कक्षा 9 · विज्ञान · Hindi माध्यम · प्रश्न-उत्तर

अध्याय 12: जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण

नीचे अध्याय की गतिविधियाँ, चिंतन प्रश्न, अभ्यास और विद्यार्थी-अनुकूल विस्तृत उत्तर पढ़ें।

अन्वेषणहिंदी माध्यमप्रश्न-उत्तर
कक्षा
9
विषय
विज्ञान
पुस्तक
अन्वेषण
माध्यम
Hindi
अध्याय 12 के संपूर्ण प्रश्न-उत्तर

दिए गए अध्याय के चिंतन, गतिविधि और अभ्यास प्रश्नों के क्रमबद्ध उत्तर नीचे दिए गए हैं।

प्रश्न-उत्तर

चिंतन कीजिए

1जैव विविधता से आपका क्या अभिप्राय है?

उत्तर:

जैव विविधता से अभिप्राय पृथ्वी अथवा किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों और उनके पर्यावासों की विविधता से है। इसमें सूक्ष्मजीवों, पादपों और जंतुओं के असंख्य रूप तथा उनकी विशेषताएँ सम्मिलित हैं। यह विविधता पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बनाए रखने और पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।

2विविधता को समझने के लिए जीवों का समूहन किस प्रकार हमारी सहायता करता है?

उत्तर:

जीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूहों में रखने से विशाल जैव विविधता का अध्ययन सरल, व्यवस्थित और क्रमबद्ध हो जाता है। इससे जीवों की पहचान, तुलना और नामकरण करने तथा उनके विकासात्मक संबंधों को समझने में सहायता मिलती है। यह ज्ञान जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक तंत्र के प्रबंधन में भी उपयोगी होता है।

3पादपों और जंतुओं को किस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 1

पादपों का वर्गीकरण शरीर के विभेदन, वास्तविक जड़-तना-पत्तियों, संवहनी ऊतकों, बीजों, पुष्पों और फलों की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है। जंतुओं के वर्गीकरण में शरीर-संगठन, सममिति, देहगुहा, खंडीभवन, कंकाल तथा पृष्ठरज्जु की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण होती है। कशेरुकियों को पर्यावास, देहावरण और जनन के आधार पर भी बाँटा जाता है।

4वर्गीकरण कृषि की समस्याओं को दूर करने में किस प्रकार सहायक है?

उत्तर:

वर्गीकरण से फसलों की विभिन्न किस्मों तथा उपयोगी और हानिकारक जीवों की सही पहचान की जा सकती है। सूखा-सहिष्णु, पीड़क-प्रतिरोधी और कम पोषक तत्त्वों वाली मृदा में उगने वाली किस्मों का चयन एवं संरक्षण किया जा सकता है। इससे फसल नष्ट होने का जोखिम कम होता है और संधारणीय कृषि तथा खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है।

सोचिए और बताइए—पृष्ठ 231

1यदि अनेक जीव समान विशेषताओं को साझा करते हैं, तो क्या उनके वंशक्रम भी समान हो सकते हैं?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 2

हाँ, अनेक जीवों में पाई जाने वाली मूलभूत संरचनात्मक, कोशिकीय और आनुवंशिक समानताएँ संकेत देती हैं कि वे किसी समान पूर्वज से विकसित हुए हो सकते हैं। जितनी अधिक महत्त्वपूर्ण समानताएँ होती हैं, उनका विकासात्मक संबंध उतना ही निकट माना जाता है। जीवाश्मों और डीएनए के अध्ययन से इन संबंधों की पुष्टि की जा सकती है।

सोचिए और बताइए—पृष्ठ 236

2एककोशिकीय जीव अपने सभी जैव-प्रक्रम किस प्रकार करते हैं, जबकि हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में समान कार्य करने के लिए अरबों कोशिकाओं की आवश्यकता होती है?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 3

एककोशिकीय जीव की अकेली कोशिका पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया और जनन जैसे सभी जैव-प्रक्रम करती है। उसका शरीर छोटा और संगठन सरल होता है। बहुकोशिकीय जीव बड़े और जटिल होते हैं। उनमें श्रम-विभाजन के कारण विशेषीकृत कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, अंग और अंग-तंत्र बनाती हैं तथा अलग-अलग कार्य करती हैं।

सोचिए और बताइए—पृष्ठ 238

3पादपों की ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जो जल पर पादपों की निर्भरता को कम करती हैं, परंतु इसके पश्चात भी नम परिस्थितियों की आवश्यकता बनी रहती है?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 4

ब्रायोफाइट में मूलाभास और शरीर का कुछ विभेदन तथा टेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना, पत्तियाँ और संवहनी ऊतक जल पर प्रत्यक्ष निर्भरता को कम करते हैं। फिर भी इनके नर जनन कोशिकाओं को मादा जनन कोशिका तक पहुँचने के लिए जल की पतली परत चाहिए। इसलिए जनन के समय नम परिस्थितियाँ आवश्यक रहती हैं।

4ऊँचे पादपों को विशेष परिवहन ऊतकों की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 5

ऊँचे पादपों में जड़ों, तने और पत्तियों के बीच दूरी अधिक होती है। केवल विसरण द्वारा पदार्थों का परिवहन पर्याप्त और तीव्र नहीं हो सकता। इसलिए जाइलम जड़ों से जल तथा खनिजों को ऊपर पहुँचाता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पादप के अन्य भागों तक पहुँचाता है। इससे पादप की वृद्धि और उत्तरजीविता संभव होती है।

5पादप कहाँ और कैसे जीवित रहेंगे, इसे बीज और फल किस प्रकार प्रभावित करते हैं? उत्तर: बीज विकासशील भ्रूण की रक्षा करते हैं और उसके लिए भोजन संचित रखते हैं। वे अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर अंकुरित होकर नया पादप बनाते हैं। फल बीजों की रक्षा करने के साथ उन्हें वायु, जल और जंतुओं द्वारा नए स्थानों तक पहुँचाने में सहायता करते हैं। इस प्रकार बीज और फल पादपों के प्रसार एवं उत्तरजीविता को बढ़ाते हैं।

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 6

सोचिए और बताइए—पृष्ठ 242

6एक केंचुआ (ऐनेलिडा) और एक भृंग (आर्थ्रोपोडा), दोनों का शरीर खंडयुक्त होता है, परंतु भृंग का बहिःकंकाल कठोर होता है। भृंग का बहिःकंकाल उसे जीवित रहने में किस प्रकार सहायता करता है?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 7

भृंग का कठोर बहिःकंकाल उसके कोमल आंतरिक अंगों को चोट, शत्रुओं और बाहरी दबाव से बचाता है। यह शरीर से जल की हानि कम करके उसे शुष्क और असुरक्षित पर्यावरण में जीवित रहने में सहायता करता है। बहिःकंकाल मांसपेशियों को अवलंब भी देता है, जिससे संधित उपांगों द्वारा प्रभावी गति संभव होती है।

सोचिए और बताइए—पृष्ठ 247

7क्या जैव विविधता शब्द का संबंध केवल जीवों की विविधता से है अथवा इसमें अन्य तत्त्व भी सम्मिलित हैं?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 8

जैव विविधता का संबंध केवल विभिन्न जीव-जातियों से नहीं है। इसमें एक ही जाति के जीवों में आनुवंशिक भिन्नताएँ, विभिन्न जातियों की विविधता, उनके पर्यावास और पारिस्थितिक तंत्र भी सम्मिलित हैं। जीवों के बीच तथा जीवों और उनके पर्यावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाएँ भी जैव विविधता का महत्त्वपूर्ण भाग हैं।

8यदि आपको किसी तालाब में कोई नया जीव दिखाई देता है, तो आप उसे वर्गीकृत करने के लिए उसकी किन विशेषताओं का अवलोकन करेंगे और क्यों? उत्तर: मैं उसके आकार, शरीर-संगठन, गति, पोषण-विधि, पर्यावास और जनन का अवलोकन करूँगा। यह भी देखूँगा कि वह एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय, उसकी कोशिकाएँ पूर्वकेंद्री हैं या सुकेंद्री तथा कोशिका भित्ति उपस्थित है या नहीं। सममिति, खंडीभवन, कंकाल और पृष्ठरज्जु जैसी विशेषताएँ उसका उचित जगत एवं समूह निर्धारित करने में सहायता करेंगी।

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 9

9आनुवंशिक अध्ययन सजीवों के संबंध में गहन जानकारी क्यों प्रदान करते हैं?

उत्तर:

आनुवंशिक अध्ययन में जीवों के डीएनए और वंशागत गुणों की तुलना की जाती है। डीएनए में जीव की आनुवंशिक जानकारी सुरक्षित रहती है। डीएनए में अधिक समानता जीवों के साझा पूर्वज और निकट विकासात्मक संबंध का संकेत देती है। इसलिए आनुवंशिक अध्ययन बाहरी लक्षणों की तुलना में जीवों की पहचान और वर्गीकरण के लिए अधिक गहन एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करते हैं।

10जलवायु में होने वाले परिवर्तन जैव विविधता को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं?

उत्तर:
अध्याय 12 का चित्र 10

तापमान, वर्षा और ऋतु-चक्र में परिवर्तन से जीवों के पर्यावास, भोजन, जल और प्रजनन की परिस्थितियाँ बदल जाती हैं। जो जातियाँ इन परिवर्तनों के अनुसार अनुकूलन या स्थान परिवर्तन नहीं कर पातीं, उनकी जनसंख्या घट सकती है। किसी एक जाति के विलुप्त होने से उस पर निर्भर दूसरी जातियाँ और पूरा आहार-जाल भी प्रभावित हो सकता है।

अध्याय 12—जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

1मीना और हरि ने अपने उद्यान में एक जंतु देखा। हरि ने उसे कीट कहा जबकि मीना ने कहा कि वह केंचुआ है। उस सही विकल्प को चुनिए जो यह पुष्टि करता है कि वह एक कीट है।

उत्तर:

(i) द्विपार्श्व सममिति की काया(ii) संधित पाद वाली काया(iii) बेलनाकार काया(iv) कम खंडीभवन वाली काया

सही विकल्प (ii) संधित पाद वाली काया है। कीट आर्थ्रोपोडा समूह के सदस्य होते हैं और उनमें संधित पाद पाए जाते हैं। केंचुए का शरीर बेलनाकार एवं खंडयुक्त होता है, लेकिन उसमें संधित पाद नहीं होते।

2स्पंज, जंतु जगत की सबसे सरल शरीर-संरचना वाले जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके शरीर में वास्तविक ऊतक और अंग नहीं होते हैं। स्पंज कोशिकाओं की कौन-सी विशेषता उसे जंतु जगत के अंतर्गत वर्गीकृत करने का आधार है?

उत्तर:

(i) माइटोकॉन्ड्रिया की अनुपस्थिति(ii) प्रकाश-संश्लेषण करने की क्षमता(iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति(iv) कोशिका भित्ति की उपस्थिति

दिए गए विकल्पों में सही उत्तर (iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति है। स्पंज की कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली होती है, परंतु कोशिका भित्ति और प्रकाश-संश्लेषण की क्षमता नहीं होती। वे बहुकोशिकीय, सुकेंद्रकी और विषमपोषी होते हैं, इसलिए जंतु जगत में रखे जाते हैं।

3अपने आस-पास के वातावरण में दो अलग-अलग जीवों का अवलोकन कीजिए। उनकी कौन-सी विशेषताएँ आपको उनमें अंतर करने में सहायता करती हैं? ये विशेषताएँ किस प्रकार से उन्हें भिन्न समूहों में रखने में सहायता प्रदान करती हैं?

उत्तर:

उदाहरण के लिए, गुलाब का पौधा हरा, अचल और स्वपोषी होता है। उसकी कोशिकाओं में पर्णहरित तथा कोशिका भित्ति पाए जाते हैं। इसके विपरीत चींटी गतिशील और विषमपोषी होती है तथा उसकी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती। कोशिका-संरचना, पोषण-विधि और गति की इन भिन्नताओं के आधार पर गुलाब को जगत प्लांटी तथा चींटी को जगत एनीमेलिया में रखा जाता है।

4कोई वैज्ञानिक वर्गीकरण करने के लिए जाइलम और फ्लोएम की उपस्थिति की तुलना में कोशिकीय संगठन को अधिक मौलिक आधार बनाना किस प्रकार न्यायसंगत सिद्ध करता है?

उत्तर:

कोशिकीय संगठन सभी जीवों पर लागू होने वाला मूलभूत मानदंड है। इससे पता चलता है कि जीव एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय तथा उसकी कोशिकाएँ पूर्वकेंद्रकी हैं या सुकेंद्रकी। इसके विपरीत जाइलम और फ्लोएम केवल संवहनी पादपों में पाए जाते हैं। इसलिए व्यापक वर्गीकरण और विकासात्मक संबंधों को समझने के लिए कोशिकीय संगठन अधिक मौलिक आधार है।

5यदि आपको एक बिना नाम वाली स्लाइड पर ऐसा एककोशिकीय जीव मिले जिसमें सुस्पष्ट केंद्रक तथा अनेक पक्ष्माभ हों, तो उसके किस समूह का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना है? कारण बताइए।

उत्तर:

उसके जगत प्रोटिस्टा का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना है। एककोशिकीय होना और झिल्ली से घिरा सुस्पष्ट केंद्रक होना प्रोटिस्टा की प्रमुख विशेषताएँ हैं। अनेक पक्ष्माभों द्वारा गति करने के कारण वह पैरामीशियम जैसा पक्ष्माभी प्रोटिस्ट हो सकता है।

6किसी पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और स्थायित्व में जीवों की विविधता किस प्रकार योगदान देती है?

उत्तर:

जीवों की विविधता के कारण पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता, परागणकर्ता और अपघटक अपने-अपने कार्य करते हैं। पादप भोजन और ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं, जंतु आहार-जाल की कड़ियाँ बनते हैं तथा कवक और जीवाणु पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं। इन परस्पर संबंधों से पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरणीय परिवर्तनों का सामना करके संतुलित और स्थायी बना रहता है।

7यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए तो कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?

उत्तर:

सभी एककोशिकीय जीव समान नहीं होते। जीवाणु पूर्वकेंद्रकी होते हैं, जबकि अमीबा और पैरामीशियम सुकेंद्रकी होते हैं। यीस्ट भी एककोशिकीय है, परंतु उसमें काइटिनयुक्त कोशिका भित्ति और अवशोषी पोषण पाया जाता है। इन्हें एक ही जगत में रखने से कोशिका-संरचना, पोषण-विधि, कोशिका भित्ति और विकासात्मक संबंधों के मूलभूत अंतर छिप जाएँगे तथा वर्गीकरण भ्रामक हो जाएगा।

8विषाणुओं के विषय में आप पहले की कक्षाओं में पढ़ चुके हैं। इन्हें पाँच-जगत में से किसी के भी अंतर्गत क्यों नहीं रखा गया? कारण बताइए।

उत्तर:

विषाणु अकोशिकीय होते हैं। उनमें कोशिकाद्रव्य, कोशिकांग और स्वतंत्र उपापचय नहीं होता। उनमें आनुवंशिक पदार्थ अवश्य होता है, परंतु वे केवल परपोषी कोशिका के भीतर ही अपनी प्रतिकृतियाँ बना सकते हैं और उसके बाहर निष्क्रिय रहते हैं। पाँच-जगत प्रणाली कोशिकीय जीवों पर आधारित है, इसलिए विषाणु किसी भी जगत के मूल मानदंडों को पूरा नहीं करते।

9यदि आपसे पाँच-जगत वर्गीकरण में संशोधन करने के लिए कहा जाए तो क्या आप विषाणु को पृथक श्रेणी में रखेंगे या इस प्रणाली से बाहर रखेंगे? अपने उत्तर को उचित ठहराइए और स्पष्ट कीजिए कि यह वैज्ञानिक वर्गीकरण की विकासशील प्रकृति के संबंध में क्या संकेत देता है।

उत्तर:

मैं विषाणुओं को पाँच कोशिकीय जगतों से बाहर रखकर उनके लिए एक पृथक अकोशिकीय श्रेणी बनाऊँगा। उनमें आनुवंशिक पदार्थ और प्रतिकृति बनाने की क्षमता होती है, लेकिन कोशिकीय संगठन तथा स्वतंत्र उपापचय नहीं होता। इससे स्पष्ट होता है कि कोई वर्गीकरण प्रणाली अंतिम नहीं होती। नई जानकारियों और तकनीकी प्रगति के साथ वैज्ञानिक वर्गीकरण में संशोधन एवं नई श्रेणियाँ जोड़ी जाती रहती हैं।

10विषाणुओं में सजीवों की भाँति आनुवंशिक पदार्थ होता है, परंतु इनमें कोशिकीय संगठन नहीं होता। इनकी कौन-सी विशेषताएँ इन्हें पाँच-जगत प्रणाली के अंतर्गत रखे जाने से रोकती हैं? इस बात से हमें वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या ज्ञात होता है?

उत्तर:

विषाणु अकोशिकीय होते हैं तथा उनमें कोशिकाद्रव्य, कोशिकांग, स्वतंत्र पोषण, श्वसन और उपापचय नहीं होता। वे परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहते हैं और स्वतंत्र रूप से जनन नहीं कर सकते। इसलिए कोशिका-प्रकार, संगठन-स्तर और पोषण-विधि पर आधारित पाँच-जगत प्रणाली में उनका स्थान निर्धारित नहीं होता। इससे ज्ञात होता है कि वर्गीकरण प्रणालियाँ अपने चुने हुए मानदंडों तक सीमित होती हैं।

11टेरिडोफाइट और ब्रायोफाइट दोनों में पुष्प और बीज नहीं पाए जाते हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग समूहों में रखा गया है। इनकी मुख्य विशेषताओं के आधार पर इस वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

ब्रायोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ स्पष्ट नहीं होतीं। इनमें मूलाभास पाए जाते हैं तथा जाइलम और फ्लोएम अनुपस्थित होते हैं। इसके विपरीत टेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना, पत्तियाँ और संवहनी ऊतक पाए जाते हैं। दोनों बीज उत्पन्न नहीं करते और जनन के लिए जल पर निर्भर रहते हैं, परंतु शरीर-संगठन तथा परिवहन ऊतकों के अंतर के कारण उन्हें अलग समूहों में रखा गया है।

12वर्गीकरण पदानुक्रम में वर्ग अथवा वंश में से किस समूह में सदस्यों की संख्या कम होती है, परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

वंश में सदस्यों की संख्या वर्ग की तुलना में कम होती है, लेकिन वे अधिक समान विशेषताएँ साझा करते हैं। पदानुक्रम में जगत से जाति की ओर जाने पर समूह छोटे और विशिष्ट होते जाते हैं। उदाहरण के लिए, स्तनधारी वर्ग में अनेक वंश हैं, जबकि पेंथेरा वंश में बाघ और सिंह जैसी निकट संबंध वाली जातियाँ आती हैं।

13एक वैज्ञानिक एक नए जीव की खोज करता है जिसमें चलन की क्षमता तथा स्वपोषी पोषण का गुण पाया जाता है। पाँच-जगत वर्गीकरण के अनुसार कौन-सी विशेषताएँ वैज्ञानिक को इस जीव को प्रोटिस्टा कुल में रखने में सहायता करेंगी?

उत्तर:

वैज्ञानिक को जाँचना चाहिए कि जीव एककोशिकीय और सुकेंद्रकी है तथा उसमें झिल्ली-आबद्ध वास्तविक केंद्रक उपस्थित है। वह जल या नम स्थान में रहता हो और कशाभ अथवा पक्ष्माभ द्वारा गति करता हो। इन विशेषताओं के साथ स्वपोषी पोषण उसे यूग्लीना जैसे प्रोटिस्ट से जोड़ता है। केवल चलन और स्वपोषण पर्याप्त नहीं; कोशिका-प्रकार तथा संगठन-स्तर प्रमुख मानदंड हैं।

14एक शोधकर्ता ने एक एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव की पहचान कवक के रूप में की है। पाँच-जगत वर्गीकरण के अनुसार किसी एककोशिकीय जीव को जगत फंजाई में रखने के लिए आप कौन-सी पहचान कुंजी सुझाएँगे?

उत्तर:

पहचान-कुंजी में जाँचा जाएगा कि जीव एककोशिकीय और सुकेंद्रकी है, उसकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी है, उसमें पर्णहरित अनुपस्थित है तथा वह पोषक तत्त्वों को अवशोषित करता है। यदि ये विशेषताएँ उपस्थित हैं, तो उसे जगत फंजाई में रखा जाएगा। यीस्ट इसका उदाहरण है, जिसे एककोशिकीय होने पर भी काइटिनयुक्त कोशिका भित्ति के कारण कवक माना जाता है।

15—केस अध्ययन

उत्तर:

15एक दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने तीन अलग-अलग पर्यावरणों—एक अलवणीय जल के तालाब, सड़ी-गली लकड़ियों के आस-पास की नमी युक्त मिट्टी तथा जंतुओं के पाचन तंत्र से एकत्रित किए गए जीवों का परीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने जीवों का प्रत्यक्षतः नामकरण करने के स्थान पर केवल उनकी संरचनात्मक, कोशिकीय तथा पोषण संबंधी विशेषताओं को नीचे दी गई तालिका के अनुसार अभिलेखित किया।

उत्तर:
जीवमुख्य अवलोकन
Pसूक्ष्मदर्शीय , वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित , दृढ़ कोशिका आवरण , उच्च लवणता और तापमान में जीवित रहता है।
Qबहुकोशिकीय , तंतुमय काया , कोशिका भित्ति उपस्थित , पर्णहरित अनुपस्थित , मृत कार्बनिक पदार्थ पर वृद्धि करता है।
Rएककोशिकीय , वास्तविक केंद्रक उपस्थित , संकुचनशील धानी उपस्थित , कशाभ द्वारा गति करता है , प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश - संश्लेषण करता है और प्रकाश की अनुपस्थिति में विषमपोषी बन जाता है।
Sबहुकोशिकीय , सुविभेदित ऊतक , मेरुदंड उपस्थित ; जीवन की प्रारंभिक अवस्था में जलीय श्वसन।
Tअकोशिकीय , आनुवंशिक पदार्थ उपस्थित , परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है।

विद्यार्थियों ने अनुभव किया कि कुछ जीवों को व्हिटेकर के पाँच-जगत वर्गीकरण के अंतर्गत स्पष्ट रूप से रखा जा सकता है, जबकि कुछ इस वर्गीकरण की मूल अवधारणा को चुनौती देते हैं। उपर्युक्त अध्ययन के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(i) किसी एक ऐसे जीव की पहचान कीजिए जो स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित हो। अपने उत्तर के समर्थन में एक अवलोकन लिखिए।

जीव ‘Q’ जगत फंजाई में सम्मिलित होगा। इसका मृत कार्बनिक पदार्थ पर वृद्धि करके पोषक तत्त्व प्राप्त करना इसकी मृतपोषी कवकीय प्रकृति की पुष्टि करता है।

(ii) कौन-सा जीव जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा? इस वर्गीकरण को संगतपूर्ण ठहराने वाली एक विशेषता लिखिए।

जीव ‘P’ जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा। इसमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित है, इसलिए यह पूर्वकेंद्रकी जीव है। उच्च लवणता और तापमान सहने की क्षमता इसके आर्किया-जैसे मोनेरा सदस्य होने का संकेत देती है।

(iii) जीव ‘R’ और ‘Q’ दोनों सुकेंद्रकी हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग जगतों में सम्मिलित किया गया है। उन मानदंडों का विश्लेषण कीजिए जो इन्हें अलग करते हैं।

जीव ‘R’ एककोशिकीय, कशाभ द्वारा गतिशील और मिश्रपोषी है; इसलिए यह प्रोटिस्टा में आएगा। जीव ‘Q’ बहुकोशिकीय, तंतुमय, कोशिका भित्तियुक्त तथा मृत कार्बनिक पदार्थ से पोषण लेने वाला विषमपोषी अपघटक है; इसलिए यह फंजाई में आएगा। संगठन का स्तर, गति, शरीर-संरचना और पोषण-विधि इन्हें अलग करते हैं।

(iv) समझाइए कि जीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण की विधि के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता।

विषमपोषी पोषण फंजाई, प्रोटिस्टा और एनीमेलिया के अनेक जीवों में पाया जाता है, इसलिए यह अकेला पर्याप्त आधार नहीं है। जीव ‘S’ बहुकोशिकीय है, उसमें सुविभेदित ऊतक और मेरुदंड उपस्थित हैं तथा प्रारंभिक अवस्था में जलीय श्वसन होता है। ये विशेषताएँ उसे एनीमेलिया के कशेरुकी तथा संभवतः उभयचर वर्ग में रखती हैं।

(v) जीव ‘T’ पाँचों जगतों में से किसी में भी नहीं रखा जा सकता है। वर्गीकरण में प्रयुक्त कौन-सी मूलभूत विशेषता इसमें नहीं है और इससे वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या पता चलता है?

जीव ‘T’ में मूलभूत कोशिकीय संगठन नहीं है। उसमें आनुवंशिक पदार्थ है, लेकिन वह परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है। इससे पता चलता है कि पाँच-जगत प्रणाली मुख्यतः कोशिकीय जीवों के लिए बनाई गई है। विषाणु जैसे अकोशिकीय रूपों को सम्मिलित करने के लिए पृथक अथवा संशोधित वर्गीकरण प्रणाली की आवश्यकता होती है।

(vi) यदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया गया होता तो किन जीवों को अयथार्थ रूप से एक साथ समूहित किया जा सकता था? ऐसे वर्गीकरण के वैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।

जीव ‘R’ और ‘S’ को जल से संबंध होने के कारण एक ही समूह में रखा जा सकता था। परंतु ‘R’ एककोशिकीय प्रोटिस्ट है, जबकि ‘S’ बहुकोशिकीय कशेरुकी जंतु है। पर्यावास-आधारित वर्गीकरण असंबंधित जीवों को साथ रखता, कोशिकीय संगठन तथा विकासात्मक संबंधों की उपेक्षा करता और उनकी पहचान एवं विशेषताओं के विषय में भ्रामक वैज्ञानिक निष्कर्ष देता।

(vii) कल्पना कीजिए कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए जीव की खोज की है जो बहुकोशिकीय तथा सुकेंद्रकी है। उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से किसी परपोषी से पोषक तत्त्व अवशोषित करता है। बताइए इसे फंजाई या एनीमेलिया में से किस जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए? वर्गीकरण के मानदंडों के आधार पर अपने तर्क को उचित ठहराइए।

इसे जगत फंजाई में रखा जाना चाहिए। यह बहुकोशिकीय और सुकेंद्रकी है, पर्णहरित के अभाव में प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता तथा बाहर से पोषक तत्त्वों का अवशोषण करता है। अवशोषण द्वारा विषमपोषी पोषण कवकों की प्रमुख विशेषता है, जबकि जंतु सामान्यतः भोजन का अंतर्ग्रहण करते हैं। काइटिनयुक्त कोशिका भित्ति की उपस्थिति इस वर्गीकरण की पुष्टि करेगी।

खोज जारी है…

आपके विचार से वैज्ञानिक भविष्य में कौन-सी नई जानकारियाँ प्राप्त करेंगे और इससे वर्गीकरण प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

भविष्य में वैज्ञानिक नए सूक्ष्मजीवों, चरम पर्यावरणों में रहने वाले जीवों, कोशिकाओं की सूक्ष्म संरचना, डीएनए एवं जीन-क्रम, जैवरासायनिक प्रक्रमों, जीवाश्मों और पारिस्थितिक भूमिकाओं के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे। इससे जीवों के विकासात्मक संबंध अधिक स्पष्ट होंगे। नए प्रमाणों के आधार पर कुछ जीवों के समूह बदले जा सकते हैं तथा विषाणुओं जैसे रूपों के लिए नई श्रेणियाँ बनाई जा सकती हैं।

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