कक्षा 9 हिंदी · गंगा · अध्याय 7

मैं और मेरा देश

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 7 मैं और मेरा देश का सारांश, व्याख्या, शब्दार्थ, NCERT प्रश्न उत्तर, भाषा-अभ्यास और वीडियो समाधान।

वीडियो पाठसारांशव्याख्याशब्दार्थसंपूर्ण प्रश्नोत्तर
लेखक / कवि
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
पुस्तक
गंगा
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ
120–138
विधा
गद्य
अध्याय 7 के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री

यह प्रेरक निबंध बताता है कि नागरिक और देश का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है तथा छोटे-से-छोटा जिम्मेदार कार्य भी राष्ट्र-निर्माण में योगदान देता है।

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सारांश, व्याख्या और महत्वपूर्ण अध्ययन-बिंदु

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लेखक: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ यह अध्याय व्यक्ति और देश के गहरे संबंध को समझाने वाला प्रेरणात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने बताया है कि नागरिक और देश अलग-अलग नहीं हैं। नागरिक के अच्छे-बुरे कार्यों का प्रभाव देश की प्रतिष्ठा पर पड़ता है, और देश के सम्मान या अपमान का प्रभाव नागरिक पर पड़ता है।

1. लेखक परिचय

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार थे। उनका जन्म 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था। उन्होंने ‘नया जीवन’ और ‘विकास’ पत्रों का संपादन किया। वे स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे, इसलिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — दीप जले शंख बजे, जिंदगी मुसकरायी, बाजे पायलिया के घुँघरू, जिंदगी लहलहाई, कारवाँ आगे बढ़े, माटी हो गई सोना आदि। उन्हें साहित्यिक योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका निधन 1995 ई. में हुआ।

2. पाठ का प्रकार

यह पाठ एक निबंध है। इस निबंध की शैली प्रश्नोत्तर और संवादात्मक शैली है। लेखक स्वयं प्रश्न उठाते हैं और फिर उनका उत्तर देते हैं। इस कारण पाठ रोचक और विचारपूर्ण बन जाता है।

3. पाठ का केंद्रीय भाव

इस निबंध का मुख्य भाव यह है कि व्यक्ति और देश का संबंध अविभाज्य है। लेखक कहते हैं कि मनुष्य केवल अपने घर, पड़ोस और नगर से ही पूरा नहीं होता। उसकी पूर्णता उसके देश से जुड़कर ही होती है।

लेखक के अनुसार —

मैं और मेरा देश दो अलग चीजें नहीं हैं।

अर्थात, नागरिक का सम्मान देश के सम्मान से जुड़ा है, और देश का सम्मान नागरिकों के आचरण से जुड़ा है।

4. सरल सारांश

लेखक कहते हैं कि उनका जन्म घर में हुआ, वे पड़ोस में खेले, नगर में घूमे और समाज से बहुत कुछ सीखा। वे सोचते थे कि घर, पड़ोस और नगर के कारण उनका जीवन पूर्ण हो गया है। लेकिन एक दिन उनके विचारों में बड़ा परिवर्तन आया।

यह परिवर्तन लाला लाजपत राय के अनुभव से हुआ। लाला लाजपत राय विदेश गए थे। वहाँ उन्होंने अनुभव किया कि भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर लगा रहता था। इससे लेखक को समझ आया कि यदि व्यक्ति के पास संसार की सारी सुख-सुविधाएँ हों, लेकिन उसका देश पराधीन या अपमानित हो, तो वह व्यक्ति भी पूर्ण सम्मान का अनुभव नहीं कर सकता।

लेखक बताते हैं कि हर नागरिक अपने देश के लिए कुछ कर सकता है। देश सेवा केवल बड़े वैज्ञानिक, धनवान या नेता ही नहीं करते। सामान्य नागरिक भी अपने छोटे-छोटे अच्छे कार्यों से देश का गौरव बढ़ा सकता है।

इस विचार को समझाने के लिए लेखक दो घटनाएँ बताते हैं। पहली घटना जापान की है। स्वामी रामतीर्थ को जापान में फल नहीं मिले, तो उनके मुँह से निकला कि शायद जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। एक जापानी युवक ने यह सुनकर तुरंत ताजे फल लाकर दिए और मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि वे अपने देश जाकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इस घटना से युवक का देश-प्रेम और देश-गौरव प्रकट होता है।

दूसरी घटना में एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान के पुस्तकालय से पुस्तक के दुर्लभ चित्र निकाल लिए। उसके इस गलत काम के कारण उसके देश के लोगों को भी उस पुस्तकालय में प्रवेश से रोक दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि एक नागरिक का गलत काम पूरे देश की छवि को खराब कर सकता है।

लेखक आगे कहते हैं कि किसी काम की महानता उसके आकार में नहीं, बल्कि उसके पीछे की भावना में होती है। कमालपाशा और पंडित नेहरू से जुड़ी घटनाएँ इसी बात को सिद्ध करती हैं। एक छोटा-सा उपहार भी यदि प्रेम और सम्मान की भावना से दिया गया हो, तो वह बहुत मूल्यवान बन जाता है।

लेखक के अनुसार हमारे देश को दो चीजों की सबसे अधिक आवश्यकता है — शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध। शक्ति-बोध का अर्थ है देश के प्रति आत्मविश्वास और सामूहिक मानसिक बल। सौंदर्य-बोध का अर्थ है स्वच्छता, सभ्यता, सुरुचि और अच्छा आचरण। यदि हम सार्वजनिक स्थानों को गंदा करते हैं, देश की निंदा करते हैं या अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं, तो देश की शक्ति और सुंदरता को चोट पहुँचाते हैं।

अंत में लेखक चुनाव को देश की ऊँचाई और हीनता की कसौटी बताते हैं। वे कहते हैं कि सही उम्मीदवार को वोट देना नागरिक का कर्तव्य है। साथ ही, नागरिक का यह अधिकार भी है कि उसका मत लिए बिना कोई व्यक्ति शासन की कुर्सी पर न बैठे।

इस प्रकार यह निबंध हमें सिखाता है कि देश का सम्मान नागरिकों के अच्छे आचरण, कर्तव्य-पालन, स्वच्छता, सही मतदान और देश-प्रेम से बढ़ता है।

5. मुख्य घटनाएँ और उनका महत्व

घटना 1: लाला लाजपत राय का अनुभव

लाला लाजपत राय विदेशों में गए, लेकिन भारत की पराधीनता की लज्जा उन्हें हर जगह महसूस हुई। इससे लेखक को समझ आया कि देश का सम्मान व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा होता है।

महत्व: देश की स्वतंत्रता और सम्मान के बिना व्यक्ति भी पूर्ण गौरव का अनुभव नहीं कर सकता।

घटना 2: जापानी युवक और फल

स्वामी रामतीर्थ ने कहा कि जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते। यह सुनकर एक जापानी युवक ताजे फल लाया और मूल्य में केवल यह माँगा कि वे अपने देश में जाकर जापान की बुराई न करें।

महत्व: यह घटना बताती है कि सच्चा नागरिक अपने देश की छवि और सम्मान के प्रति बहुत सजग रहता है।

घटना 3: पुस्तकालय से चित्र चुराने वाला विद्यार्थी

एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान के पुस्तकालय से पुस्तक के दुर्लभ चित्र निकाल लिए। उसके कारण उसके देश के सभी लोगों को पुस्तकालय में प्रवेश से रोक दिया गया।

महत्व: एक व्यक्ति का गलत आचरण पूरे देश को बदनाम कर सकता है।

घटना 4: कमालपाशा और किसान का शहद

एक बूढ़ा किसान कमालपाशा को जन्मदिन पर थोड़ा-सा शहद देने आया। कमालपाशा ने उस छोटे उपहार को बहुत सम्मान से स्वीकार किया क्योंकि उसमें किसान का सच्चा प्रेम था।

महत्व: कार्य की महानता उसके आकार में नहीं, भावना में होती है।

घटना 5: पंडित नेहरू और किसान की खाट

एक किसान रंगीन सुतलियों से बनी खाट पंडित नेहरू को भेंट करने आया। नेहरू जी ने उसे स्वीकार किया और अपने हस्ताक्षर वाला फोटो उसे दिया।

महत्व: सच्ची भावना से दिया गया छोटा उपहार भी बहुत मूल्यवान होता है।

6. पाठ के प्रमुख विचार

1. व्यक्ति और देश अलग नहीं हैं

लेखक का मानना है कि नागरिक और देश का संबंध बहुत गहरा है। नागरिक की प्रतिष्ठा देश से जुड़ी होती है और देश की प्रतिष्ठा नागरिकों से।

2. हर नागरिक देश के लिए महत्वपूर्ण है

देश सेवा केवल सैनिक, नेता, वैज्ञानिक या धनवान ही नहीं करते। किसान, मजदूर, विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार और सामान्य नागरिक भी अपने काम से देश की प्रगति में योगदान देते हैं।

3. छोटे कार्य भी महान हो सकते हैं

यदि किसी कार्य के पीछे अच्छी भावना है, तो छोटा कार्य भी महान बन जाता है।

4. नागरिक का आचरण देश की छवि बनाता है

स्वच्छता, शिष्ट भाषा, अनुशासन, ईमानदारी और सही व्यवहार देश की सुंदर छवि बनाते हैं।

5. देश को शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध चाहिए

देश की उन्नति के लिए नागरिकों में आत्मविश्वास, देश-गौरव, स्वच्छता और सुरुचि होना आवश्यक है।

6. सही मतदान नागरिक का कर्तव्य है

चुनाव में योग्य व्यक्ति को वोट देना नागरिक का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

7. महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
संचितइकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ
मानसमन, चित्त
तेजस्वीप्रभावशाली, प्रतापी, शक्तिशाली
ठसकशान, ऐंठ, नखरा
धनिकधनवान व्यक्ति
रसदभोजन-सामग्री, राशन
दाद देनाप्रशंसा करना
साक्षीगवाह
लांछितकलंकित, दोषयुक्त
हँडियामिट्टी का छोटा बर्तन
सुतलीसन या पटसन से बनी डोरी
चौपालगाँव में बैठने की सार्वजनिक जगह
सघनघना
तरेड़दरार
ज़ीनासीढ़ी
पराधीनतागुलामी
गौरवसम्मान, गर्व
हीनताकमी, नीचता का भाव
शक्ति-बोधअपनी शक्ति और आत्मविश्वास का ज्ञान
सौंदर्य-बोधसुंदरता, स्वच्छता और सुरुचि की समझ
कुरुचिखराब रुचि
सुरुचिअच्छी रुचि
मतवोट
कसौटीजाँचने का आधार
अपमानअनादर
सम्मानआदर
नागरिकदेश का निवासी
कर्तव्यजो काम करना चाहिए
अधिकारजो प्राप्त करने का हक हो

8. कठिन पंक्तियों का सरल अर्थ

पंक्ति 1: “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई।”

सरल अर्थ: लेखक अब तक अपने जीवन को पूर्ण और सुखी मानते थे, लेकिन एक विचार ने उनके मन को झकझोर दिया। उन्हें लगा कि केवल घर, पड़ोस और नगर से जीवन पूर्ण नहीं होता; देश का सम्मान भी आवश्यक है।

पंक्ति 2: “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।”

सरल अर्थ: नागरिक और देश एक-दूसरे से जुड़े हैं। नागरिक का सम्मान देश से है और देश की प्रतिष्ठा नागरिकों से बनती है।

पंक्ति 3: “महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है।”

सरल अर्थ: कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि वह अच्छी भावना से किया गया है, तो वह महान है।

पंक्ति 4: “जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

सरल अर्थ: जीवन में केवल सामने आकर लड़ना ही योगदान नहीं है। हर व्यक्ति अपनी भूमिका निभाकर समाज और देश की मदद कर सकता है।

पंक्ति 5: “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है।”

सरल अर्थ: देश की स्थिति नागरिक को प्रभावित करती है, और नागरिक के अच्छे-बुरे काम देश की छवि को प्रभावित करते हैं।

9. शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध

शक्ति-बोध

शक्ति-बोध का अर्थ है — देश और समाज के प्रति आत्मविश्वास, साहस और सामूहिक मानसिक शक्ति।

शक्ति-बोध को चोट पहुँचाने वाले काम: देश की अनावश्यक बुराई करना, दूसरों के सामने अपने देश को हीन दिखाना, निराशा फैलाना, गलत तुलना करना।

शक्ति-बोध बढ़ाने वाले काम: देश की उपलब्धियों पर गर्व करना, समस्याओं का समाधान सोचना, ईमानदारी से काम करना, दूसरों को प्रेरित करना।

सौंदर्य-बोध

सौंदर्य-बोध का अर्थ है — स्वच्छता, सुंदरता, सभ्यता और अच्छे आचरण की समझ।

सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाने वाले काम: सड़क पर कूड़ा फेंकना, दीवारों पर लिखना, सार्वजनिक जगहों पर गंदगी करना, गंदी भाषा बोलना, धक्का-मुक्की करना।

सौंदर्य-बोध बढ़ाने वाले काम: स्वच्छता रखना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, शिष्ट व्यवहार करना, कतार में चलना, दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना।

10. पाठ से मिलने वाली शिक्षाएँ

देश और नागरिक का संबंध बहुत गहरा होता है।

हर नागरिक अपने आचरण से देश की छवि बनाता है।

देश की बुराई करने के बजाय उसके सुधार में योगदान देना चाहिए।

छोटे-छोटे अच्छे काम भी देश सेवा हैं।

सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।

सही उम्मीदवार को वोट देना नागरिक का कर्तव्य है।

अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।

देश का सम्मान अपने सम्मान के समान समझना चाहिए।

11. परीक्षा के लिए उपयोगी बिंदु

अध्याय का नाम: मैं और मेरा देश लेखक: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ विधा: निबंध शैली: प्रश्नोत्तर / संवादात्मक शैली मुख्य विषय: नागरिक और देश का संबंध मुख्य संदेश: नागरिक का आचरण देश के सम्मान से जुड़ा है। मुख्य उदाहरण: लाला लाजपत राय, जापानी युवक, पुस्तकालय की घटना, कमालपाशा, पंडित नेहरू मुख्य मूल्य: देश-प्रेम, जिम्मेदारी, स्वच्छता, कर्तव्य-पालन, सही मतदान, सद्भावना

12. पात्र और व्यक्तित्व

लेखक

विचारशील, देशभक्त, आत्मचिंतन करने वाले और समाज को जागरूक करने वाले व्यक्ति।

लाला लाजपत राय

तेजस्वी स्वतंत्रता सेनानी, जिनके अनुभव ने लेखक के मन में राष्ट्रीय चेतना जगाई।

जापानी युवक

देश-प्रेमी, सजग, स्वाभिमानी और अपने देश की छवि के प्रति जिम्मेदार।

चित्र चुराने वाला विद्यार्थी

लापरवाह और गलत आचरण करने वाला विद्यार्थी, जिसके कारण उसके देश की बदनामी हुई।

कमालपाशा

जनभावना का सम्मान करने वाले महान नेता।

पंडित नेहरू

साधारण नागरिक की भावना को महत्व देने वाले संवेदनशील नेता।

13. व्याकरण संबंधी बातें

1. संदर्भ में शब्द

कुछ शब्द संदर्भ के अनुसार अलग-अलग अर्थ देते हैं।

दरार: दीवार की दरार — चटक या टूटन संबंधों में दरार — संबंधों में दूरी

गाँठ: धागे की गाँठ — बाँधी हुई जगह देश और नागरिक की गाँठ — गहरा संबंध

पानी: पीने का पानी — जल पानी-पानी होना — शर्मिंदा होना पानी उतरना — सम्मान कम होना

2. शब्द-युग्म

पाठ में कई शब्द-युग्म मिलते हैं, जैसे —

शब्द-युग्मअर्थ
ममता-दुलारस्नेह और प्यार
भरा-पूरापूर्ण, संपन्न
घर-पड़ोसघर और आसपास का क्षेत्र
दाल-रोटीसामान्य जीवन-यापन
छोटे-छोटेबहुत छोटे
बुरे-भलेअच्छे-बुरे
ऊँच-नीचश्रेष्ठता और हीनता

3. उपसर्ग और प्रत्यय

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णतापूर्णता
अलौकिकलौकिक
निरक्षरतानिरअक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअनआवश्यक
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमान

अध्याय 7 — मैं और मेरा देश

अभ्यास और पुनरावृत्ति

संपूर्ण प्रश्नोत्तर और भाषा-अभ्यास

प्रश्न, उत्तर, तर्क, काव्य-बोध, व्याकरण तथा गतिविधियाँ मूल अध्ययन सामग्री के क्रम में दी गई हैं।

मौलिक अध्ययन-मार्गदर्शिका: NCERT Hindi Tutor · ncerthinditutor.com

प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

उत्तर

सही विकल्प — (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार

तर्क

लेखक पहले सोचते थे कि घर, पड़ोस और नगर के कारण उनका जीवन पूर्ण हो गया है। लेकिन लाला लाजपत राय के अनुभव को सुनकर उन्हें लगा कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान के बिना व्यक्ति की पूर्णता अधूरी है। इसलिए यहाँ ‘दरार’ का अर्थ उनकी पूर्णता की भावना पर चोट लगना है। पाठ में लेखक के मन में आए इस “मानसिक भूकंप” का वर्णन भी इसी भाव को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

उत्तर

सही विकल्प — (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का

तर्क

लेखक ऐसे प्रश्नों को महत्त्वपूर्ण मानते हैं जिनसे विचार खुलते हैं और बात आगे बढ़ती है। “क्या कोई भूकंप आया था?” जैसे प्रश्न लेखक को अपने विचार विस्तार से बताने का अवसर देते हैं। इसलिए उन्हें बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है।

प्रश्न 3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—

उत्तर

सही विकल्प — (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

तर्क

पराधीनता का सबसे बड़ा दुख यह था कि भारतीयों का आत्मसम्मान दबाया जाता था। लाला लाजपत राय विदेशों में भी भारत की गुलामी की लज्जा अनुभव करते थे। इससे स्पष्ट है कि गुलामी केवल राजनीतिक समस्या नहीं थी, बल्कि वह व्यक्ति के सम्मान और गौरव को भी चोट पहुँचाती थी।

प्रश्न 4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—

उत्तर

सही विकल्प — (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

तर्क

लेखक कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पास संसार के सारे साधन हों, पर उसका देश गुलाम या हीन स्थिति में हो, तो वह व्यक्ति सच्चे गौरव का अनुभव नहीं कर सकता। देश का सम्मान व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा होता है।

प्रश्न 5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

उत्तर

सही विकल्प — (क) देश और नागरिक

तर्क

लेखक जापानी युवक और पुस्तकालय वाली घटना के माध्यम से दिखाते हैं कि नागरिक का आचरण देश की छवि से जुड़ा होता है। अच्छे काम से देश का गौरव बढ़ता है और बुरे काम से देश की बदनामी होती है। इसलिए यहाँ ‘गाँठ’ देश और नागरिक के संबंध को बाँधती है।

प्रश्न 6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

उत्तर

सही विकल्प — (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध

तर्क

पूरे निबंध में लेखक ने यही समझाया है कि व्यक्ति और देश अलग-अलग नहीं हैं। नागरिक का सम्मान देश के सम्मान से जुड़ा है और देश का सम्मान नागरिकों के व्यवहार से बनता है। इसलिए इस निबंध का मुख्य भाव व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध है।

मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर

स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले जापानी युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध हो गए क्योंकि उस युवक ने फलों का मूल्य धन में नहीं माँगा। उसने केवल यह कहा कि वे अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इससे उस युवक का देश-प्रेम, स्वाभिमान और अपने देश की प्रतिष्ठा के प्रति सजगता प्रकट होती है। स्वामी रामतीर्थ ने समझ लिया कि वह युवक अपने छोटे-से काम से भी अपने देश का गौरव बचाना चाहता है। इसलिए वे उसके उत्तर से प्रभावित और मुग्ध हो गए।

प्रश्न 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर

जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में धन नहीं माँगा। उसने केवल यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।

उस युवक के व्यक्तित्व की छवि एक सच्चे देशभक्त, स्वाभिमानी, सजग और जिम्मेदार नागरिक की उभरती है। वह अपने देश की छोटी-सी आलोचना भी सहन नहीं कर सका। उसने अपने काम से सिद्ध किया कि देश का सम्मान केवल बड़े-बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे आचरणों से भी बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे कई तर्क हैं। व्यक्ति जिस देश में जन्म लेता है, वही देश उसे भाषा, संस्कृति, शिक्षा, सुरक्षा और पहचान देता है। इसलिए व्यक्ति का सम्मान देश के सम्मान से जुड़ा होता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय विद्यार्थी विदेश में अच्छा कार्य करता है, तो लोग कहते हैं कि भारत का विद्यार्थी बहुत योग्य है। इससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ती है। लेकिन यदि कोई नागरिक विदेश में गलत काम करता है, तो उसके कारण उसके देश की छवि भी खराब होती है।

इसी तरह, यदि हम अपने शहर को साफ रखते हैं, नियमों का पालन करते हैं और दूसरों से अच्छा व्यवहार करते हैं, तो इससे हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति का अच्छा परिचय मिलता है। इसलिए व्यक्ति और देश अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इस पंक्ति का अर्थ है कि देश की स्थिति का प्रभाव नागरिकों पर पड़ता है और नागरिकों के कामों का प्रभाव देश पर पड़ता है। यदि देश का सम्मान बढ़ता है, तो उसके नागरिक भी सम्मान पाते हैं। यदि नागरिक गलत काम करते हैं, तो देश की छवि खराब होती है।

उदाहरण के लिए, जब कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक या विश्व प्रतियोगिता में पदक जीतता है, तो केवल उस खिलाड़ी का ही नहीं, पूरे देश का सम्मान बढ़ता है। जब कोई वैज्ञानिक नई खोज करता है, तो देश का नाम ऊँचा होता है।

दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर गंदगी फैलाता है, नियम तोड़ता है या भ्रष्टाचार करता है, तो लोग कहते हैं कि हमारे देश में अनुशासन की कमी है। इस प्रकार नागरिक के अच्छे या बुरे काम देश की छवि को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था”

(क). प्रात:काल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर

प्रात:काल से लेकर रात्रि तक हमें अनेक लोगों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। सुबह माता-पिता हमें समय पर उठाते हैं, भोजन देते हैं और विद्यालय जाने की तैयारी में सहायता करते हैं। सफाई कर्मचारी हमारे घर और आस-पास की सफाई करते हैं। बस चालक या रिक्शा चालक हमें विद्यालय पहुँचाने में सहायता करते हैं। विद्यालय में शिक्षक हमें पढ़ाते हैं और मित्र पढ़ाई तथा खेल में सहयोग करते हैं।

हम भी दूसरों की सहायता कर सकते हैं। घर में हम छोटे-मोटे कामों में माता-पिता की मदद कर सकते हैं। विद्यालय में मित्रों को पढ़ाई समझा सकते हैं, पुस्तकें साझा कर सकते हैं और अनुशासन बनाए रखने में सहयोग कर सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाकर और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करके भी हम समाज के लिए उपयोगी बन सकते हैं।

(ख). उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर

‘बहुतों’ में वे सभी लोग सम्मिलित हो सकते हैं जिनसे लेखक को जीवन में सहयोग मिला होगा। जैसे — माता-पिता, परिवार के सदस्य, पड़ोसी, मित्र, शिक्षक, दुकानदार, किसान, मजदूर, सफाई कर्मचारी, डॉक्टर, लेखक, पाठक, समाज के लोग और नगर के नागरिक।

लेखक के जीवन में ये सभी किसी-न-किसी रूप में सहारा, ज्ञान, सुविधा, प्रेम और सहयोग देने वाले रहे होंगे।

(ग). रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर

रचनाकार को दूसरे लोगों से प्रेम, प्रेरणा, अनुभव, ज्ञान, संवाद और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी। समाज में रहते हुए वह लोगों के जीवन, समस्याओं और भावनाओं को देखकर अपनी रचनाओं के लिए विचार प्राप्त करता होगा।

रचनाकार दूसरों को अपनी लेखनी से सहयोग देता होगा। वह समाज को जागरूक करता होगा, अच्छे विचार देता होगा, लोगों में देश-प्रेम और कर्तव्य-बोध जगाता होगा। उसकी रचनाएँ पाठकों को सोचने, समझने और बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा देती होंगी।

प्रश्न 3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

(क). उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।

उत्तर

“युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” का अर्थ है कि देश की सेवा केवल सीमा पर लड़कर ही नहीं की जाती। हर नागरिक अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से काम करके देश की प्रगति, विकास और सुरक्षा में योगदान दे सकता है।

देश की प्रगति के लिए विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे मेहनत से पढ़ें, अनुशासित रहें और अच्छे नागरिक बनें। शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को सही ज्ञान और संस्कार दें। किसानों का दायित्व है कि वे अन्न उत्पादन करें। वैज्ञानिक नई खोजों से देश को आगे बढ़ाते हैं। डॉक्टर लोगों का स्वास्थ्य बचाते हैं। सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हैं। व्यापारी, मजदूर, कर्मचारी और कलाकार भी अपने काम से देश को मजबूत बनाते हैं।

हम सबका दायित्व है कि हम नियमों का पालन करें, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, स्वच्छता रखें, ईमानदार रहें, करों का सही भुगतान करें, अफवाह न फैलाएँ और देश की एकता बनाए रखें।

(ख). अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?

(संकेत– आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)

उत्तर

हमारे पास-पड़ोस में गाय, कुत्ते, बिल्ली, चिड़िया, कबूतर, गिलहरी और अन्य पशु-पक्षी दिखाई देते हैं। उनके जीवन में भी संघर्ष होता है। वे भोजन की खोज करते हैं, मौसम की कठिनाइयों को सहते हैं और अपने बच्चों की रक्षा करते हैं। गर्मी, वर्षा और सर्दी में वे सुरक्षित स्थान ढूँढ़ते हैं।

चिड़ियाँ सुबह से भोजन की तलाश में निकलती हैं और अपने बच्चों के लिए दाना लाती हैं। गाय और कुत्ते कई बार सड़क पर भटकते हैं और उन्हें भोजन, पानी तथा सुरक्षा की आवश्यकता होती है। इन संघर्षों को देखकर लगता है कि जीवन सभी के लिए परिश्रम और धैर्य की परीक्षा है।

‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती भी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। वे अन्याय सहते हैं, पर अपने स्वाभिमान और मित्रता को नहीं छोड़ते। इसी प्रकार पशु-पक्षी भी अपने जीवन की रक्षा के लिए संघर्ष करते हैं।

(ग). इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।

उत्तर

इस निबंध में जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि जीवन में हर व्यक्ति को अनेक कठिनाइयों, जिम्मेदारियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे युद्ध में केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि रसद पहुँचाने वाले, उपचार करने वाले और उत्साह बढ़ाने वाले लोग भी महत्त्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही जीवन और देश-निर्माण में हर व्यक्ति की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।

बड़ों के विचार से जीवन में सफलता पाने के लिए संघर्ष, धैर्य, अनुशासन और मेहनत आवश्यक है। वे मानते हैं कि हर व्यक्ति को अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना चाहिए।

मेरे विचार से जीवन एक युद्ध इसलिए है क्योंकि हमें आलस्य, अज्ञान, डर, गलत आदतों और कठिनाइयों से लड़ना पड़ता है। विद्यार्थी के रूप में हमारा युद्ध पढ़ाई, अनुशासन और अच्छे आचरण के लिए होता है।

(घ). देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर

हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग काम करते हैं। जैसे — शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, किसान, मजदूर, चालक, डाकिया, बिजली कर्मचारी, पानी की आपूर्ति करने वाले कर्मचारी, दुकानदार और समाजसेवी।

हम उनके लिए सम्मानजनक व्यवहार कर सकते हैं। सफाई कर्मचारियों की सहायता के लिए हमें कूड़ा कूड़ेदान में डालना चाहिए। शिक्षकों का आदर करना चाहिए। डॉक्टरों और नर्सों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। पुलिस और यातायात नियमों का सम्मान करना चाहिए। किसानों के श्रम का सम्मान करते हुए अन्न की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। हमें हर श्रमिक और कर्मी के काम को महत्त्व देना चाहिए।

प्रश्न 4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

(क). उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर

इस पंक्ति से पता चलता है कि पास-पड़ोस के लोगों में आत्मीयता, प्रेम, सहयोग और अपनापन रहा होगा। बच्चे पड़ोस में खेलते होंगे और पड़ोसी उन्हें अपने बच्चों की तरह स्नेह देते होंगे। सुख-दुख में लोग एक-दूसरे की सहायता करते होंगे। पड़ोस केवल रहने की जगह नहीं था, बल्कि एक परिवार जैसा वातावरण था।

(ख). वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।

उत्तर

वर्तमान समय में पड़ोसियों के संबंधों में पहले जैसी आत्मीयता कुछ कम हो गई है। अब लोग अपने काम, पढ़ाई, नौकरी और मोबाइल या इंटरनेट में अधिक व्यस्त रहते हैं। बड़े शहरों में लोग एक-दूसरे को जानते तक नहीं हैं। संयुक्त परिवारों की कमी और जीवन की तेज गति के कारण भी आपसी मेल-जोल कम हुआ है।

इसके बावजूद अच्छे पड़ोस का महत्व आज भी है। यदि लोग एक-दूसरे से बात करें, जरूरत के समय सहायता करें और त्योहारों या सामाजिक कार्यों में साथ आएँ, तो पड़ोस में फिर से अपनापन बढ़ सकता है।

प्रश्न 5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?

उत्तर

हम घर और विद्यालय के आस-पास स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ा कूड़ेदान में डालते हैं। हम सड़क, पार्क, बस-स्टॉप और विद्यालय परिसर में गंदगी नहीं फैलाते। विद्यालय में हम अपनी कक्षा साफ रखते हैं, दीवारों पर नहीं लिखते और पौधों की देखभाल करते हैं।

सार्वजनिक संसाधनों जैसे नल, बिजली, सड़क, पुस्तकालय, बस और पार्क की वस्तुओं का सही उपयोग करते हैं। ऐतिहासिक स्थानों पर हम दीवारों पर नाम नहीं लिखते, वहाँ कूड़ा नहीं फेंकते और शांति बनाए रखते हैं। हम दूसरों को भी स्वच्छता और अनुशासन का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे देश का सौंदर्य-बोध और संस्कृति मजबूत होती है।

प्रश्न 6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें?

उत्तर

क्या करें?

देश के नियमों और कानूनों का पालन करें।

सार्वजनिक स्थानों को साफ रखें।

देश की संपत्ति की रक्षा करें।

सभी धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करें।

सही और योग्य व्यक्ति को वोट दें।

अफवाहें न फैलाएँ और सत्य का साथ दें।

ईमानदारी से पढ़ाई और काम करें।

जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।

देश की उपलब्धियों पर गर्व करें।

पर्यावरण की रक्षा करें और पेड़-पौधे लगाएँ।

क्या नहीं करें?

सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाएँ।

दीवारों और ऐतिहासिक स्थानों पर नाम न लिखें।

देश की झूठी या अनावश्यक बुराई न करें।

भ्रष्टाचार, बेईमानी और चोरी जैसे कार्य न करें।

जाति, धर्म या भाषा के नाम पर भेदभाव न करें।

ट्रैफिक नियम न तोड़ें।

पानी, बिजली और भोजन की बर्बादी न करें।

हिंसा, नफरत और अफवाहों को बढ़ावा न दें।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ।

अपने कर्तव्यों की उपेक्षा न करें।

निष्कर्ष: देश का सम्मान केवल सैनिकों या नेताओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अच्छे आचरण से बढ़ता है। विद्यार्थी के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अनुशासित, स्वच्छ, ईमानदार और जागरूक नागरिक बनें।

मेरे प्रश्न

प्रश्न “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है” निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं—

(क). रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?

उत्तर

रचनाकार को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है, जो बात को खोलने, आगे बढ़ाने और विचारों को विस्तार देने का अवसर देते हैं। ऐसे प्रश्न लेखक को अपने अनुभव और विचार स्पष्ट करने का मौका देते हैं। इसलिए वे कहते हैं कि ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में अपूर्व आनंद आता है।

(ख). आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?

उत्तर

मुझे ऐसे प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है, जिनमें सोचने, तर्क करने और अपने अनुभव से उत्तर देने का अवसर मिले। उदाहरण के लिए, देश, समाज, प्रकृति, जीवन-मूल्य और नागरिक कर्तव्य से जुड़े प्रश्न रोचक लगते हैं, क्योंकि इनके उत्तर केवल पुस्तक से नहीं, बल्कि अपने विचारों और अनुभवों से भी दिए जा सकते हैं।

अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।

यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 1. क्या केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं?

प्रश्न 2. सभी नागरिक अपने-अपने ढंग से देश की सुरक्षा और विकास में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं?

प्रश्न 3. किसी नागरिक के गलत कार्य से केवल उसकी अपनी छवि ही नहीं, बल्कि देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव क्यों पड़ता है?

विधा से संवाद

प्रश्न 1. निबंध की विशेषताओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।

1. विषय-केंद्रीयता

उत्तर

इस निबंध का मुख्य विषय व्यक्ति और देश का संबंध है। लेखक पूरे निबंध में इसी विषय को केंद्र में रखकर बताते हैं कि नागरिक और देश अलग-अलग नहीं हैं। नागरिक के अच्छे या बुरे कार्य का प्रभाव देश की प्रतिष्ठा पर पड़ता है।

2. विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता

उत्तर

निबंध में विचार प्रधानता भी है और भावनात्मकता भी। लेखक तर्क देकर समझाते हैं कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्ति के गौरव से जुड़े हैं। साथ ही लाला लाजपत राय का अनुभव, जापानी युवक की घटना और देश के सम्मान की बात पाठक के मन में भावनाएँ जगाती है।

3. वैयक्तिकता

उत्तर

लेखक ने निबंध की शुरुआत अपने जीवन और अनुभव से की है। वे बताते हैं कि उनका जन्म घर में हुआ, वे पड़ोस में खेले और नगर के समाज से जुड़े। इस प्रकार लेखक ने अपने निजी अनुभव के आधार पर निबंध को आगे बढ़ाया है।

4. प्रेरणात्मकता

उत्तर

यह निबंध पाठकों को अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। लेखक समझाते हैं कि हर नागरिक अपने छोटे-छोटे अच्छे कार्यों से देश का सम्मान बढ़ा सकता है। स्वच्छता, सही मतदान, शिष्ट आचरण और देश के प्रति सम्मान रखने की प्रेरणा इस निबंध में मिलती है।

5. संक्षिप्तता और स्पष्टता

उत्तर

लेखक ने अपने विचारों को सरल और स्पष्ट भाषा में रखा है। वे उदाहरणों के माध्यम से कठिन बातों को भी आसानी से समझाते हैं। जैसे, जापानी युवक की घटना से यह स्पष्ट हो जाता है कि नागरिक का व्यवहार देश की छवि से जुड़ा होता है।

6. तार्किकता

उत्तर

निबंध में लेखक ने अपने विचारों को तर्क के साथ प्रस्तुत किया है। पहले वे व्यक्ति की पूर्णता की बात करते हैं, फिर लाला लाजपत राय के अनुभव से सिद्ध करते हैं कि देश के सम्मान के बिना व्यक्ति का सम्मान अधूरा है। इसी प्रकार वे जापान की दो घटनाओं से सिद्ध करते हैं कि नागरिक और देश का संबंध गहरा होता है।

7. साहित्यिक सौंदर्य

उत्तर

निबंध की भाषा साहित्यिक और प्रभावशाली है। “आनंद की दीवार में दरार पड़ गई”, “मानस में भूकंप उठा”, “गौरव के दीपक जलाए” जैसे प्रयोग निबंध को सुंदर और प्रभावी बनाते हैं।

8. सजीवता / चित्रात्मकता

उत्तर

निबंध में घटनाओं का वर्णन बहुत सजीव ढंग से किया गया है। जैसे जापानी युवक द्वारा फल लाना, बूढ़े किसान द्वारा कमालपाशा को शहद भेंट करना और किसान द्वारा पंडित नेहरू को खाट देना — ये घटनाएँ पाठक के सामने चित्र की तरह उपस्थित हो जाती हैं।

प्रश्न 2. इस निबंध की प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली के अतिरिक्त अन्य विशेषताएँ छाँटकर लिखिए।

उत्तर

इस निबंध की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. आत्मकथात्मक आरंभ: लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर से जुड़े अनुभवों से निबंध शुरू करते हैं।

2. प्रश्नोत्तर शैली: लेखक स्वयं प्रश्न उठाते हैं और उनका उत्तर देते हैं। इससे निबंध रोचक और संवाद जैसा बन जाता है।

3. उदाहरणों का प्रयोग: लेखक ने अपने विचारों को समझाने के लिए लाला लाजपत राय, जापानी युवक, पुस्तकालय की घटना, कमालपाशा और पंडित नेहरू के उदाहरण दिए हैं।

4. तर्कपूर्ण प्रस्तुति: लेखक हर बात को तर्क और प्रमाण के साथ स्पष्ट करते हैं।

5. प्रेरणात्मक स्वर: निबंध पाठक को देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

6. सरल और प्रभावशाली भाषा: भाषा सरल है, लेकिन उसमें प्रभाव और भावनात्मकता भी है।

7. देशभक्ति की भावना: पूरे निबंध में देश के सम्मान, स्वतंत्रता, नागरिक कर्तव्य और देश-प्रेम की भावना दिखाई देती है।

8. व्यावहारिक संदेश: लेखक केवल बड़े आदर्शों की बात नहीं करते, बल्कि स्वच्छता, सही मतदान, अच्छे व्यवहार और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन जैसे व्यावहारिक संदेश देते हैं।

प्रश्न 3. नीचे दिए गए विषयों में से आप किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए।

1. मेरा भारत मेरा गौरव

उत्तर

मैं “मेरा भारत मेरा गौरव” विषय पर निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि यह विषय देश-प्रेम और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा है। इसमें भारत की संस्कृति, विविधता, स्वतंत्रता संग्राम, वैज्ञानिक उपलब्धियों, भाषाओं, त्योहारों और महान व्यक्तियों के बारे में लिखा जा सकता है। यह विषय हमें अपने देश पर गर्व करना सिखाता है।

2. चाँद के साथ गपशप

उत्तर

मैं “चाँद के साथ गपशप” विषय पर भी निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि यह कल्पनात्मक और रोचक विषय है। इसमें चाँद से बातचीत के माध्यम से प्रकृति, रात, सपनों, विज्ञान और कल्पना को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

3. जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि

उत्तर

यह विषय भी मुझे पसंद है, क्योंकि इसमें कवि की कल्पना-शक्ति का वर्णन किया जा सकता है। कवि अपनी कल्पना से उन स्थानों और भावों तक पहुँच सकता है, जहाँ सामान्य दृष्टि नहीं पहुँचती। इस विषय में साहित्य की शक्ति और कल्पना की उड़ान को समझाया जा सकता है।

4. गागर में सागर

उत्तर

मैं “गागर में सागर” विषय पर निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि यह विषय कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त करने की कला से जुड़ा है। इसमें कहावतों, दोहों, सूक्तियों और साहित्य की संक्षिप्त लेकिन गहरी अभिव्यक्ति पर लिखा जा सकता है।

5. यथा नाम तथा गुण

उत्तर

यह विषय भी अच्छा है, क्योंकि इसमें नाम और गुण के संबंध पर विचार किया जा सकता है। कई बार व्यक्ति का नाम उसके गुणों से मेल खाता है और कई बार नहीं। इस विषय में उदाहरण देकर रोचक निबंध लिखा जा सकता है।

6. दूध का दूध और पानी का पानी

उत्तर

मैं इस विषय पर भी निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि यह न्याय, सत्य और निष्पक्षता से जुड़ा विषय है। इसमें बताया जा सकता है कि सत्य अंत में सामने आता है और झूठ अधिक समय तक छिप नहीं सकता।

विषयों से संवाद

चुनाव एवं आपके अनुभव

प्रश्न 1. जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?

उत्तर

जब कोई चुनाव प्रक्रिया क्षेत्र में शुरू होती है, तो सबसे पहले चुनाव की घोषणा होती है। इसके बाद उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र भरते हैं। राजनीतिक दल और उम्मीदवार प्रचार करते हैं। जगह-जगह सभाएँ, रैलियाँ और जनसंपर्क कार्यक्रम होते हैं। उम्मीदवार लोगों से मिलकर अपनी योजनाएँ बताते हैं। पोस्टर, बैनर, भाषण और घोषणापत्र के माध्यम से मतदाताओं को समझाया जाता है।

चुनाव के दिन मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। मतदाता पंक्ति में खड़े होकर अपना वोट देते हैं। मतदान के बाद मतगणना होती है और फिर परिणाम घोषित किया जाता है।

प्रश्न 2. “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

उत्तर

एक अच्छे उम्मीदवार में निम्नलिखित गुण होने चाहिए—

वह ईमानदार होना चाहिए।

वह जनता की समस्याओं को समझने वाला होना चाहिए।

उसमें सेवा-भाव होना चाहिए।

वह शिक्षित और जागरूक होना चाहिए।

वह जाति, धर्म या भाषा के आधार पर भेदभाव न करता हो।

वह कानून और संविधान का सम्मान करता हो।

वह वादे करके भूलने वाला न हो।

वह स्वच्छ छवि वाला होना चाहिए।

वह विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को महत्व देता हो।

वह जनता के प्रति उत्तरदायी और विनम्र होना चाहिए।

प्रश्न 3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए।

संकेत — विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव

उत्तर

हमारे विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव हुआ था। कक्षा अध्यापक ने पहले चुनाव की प्रक्रिया समझाई। कुछ विद्यार्थियों ने उम्मीदवार बनने की इच्छा जताई। सभी उम्मीदवारों ने कक्षा के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि वे कक्षा में अनुशासन, स्वच्छता और पढ़ाई का अच्छा वातावरण बनाए रखने के लिए क्या करेंगे।

इसके बाद सभी विद्यार्थियों ने मतदान किया। मतगणना के बाद सबसे अधिक मत पाने वाले विद्यार्थी को कक्षा प्रतिनिधि चुना गया। इस चुनाव से मुझे समझ आया कि मतदान सोच-समझकर करना चाहिए। केवल मित्रता के आधार पर नहीं, बल्कि योग्य और जिम्मेदार विद्यार्थी को ही वोट देना चाहिए।

प्रश्न 4. यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?

उत्तर

यदि मैं किसी सभा या क्लब के चुनाव में उम्मीदवार होऊँ, तो मेरे मुख्य मुद्दे ये होंगे—

सभा या क्लब में स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना।

सभी सदस्यों की बात ध्यान से सुनना।

खेल, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।

पुस्तक-पठन और ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन करना।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान चलाना।

जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करना।

समय-समय पर सामूहिक चर्चा और प्रतियोगिताएँ करवाना।

सभी सदस्यों के साथ समान और सम्मानजनक व्यवहार करना।

क्लब की वस्तुओं और संसाधनों की सुरक्षा करना।

सभी निर्णय पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लेना।

अधिकार और कर्तव्य

प्रश्न. इस निबंध में स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और कर्तव्य की बात की गई है। इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर

किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिकों को अधिकार भी मिलते हैं और उनके कुछ कर्तव्य भी होते हैं। अधिकार नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, विचार व्यक्त करने और समानता पाने का अवसर देते हैं। लेकिन अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करना भी आवश्यक है।

हमारा कर्तव्य है कि हम संविधान का सम्मान करें, देश की एकता और अखंडता बनाए रखें, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, स्वच्छता रखें, सभी धर्मों और भाषाओं का सम्मान करें तथा नियमों का पालन करें।

इस निबंध में लेखक ने बताया है कि सही व्यक्ति को मत देना नागरिक का कर्तव्य है। साथ ही यह नागरिक का अधिकार भी है कि उसका मत लिए बिना कोई व्यक्ति शासन की कुर्सी पर न बैठे। इसलिए अधिकार और कर्तव्य दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। एक अच्छा नागरिक वही है जो अपने अधिकारों को समझता है और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है।

सृजन

हमारा पुस्तकालय

प्रश्न 1. पुस्तक फटी हुई मिलने, पृष्ठ गायब होने या पेन से निशान लगे होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर

पुस्तक फटी हुई मिलने, पृष्ठ गायब होने या पेन से निशान लगे होने के पीछे मुख्य कारण पाठकों की लापरवाही हो सकती है। कुछ विद्यार्थी पुस्तक को अपनी निजी वस्तु समझकर उसमें पेन या पेंसिल से निशान लगा देते हैं। कुछ लोग चित्र, जानकारी या अभ्यास के लिए पृष्ठ फाड़ लेते हैं। कई बार पुस्तक को सही ढंग से न रखने, मोड़ने, गंदे हाथों से छूने या बैग में दबाकर रखने से भी पुस्तक खराब हो जाती है।

इसके पीछे पुस्तकालय के नियमों की अनदेखी, सार्वजनिक संपत्ति के प्रति असम्मान और जिम्मेदारी की कमी भी कारण हो सकते हैं।

प्रश्न 2. ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है?

उत्तर

ऐसा न हो, इसके लिए पुस्तकालय में स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए और उनका पालन करवाया जाना चाहिए। पुस्तकों को सावधानी से रखने, पृष्ठ न फाड़ने और पेन से निशान न लगाने की सीख विद्यार्थियों को दी जानी चाहिए। पुस्तकालय में “पुस्तक हमारी साझा संपत्ति है” जैसे संदेश लगाए जा सकते हैं।

यदि कोई पुस्तक खराब करता है, तो उसे समझाया जाना चाहिए और आवश्यक होने पर पुस्तक की मरम्मत या जुर्माने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। पुस्तक लौटाते समय उसकी जाँच की जानी चाहिए। साथ ही, विद्यार्थियों में यह भावना विकसित करनी चाहिए कि पुस्तक ज्ञान का स्रोत है, इसलिए उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

प्रश्न 3. आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है?

उत्तर

मैं पुस्तकालय में निम्नलिखित नियमों का पालन करता हूँ—

पुस्तकालय में शांति बनाए रखता हूँ।

पुस्तक को साफ हाथों से पकड़ता हूँ।

पुस्तक के पृष्ठ नहीं मोड़ता और न ही फाड़ता हूँ।

पुस्तक में पेन या पेंसिल से निशान नहीं लगाता।

पुस्तक को समय पर वापस करता हूँ।

पुस्तक को उसके सही स्थान पर रखता हूँ।

पुस्तकालय की मेज-कुर्सी और अन्य वस्तुओं को नुकसान नहीं पहुँचाता।

इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है क्योंकि पुस्तकालय सभी विद्यार्थियों के उपयोग के लिए होता है। यदि कोई विद्यार्थी पुस्तक को खराब कर देता है, तो दूसरे विद्यार्थी उसका लाभ नहीं उठा पाते। नियमों का पालन करने से पुस्तकालय में अनुशासन, स्वच्छता और ज्ञान का अच्छा वातावरण बना रहता है।

ब्रेल लिपि में पुस्तकें

प्रश्न. दृष्टिबाधित सहपाठियों के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में प्रधानाध्यापक को पत्र लिखिए।

उत्तर

सेवा में, प्रधानाध्यापक महोदय, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दिल्ली।

दिनांक: 6 मई 2026

विषय: विद्यालय पुस्तकालय में ब्रेल लिपि की पुस्तकें मँगवाने के संबंध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में अनेक रोचक और उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं। विद्यार्थी इन पुस्तकों को पढ़कर ज्ञान और आनंद प्राप्त करते हैं। लेकिन हमारे विद्यालय के दृष्टिबाधित सहपाठी स्वयं इन पुस्तकों को पढ़कर उनका आनंद नहीं ले पाते।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि विद्यालय पुस्तकालय में ब्रेल लिपि में कहानी, कविता, ज्ञान-विज्ञान और पाठ्य-सहायक पुस्तकें मँगवाई जाएँ। इससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को भी पुस्तकालय का पूरा लाभ मिल सकेगा। वे भी आत्मनिर्भर होकर पढ़ सकेंगे और उनके अध्ययन में रुचि बढ़ेगी।

कृपया इस विषय पर शीघ्र उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी, नाम: __________ कक्षा: 9 अनुक्रमांक: __________

कृतज्ञता ज्ञापन

प्रश्न. देश के विकास में योगदान देने वाले सभी लोगों के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर

कृतज्ञता ज्ञापन

हम अपने महान देश के उन सभी वीरों, कर्मयोगियों और सेवाभावी नागरिकों के प्रति हृदय से कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता, सुरक्षा, विकास और सम्मान के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया है।

हम उन स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं, जिन्होंने पराधीनता के कठिन दिनों में अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए। हम सीमा पर तैनात सैनिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करते हैं।

हम किसानों के प्रति कृतज्ञ हैं, जो अन्न उत्पन्न करके देश का पेट भरते हैं। हम श्रमिकों के प्रति धन्यवाद प्रकट करते हैं, जो अपने परिश्रम से सड़कों, भवनों, कारखानों और अन्य निर्माण कार्यों में योगदान देते हैं। हम अध्यापकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जो विद्यार्थियों को ज्ञान और संस्कार देकर देश का भविष्य बनाते हैं।

हम वैज्ञानिकों और अभियंताओं को धन्यवाद देते हैं, जो नई खोजों और तकनीक के माध्यम से देश को आगे बढ़ाते हैं। हम कलाकारों, साहित्यकारों, डॉक्टरों, नर्सों, सफाई कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों और समाजसेवियों के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जो समाज को बेहतर बनाते हैं।

हम संकल्प लेते हैं कि हम भी ईमानदार, अनुशासित, स्वच्छ और जागरूक नागरिक बनकर देश की उन्नति में अपना योगदान देंगे।

विज्ञापन

प्रश्न. चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर

स्वच्छता और आचरण

प्रश्न. ऐसे कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है?

उत्तर

ऐसे कई आचरण हैं जिनसे देश के सौंदर्य और संस्कृति को आघात लगता है। जैसे—

सड़क पर कूड़ा फेंकना।

केला या फल खाकर छिलका रास्ते में फेंकना।

सार्वजनिक स्थानों पर थूकना।

दीवारों पर पान की पीक डालना।

ऐतिहासिक इमारतों पर अपना नाम लिखना।

पार्कों में पौधे तोड़ना।

बस, रेल या विद्यालय की दीवारों पर लिखना।

नदियों और तालाबों में कचरा डालना।

प्लास्टिक का अधिक उपयोग करके उसे इधर-उधर फेंकना।

सार्वजनिक शौचालयों को गंदा करना।

कतार तोड़ना और धक्का-मुक्की करना।

गंदी भाषा का प्रयोग करना।

इन आचरणों से देश की सुंदरता, स्वच्छता और संस्कृति को चोट पहुँचती है। हमें स्वच्छ और सभ्य आचरण अपनाकर देश के सौंदर्य को बनाए रखना चाहिए।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

संदर्भ में शब्द

प्रश्न. अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।

उत्तर
शब्दसंदर्भ 1अर्थ 1संदर्भ 2अर्थ 2
दीपदीप जलानादीया / प्रकाशगौरव के दीपसम्मान और प्रेरणा का प्रतीक
सिरसिर ऊँचा करनासम्मान बढ़ानासिर पर टोपीशरीर का अंग
कलंकमाथे पर कलंकअपमान / बदनामीकपड़े पर कलंकदाग
दीवारघर की दीवारईंट-पत्थर की दीवारआनंद की दीवारमन की पूर्णता या सुख का भाव
भूकंपधरती का भूकंपधरती का हिलनामानस में भूकंपमन में बड़ा परिवर्तन
फलपेड़ का फलखाने योग्य वस्तुकर्म का फलपरिणाम
मुँहमुँह से बोलनामुखमुँह की बातकही हुई बात
बलशारीरिक बलताकतमानसिक बलआत्मविश्वास
मतअपना मत देनावोटमेरा मत हैविचार / राय
रसदयुद्ध की रसदभोजन-सामग्रीजीवन की रसदजीवन के लिए आवश्यक साधन

मिलते-जुलते भाव वाले शब्द-युग्म

प्रश्न. इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।

शब्द-युग्मअर्थ / भाव
ममता-दुलारस्नेह और प्यार
भरा-पूरापूर्ण, संपन्न
घर-पड़ोसघर और आसपास का क्षेत्र
घूम-फिरकरइधर-उधर घूमकर
पास-पड़ोसआसपास का क्षेत्र
दाल-रोटीसामान्य जीवन-यापन
छोटी-छोटीबहुत छोटी
बड़े-बड़ेबहुत बड़े
बातों-बातोंबातचीत के दौरान
धीरे-धीरेक्रमशः
आगे-पीछेआगे और पीछे
ऊँच-नीचश्रेष्ठता और हीनता
जय-जयकारप्रशंसा / उत्साह
साफ-साफस्पष्ट रूप से
देश-विदेशअपना देश और अन्य देश
ताजा-ताजाबिल्कुल नया / ताजा
ठेलमठेलधक्का-मुक्की
इधर-उधरयहाँ-वहाँ
हानि-लाभनुकसान और फायदा
सम्मान-अपमानआदर और अनादर

शब्दों की कड़ियाँ / शृंखला

प्रश्न. दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय पहचानकर लिखिए।

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णतापूर्णता
अलौकिकलौकिक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमान

नोट: कुछ शब्दों में प्रत्यय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जैसे — निरक्षरता में ‘ता’, सम्मानित में ‘इत’। कुछ शब्दों में केवल उपसर्ग प्रमुख रूप से दिखाई देता है, जैसे — अलौकिक, अनावश्यक।

गतिविधियाँ

विषय: ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’

परिचर्चा की रिपोर्ट

उत्तर

परिचर्चा रिपोर्ट

विषय: देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है। स्थान: कक्षा 9 आयोजन: हिंदी विषय परिचर्चा अध्यक्षता: हिंदी अध्यापक / अध्यापिका

आज हमारी कक्षा में “देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचार प्रस्तुत किए।

सबसे पहले यह बात सामने आई कि देश केवल जमीन, नदियों, पहाड़ों और सीमाओं का नाम नहीं है। देश अपने नागरिकों, संस्कृति, भाषा, इतिहास, परंपराओं, संविधान, स्वतंत्रता, कर्तव्यों और भावनाओं से मिलकर बनता है।

कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीतता है, तो पूरे देश को गर्व होता है। इससे स्पष्ट है कि देश की पहचान उसके नागरिकों से बनती है। कुछ विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि सैनिक सीमा की रक्षा करते हैं, लेकिन देश के भीतर शिक्षक, किसान, डॉक्टर, वैज्ञानिक, श्रमिक और सफाई कर्मचारी भी देश को मजबूत बनाते हैं।

परिचर्चा में यह भी विचार आया कि देश का सम्मान नागरिकों के अच्छे आचरण से बढ़ता है। यदि हम स्वच्छता रखें, नियमों का पालन करें, ईमानदारी से काम करें और सही व्यक्ति को वोट दें, तो हम देश की उन्नति में योगदान देते हैं।

मुख्य बिंदु:

देश केवल भौगोलिक सीमा नहीं है।

देश नागरिकों, संस्कृति और संविधान से बनता है।

हर नागरिक देश का प्रतिनिधित्व करता है।

देश की रक्षा केवल सैनिक ही नहीं, सभी नागरिक करते हैं।

स्वच्छता, अनुशासन और सही मतदान देश सेवा के रूप हैं।

देश का सम्मान हमारे आचरण से जुड़ा है।

निष्कर्ष: परिचर्चा से यह निष्कर्ष निकला कि देश एक जीवंत भाव है। देश हमारी पहचान, संस्कृति, जिम्मेदारी और गौरव का प्रतीक है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को देश के सम्मान और विकास के लिए अपना योगदान देना चाहिए।

भाषा संगम

प्रश्न. ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में लिखिए।

उत्तर

‘देश’ शब्द को अंग्रेज़ी भाषा में Country कहा जाता है। अरबी में इसे वतन कहा जाता है। भोजपुरी में इसे देस कहा जाता है।

प्रश्न. “मैं अपने देश का नागरिक हूँ” वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखिए।

उत्तर

यदि मातृभाषा हिंदी है, तो वाक्य होगा—

मैं अपने देश का नागरिक हूँ।

यदि भोजपुरी में लिखना हो, तो—

हम अपना देस के नागरिक हईं।

यदि अंग्रेज़ी में लिखना हो, तो—

I am a citizen of my country.

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