दिए गए अध्याय के चिंतन, गतिविधि और अभ्यास प्रश्नों के क्रमबद्ध उत्तर नीचे दिए गए हैं।
प्रश्न-उत्तर
चिंतन कीजिए
1कोशिका कहाँ से आती है?
नई कोशिकाएँ पहले से उपस्थित कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं। इस विचार को रुडोल्फ विरचो ने कोशिका सिद्धांत में सम्मिलित किया था। बहुकोशिकीय जीवों में कोशिका विभाजन से शरीर की वृद्धि होती है तथा पुरानी, मृत या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का स्थान नई कोशिकाएँ लेती हैं। एककोशिकीय जीवों में एक कोशिका का विभाजन नए जीव के निर्माण का कारण बन सकता है।
2नग्न आँखों से परे संसार को समझने के लिए तकनीकी प्रयोगों ने नए ज्ञान के सृजन में किस प्रकार सहायता की है?
सूक्ष्मदर्शी जैसी तकनीकों ने वैज्ञानिकों को नग्न आँखों से न दिखाई देने वाली कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों को देखने में सहायता की। प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से कोशिका का सामान्य आकार और संरचना देखी गई, जबकि इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से राइबोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया तथा कोशिका झिल्ली जैसी अत्यंत सूक्ष्म संरचनाओं का अध्ययन संभव हुआ। अभिरंजन तकनीकों और प्रयोगों ने कोशिका विभाजन तथा कोशिकांगों के कार्यों के विषय में नया ज्ञान दिया।
3कोशिका जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई किस प्रकार है?
सभी सजीव एक या अनेक कोशिकाओं से बने होते हैं। समान कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं, ऊतक मिलकर अंग तथा अंग मिलकर अंग-तंत्र बनाते हैं। इसलिए कोशिका शरीर के निर्माण की सबसे छोटी इकाई है। पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि और जनन जैसी आवश्यक जैविक क्रियाएँ कोशिकाओं में ही होती हैं। इसलिए कोशिका जीवन की संरचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई कहलाती है।
4कोशिका किस प्रकार गुणन करती है?
कोशिका अपने आकार में वृद्धि करने के बाद कोशिका विभाजन द्वारा गुणन करती है। समसूत्री विभाजन में एक जनक कोशिका से आनुवंशिक रूप से समान दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। यह शरीर की वृद्धि, मरम्मत और पुरानी कोशिकाओं के प्रतिस्थापन में सहायक है। अर्धसूत्री विभाजन में एक जनक कोशिका से चार संतति कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है। इससे युग्मक बनते हैं।
क्या होगा यदि… — पृष्ठ 12
5मूँग के बीजों को 12 घंटे तक जल में भिगोने के पश्चात एक सांद्र विलयन में रखा जाए, बताइए इनमें क्या परिवर्तन होगा?
जल में 12 घंटे तक भिगोने पर मूँग के बीज जल अवशोषित करके फूल जाते हैं। जब इन्हें नमक या चीनी के सांद्र विलयन में रखा जाएगा, तो बीजों की कोशिकाओं के भीतर का जल परासरण द्वारा बाहर निकलने लगेगा। इससे बीज सिकुड़ सकते हैं, उनका भार कम हो सकता है और वे कम कठोर दिखाई देंगे। अधिक समय तक सांद्र विलयन में रहने से उनके अंकुरण की प्रक्रिया भी धीमी या बाधित हो सकती है।
सोचिए और बताइए — पृष्ठ 14
1एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करने वाले जंतुओं की अपेक्षा एक स्थान पर स्थिर रहने वाले पादपों में कोशिका भित्ति की आवश्यकता के संबंध में आप क्या तर्क देंगे?
पादप एक स्थान पर स्थिर रहते हैं और उन्हें हवा, वर्षा, गुरुत्व तथा अन्य बाहरी दबावों को सहन करना पड़ता है। इसलिए उनकी कोशिकाओं को कठोर कोशिका भित्ति की आवश्यकता होती है। कोशिका भित्ति पौधों को संरचनात्मक सहायता देती है, उनका आकार बनाए रखती है और उन्हें सीधा खड़ा रहने में सहायता करती है। जंतुओं को गति के लिए लचीली कोशिकाओं की आवश्यकता होती है, इसलिए उनकी कोशिकाओं में कठोर कोशिका भित्ति नहीं होती।
2यदि किसी पादप कोशिका की कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली के समान लचीली हो जाए तो आप किन परिणामों का पूर्वानुमान लगाएँगे?
यदि पादप कोशिका की कोशिका भित्ति लचीली हो जाए, तो कोशिका अपना निश्चित आकार और दृढ़ता खो देगी। कोशिका के भीतर जल प्रवेश करने पर उत्पन्न दबाव को वह सहन नहीं कर पाएगी और अधिक जल आने पर फट भी सकती है। पौधे के ऊतक कमजोर हो जाएँगे, तना और पत्तियाँ सीधे नहीं रह पाएँगे तथा पौधा आसानी से झुक या मुरझा सकता है। बाहरी आघातों से कोशिका की सुरक्षा भी कम हो जाएगी।
3दो आलू के टुकड़ों को लगभग समान आकार में काटकर उन्हें विभिन्न तरल पदार्थों में रखने से पूर्व उनके आरंभिक भार का मापन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
आलू के टुकड़ों का आरंभिक भार जानने से प्रयोग के बाद हुए भार परिवर्तन की सही गणना की जा सकती है। इससे पता चलता है कि किसी विलयन में आलू ने जल अवशोषित किया है या जल खोया है। समान आकार और ज्ञात आरंभिक भार वाले टुकड़ों के प्रयोग से दोनों विलयनों के प्रभाव की निष्पक्ष तुलना होती है। आरंभिक भार मापे बिना यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि अंतिम भार में कितना वास्तविक परिवर्तन हुआ।
तालिका 2.1 — संरचना के आधार पर विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं की तुलना
✓ = उपस्थित, ✗ = अनुपस्थित
| क्र . सं . | कोशिका संरचना | जीवाणु कोशिका | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|---|---|
| 1. | कोशिका झिल्ली | ✓ | ✓ | ✓ |
| 2. | कोशिका भित्ति | ✓ | ✓ | ✗ |
| 3. | कोशिकाद्रव्य | ✓ | ✓ | ✓ |
| 4. | सुस्पष्ट केंद्रक — झिल्ली से घिरा आनुवंशिक पदार्थ | ✗ | ✓ | ✓ |
| 5. | आद्य केंद्रक या केंद्रकाभ — झिल्ली रहित आनुवंशिक पदार्थ | ✓ | ✗ | ✗ |
| 6. | झिल्ली - आबद्ध कोशिकांग | ✗ | ✓ | ✓ |
निष्कर्ष
जीवाणु कोशिका एक पूर्वकेंद्रकी कोशिका है क्योंकि इसमें स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग नहीं होते। पादप तथा जंतु कोशिकाएँ सुकेंद्रकी कोशिकाएँ हैं क्योंकि इनमें स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग पाए जाते हैं।
जिज्ञासा-सूत्र — पृष्ठ 16
9क्या आप बिना केंद्रक की किसी अन्य कोशिका के विषय में जानते हैं?
हाँ, पादपों में पाए जाने वाले परिपक्व चालनी नलिका तत्व केंद्रक रहित होते हैं। ये फ्लोएम ऊतक का भाग होते हैं और पत्तियों में बने भोजन को पौधे के दूसरे भागों तक पहुँचाते हैं। केंद्रक न होने के कारण चालनी नलिका तत्व अपने सभी कार्य स्वतंत्र रूप से नहीं कर पाते। उनके पास स्थित सहचर कोशिकाएँ उन्हें आवश्यक पदार्थ और जैविक सहायता प्रदान करती हैं।
सोचिए और बताइए — पृष्ठ 19
4क्या सफेद फूलों में कोई वर्णक होता है? कारण बताइए।
सफेद फूलों की पंखुड़ियों में सामान्यतः लाल, पीले या नारंगी रंग देने वाले वर्णक बहुत कम होते हैं अथवा अनुपस्थित होते हैं। उनकी कोशिकाओं के भीतर उपस्थित वायु-स्थान प्रकाश के लगभग सभी रंगों को परावर्तित या प्रकीर्णित कर देते हैं। सभी रंगों का प्रकाश हमारी आँखों को एक साथ प्राप्त होने पर पंखुड़ियाँ सफेद दिखाई देती हैं। इसलिए सफेद रंग प्रायः रंगीन वर्णकों के अभाव तथा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण दिखाई देता है।
5निम्न संकेतों का उपयोग करके एक पादप या जंतु कोशिका का सुस्पष्ट रूप से नामांकित आरेखी चित्र बनाइए—
- कोशिका के भीतर केंद्रक एक सघन और गोल पिंड के रूप में दिखाई देता है।
- अंतर्द्रव्ययी जालिका विस्तारित केंद्रक आवरण के संजाल की तरह फैलती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक छड़ाकार होते हैं।
नामांकित पादप कोशिका का सांकेतिक चित्र

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 22
6एक कोशिका में अनेक छोटे-छोटे माइटोकॉन्ड्रिया की अपेक्षा एक विशाल माइटोकॉन्ड्रिया क्यों नहीं होता? यह पृष्ठीय क्षेत्रफल की अवधारणा से किस प्रकार संबंधित है?
अनेक छोटे माइटोकॉन्ड्रिया मिलकर एक विशाल माइटोकॉन्ड्रिया की तुलना में अधिक कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की भीतरी झिल्ली पर कोशिकीय श्वसन और ATP निर्माण की अभिक्रियाएँ होती हैं। अधिक झिल्ली क्षेत्र उपलब्ध होने से अधिक अभिक्रियाएँ एक साथ हो सकती हैं और ऊर्जा अधिक कुशलता से बनती है। छोटे माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के अलग-अलग भागों में पहुँचकर वहाँ ऊर्जा भी उपलब्ध करा सकते हैं।
7यदि त्वचा की कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन की अपेक्षा अर्धसूत्री विभाजन करने लगें तो आपके विचार से त्वचा के कटने पर क्या होगा?
यदि त्वचा की कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन के स्थान पर अर्धसूत्री विभाजन करने लगें, तो बनने वाली कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाएगी और वे मूल त्वचा कोशिकाओं के समान नहीं होंगी। ऐसी कोशिकाएँ त्वचा की सामान्य संरचना और कार्य नहीं कर पाएँगी। परिणामस्वरूप कटे हुए स्थान पर सही प्रकार की नई कोशिकाएँ नहीं बनेंगी, घाव भरने में बहुत अधिक समय लगेगा या घाव ठीक नहीं होगा तथा ऊतक में असामान्यताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
अध्याय 2 — कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई
अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
निम्न उत्तर कक्षा 9 विज्ञान की पुस्तक ‘अन्वेषण’ के अध्याय 2 के आधार पर लिखे गए हैं।
1कोष्ठक में दिए गए संकेतों के आधार पर निम्नलिखित युग्मों के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए—
(i) कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति — पारगम्यता
| कोशिका झिल्ली | कोशिका भित्ति |
|---|---|
| यह वरणात्मक रूप से पारगम्य होती है। | यह सामान्यतः पारगम्य होती है। |
| यह केवल कुछ चुने हुए पदार्थों को अपने आर - पार जाने देती है। | जल और कई घुले हुए पदार्थ इससे होकर गुजर सकते हैं। |
| यह पदार्थों के प्रवेश और निकास को नियंत्रित करती है। | यह मुख्यतः कोशिका को आकार , सुरक्षा और दृढ़ता प्रदान करती है। |
(ii) रूक्ष अंतर्द्रव्ययी जालिका और चिकनी अंतर्द्रव्ययी जालिका — संरचना
| रूक्ष अंतर्द्रव्ययी जालिका —RER | चिकनी अंतर्द्रव्ययी जालिका —SER |
|---|---|
| इसकी सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं। | इसकी सतह पर राइबोसोम नहीं होते। |
| राइबोसोम के कारण यह खुरदुरी दिखाई देती है। | राइबोसोम न होने के कारण यह चिकनी दिखाई देती है। |
| यह मुख्यतः प्रोटीन संश्लेषण से संबंधित है। | यह मुख्यतः लिपिड तथा कुछ हार्मोनों के संश्लेषण से संबंधित है। |
(iii) हरितलवक और वर्णीलवक — वर्णक
| हरितलवक | वर्णीलवक |
|---|---|
| इसमें हरा वर्णक क्लोरोफिल पाया जाता है। | इसमें पीले , नारंगी या लाल वर्णक पाए जाते हैं। |
| यह पौधे को हरा रंग देता है। | यह फूलों , फलों और कुछ सब्जियों को विभिन्न रंग देता है। |
| यह प्रकाश - संश्लेषण में सहायता करता है। | यह परागणकारियों और फल खाने वाले जंतुओं को आकर्षित करता है। |
2दो समान जंतु कोशिकाओं को दो अलग-अलग विलयनों में रखा जाता है। कोशिका X को शुद्ध जल में तथा कोशिका Y को नमक के सांद्र विलयन में रखा गया। कुछ समय बाद कोशिका X फूल जाती है और कोशिका Y सिकुड़ जाती है। सही स्पष्टीकरण चुनिए।
सही विकल्प—(iii)कोशिका झिल्ली के माध्यम से जल कोशिका X में प्रवेश कर गया और कोशिका Y से बाहर चला गया।
व्याख्या: शुद्ध जल कोशिका के अंदर के द्रव की तुलना में अल्पपरासारी होता है। इसलिए जल परासरण द्वारा कोशिका X में प्रवेश करता है और वह फूल जाती है। नमक का सांद्र विलयन अतिपरासारी होता है। इसलिए कोशिका Y का जल बाहर निकल जाता है और वह सिकुड़ जाती है।

3चित्र 2.20 में (क) से (छ) तक चिह्नित भागों की पहचान कीजिए और दिए गए कार्यों से उनका मिलान कीजिए।
| चिह्न | कोशिका का भाग | संबंधित कार्य |
|---|---|---|
| ( क ) | माइटोकॉन्ड्रिया | (ii) कोशिकीय श्वसन का स्थल |
| ( ख ) | केंद्रक | (i) कोशिका की सभी गतिविधियों का नियंत्रण |
| ( ग ) | गॉल्जी उपकरण | (vi) अंतर्द्रव्ययी जालिका से प्राप्त सामग्री को पैक और संग्रहीत करना |
| ( घ ) | हरितलवक | (vii) भोजन निर्माण में सहायता करना |
| ( ङ ) | कोशिका झिल्ली | (iv) कोशिका के अवयवों को परिवेश से अलग करना |
| ( च ) | कोशिका भित्ति | (v) कोशिका को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करना |
| ( छ ) | रसधानी | (iii) भंडारण करना तथा कोशिका को दृढ़ता प्रदान करना |
4निम्नलिखित में से कोशिकांगों के कौन-से युग्म दिए गए वर्गों से सही सुमेलित हैं?
सही विकल्प—(i) अवर्णी लवक — कोशिका भित्ति
कारण: अवर्णी लवक पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं और भोजन का भंडारण करते हैं। कोशिका भित्ति जंतु कोशिकाओं में अनुपस्थित होती है। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, गॉल्जी उपकरण और अंतर्द्रव्ययी जालिका जंतु कोशिकाओं में भी पाए जाते हैं।
5रेणु का कहना है कि पौधों के सभी भागों, यहाँ तक कि जड़ों में भी लवक होते हैं। रोहित के अनुसार जड़ों में लवक नहीं होते। कौन सही है? औचित्य सिद्ध कीजिए।
रेणु का कथन सही है। पौधों की जड़ों में भी लवक पाए जाते हैं, लेकिन वे सामान्यतः हरितलवक नहीं होते क्योंकि जड़ों को प्रकाश नहीं मिलता और वे प्रकाश-संश्लेषण नहीं करतीं। जड़ों की कोशिकाओं में अधिकतर रंगहीन अवर्णी लवक पाए जाते हैं। ये स्टार्च, तेल या प्रोटीन जैसे खाद्य पदार्थों का भंडारण करते हैं। आलू में स्टार्च संचित करने वाले अवर्णी लवक इसका उदाहरण हैं।
6माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक संरचनात्मक और कार्यात्मक रूप से किस प्रकार समान और भिन्न हैं?
समानताएँ
| आधार | समानता |
|---|---|
| झिल्ली | दोनों दोहरी झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं। |
| आनुवंशिक पदार्थ | दोनों में अपना डीएनए होता है। |
| राइबोसोम | दोनों में अपने राइबोसोम पाए जाते हैं। |
| प्रोटीन निर्माण | दोनों अपने कुछ प्रोटीन स्वयं बना सकते हैं। |
| ऊर्जा परिवर्तन | दोनों कोशिका में ऊर्जा के परिवर्तन से संबंधित हैं। |
भिन्नताएँ
| माइटोकॉन्ड्रिया | हरितलवक |
|---|---|
| पादप और जंतु दोनों कोशिकाओं में पाया जाता है। | मुख्यतः हरे पादप भागों की कोशिकाओं में पाया जाता है। |
| इसमें क्लोरोफिल नहीं होता। | इसमें क्लोरोफिल होता है। |
| यह कोशिकीय श्वसन का स्थल है। | यह प्रकाश - संश्लेषण का स्थल है। |
| भोजन का विघटन करके ATP के रूप में ऊर्जा बनाता है। | सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके भोजन बनाता है। |
| भीतरी झिल्ली पर अंतःकटक या क्रिस्टी होती हैं। | इसके भीतर क्लोरोफिल युक्त चक्रिकानुमा झिल्लियाँ होती हैं। |
| इसके आंतरिक द्रव को मैट्रिक्स कहते हैं। | इसके आंतरिक अर्धतरल पदार्थ को पीठिका या स्ट्रोमा कहते हैं। |
7निम्नलिखित में से कोशिकांगों के किस जोड़े में डीएनए होता है?
सही विकल्प—(ii) माइटोकॉन्ड्रिया और केंद्रक
व्याख्या: केंद्रक में कोशिका का मुख्य आनुवंशिक पदार्थ डीएनए के रूप में उपस्थित होता है। माइटोकॉन्ड्रिया में भी अपना कुछ डीएनए पाया जाता है। हरितलवक में भी डीएनए होता है, लेकिन राइबोसोम में डीएनए नहीं होता। इसलिए विकल्प (i) सही नहीं है।

8गाजर का परासरण प्रयोग
एक गाजर को साधारण जल में और दूसरी गाजर को नमक के सांद्र विलयन में 24 घंटे के लिए रखा गया।
(i) शोधकर्ता इस प्रयोग द्वारा कौन-सी परिकल्पना का परीक्षण करना चाहती है?
शोधकर्ता यह परीक्षण करना चाहती है कि बाहरी विलयन की सांद्रता के कारण पादप कोशिकाओं में परासरण द्वारा जल का प्रवेश या निकास होता है। साधारण जल में कोशिकाएँ जल ग्रहण करेंगी, जबकि नमक के सांद्र विलयन में कोशिकाएँ जल खो देंगी।
(ii) प्रयोग में सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
प्रयोग को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए—
- दोनों गाजरें एक ही प्रकार और लगभग समान आकार तथा भार की होनी चाहिए।
- दोनों बर्तनों में तरल की मात्रा समान होनी चाहिए।
- नमक के विलयन की सांद्रता निश्चित होनी चाहिए।

- दोनों को समान तापमान और समान समय तक रखना चाहिए।
- प्रयोग से पहले और बाद में दोनों गाजरों का भार मापना चाहिए।
- प्रयोग को एक से अधिक बार दोहराना चाहिए।
(iii) साधारण जल में गाजर कठोर रहती है, लेकिन नमक के सांद्र विलयन में नरम क्यों हो जाती है?
साधारण जल में परासरण द्वारा जल गाजर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। इससे रसधानियाँ भरती हैं और कोशिकाओं में स्फीति-दाब उत्पन्न होता है। इसलिए गाजर कठोर तथा कुरकुरी रहती है। नमक के सांद्र विलयन में कोशिकाओं का जल बाहर निकल जाता है। कोशिकाएँ अपनी दृढ़ता खो देती हैं और गाजर नरम तथा रबर जैसी लचीली हो जाती है।
9जीवाणु और जंतु कोशिकाओं में निम्न संरचनाओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति बताइए।
✓ = उपस्थित, ✗ = अनुपस्थित
| कोशिका संरचना | जीवाणु कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|
| गुणसूत्र या आनुवंशिक पदार्थ | ✓ | ✓ |
| सुस्पष्ट केंद्रक | ✗ | ✓ |
| माइटोकॉन्ड्रिया | ✗ | ✓ |
| गॉल्जी उपकरण | ✗ | ✓ |
| वर्णीलवक | ✗ | ✗ |
नोट: जीवाणु में आनुवंशिक पदार्थ एक सामान्यतः गोलाकार गुणसूत्र के रूप में केंद्रकाभ क्षेत्र में रहता है। उसके चारों ओर केंद्रक झिल्ली नहीं होती।
10आलू के कप का प्रयोग
(i) कप ‘ख’ और कप ‘ग’ के खोखले भाग में जल क्यों जमा होता है?
कप ‘ख’ में चीनी और कप ‘ग’ में नमक डालने से उनके खोखले भाग में सांद्र विलयन बन जाता है। बीकर का जल आलू की जीवित कोशिकाओं की वरणात्मक रूप से पारगम्य झिल्लियों से होकर परासरण द्वारा कम विलेय सांद्रता वाले क्षेत्र से अधिक विलेय सांद्रता वाले खोखले भाग की ओर जाता है। इसलिए दोनों कपों में जल एकत्र हो जाता है।

(ii) इस प्रयोग के लिए कप ‘क’ क्यों आवश्यक है?
कप ‘क’ एक नियंत्रण व्यवस्था है। इसमें कोई नमक या चीनी नहीं डाली जाती। इससे यह सिद्ध होता है कि जल का संग्रह केवल आलू के कारण नहीं, बल्कि खोखले भाग में उपस्थित सांद्र चीनी या नमक के विलयन के कारण होता है।
(iii) कप ‘क’ और कप ‘घ’ में पानी क्यों नहीं एकत्र होता?
कप ‘क’ में कोई विलेय पदार्थ नहीं है, इसलिए सांद्रता में आवश्यक अंतर उत्पन्न नहीं होता और परासरण द्वारा जल इकट्ठा नहीं होता।
कप ‘घ’ उबले हुए आलू से बनाया गया है। उबालने के कारण कोशिकाएँ मर जाती हैं और उनकी कोशिका झिल्लियों की वरणात्मक पारगम्यता नष्ट हो जाती है। इसलिए प्रभावी परासरण नहीं होता और खोखले भाग में जल जमा नहीं होता।
11उस युग्म की पहचान कीजिए जो कोशिकांग और उसके कार्य के साथ सुमेलित नहीं है।
सही विकल्प—(ii) चिकनी अंतर्द्रव्ययी जालिका — लिपिड और सेल्युलोस का संश्लेषण
व्याख्या: चिकनी अंतर्द्रव्ययी जालिका लिपिड और कुछ हार्मोनों के संश्लेषण में सहायता करती है, लेकिन वह सेल्युलोस का संश्लेषण नहीं करती। पादप कोशिका में सेल्युलोस का निर्माण मुख्यतः कोशिका झिल्ली पर उपस्थित विशेष एंजाइमों द्वारा होता है।
अन्य दोनों युग्म सही हैं—
- राइबोसोम — प्रोटीन संश्लेषण
- लाइसोसोम — बाहरी तथा अवांछित पदार्थों का पाचन
12यदि किसी सुकेंद्रकी कोशिका से सभी माइटोकॉन्ड्रिया निकाल दिए जाएँ तो क्या परिणाम होगा?
माइटोकॉन्ड्रिया निकाल दिए जाने पर कोशिका में वायवीय कोशिकीय श्वसन तथा ATP का निर्माण लगभग बंद हो जाएगा। कोशिका को अपनी गतिविधियों के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलेगी। सक्रिय परिवहन, पदार्थों का संश्लेषण, वृद्धि, मरम्मत और कोशिका विभाजन जैसी प्रक्रियाएँ प्रभावित होंगी। कोशिकाद्रव्य में थोड़ी ऊर्जा बन सकती है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं होगी। अंततः कोशिका निष्क्रिय होकर मर सकती है।
13मानव शरीर में अर्बुद के निर्माण को कौन-सी परिघटना रोकती या संदमित करती है? क्या पौधों में भी अर्बुद का विकास हो सकता है?
मानव शरीर में संपर्क अवरोध सामान्य कोशिकाओं को आवश्यकता से अधिक विभाजित होने से रोकता है। जब कोशिकाएँ आसपास की कोशिकाओं के संपर्क में आती हैं, तो उनका विभाजन रुक जाता है। कोशिका-चक्र का नियंत्रण और क्रमादेशित कोशिका मृत्यु भी असामान्य कोशिकाओं को हटाने में सहायता करते हैं।
हाँ, पौधों में भी अनियंत्रित कोशिका विभाजन से गाँठ या अर्बुद जैसी वृद्धि हो सकती है। यह आनुवंशिक परिवर्तन, हार्मोन असंतुलन या कुछ रोगजनक जीवों के कारण हो सकती है। कठोर कोशिका भित्ति के कारण पौधों में ऐसी कोशिकाओं का फैलाव जंतुओं के कैंसर से भिन्न होता है।
14कोशिका झिल्ली के संश्लेषण में कौन-से कोशिकांग सहायता करते हैं? प्रोटीन और लिपिड के निर्माण-स्थल से कोशिका झिल्ली तक का पथ लिखिए।
कोशिका झिल्ली मुख्यतः प्रोटीन और लिपिड से बनी होती है।
- झिल्ली के प्रोटीन राइबोसोम द्वारा बनाए जाते हैं। झिल्ली में लगाए जाने वाले अनेक प्रोटीन रुक्ष अंतर्द्रव्ययी जालिका पर स्थित राइबोसोम बनाते हैं।
- झिल्ली के लिपिड चिकनी अंतर्द्रव्ययी जालिका में बनाए जाते हैं।
- ये पदार्थ परिवहन पुटिकाओं द्वारा गॉल्जी उपकरण तक पहुँचते हैं।
- गॉल्जी उपकरण उन्हें संशोधित, वर्गीकृत और पैक करता है।
- गॉल्जी से बनी पुटिकाएँ कोशिका झिल्ली तक पहुँचकर उससे जुड़ जाती हैं और नई झिल्ली सामग्री उसमें सम्मिलित कर देती हैं।
पथ
प्रोटीन का पथ:राइबोसोम → RER → परिवहन पुटिका → गॉल्जी उपकरण → पुटिका → कोशिका झिल्ली
लिपिड का पथ:SER → परिवहन पुटिका → गॉल्जी उपकरण → पुटिका → कोशिका झिल्ली
नामांकित सांकेतिक चित्र
इस पूरी प्रक्रिया को झिल्ली जैवजनन या झिल्ली निर्माण कहा जा सकता है।

15यदि युग्मक समसूत्री विभाजन द्वारा बनाए जाएँ तो क्या होगा?
यदि युग्मक समसूत्री विभाजन से बनें, तो उनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी होने के बजाय जनक कोशिका के समान रहेगी। निषेचन के समय दो पूर्ण गुणसूत्र संख्या वाले युग्मक मिलेंगे और संतति में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। उदाहरण के लिए मनुष्य में 46 गुणसूत्र वाले शुक्राणु और अंडाणु मिलने से 92 गुणसूत्र हो जाएँगे। इससे सामान्य भ्रूण विकास बाधित होगा और प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्र संख्या बढ़ती जाएगी।
समसूत्री विभाजन से बने युग्मकों में आनुवंशिक विविधता भी बहुत कम होगी। इसलिए लैंगिक जनन के लिए अर्धसूत्री विभाजन आवश्यक है।
16गद्यांश आधारित प्रश्न
(i) कृषक ने खेत-उत्पाद के संरक्षण में कौन-सी वैज्ञानिक अवधारणा का उपयोग किया है?
कृषक ने परासरण तथा उच्च सांद्रता वाले माध्यम द्वारा खाद्य संरक्षण की वैज्ञानिक अवधारणा का उपयोग किया। नमक, चीनी या गुड़ मिलाने से फल के आसपास अतिपरासारी माध्यम बनता है। यह सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोककर अचार, मुरब्बे और शरबत की निधानी आयु बढ़ाता है।
(ii) नमक और चीनी की उच्च सांद्रता जीवाणुओं और कवकों की वृद्धि किस प्रकार रोकती है?
नमक या चीनी की अधिक सांद्रता भोजन के आसपास अतिपरासारी वातावरण बनाती है। भोजन को दूषित करने वाले जीवाणुओं और कवकों की कोशिकाओं से जल परासरण द्वारा बाहर निकल जाता है। इससे उनकी कोशिकाएँ सिकुड़ जाती हैं और उनकी जैविक क्रियाएँ, वृद्धि तथा जनन रुक जाते हैं। भोजन में उपलब्ध जल की मात्रा कम होने से भी सूक्ष्मजीव तेजी से नहीं बढ़ पाते।
(iii) इस प्रकार के खाद्य परिरक्षण के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक पाकविधि सुझाइए।
कम नमक और कम चीनी वाला आँवला-नींबू संरक्षण तैयार किया जा सकता है। आँवले के छोटे टुकड़ों को हल्का भाप देकर स्वच्छ तथा निर्जीवाणुकृत काँच की बोतल में रखें। इसमें नींबू का रस, थोड़ी मात्रा में नमक, हल्दी और सरसों जैसे मसाले मिलाएँ। अधिक तेल और कृत्रिम परिरक्षकों का प्रयोग न करें। इसे छोटी मात्रा में बनाकर रेफ्रिजरेटर में रखें और स्वच्छ चम्मच से निकालें।
(iv) उपर्युक्त स्थिति में किन वैज्ञानिक मूल्यों पर ध्यान दिया गया है?
इस स्थिति में निम्न वैज्ञानिक मूल्यों का प्रयोग किया गया है—
- वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग
- समस्या समाधान और दूरदर्शिता
- स्वच्छता तथा खाद्य सुरक्षा
- प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग
- खाद्य अपशिष्ट में कमी
- पर्यावरणीय संधारणीयता
- स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को बढ़ावा
- नवाचार तथा कृषि-प्रसंस्करण
- उत्पादों के मूल्यवर्धन द्वारा आय में वृद्धि।
खोज जारी है
30: निर्जीव रसायनों के उपयोग द्वारा संश्लेषित कोशिकाओं के विकास का भविष्य क्या है? यदि एक संश्लेषित कोशिका तैयार की जाती है, तो संबंधित नैतिक विषय क्या हो सकते हैं?
निर्जीव रसायनों से संश्लेषित कोशिकाओं का निर्माण भविष्य में जीवन की उत्पत्ति और कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक हो सकता है। ऐसी कोशिकाओं का उपयोग नई औषधियाँ बनाने, रोगों का अध्ययन करने, जैव-ईंधन तैयार करने, प्रदूषण कम करने तथा उपयोगी पदार्थों के उत्पादन में किया जा सकता है।
इसके साथ कई नैतिक प्रश्न भी उत्पन्न होंगे। जैसे— क्या मनुष्य को कृत्रिम जीवन बनाने का अधिकार है, संश्लेषित कोशिका के अनियंत्रित रूप से फैलने पर पर्यावरण को क्या हानि होगी तथा इसका दुरुपयोग जैविक हथियार बनाने में तो नहीं किया जाएगा। इसलिए ऐसे अनुसंधान में सुरक्षा, पारदर्शिता, सरकारी नियंत्रण और समाज के हित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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