किंतु प्रकार ‘क’ ने क्यों नहीं की?

उत्तर: प्रकार ‘ख’ की कलम में पर्वसंधि और एक जीवित कली उपस्थित थी। पर्वसंधि के पास स्थित विभज्योतकी कोशिकाएँ सक्रिय रूप से विभाजित हुईं और कली से नया प्ररोह विकसित हुआ। प्रकार ‘क’ की कलम केवल पर्व के बीच का भाग थी तथा उसमें पर्वसंधि और जीवित कली नहीं थी। इसलिए उसमें नई कोशिकाओं और प्ररोह का पर्याप्त निर्माण नहीं हुआ तथा वह अंकुरित नहीं हो सकी।

(ii) प्रकार ‘ख’ में प्रकार ‘क’ की तुलना में क्या अंतर था?

उत्तर: प्रकार ‘ख’ की कलम में कम-से-कम एक पर्वसंधि, जीवित कली और उसके पास सक्रिय विभज्योतकी ऊतक उपस्थित था। प्रकार ‘क’ में पर्वसंधि और कली अनुपस्थित थी। इस प्रकार प्रयोग में परिवर्तित किया गया मुख्य कारक कलम में पर्वसंधि तथा कली की उपस्थिति या अनुपस्थिति था।

(iii) इस परिवर्तन के प्रभाव का निर्धारण करने के लिए कौन-सा प्रेक्षण अथवा मापन किया गया?

उत्तर: परिवर्तन का प्रभाव जानने के लिए दोनों प्रकार की कलमों में अंकुर निकलने या न निकलने का अवलोकन किया गया। अंकुरित कलमों की संख्या, अंकुरण में लगा समय, बने हुए अंकुरों की संख्या और उनकी लंबाई भी मापी जा सकती है। दिए गए प्रयोग में प्रमुख परिणाम यह था कि प्रकार ‘ख’ में अंकुर निकले, जबकि प्रकार ‘क’ में अंकुरण नहीं हुआ।

(iv) उचित तुलना सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रकार की कलमों में कौन-से मानदंड समान रखने चाहिए?

उत्तर: दोनों कलमों को एक ही किस्म और लगभग समान आयु के गन्ने से लेना चाहिए। उनकी लंबाई, मोटाई और स्वास्थ्य लगभग समान होने चाहिए। दोनों को समान मिट्टी, गहराई, पानी, प्रकाश, तापमान, खाद और समय देना चाहिए। केवल पर्वसंधि तथा कली की उपस्थिति को अलग रखना चाहिए। इससे स्पष्ट होगा कि अंकुरण में अंतर इसी कारक के कारण आया है।

11रोहन कहता है—“ऊतक समान कोशिकाओं का समूह है जो समान कार्य करता है”, किंतु राजीव कहता है—“यह सरल ऊतकों की स्थिति में सत्य है, लेकिन जटिल ऊतकों की स्थिति में थोड़ा भिन्न है।” अपना स्पष्टीकरण दीजिए।

उत्तर:

राजीव का कथन अधिक स्पष्ट है। सरल ऊतक एक ही प्रकार की समान कोशिकाओं से बने होते हैं, जैसे मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक। इसके विपरीत जटिल ऊतक विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, लेकिन सभी कोशिकाएँ मिलकर एक सामान्य कार्य करती हैं। उदाहरण के लिए, जाइलम में वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ, जाइलम मृदूतक और तंतु होते हैं, जो मिलकर जल-खनिज परिवहन और सहारा देने का कार्य करते हैं।

12नारियल के कठोर और रेशेदार तंतुओं का उपयोग चटाई बनाने के लिए किया जाता है। कौन-से ऊतक में यह दृढ़ता प्रदान करने के लिए उपयुक्त संरचनात्मक विशेषताएँ होती हैं? स्पष्ट कीजिए कि सजीव मृदूतक से इस उद्देश्य की पूर्ति क्यों नहीं हो सकती है।

उत्तर:

नारियल के रेशों में दृढ़ोतक पाया जाता है। इसकी लंबी कोशिकाओं की भित्तियाँ बहुत मोटी और लिग्निनयुक्त होती हैं। परिपक्व अवस्था में अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं, जिससे रेशे कठोर, मजबूत और खिंचाव सहने योग्य बनते हैं। इसलिए वे चटाई बनाने के लिए उपयुक्त हैं। मृदूतक की सजीव कोशिकाओं की भित्तियाँ पतली होती हैं और उनके बीच अंतराकोशिकीय स्थान होते हैं। अतः वे मुलायम होती हैं और पर्याप्त यांत्रिक दृढ़ता नहीं दे सकतीं।

13विभा अपनी सहेली नेहा से कहती है—“विभज्योतकी कोशिकाएँ केवल जड़ और प्ररोह के अग्रभाग पर स्थित होती हैं।” आप इस कथन के विषय में क्या सोचते हैं? यदि कथन असत्य है, तो नेहा विभा से कौन-सा प्रश्न पूछ सकती है जिससे वह इसे भली-भाँति समझ सके?

उत्तर:

विभा का कथन असत्य है। जड़ और प्ररोह के अग्रभाग पर शीर्षस्थ विभज्योतक होता है, लेकिन विभज्योतक कोशिकाएँ अन्य स्थानों पर भी पाई जाती हैं। पार्श्व विभज्योतक तने और जड़ की मोटाई बढ़ाता है, जबकि अंतर्वेशी विभज्योतक पर्वसंधि या पर्व के आधार पर पाया जाता है। नेहा पूछ सकती है—“यदि विभज्योतक केवल अग्रभाग पर होता है, तो तना मोटा कैसे होता है और काटने के बाद घास फिर से कैसे उगती है?”

14एक पादप कोशिका और एक जंतु कोशिका का आमाप समान है।

उत्तर:

(i) किस कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बड़ी होगी? कारण बताइए।

उत्तर: सामान्यतः पादप कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बड़ी होगी। परिपक्व पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है, जिसमें जल, लवण, शर्करा और अपशिष्ट पदार्थ संचित रहते हैं। यह कोशिका में स्फीति दाब बनाए रखकर पौधे को दृढ़ता और सहारा भी देती है। जंतु कोशिका में रसधानियाँ सामान्यतः छोटी, अस्थायी और कम संख्या में होती हैं, क्योंकि जंतुओं को इसी प्रकार के स्फीति-दाब आधारित सहारे की आवश्यकता नहीं होती।

(ii) उपर्युक्त प्रश्न का उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं?

उत्तर: हमने यह पूर्वानुमान लगाया है कि तुलना एक सामान्य, परिपक्व और जलयुक्त पादप कोशिका तथा सामान्य जंतु कोशिका के बीच की जा रही है। पादप कोशिका विभज्योतकी या अत्यधिक युवा नहीं है, क्योंकि ऐसी कोशिकाओं में रसधानी छोटी या अनुपस्थित हो सकती है। हमने यह भी माना है कि दोनों कोशिकाएँ सामान्य शारीरिक परिस्थितियों में हैं और किसी विशेष प्रकार की कोशिका नहीं हैं।

15एक पाठ्यपुस्तक में कहा गया है—“प्रत्येक पादप ऊतक केवल एक विशिष्ट कार्य करता है।” इस कथन की सत्यता की विवेचनात्मक जाँच करने के लिए आप कौन-से प्रश्न पूछेंगे? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए आप किन ऊतकों के उदाहरण लेंगे?

उत्तर:

इस कथन की जाँच के लिए निम्नलिखित प्रश्न पूछे जा सकते हैं:

  1. क्या मृदूतक केवल भोजन संग्रह करता है या प्रकाश-संश्लेषण और तैरने में भी सहायता करता है?
  2. क्या जाइलम केवल जल पहुँचाता है या पौधे को यांत्रिक सहारा भी देता है?
  3. क्या बाह्यत्वचा केवल सुरक्षा करती है या मूल रोम द्वारा अवशोषण तथा रंध्रों द्वारा गैसीय विनिमय भी करती है?
  4. क्या फ्लोएम केवल भोजन पहुँचाता है या पदार्थों का भंडारण और पौधे को दृढ़ता भी देता है?

इनके लिए मृदूतक, जाइलम, फ्लोएम और बाह्यत्वचा के उदाहरण लिए जा सकते हैं। इससे निष्कर्ष निकलता है कि कथन पूर्णतः सत्य नहीं है। कई पादप ऊतक एक से अधिक संबंधित कार्य करते हैं।

प्रश्न-उत्तर

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1क्या पादपों की भाँति जंतु कोशिका से एक पूर्ण जंतु प्राप्त करना संभव होगा? यदि हाँ, तो इस विकास के क्या लाभ और चुनौतियाँ होंगी?

उत्तर:

प्रश्न. क्या पादपों की भाँति जंतु कोशिका से एक पूर्ण जंतु प्राप्त करना संभव होगा? यदि हाँ, तो इस विकास के क्या लाभ और चुनौतियाँ होंगी?

उत्तर: विशेष परिस्थितियों में जंतु कोशिका की आनुवंशिक सामग्री से पूर्ण जंतु प्राप्त करना संभव है। दैहिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण नामक क्लोनिंग तकनीक में किसी दैहिक कोशिका के केंद्रक को केंद्रक-विहीन अंड कोशिका में स्थापित किया जाता है। विकसित भ्रूण को उपयुक्त मादा के गर्भाशय में रखकर क्लोन जंतु प्राप्त किया जा सकता है। डॉली भेड़ इसका प्रसिद्ध उदाहरण थी। फिर भी सामान्य जंतु कोशिका को केवल पोषक माध्यम में रखकर सीधे पूरा जंतु नहीं बनाया जा सकता।

संभावित लाभ

  • संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण में सहायता
  • उपयोगी गुणों वाले पशुओं का उत्पादन
  • आनुवंशिक और रोग संबंधी अनुसंधान
  • नई औषधियों एवं उपचारों का परीक्षण
  • क्षतिग्रस्त ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायता

प्रमुख चुनौतियाँ

  • सफलता की दर कम होना
  • भ्रूण के असामान्य विकास का खतरा
  • पशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी समस्याएँ
  • अत्यधिक लागत और जटिल तकनीक
  • आनुवंशिक विविधता में कमी
  • क्लोनिंग से जुड़े सामाजिक और नैतिक प्रश्न

अतः यह वैज्ञानिक रूप से कुछ परिस्थितियों में संभव है, लेकिन इसके उपयोग से पहले सुरक्षा, पशु-कल्याण और नैतिक पहलुओं पर गंभीर विचार आवश्यक है।

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