कक्षा 9 · विज्ञान · Hindi माध्यम · प्रश्न-उत्तर

अध्याय 11: जनन – जीवन की निरंतरता

नीचे अध्याय की गतिविधियाँ, चिंतन प्रश्न, अभ्यास और विद्यार्थी-अनुकूल विस्तृत उत्तर पढ़ें।

अन्वेषणहिंदी माध्यमप्रश्न-उत्तर
कक्षा
9
विषय
विज्ञान
पुस्तक
अन्वेषण
माध्यम
Hindi
अध्याय 11 के संपूर्ण प्रश्न-उत्तर

दिए गए अध्याय के चिंतन, गतिविधि और अभ्यास प्रश्नों के क्रमबद्ध उत्तर नीचे दिए गए हैं।

प्रश्न-उत्तर

चिंतन कीजिए

1एक कृषक फसल उत्पादन के लिए अलैंगिक या लैंगिक जनन विधियों का चयन किस आधार पर करता है?

उत्तर:

कृषक फसल के प्रकार, वांछित गुण, उत्पादन की गति, लागत और आनुवंशिक विभिन्नता की आवश्यकता के आधार पर विधि चुनता है। कम समय में समान गुणों वाले अनेक पौधे चाहिए तो आलू, गन्ना और गुलाब जैसी फसलों में अलैंगिक जनन अपनाया जाता है। नई किस्म, बेहतर अनुकूलन या विभिन्नता प्राप्त करनी हो तो बीजों द्वारा लैंगिक जनन चुना जाता है।

2आपके विचार से अधिकांश जटिल संरचना वाले जंतु और पुष्पी पादप लैंगिक जनन क्यों करते हैं, जबकि यीस्ट और हाइड्रा जैसे अनेक सरल जीव मुख्यतः अलैंगिक जनन करते हैं?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 1

लैंगिक जनन से नर और मादा जनकों के आनुवंशिक गुण मिलते हैं, जिससे संतति में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। ये विभिन्नताएँ जटिल जीवों को बदलते पर्यावरण में अनुकूलन और जीवित रहने में सहायता करती हैं। इसके विपरीत यीस्ट और हाइड्रा जैसे सरल जीव अलैंगिक जनन द्वारा कम समय और ऊर्जा में तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं। इसमें युग्मकों या विशेष जनन अंगों की आवश्यकता नहीं होती।

विज्ञान एवं समाज — पृष्ठ 212

3। ब्रेड पर लगी फफूँद देखने में अरुचिकर लग सकती है, परंतु कुछ कवक समाज के लिए अत्यधिक लाभप्रद होते हैं। बीजाणु निर्माण द्वारा कवक बहुत तेजी से वृद्धि करते हैं तथा कार्बनिक अपशिष्टों और प्रदूषकों को निम्नीकृत करते हैं। कवक औद्योगिक अपशिष्टों से भारी धातुओं के निष्कासन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कवक से अनेक प्रतिजैविक, जैसे पेनिसिलिन और एमॉक्सिसिलिन, प्राप्त होते हैं। क्या आप किसी ऐसे कवक के विषय में जानते हैं जो प्लास्टिक को निम्नीकृत कर सकता है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 2

हाँ, एस्परजिलस ट्यूबिन्जेन्सिस (Aspergillus tubingensis) नामक कवक पॉलियूरेथेन प्लास्टिक को निम्नीकृत कर सकता है। यह प्लास्टिक की सतह पर वृद्धि करके ऐसे एंजाइम स्रावित करता है जो उसके रासायनिक बंधों को तोड़ते हैं। पेस्टालोटियोप्सिस माइक्रोस्पोरा भी कुछ प्रकार के पॉलियूरेथेन को निम्नीकृत कर सकता है। इन कवकों का अपशिष्ट प्रबंधन में संभावित उपयोग अभी शोध का विषय है। संबंधित वैज्ञानिक अध्ययन

तालिका 11.1 — पुष्प के भागों के अध्ययन के लिए अवलोकन तालिका

4। विभिन्न पुष्पों में बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर की उपस्थिति, अन्य विशेषताओं तथा उनके कार्यों का अवलोकन कीजिए।

उत्तर:

वास्तविक अवलोकन चुने गए पुष्पों पर निर्भर करेगा। नीचे एक उपयुक्त नमूना दिया गया है:

उदाहरण: क—पपीते का मादा पुष्प, ख—गुड़हल, ग—सरसों, घ—कद्दू का नर पुष्प।

अध्याय 11 का चित्र 3
क्र . सं .पुष्प का भागअन्य विशेषताएँअनुमानित कार्य
1बाह्यदलहाँहाँहाँहाँसामान्यतः हरे तथा सबसे बाहरी चक्र मेंकली की अवस्था में पुष्प की रक्षा करना
2दलहाँहाँहाँहाँप्रायः रंगीन , सुगंधित और आकर्षकपरागणकर्ताओं को आकर्षित करना
3पुंकेसरनहींहाँहाँहाँपरागकोश और तंतु से बना नर जनन भागनर युग्मक वाले परागकण बनाना
4स्त्रीकेसरहाँहाँहाँनहींवर्तिकाग्र , वर्तिका और अंडाशय से बना मादा जनन भागपरागकण ग्रहण करना तथा बीजांडों को धारण करना

निष्कर्ष: सभी पुष्पों में चारों भाग उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। जिन पुष्पों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं, वे उभयलिंगी पुष्प कहलाते हैं। केवल एक जनन भाग वाले पुष्प एकलिंगी होते हैं।

तालिका 11.2 — मटर के पौधे में परागण के अध्ययन के लिए अवलोकन तालिका

5। अलग-अलग उपचार किए गए मटर के पुष्पों में फल निर्माण का अवलोकन कीजिए।

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 4
विधि अथवा उपचारफल निर्माण
पुष्प की कली — मलमल के कपड़े की थैली से लपेटी हुईहाँ
पुंकेसर निकाली गई पुष्प - कली — मलमल की थैली से लपेटी हुईनहीं
पुंकेसर निकाला गया खिला पुष्प — मलमल की थैली से लपेटा हुआहाँ
खिला पुष्प — मलमल की थैली से लपेटा हुआहाँ
खिला पुष्प — मलमल की थैली के बिनाहाँ

निष्कर्ष: केवल उस पुष्प-कली में फल नहीं बनता जिसके पुंकेसर खिलने से पहले निकाल दिए गए थे। खिले हुए पुष्प में पुंकेसर निकालने से पहले स्व-परागण हो चुका हो सकता है। अतः परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का पहुँचना फल निर्माण के लिए आवश्यक है। NCERT अध्याय 11

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 217

1गुड़हल के एक पौधे में परागकण के वर्तिकाग्र पर पहुँचने के पश्चात् परागनलिका वर्तिका से होते हुए आगे बढ़ती है। इसके पश्चात् कौन-सी प्रक्रिया होने वाली है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 5

परागनलिका अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचेगी। नर युग्मक परागनलिका से होकर बीजांड में प्रवेश करेगा और अंड कोशिका से संलयित होगा। इस प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं। निषेचन से युग्मनज बनेगा, जो आगे भ्रूण में विकसित होगा। इसके बाद बीजांड बीज और अंडाशय फल में विकसित हो जाएगा।

2नीचे दिए गए मदार और डेंडेलियन के बीजों के चित्र देखिए। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ये बीज किस प्रकार के बीज-प्रकीर्णन के लिए अनुकूलित हैं?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 6

मदार और डेंडेलियन के बीज वायु द्वारा बीज-प्रकीर्णन के लिए अनुकूलित हैं। ये बीज बहुत हल्के होते हैं तथा इनके ऊपर रेशेदार या बालों जैसी संरचनाएँ होती हैं। ये संरचनाएँ पैराशूट की तरह कार्य करती हैं और बीजों को हवा के साथ दूर तक उड़ने में सहायता करती हैं।

3एक कृषक मक्का की दो किस्मों को एक-दूसरे के पास बोता है, परंतु देखता है कि बीज तभी बनते हैं जब एक किस्म का परागकण दूसरी किस्म के वर्तिकाग्र तक पहुँचता है। यह किस प्रकार का परागण है?

उत्तर:

यह पर-परागण है, क्योंकि परागकण एक पौधे की किस्म के पुष्प से उसी प्रजाति की दूसरी किस्म के पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचता है।

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 218

4बाह्य निषेचन करने वाले जंतु सामान्यतः आंतरिक निषेचन करने वाले जंतुओं की तुलना में अधिक अंडे क्यों देते हैं?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 7

बाह्य निषेचन में अंडे और शुक्राणु शरीर के बाहर, प्रायः जल में छोड़े जाते हैं। अनेक युग्मक जलधारा में बह जाते हैं, शिकारियों द्वारा खा लिए जाते हैं या प्रतिकूल पर्यावरण के कारण नष्ट हो जाते हैं। निषेचन और उत्तरजीविता की संभावना कम होने की पूर्ति के लिए ये जंतु बहुत अधिक संख्या में अंडे उत्पन्न करते हैं।

5जंतुओं में किस निषेचन विधि में युग्मक अधिक सुरक्षित रहते हैं?

उत्तर:

आंतरिक निषेचन में युग्मक अधिक सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि उनका संलयन मादा के शरीर के भीतर होता है। वहाँ उन्हें सूखने, बहने, शिकारियों और प्रतिकूल बाहरी परिस्थितियों से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षा मिलती है।

जिज्ञासा-सूत्र

11। मादाओं में XX और नरों में XY लिंग गुणसूत्र होते हैं। माँ सदैव शिशु को X गुणसूत्र प्रदान करती है और पिता X अथवा Y गुणसूत्र प्रदान करता है। शिशु के लिंग का निर्धारण कौन करता है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 8

जैविक रूप से शिशु के लिंग गुणसूत्रों का निर्धारण पिता के शुक्राणु द्वारा होता है। माँ का अंडाणु हमेशा X गुणसूत्र देता है। यदि X-युक्त शुक्राणु निषेचन करता है तो XX संयोजन बनता है और यदि Y-युक्त शुक्राणु निषेचन करता है तो XY संयोजन बनता है। यह पूर्णतः प्राकृतिक और यादृच्छिक प्रक्रिया है; इसके लिए माँ को उत्तरदायी नहीं माना जा सकता।

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 222

6रवि अचानक देखता है कि उसकी लंबाई तीव्रता से बढ़ रही है, उसके कंधे चौड़े हो रहे हैं और आवाज में परिवर्तन हो रहा है। सोचिए कि वह जीवन की किस अवस्था में प्रवेश कर रहा है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 9

रवि किशोरावस्था अथवा यौवनारंभ में प्रवेश कर रहा है। इस अवस्था में हार्मोनों के प्रभाव से शरीर तेजी से बढ़ता है और द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं। लड़कों में कंधे चौड़े होना, आवाज भारी होना तथा चेहरे और शरीर पर बाल उगना इसके सामान्य संकेत हैं।

7रीना का मासिक धर्म प्रत्येक 28वें दिन पर होता है। उसका पिछला मासिक धर्म 5 मार्च को हुआ था। उसका अगला मासिक धर्म किस दिन होने की सबसे अधिक संभावना है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 10

5 मार्च के 28 दिन बाद 2 अप्रैल की तिथि होगी। इसलिए रीना का अगला मासिक धर्म 2 अप्रैल के आसपास होने की सबसे अधिक संभावना है। वास्तविक मासिक चक्र में कुछ दिनों का सामान्य अंतर हो सकता है।

8एक मानव युग्मनज अभी बना है। इसमें कितने गुणसूत्र हैं?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 11

मानव युग्मनज में 46 गुणसूत्र अर्थात् 23 जोड़े होते हैं। इनमें 23 गुणसूत्र माँ के अंडाणु से और 23 गुणसूत्र पिता के शुक्राणु से प्राप्त होते हैं।

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 223

9यौन क्रिया के समय यौन संचारित संक्रमणों के प्रसार को कम करने के लिए कौन-से सुरक्षात्मक साधनों का उपयोग किया जा सकता है?

उत्तर:

यौन संचारित संक्रमणों के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए कंडोम अथवा योनि आवरण जैसे अवरोधक साधनों का सही और नियमित उपयोग किया जा सकता है। ये संक्रमित शारीरिक द्रवों के प्रत्यक्ष संपर्क को कम करते हैं। संक्रमण की आशंका होने पर योग्य चिकित्सक से जाँच और उपचार कराना भी आवश्यक है।

10यदि कोई दंपत्ति मुँह से ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करता है, किंतु कंडोम का नहीं, तो कौन-से जोखिम बने रहते हैं और क्यों?

उत्तर:

गर्भनिरोधक गोलियाँ मुख्यतः अंडोत्सर्ग को प्रभावित करके गर्भधारण का जोखिम कम करती हैं, लेकिन वे यौन संचारित संक्रमणों से सुरक्षा नहीं देतीं। कंडोम का उपयोग न करने पर एचआईवी, सिफिलिस, सुजाक और हर्पीज जैसे संक्रमणों का जोखिम बना रहता है, क्योंकि दोनों व्यक्तियों के शारीरिक द्रवों के संपर्क को रोकने वाला कोई भौतिक अवरोध उपस्थित नहीं होता।

सोचिए और बताइए — पृष्ठ 224

11अनेक जंतुओं में बच्चे जन्म के तुरंत बाद चल सकते हैं अथवा भोजन खोज सकते हैं। इसके विपरीत मानव शिशु लंबे समय तक पूर्णतः दूसरों पर निर्भर रहते हैं। एक जाति के रूप में मनुष्यों में इसके क्या लाभ और हानियाँ हो सकती हैं?

उत्तर:

मानव शिशु की लंबी निर्भरता उसके मस्तिष्क के व्यापक विकास के लिए समय प्रदान करती है। इस अवधि में वह भाषा, सामाजिक व्यवहार, समस्याओं का समाधान, संस्कृति और विभिन्न कौशल सीखता है। लंबे समय तक देखभाल से माता-पिता तथा शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी मजबूत होता है। इसकी हानि यह है कि शिशु लंबे समय तक असुरक्षित रहता है और भोजन, सुरक्षा तथा देखभाल के लिए परिवार पर निर्भर होता है। माता-पिता को उसके पालन-पोषण में अधिक समय, ऊर्जा और संसाधन लगाने पड़ते हैं।

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

1एक पुष्प के परागकोश को परिपक्व होने से पूर्व ही हटा दिया जाता है। इसके पश्चात् उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के परागकण उसके वर्तिकाग्र पर छिड़के जाते हैं और बीज बनते हैं। यहाँ कौन-सी प्रक्रिया सुनिश्चित होती है?

उत्तर:

(i) स्व-परागण(ii) पर-परागण(iii) निषेचन(iv) ऊतक संवर्धन

सही विकल्प है—(ii) पर-परागण।

अध्याय 11 का चित्र 12

परागकोश को परिपक्व होने से पहले हटाने से पुष्प का अपने ही परागकणों द्वारा परागण नहीं हो सकता। जब उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के परागकण वर्तिकाग्र पर डाले जाते हैं, तब पर-परागण सुनिश्चित होता है।

2पौधों में लैंगिक जनन के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए—

उत्तर:

(i) वर्तिकाग्र पर पराग का अंकुरण(ii) निषेचन(iii) परागण(iv) युग्मनज का निर्माण

सही क्रम है—

(iii) परागण → (i) वर्तिकाग्र पर पराग का अंकुरण → (ii) निषेचन → (iv) युग्मनज का निर्माण

परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर परागनलिका बनाता है। नर युग्मक बीजांड तक पहुँचकर मादा युग्मक से संलयित होता है। इस निषेचन के फलस्वरूप युग्मनज बनता है।

3नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए।

उत्तर:

अभिकथन— निषेचन के पश्चात् निर्मित युग्मनज तत्काल गर्भाशय भित्ति से जुड़ जाता है।कारण— गर्भाशय की भित्ति सदैव युग्मनज को ग्रहण करने के लिए तैयार रहती है।

अभिकथन और कारण दोनों असत्य हैं। अतः दिए गए विकल्पों में कोई भी पूर्णतः सही नहीं है।

अध्याय 11 का चित्र 13

निषेचन के बाद युग्मनज तुरंत गर्भाशय की भित्ति से नहीं जुड़ता। वह अंडवाहिनी से गुजरते हुए बार-बार विभाजित होता है और कुछ दिनों बाद भ्रूण के रूप में गर्भाशय की तैयार भित्ति में स्थापित होता है। गर्भाशय की भित्ति भी सदैव तैयार नहीं रहती; वह मासिक चक्र के दौरान हार्मोनों के प्रभाव से मोटी होती है।

4अलैंगिक जनन से उत्पन्न संततियाँ आनुवंशिक रूप से जनक के समान क्यों होती हैं?

उत्तर:

अलैंगिक जनन में केवल एक जनक भाग लेता है तथा युग्मकों का निर्माण और संलयन नहीं होता। नई संतति समसूत्री कोशिका विभाजन द्वारा बनती है, जिसमें जनक के आनुवंशिक पदार्थ की प्रतिलिपि तैयार होती है। इसलिए संततियाँ जनक के लगभग समान होती हैं और उन्हें क्लोन कहा जाता है। केवल उत्परिवर्तन या प्रतिलिपिकरण की त्रुटि से थोड़ी विविधता आ सकती है।

5गर्भावस्था के दौरान मासिक धर्म क्यों रुक जाता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 14

निषेचन के बाद भ्रूण गर्भाशय की मोटी भित्ति में स्थापित हो जाता है। गर्भावस्था के हार्मोन गर्भाशय की भित्ति को बनाए रखते हैं, जिससे भ्रूण को पोषण और सुरक्षा मिलती है। चूँकि गर्भाशय की भित्ति का विघटन और निष्कासन नहीं होता, इसलिए मासिक धर्म रुक जाता है। इस अवधि में सामान्यतः अंडोत्सर्ग भी नहीं होता।

6दिन के समय खिलने वाले पुष्पों की तुलना में रात में खिलने वाले पुष्प सफेद या हल्के रंग के क्यों होते हैं?

उत्तर:

सफेद या हल्के रंग के पुष्प कम प्रकाश अथवा चाँदनी में आसानी से दिखाई देते हैं। इससे पतंगे और चमगादड़ जैसे रात्रिचर परागणकर्ता उनकी ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे पुष्पों में प्रायः तेज सुगंध और पर्याप्त मकरंद भी होता है, जो अँधेरे में परागणकर्ताओं को पुष्प तक पहुँचने में सहायता करता है।

7लैंगिक रूप से उत्पन्न पौधों की तुलना में कायिक रूप से प्रवर्धित पौधे रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 15

कायिक प्रवर्धन से बने पौधे आनुवंशिक रूप से लगभग एक जैसे होते हैं। उनमें रोग-प्रतिरोध संबंधी विविधता बहुत कम होती है। इसलिए यदि कोई रोगजनक एक पौधे को संक्रमित कर सकता है, तो वह अन्य समान पौधों को भी तेजी से संक्रमित कर सकता है। लैंगिक जनन से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जिसके कारण कुछ पौधे रोग-प्रतिरोधी हो सकते हैं।

8यदि किसी प्रकार के पौधे में सभी पुष्प केवल स्व-परागण करने में सक्षम हों तो आगे आने वाली अनेक पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

लगातार स्व-परागण होने से नई आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होने की संभावना कम हो जाएगी, क्योंकि प्रत्येक पीढ़ी में उसी पौधे के नर और मादा युग्मकों का संलयन होगा। अनेक पीढ़ियों के बाद पौधों में समयुग्मजता बढ़ेगी और वे आनुवंशिक रूप से अधिक समान हो जाएँगे। हानिकारक अप्रभावी लक्षण भी व्यक्त हो सकते हैं। इससे बदलते पर्यावरण, नए रोगों और कीटों के प्रति अनुकूलन की क्षमता घट सकती है। नई विविधता मुख्यतः उत्परिवर्तन से ही आ सकेगी।

9एक कृषक बड़ी संख्या में आनुवंशिक रूप से एक जैसे पौधे शीघ्रता से उगाना चाहता है। इसके लिए उपयुक्त जनन विधियों का सुझाव दीजिए और समझाइए कि वे प्रभावी क्यों हैं?

उत्तर:

कृषक को निम्नलिखित विधियाँ अपनानी चाहिए—

अध्याय 11 का चित्र 16
  • कायिक प्रवर्धन: तना-कर्तन, दाब-कलम, रोपण, कंद या प्रकंद द्वारा कम समय में अनेक पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
  • ऊतक संवर्धन: पौधे के छोटे ऊतक को पोषक माध्यम में उगाकर बहुत बड़ी संख्या में पौधे बनाए जा सकते हैं।

इन विधियों में एक ही जनक के कायिक भाग प्रयुक्त होते हैं और युग्मकों का संलयन नहीं होता। इसलिए तैयार पौधे आनुवंशिक रूप से लगभग समान होते हैं। इनमें जनक के वांछित गुण सुरक्षित रहते हैं और कम स्थान तथा समय में बड़ी संख्या में पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं।

10सुरेश परागकणों के अंकुरण का अध्ययन करने के लिए विभिन्न शर्करा सांद्रता (0%, 2.5%, 5%, 7.5%, 10%) में परागकण लेकर स्लाइड तैयार करता है।

उत्तर:

(i) इस व्यवस्था के उपयोग से किन विभिन्न परिकल्पनाओं की जाँच की जा सकती है?

इस प्रयोग द्वारा निम्नलिखित परिकल्पनाओं की जाँच की जा सकती है—

  • शर्करा की सांद्रता परागकणों के अंकुरण को प्रभावित करती है।
  • किसी विशेष शर्करा सांद्रता पर अंकुरण सर्वाधिक होता है।
  • शर्करा की बहुत कम या बहुत अधिक सांद्रता अंकुरण को घटा सकती है।
  • शर्करा की सांद्रता परागनलिका की लंबाई अथवा वृद्धि-दर को प्रभावित करती है।

यहाँ शर्करा की सांद्रता स्वतंत्र चर तथा अंकुरित परागकणों का प्रतिशत और परागनलिका की लंबाई आश्रित चर होंगे।

(ii) इस व्यवस्था में कौन-से मानदंडों को समान रखा जाना चाहिए?

सभी स्लाइडों में पौधे की प्रजाति, पुष्प और परागकणों की परिपक्वता, परागकणों की संख्या, विलयन की मात्रा, माध्यम का pH, तापमान, आर्द्रता, प्रकाश, स्लाइड और कवर-स्लिप का प्रकार तथा अंकुरण के लिए दिया गया समय समान होना चाहिए। सभी स्लाइडों का अवलोकन समान आवर्धन पर किया जाना चाहिए। केवल शर्करा की सांद्रता बदली जानी चाहिए।

11नीचे दिए गए चित्र को देखिए और दिए गए संकेतों के आधार पर पता लगाइए कि इन पुष्पों में किस प्रकार का परागण हुआ होगा।

उत्तर:
पौधाचित्र में दिया गया संकेतसंभावित परागण
टमाटरपुंकेसर वर्तिकाग्र को ढक लेते हैं ।स्व - परागण , क्योंकि उसी पुष्प के परागकण सरलता से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं ।
गेहूँपुष्प परागण के पश्चात् खुलते हैं ।स्व - परागण , क्योंकि पुष्प के खुलने से पहले ही परागण हो जाता है ।
पपीतानर और मादा पुष्प प्रायः अलग - अलग पौधों पर होते हैं ।पर - परागण , क्योंकि नर पौधे के परागकणों को मादा पौधे के पुष्प तक पहुँचना पड़ता है ।
अध्याय 11 का चित्र 17
अध्याय 11 का चित्र 18
अध्याय 11 का चित्र 19

12सेब के दो उद्यानों—स्थान ‘क’ में प्राकृतिक परागण और स्थान ‘ख’ में मधुमक्खी पालन—से प्राप्त आँकड़ों का अध्ययन कीजिए।

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 20

(i) शोधकर्ता-कृषक समूह ने इस शोध कार्य के लिए किन परिकल्पनाओं पर विचार किया होगा?

शोधकर्ता समूह ने संभवतः यह परिकल्पना बनाई होगी कि सेब के उद्यान में मधुमक्खियों की कॉलोनी रखने से पुष्पों का परागण अधिक प्रभावी होगा। इससे फल लगने का प्रतिशत बढ़ेगा, समय से पहले फल गिरने का प्रतिशत घटेगा और सेब की कुल उपज बढ़ेगी। साथ ही, मिश्रित कृषि द्वारा कृषकों को शहद का अतिरिक्त उत्पादन भी प्राप्त होगा।

(ii) प्रयोग में कौन-कौन से विभिन्न मानदंड हैं?

  • स्वतंत्र मानदंड: परागण की व्यवस्था—केवल प्राकृतिक परागण अथवा मधुमक्खियों की कॉलोनी के साथ परागण।
  • आश्रित मानदंड: फल लगने का प्रतिशत, फल गिरने का प्रतिशत और सेब की उपज।
  • नियंत्रित मानदंड: सेब की किस्म, पौधों की आयु और संख्या, उद्यान का क्षेत्रफल, सिंचाई, खाद, मिट्टी, कीटनाशक तथा अन्य कृषि परिस्थितियाँ यथासंभव समान होनी चाहिए।

(iii) सेब की अधिक उपज के संदर्भ में परीक्षणार्थ लगाए गए दोनों उद्यानों ‘क’ और ‘ख’ के आँकड़ों की तुलना और विश्लेषण कीजिए।

चित्र 11.24 के अनुसार स्थान ‘क’ में प्राकृतिक परागण से लगभग 26% फल लगे, जबकि मधुमक्खियों की कॉलोनी वाले स्थान ‘ख’ में लगभग 40% फल लगे। इस प्रकार स्थान ‘ख’ में फल लगना लगभग 14 प्रतिशत-बिंदु अधिक था। स्थान ‘क’ में लगभग 35% फल गिरे, जबकि स्थान ‘ख’ में फल गिरना केवल लगभग 8% रहा। अतः मधुमक्खियों वाले उद्यान में अधिक फल बने और उनमें से बहुत कम समय से पहले गिरे। दोनों परिणाम स्थान ‘ख’ में सेब की अधिक उपज दर्शाते हैं।

(iv) अपने विश्लेषण के आधार पर इन आँकड़ों से आपने क्या निष्कर्ष निकाला?

आँकड़ों से निष्कर्ष निकलता है कि मधुमक्खियों की कॉलोनी रखने से सेब के पुष्पों का परागण अधिक सफल हुआ। इससे फल लगने का प्रतिशत बढ़ा और फल गिरने का प्रतिशत काफी घट गया। इसलिए मधुमक्खी पालन के साथ सेब की खेती उपज बढ़ाने की प्रभावी मिश्रित कृषि तकनीक है। इससे कृषकों को सेब के साथ शहद का अतिरिक्त उत्पादन और आय भी प्राप्त होती है।

13एक विद्यार्थी का दावा है कि ‘मानवों में अंडोत्सर्ग सदैव मासिक धर्म के 14वें दिन होता है।’ कथन की विवेचनात्मक रूप से जाँच कीजिए और बताइए कि दावा सही है या नहीं। अपने उत्तर के लिए कम-से-कम दो कारण दीजिए।

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 21

विद्यार्थी का दावा सही नहीं है। अंडोत्सर्ग का 14वाँ दिन केवल 28 दिन के नियमित मासिक चक्र का एक अनुमान है।

  • अलग-अलग व्यक्तियों के मासिक चक्र की अवधि अलग होती है और एक ही व्यक्ति में भी चक्र की अवधि बदल सकती है।
  • अंडोत्सर्ग सामान्यतः अगले मासिक धर्म से लगभग 14 दिन पहले होता है, न कि प्रत्येक स्थिति में पिछले मासिक धर्म के ठीक 14वें दिन।
  • तनाव, बीमारी, पोषण, किशोरावस्था और हार्मोन संबंधी परिवर्तन अंडोत्सर्ग के समय को प्रभावित कर सकते हैं।

अतः अंडोत्सर्ग का दिन निश्चित नहीं होता।

खोज जारी है...

31। क्या अमीबा या यीस्ट जैसे एककोशिकीय जीव में कभी ‘जरण’ (ageing) होता है? जब यह विभाजित होता है तो लगभग दो समान प्रतियाँ उत्पन्न करता है। तो क्या उनमें कोई जरण भी होता है?

उत्तर:
अध्याय 11 का चित्र 22

एककोशिकीय जीवों में जरण बहुकोशिकीय जीवों से अलग प्रकार का होता है। अमीबा के द्विखंडन में कोई स्पष्ट जनक जीव शेष नहीं रहता, परंतु पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त कोशिकीय सामग्री दोनों नई कोशिकाओं में सदैव बिल्कुल समान रूप से बँटे, यह आवश्यक नहीं है। क्षति का संचय किसी कोशिका-वंश की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।

यीस्ट में कलिकाजनन असमान होता है। बड़ी मातृ कोशिका पर प्रत्येक विभाजन के बाद कलिका-चिह्न बनते हैं और वह सीमित बार ही विभाजित हो सकती है। नई पुत्री कोशिका अपेक्षाकृत युवा होती है। इसलिए एककोशिकीय जीव अमर नहीं माने जाते; उनमें जरण कोशिकीय क्षति, विभाजन-क्षमता और परिस्थितियों के आधार पर दिखाई दे सकता है।

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