कक्षा 9 हिंदी · गंगा · अध्याय 12

घर की याद

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 12 घर की याद का सारांश, व्याख्या, शब्दार्थ, NCERT प्रश्न उत्तर, भाषा-अभ्यास और वीडियो समाधान।

वीडियो पाठसारांशव्याख्याशब्दार्थसंपूर्ण प्रश्नोत्तर
लेखक / कवि
भवानीप्रसाद मिश्र
पुस्तक
गंगा
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ
194–205
विधा
काव्य
अध्याय 12 के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री

वर्षा की पृष्ठभूमि में लिखी यह मार्मिक कविता जेल में बंद कवि की घर, माता-पिता और भाई-बहनों के प्रति गहरी स्मृति, प्रेम और व्याकुलता को व्यक्त करती है।

देखिए और समझिए

वीडियो पाठ

NCERT Hindi Tutor के वीडियो से अध्याय समझिए, फिर नीचे दिए गए नोट्स और प्रश्नोत्तर से दोहराव कीजिए।

अध्याय को समझें

सारांश, व्याख्या और महत्वपूर्ण अध्ययन-बिंदु

आपकी तैयार की गई अध्ययन सामग्री को विषयानुसार उसी क्रम में व्यवस्थित किया गया है।

घर की याद — पद्यांशवार व्याख्या

पद्यांश 1

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, अब सबेरा हो गया है, कब सबेरा हो गया है, ठीक से मैंने न जाना, बहुत सोकर सिर्फ माना— क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी, अभी तक चुपचाप है सब, रातवाली छाप है सब, गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर, बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, घर कि घर में चार भाई, मायके में बहिन आई, बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर!

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि जेल में रहते हुए लगातार हो रही वर्षा का वर्णन करता है। रात भर पानी बरसता रहा है, इसलिए वातावरण में अँधेरा और उदासी छाई हुई है। सुबह हो चुकी है, पर बादलों के कारण कवि को ठीक से पता नहीं चला। बारिश, हवा और पत्तों की आवाज़ें कवि के मन की बेचैनी को और बढ़ा देती हैं। ऐसे वातावरण में उसे अपना घर याद आने लगता है। घर उससे दूर है, पर वही घर सुख, प्रेम और अपनापन से भरा हुआ है। कवि को अपने चार भाई और बहन की याद आती है। बहन मायके आई होगी, पर कवि के न होने से घर में सुख के स्थान पर दुख और पीड़ा का वातावरण होगा।

पद्यांश 2

आज का दिन दिन नहीं है, क्योंकि इसका छिन नहीं है, एक छिन सौ बरस है रे, हाय कैसा तरस है रे, घर कि घर में सब जुड़े हैं, सब कि इतने कब जुड़े हैं, चार भाई चार बहिनें भुजा भाई प्यार बहिनें, और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर, माँ कि जिसकी स्नेह-धारा का यहाँ तक भी पसारा, उसे लिखना नहीं आता, जो कि उसका पत्र पाता।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि की घर के प्रति व्याकुलता व्यक्त हुई है। उसे आज का दिन बहुत लंबा और भारी लग रहा है। एक क्षण भी सौ वर्षों के समान प्रतीत हो रहा है। उसे अपने संयुक्त परिवार की याद आती है, जहाँ भाई-बहन सब एक साथ जुड़े हुए हैं। कवि अपनी माँ को याद करता है। माँ भले ही अनपढ़ है, पर वह स्नेह और ममता की मूर्ति है। माँ की गोद में सिर रखते ही सारे दुख दूर हो जाते हैं। कवि को दुख है कि माँ पढ़ी-लिखी नहीं है, इसलिए वह उसे पत्र नहीं लिख सकती। यदि माँ का पत्र मिल जाता, तो उसे बहुत सांत्वना मिलती।

पद्यांश 3

और पानी गिर रहा है, घर चतुर्दिक् घिर रहा है, पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर, पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, जो अभी भी दौड़ जाएँ, जो अभी भी खिलखिलाएँ, मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें, बोल में बादल गरजता, काम में झंझा लरजता, आज गीता-पाठ करके, दंड दो सौ साठ करके, खूब मुगदर हिला लेकर, मूठ उनकी मिला लेकर, जब कि नीचे आए होंगे, नैन जल से छाए होंगे, हाय, पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि अपने पिता को याद करता है। वर्षा लगातार हो रही है और कवि की कल्पना में घर चारों ओर से बारिश से घिरा हुआ दिखाई देता है। कवि के पिता भोले, बहादुर और मजबूत व्यक्तित्व वाले हैं। उनकी भुजाएँ वज्र के समान कठोर हैं, पर हृदय मक्खन की तरह कोमल है। वे वृद्ध होने पर भी कमजोर नहीं हुए हैं। वे साहसी हैं, मृत्यु और शेर जैसे संकटों से भी नहीं डरते। उनकी वाणी बादल जैसी प्रभावशाली है और उनका कार्य झंझा जैसा तेज है। वे गीता-पाठ, व्यायाम और मुगदर चलाने वाले कर्मठ व्यक्ति हैं। फिर भी कवि की याद में उनकी आँखें आँसुओं से भर आई होंगी। इस प्रकार पिता के बाहरी कठोरपन और भीतरी कोमलता दोनों का सुंदर चित्रण हुआ है।

पद्यांश 4

चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें, खेलते या खड़े होंगे, नजर उनको पड़े होंगे। पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, रो पड़े होंगे बराबर, पाँचवें का नाम लेकर, पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा, पिताजी कहते रहे हैं, प्यार में बहते रहे हैं, आज उनके स्वर्ण बेटे, लगे होंगे उन्हें हेटे, क्योंकि मैं उन पर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा।

व्याख्या

यहाँ कवि अपने भाइयों और बहनों की कल्पना करता है। वह सोचता है कि घर के बच्चे खेलते या खड़े होंगे और पिता की दृष्टि उन पर पड़ते ही उन्हें पाँचवें बेटे अर्थात कवि की याद आ गई होगी। कवि स्वयं को अभागा कहता है, क्योंकि वह अपने परिवार से दूर जेल में है। पिता कवि को बहुत प्यार करते रहे हैं और उसे अपने बेटों में विशेष मानते रहे हैं। कवि को लगता है कि उसके बिना पिता को बाकी बच्चे भी अधूरे लग रहे होंगे। इस पद्यांश में पिता का पुत्र-प्रेम और कवि की आत्मपीड़ा बहुत मार्मिक रूप से व्यक्त हुई है।

पद्यांश 5

और माँ ने कहा होगा, दुख कितना बहा होगा आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी, वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर, गया है सो ठीक ही है यह तुम्हारी लीक ही है, पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता, इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि अपनी माँ की कल्पना करता है। वह सोचता है कि माँ ने पिता को समझाया होगा कि आँखों में आँसू क्यों लाते हो, भवानी वहाँ ठीक होगा। माँ जानती है कि कवि देश और अपने कर्तव्य के लिए जेल गया है। माँ के अनुसार यह मार्ग सही है, क्योंकि यदि वह पीछे हटता तो माँ की कोख लजा जाती। माँ पिता से कहती होगी कि वे कमजोर न पड़ें, क्योंकि उन्हें देखकर बाकी बच्चे भी रो पड़ेंगे। यहाँ माँ की ममता के साथ-साथ उसका धैर्य, साहस और देशभक्ति भी दिखाई देती है।

पद्यांश 6

पिताजी ने कहा होगा, हाय, कितना सहा होगा, कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता, कहाँ हूँ, गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी, उसे थी बरसात प्यारी, रात दिन की झड़ी झारी, खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता, तुझे बतलाता कि बेला ने फलानी फूल झेला, तू कि उसके साथ जाती, आज इससे याद आती, मैं न रोऊँगा — कहा होगा, और फिर पानी बहा होगा।

व्याख्या

इस पद्यांश में पिता की भावुकता दिखाई देती है। पिता भले ही कहते होंगे कि वे रो नहीं रहे और धैर्य नहीं खो रहे, पर वास्तव में वे कवि की याद में दुखी होंगे। बरसात देखकर उन्हें कवि का बचपन याद आया होगा। कवि को बरसात बहुत प्रिय थी। वह खुले सिर और नंगे बदन बारिश में घूमता था, बगीचे में जाता था, लौकी के बीज लगाता था और फूलों के बारे में माँ से बातें करता था। पिता स्वयं को संभालने का प्रयास करते होंगे, पर कवि की याद आते ही उनकी आँखों से आँसू बह जाते होंगे। यहाँ वर्षा स्मृति को जगाने का माध्यम बनती है।

पद्यांश 7

दृश्य उसके बाद का रे, पाँचवें की याद का रे, भाई पागल, बहिन पागल, और अम्मा ठीक बादल, और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला, शर्म से रो भी न पाएँ, खूब भीतर छटपटाएँ, आज ऐसा कुछ हुआ होगा आज सबका मन चुआ होगा।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि कल्पना करता है कि उसके याद आते ही घर का पूरा वातावरण दुखी हो गया होगा। भाई-बहन व्याकुल हो गए होंगे। माँ बादल की तरह आँसुओं से भरी होगी। भाभी और सरला भी भीतर-ही-भीतर दुखी होंगी, पर शर्म के कारण खुलकर रो नहीं पा रही होंगी। कवि को लगता है कि आज घर के सभी लोगों का मन उसकी याद से भीग गया होगा। यहाँ परिवार के प्रत्येक सदस्य के हृदय की पीड़ा दिखाई देती है।

पद्यांश 8

अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है, एक-से बादल जमे हैं, गगन-भर फैले रमे हैं, ढेर है उनका, न फाँकें, जो कि किरणें झुकें-झाँकें, लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों; गगन-आँगन की लुनाई दिशा के मन में समाई दश-दिशा चुपचाप है रे, स्वस्थ की लय छाप है रे झाड़ आँखें बंद करके साँस सुस्थिर मंद करके, हिले बिन चुपके खड़े हैं, क्षितिज पर जैसे जड़े हैं एक पंछी बोलता है, घाव उर के खोलता है, आदमी के उर बिचारे, किसलिए इतनी तृषा रे।

व्याख्या

अब वर्षा रुक गई है, पर कवि का मन बहुत भीगा हुआ है। आकाश में बादल छाए हुए हैं और सूर्य की किरणें भी दिखाई नहीं दे रही हैं। कवि को बादलों से भरा आकाश ऐसा लगता है जैसे माँ ने आँगन लीप दिया हो। चारों दिशाएँ शांत हैं, पेड़ स्थिर खड़े हैं और वातावरण में एक प्रकार की गहरी चुप्पी है। तभी एक पक्षी की आवाज़ कवि के हृदय के घाव खोल देती है। कवि सोचता है कि मनुष्य का हृदय इतना बेचैन क्यों होता है और उसमें इतनी तृष्णा क्यों रहती है। इस पद्यांश में प्रकृति और मन की स्थिति का सुंदर मेल है।

पद्यांश 9

तू जरा-सा दुख कितना, सह सकेगा क्या कि इतना, और इस पर बस नहीं है, बस बिना कुछ रस नहीं है, हवा आई उड़ चला तू, लहर आई मुड़ चला तू, लगा झटका टूट बैठा, गिरा नीचे फूट बैठा, तू कि प्रिय से दूर होकर, बह चला रे पूर होकर, दुख भर क्या पास तेरे, अश्रु सिंचित हास तेरे!

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि अपने ही मन से बात करता है। वह कहता है कि मनुष्य जरा-सा दुख भी कितना सह पाएगा? मनुष्य अपने मन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पाता। हवा और लहर की तरह वह परिस्थिति के अनुसार डगमगा जाता है। थोड़ी-सी चोट लगते ही वह टूट जाता है। प्रियजनों से दूर होकर उसका मन आँसुओं से भर जाता है। यहाँ कवि स्वीकार करता है कि घर और परिवार से दूरी का दुख बहुत गहरा होता है। मनुष्य हँसता भी है, तो उसके भीतर आँसू छिपे रहते हैं।

पद्यांश 10

पिताजी का वेश मुझको, दे रहा है क्लेश मुझको, देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे, एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, एक हल्की चोट लग ले, दूध की नदी उमग ले, एक टहनी कम न हो ले, कम कहाँ कि ख़म न हो ले, ध्यान कितना फिक्र कितनी, डाल जितनी जड़ें उतनी! इस तरह का हाल उनका, इस तरह का ख्याल उनका, हवा, उनको धीर देना, यह नहीं जी चीर देना।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि को अपने पिता की याद फिर से कष्ट देती है। वह पिता को पहाड़ जैसे मजबूत शरीर वाला मानता है, पर उनके मन को बरगद के पेड़ जैसा विशाल और संवेदनशील बताता है। पिता बाहर से कठोर दिखते हैं, पर भीतर से अत्यंत कोमल हैं। परिवार के किसी एक सदस्य को थोड़ा-सा कष्ट हो जाए, तो उनका हृदय दुख से भर जाता है। वे सबकी चिंता करते हैं। कवि हवा से प्रार्थना करता है कि वह पिता को धैर्य दे और उनके मन को अधिक दुखी न करे। यहाँ पिता की संवेदनशीलता और परिवार-प्रेम का मार्मिक चित्रण है।

पद्यांश 11

हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें, मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है, किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है, किंतु उनसे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना।

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि सावन को संबोधित करता है। वह सावन से कहता है कि तुम खूब बरसो, पर मेरे घरवालों की आँखों से आँसू न बरसें। वे पाँचवें अर्थात कवि के लिए न तरसें। कवि कहता है कि वह ठीक है, केवल घर पर नहीं है। पर यही बात सबसे बड़ी पीड़ा है, क्योंकि घर से दूर होना सब सुखों को नीरस बना देता है। फिर भी कवि सावन से कहता है कि यह दुख उसके घरवालों को न बताना, बल्कि उन्हें धैर्य देना। यहाँ कवि अपने दुख से अधिक परिवार के दुख की चिंता करता है।

पद्यांश 12

उन्हें कहना लिख रहा हूँ, उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ, काम करता हूँ कि कहना, नाम करता हूँ कि कहना, चाहते हैं लोग, कहना मत करो कुछ शोक, कहना, और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, वजन सत्तर सेर मेरा, और भोजन ढेर मेरा, कूदता हूँ, खेलता हूँ, दुख डटकर ठेलता हूँ, और कहना मस्त हूँ मैं, यों न कहना अस्त हूँ मैं, हाय रे, ऐसा न कहना, है कि जो वैसा न कहना, कह न देना जागता हूँ, आदमी से भागता हूँ, कह न देना मौन हूँ मैं, खुद न समझूँ कौन हूँ मैं, देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना, हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।

व्याख्या

अंतिम पद्यांश में कवि सावन को संदेशवाहक बनाकर घर भेजना चाहता है। वह सावन से कहता है कि घरवालों से कहना कि वह लिख-पढ़ रहा है, काम कर रहा है और लोग उसे चाहते हैं। उनसे कहना कि वे शोक न करें। कवि चाहता है कि परिवार को यही बताया जाए कि वह स्वस्थ, प्रसन्न और व्यस्त है। वह कातने का काम कर रहा है, अच्छा खा रहा है, खेलता-कूदता है और दुखों का साहस से सामना कर रहा है। पर वह सावन को सावधान करता है कि घरवालों से यह न कहना कि वह भीतर से टूट रहा है, अकेला है, जागता रहता है, लोगों से दूर रहता है और स्वयं को समझ नहीं पा रहा। कवि नहीं चाहता कि परिवार को उसके जेल जीवन की पीड़ा का पता चले। वह बार-बार सावन से प्रार्थना करता है कि वह स्वयं बरस ले, पर उसके घरवाले आँसू न बहाएँ और पाँचवें बेटे के लिए न तरसें। इस प्रकार कविता का अंत त्याग, धैर्य, परिवार-प्रेम और आत्मसंयम के भाव के साथ होता है।

कविता का संक्षिप्त परिचय

“घर की याद” भवानीप्रसाद मिश्र की अत्यंत भावपूर्ण कविता है। इसमें कवि जेल में रहते हुए अपने घर और परिवार को याद करता है। सावन की वर्षा कवि के मन में घर की स्मृतियाँ जगा देती है। उसे अपनी माँ, पिता, भाई, बहन, भाभी और परिवार के अन्य सदस्यों की याद आती है। कवि स्वयं दुखी है, लेकिन वह अपने घरवालों को दुखी नहीं करना चाहता। इसलिए वह सावन से कहता है कि घर जाकर परिवार को केवल यही बताना कि वह ठीक है, पढ़-लिख रहा है, काम कर रहा है और प्रसन्न है।

कविता का सारांश

इस कविता में कवि जेल में बैठा है और बाहर लगातार वर्षा हो रही है। वर्षा का दृश्य उसके मन में घर की याद जगा देता है। उसे लगता है कि उसका घर उसकी आँखों के सामने तैर रहा है। वह अपने संयुक्त परिवार को याद करता है, जिसमें चार भाई, चार बहनें, माँ-पिता और अन्य सदस्य हैं।

कवि अपनी माँ को याद करता है। माँ अनपढ़ है, इसलिए वह पत्र नहीं लिख सकती, पर उसका स्नेह बहुत गहरा है। कवि को लगता है कि माँ धैर्य रखकर पिता को समझा रही होगी कि भवानी अपने कर्तव्य के लिए गया है, इसलिए रोना नहीं चाहिए। इसके बाद कवि अपने पिता को याद करता है। पिता बाहर से बहुत मजबूत और साहसी हैं, पर भीतर से अत्यंत कोमल हैं। वे कवि को याद करके रो पड़े होंगे।

वर्षा कवि को अपने बचपन की याद दिलाती है। उसे याद आता है कि बरसात में वह खुले सिर और नंगे बदन घूमता था, बगीचे में जाता था और पौधे लगाता था। कवि कल्पना करता है कि घर में सभी लोग उसे याद कर रहे होंगे। अंत में कवि सावन से प्रार्थना करता है कि वह घर जाकर परिवार को सांत्वना दे। वह उनसे यह न कहे कि कवि दुखी और अकेला है, बल्कि यह कहे कि वह प्रसन्न है, काम कर रहा है और दुखों का साहस से सामना कर रहा है।

केंद्रीय भाव / मुख्य भाव

इस कविता का केंद्रीय भाव घर और परिवार की याद है। कवि जेल में है, इसलिए वह अपने घर से दूर है। वर्षा का वातावरण उसके मन में घर की स्मृतियाँ और अधिक गहरी कर देता है। कविता में माँ की ममता, पिता का प्रेम, भाई-बहनों का अपनापन और परिवार की आत्मीयता बहुत भावपूर्ण ढंग से व्यक्त हुई है।

साथ ही कविता में त्याग, धैर्य और कर्तव्य-भावना भी दिखाई देती है। कवि देश के लिए जेल में है, पर वह अपने परिवार को अपनी पीड़ा बताकर दुखी नहीं करना चाहता।

कविता का प्रसंग

यह कविता स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखी गई है। कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था, जिसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल में रहते हुए सावन की वर्षा देखकर उन्हें अपने घर और परिवार की याद आती है। इसी भावुक स्थिति में यह कविता लिखी गई है।

शीर्षक की सार्थकता

कविता का शीर्षक “घर की याद” पूरी तरह सार्थक है। पूरी कविता में कवि बार-बार अपने घर, माता-पिता, भाई-बहन और परिवार को याद करता है। वर्षा का हर दृश्य उसे घर की ओर ले जाता है। कवि का मन जेल में होते हुए भी घर में ही भटकता रहता है। इसलिए यह शीर्षक कविता के भाव और विषय दोनों को स्पष्ट करता है।

कविता का संदेश

इस कविता से हमें यह संदेश मिलता है कि घर और परिवार मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा आधार होते हैं। परिवार से दूर होने पर मनुष्य को अपने संबंधों का वास्तविक मूल्य समझ में आता है। कविता यह भी सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखना चाहिए। कवि स्वयं दुख सहता है, पर अपने परिवार को दुखी नहीं करना चाहता। इसमें त्याग, प्रेम और कर्तव्य-निष्ठा का सुंदर संदेश है।

काव्य-सौंदर्य

इस कविता की भाषा सरल, सहज और बोलचाल के निकट है। कवि ने लोकभाषा के शब्दों का प्रयोग किया है, जैसे— छिन, भौजी, चुआ, फलानी आदि। कविता में ध्वन्यात्मक शब्दों का सुंदर प्रयोग है— “झरा-झर”, “हरा-हर”, “सर-सर”, “थर-थर”। इनसे वर्षा और हवा का वातावरण जीवंत हो जाता है।

कविता में पुनरावृत्ति भी है, जैसे— “बहुत पानी गिर रहा है”, “घर नजर में तिर रहा है”, “हे सजीले हरे सावन”। इससे भावों की तीव्रता बढ़ती है। सावन को संदेशवाहक बनाकर कवि ने प्रकृति का मानवीकरण भी किया है।

प्रमुख अलंकार

अनुप्रास अलंकार: “गिर रहा पानी झरा-झर” यहाँ “झ” ध्वनि की पुनरावृत्ति है।

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: “झरा-झर”, “सर-सर”, “थर-थर” जैसे शब्दों में पुनरावृत्ति है।

उपमा अलंकार: “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” यहाँ पिता की भुजाओं की तुलना वज्र से और हृदय की तुलना मक्खन से की गई है।

मानवीकरण: कवि सावन से बात करता है और उसे घरवालों तक संदेश पहुँचाने के लिए कहता है। यहाँ सावन को मनुष्य जैसा माना गया है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और भाव

“बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है” भाव: वर्षा देखकर कवि को घर की याद आने लगती है।

“माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर” भाव: माँ की गोद कवि के लिए सबसे बड़ा सुख और सांत्वना है।

“वज्र-भुज नवनीत-सा उर” भाव: पिता बाहर से कठोर और भीतर से अत्यंत कोमल हैं।

“पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता” भाव: माँ बेटे के कर्तव्य और साहस पर गर्व करती है।

“दुख डटकर ठेलता हूँ” भाव: कवि कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना कर रहा है।

“तुम बरस लो वे न बरसें” भाव: कवि चाहता है कि सावन बरसे, पर उसके परिवार की आँखों से आँसू न बरसें।

15. कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
घनेरीबहुत घनी
तिरनातैरना
परितापअत्यधिक दुख या शोक
चतुर्दिक्चारों ओर
वज्रबहुत कठोर
नवनीतताजा मक्खन
उरहृदय
झंझातेज आँधी
लरजनाकाँपना
धीरधैर्य रखने वाला
झारीलगातार बरसने वाली वर्षा
निहायतबहुत अधिक
लुनाईसुंदरता
क्षितिजजहाँ धरती और आकाश मिलते दिखाई देते हैं
तृषातीव्र इच्छा या प्यास
अश्रुआँसू
क्लेशदुख या पीड़ा
बड़बरगद का पेड़
विरसनीरस
कातनाचरखे पर धागा बनाना
अस्तडूबा हुआ, समाप्त

16. बहुत छोटे उत्तरों में याद रखने योग्य बातें

कवि: भवानीप्रसाद मिश्र कविता का नाम: घर की याद मुख्य भाव: घर और परिवार की याद पृष्ठभूमि: स्वतंत्रता आंदोलन और जेल जीवन प्रमुख प्रतीक: वर्षा, सावन, बादल, घर माँ की छवि: स्नेहमयी, धैर्यवान, मजबूत पिता की छवि: साहसी, कर्मठ, कठोर शरीर और कोमल हृदय वाले संदेश: परिवार का प्रेम अमूल्य है और कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए।

अभ्यास और पुनरावृत्ति

संपूर्ण प्रश्नोत्तर और भाषा-अभ्यास

प्रश्न, उत्तर, तर्क, काव्य-बोध, व्याकरण तथा गतिविधियाँ मूल अध्ययन सामग्री के क्रम में दी गई हैं।

मौलिक अध्ययन-मार्गदर्शिका: NCERT Hindi Tutor · ncerthinditutor.com

घर की याद — रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?

(क) विदेश से मित्र के लिए (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए (ग) जेल से परिवार के लिए (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए

उत्तर

सही विकल्प — (ग) जेल से परिवार के लिए

तर्क

भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता जेल में रहते हुए लिखी थी। वे स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल गए थे। जेल में उन्हें अपने घर और परिवार की याद आ रही थी, इसलिए यह कविता परिवार की स्मृति और घर की याद पर आधारित है।

प्रश्न 2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?

(क) उत्साह और आवेग (ख) भय और क्रोध (ग) साहस और उमंग (घ) चिंता और बेचैनी

उत्तर

सही विकल्प — (घ) चिंता और बेचैनी

तर्क

कविता में लगातार बरसता पानी कवि के उदास और व्याकुल मन को प्रकट करता है। वर्षा के कारण कवि को घर, माता-पिता और परिवार की याद और अधिक सताने लगती है। इसलिए यह चिंता और बेचैनी का परिचायक है।

प्रश्न 3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?

(क) कमजोर और निष्क्रिय (ख) स्नेहमयी और दृढ़ (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय (घ) सरल और उदासीन

उत्तर

सही विकल्प — (ख) स्नेहमयी और दृढ़

तर्क

कविता में माँ अत्यंत स्नेहमयी दिखाई देती है। उसकी गोद में सिर रखने से दुख दूर हो जाता है। साथ ही वह भावनात्मक रूप से मजबूत भी है। वह पिता को समझाती है कि भवानी सही मार्ग पर गया है और रोना नहीं चाहिए। इसलिए माँ की छवि स्नेहमयी और दृढ़ है।

प्रश्न 4. “वज्र – भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?

(क) कर्मठ और सृजनशील (ख) साहसी और पराक्रमी (ग) दृढ़ और संवेदनशील (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय

उत्तर

सही विकल्प — (ग) दृढ़ और संवेदनशील

तर्क

“वज्र-भुज” से पिता की शक्ति और दृढ़ता का पता चलता है, जबकि “नवनीत-सा उर” से उनके कोमल और संवेदनशील हृदय का परिचय मिलता है। वे बाहर से मजबूत हैं, पर भीतर से बहुत भावुक और प्रेमपूर्ण हैं।

प्रश्न 5. “एक पत्ता टूट जाए” बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है।

(क) पिता की कठोरता (ख) पिता की भावुकता (ग) वर्षा की तीव्रता (घ) पिता की निर्बलता

उत्तर

सही विकल्प — (ख) पिता की भावुकता

तर्क

इस पंक्ति का अर्थ है कि परिवार के किसी सदस्य को थोड़ा-सा दुख भी हो जाए, तो पिता की आँखों से आँसू बहने लगते हैं। इससे उनकी भावुकता और परिवार के प्रति गहरे प्रेम का पता चलता है।

प्रश्न 6. “बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?

(क) घर का समृद्ध होना (ख) घर की सजावट (ग) घर में दुख का वातावरण (घ) घर की शांति

उत्तर

सही विकल्प — (ग) घर में दुख का वातावरण

तर्क

‘परिताप’ का अर्थ है अत्यधिक दुख या पीड़ा। बहन के मायके आने पर घर में खुशी होनी चाहिए थी, लेकिन कवि के जेल में होने के कारण घर में दुख और पीड़ा का वातावरण है।

प्रश्न 7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?

(क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है। (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है। (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है। (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।

उत्तर

सही विकल्प — (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।

तर्क

कवि वास्तव में दुखी और अकेला है, पर वह अपने परिवार को दुखी नहीं करना चाहता। इसलिए वह सावन से कहता है कि घरवालों से कहना कि मैं मस्त हूँ। इससे पता चलता है कि वह अपना दुख छिपाना चाहता है।

प्रश्न 8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?

(क) घर की शांति और सुरक्षा (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

उत्तर

सही विकल्प — (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

तर्क

पूरी कविता में कवि अपने घर, माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार को याद करता है। जेल में रहते हुए वह अकेलापन महसूस करता है। इसलिए कविता में मुख्य रूप से घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा का वर्णन है।

मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।

उत्तर

कविता में कवि के पिता का व्यक्तित्व बहुआयामी रूप में सामने आता है। वे भोले, बहादुर, साहसी और कर्मठ व्यक्ति हैं। कवि ने उन्हें “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” कहा है। इसका अर्थ है कि उनकी भुजाएँ वज्र जैसी शक्तिशाली हैं, पर उनका हृदय मक्खन जैसा कोमल है। वे वृद्ध होने पर भी कमजोर नहीं हुए हैं। वे गीता-पाठ करते हैं, व्यायाम करते हैं और मुगदर चलाते हैं। वे मृत्यु और शेर जैसे संकटों से भी नहीं डरते। फिर भी बेटे की याद आते ही उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। इस प्रकार पिता के व्यक्तित्व में साहस, शक्ति, धार्मिकता, कर्मठता और गहरी भावुकता सब दिखाई देती हैं।

प्रश्न 2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?

उत्तर

कवि जेल में है और अपने घर-परिवार से दूर है। उसे माँ, पिता, भाई, बहन और पूरे परिवार की बहुत याद आती है। फिर भी वह अपने दुख को परिवार पर प्रकट नहीं करना चाहता। वह सावन से कहता है कि घरवालों से कहना कि मैं मस्त हूँ, लिख-पढ़ रहा हूँ, काम कर रहा हूँ, अच्छा खा रहा हूँ और दुख को डटकर ठेल रहा हूँ। इससे पता चलता है कि कवि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखता है। वह अपने देश और कर्तव्य के लिए जेल का कष्ट सह रहा है। अपने परिवार को दुखी न करने के लिए वह अपनी पीड़ा छिपाता है। यही उसका साहस, त्याग और संघर्षशील स्वभाव है।

प्रश्न 3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?

उत्तर

कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के मन की उदासी, बेचैनी और घर की याद को व्यक्त करता है। लगातार गिरता पानी कवि की आँखों के आँसुओं जैसा प्रतीत होता है। वर्षा का अँधेरा और शांत वातावरण कवि के अकेलेपन को और गहरा कर देता है। सावन की बारिश उसे अपने बचपन, घर, माता-पिता और भाई-बहनों की याद दिलाती है। कवि सावन को संदेशवाहक बनाकर अपने परिवार तक सांत्वना पहुँचाना चाहता है। इस प्रकार वर्षा कविता में केवल प्राकृतिक दृश्य नहीं है, बल्कि कवि के दुख, स्मृति, प्रेम और भावुकता का प्रतीक है।

प्रश्न 4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।

उत्तर

माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय इन पंक्तियों से मिलता है—

“आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी,”

भाव

माँ पिता को समझाती है कि आँखों में आँसू लाने की आवश्यकता नहीं है। वह कहती है कि भवानी जहाँ है, वहाँ अच्छा होगा। इससे माँ का धैर्य दिखाई देता है।

“गया है सो ठीक ही है यह तुम्हारी लीक ही है,”

भाव

माँ जानती है कि कवि अपने कर्तव्य और देश-प्रेम के कारण जेल गया है। इसलिए वह उसके निर्णय को सही मानती है।

“पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता,”

भाव

माँ कहती है कि यदि भवानी कर्तव्य-पथ से पीछे हटता, तो वह मेरी कोख को लजा देता। इससे माँ की देशभक्ति, साहस और भावनात्मक दृढ़ता स्पष्ट होती है।

“इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे,”

भाव

माँ पिता को कमजोर न पड़ने की सलाह देती है, क्योंकि यदि वे रोएँगे तो घर के बाकी बच्चे भी रो पड़ेंगे। इससे माँ की समझदारी और आत्मसंयम प्रकट होता है।

प्रश्न 5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?

उत्तर

मुझे कविता का यह अंश सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है—

“माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर,”

यह अंश अत्यंत मार्मिक है, क्योंकि इसमें माँ की ममता और स्नेह का बहुत सुंदर चित्रण हुआ है। कवि के अनुसार माँ की गोद ऐसी जगह है जहाँ सारे दुख समाप्त हो जाते हैं। जेल में रहते हुए कवि को माँ की गोद, उसका स्नेह और उसका अपनापन बहुत याद आता है। इस अंश से स्पष्ट होता है कि माँ का प्रेम मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी सांत्वना होता है। इसलिए यह अंश कविता का बहुत भावुक और प्रभावशाली भाग है।

विधा से संवाद — संक्षिप्त उत्तर

कविता का सौंदर्य

प्रश्न: कविता से दी गई विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर

विशेषताकविता से पंक्तियाँ
स्मृति और दृश्य बिंब“बहुत पानी गिर रहा है, / घर नजर में तिर रहा है”
लोकभाषा की सहजता“एक छिन सौ बरस है रे”
पंक्तियों का दोहराव“आज पानी गिर रहा है, / बहुत पानी गिर रहा है”
आलंकारिक प्रयोग“वज्र-भुज नवनीत-सा उर”
प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन“गिर रहा पानी झरा-झर, / हिल रहे पत्ते हरा-हर, / बह रही है हवा सर-सर, / काँपते हैं प्राण थर-थर”
संबोधनात्मकता“हे सजीले हरे सावन, / हे कि मेरे पुण्य पावन”

कविता की संरचना

प्रश्न: ‘घर की याद’ कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें।

उत्तर

‘घर की याद’ कविता कवि के मन में उठती भावनाओं की यात्रा है। कविता की शुरुआत लगातार गिरते पानी से होती है, जो कवि की उदासी और बेचैनी को प्रकट करता है। सबेरा हो जाने पर भी बादलों के कारण अँधेरा छाया रहता है, जिससे कवि का अकेलापन बढ़ता है। वर्षा देखकर उसे अपना घर, माँ, पिता, भाई-बहन और बचपन याद आते हैं। बाद में पानी थम जाता है, पर कवि का मन नम बना रहता है। अंत में कवि सावन को संदेशवाहक बनाकर अपने परिवार को धैर्य देने की प्रार्थना करता है। इस प्रकार प्रकृति के माध्यम से कवि की स्मृति, पीड़ा, प्रेम और त्याग की यात्रा व्यक्त हुई है।

विषयों से संवाद

प्रश्न 1. कविता में चित्रित ‘घर’ एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन सी नापसंद?

उत्तर

संयुक्त परिवार में सभी सदस्य साथ रहते हैं, इसलिए प्रेम, सहयोग, सुरक्षा और संस्कार मिलते हैं। लेकिन कभी-कभी इसमें स्वतंत्रता कम हो जाती है और विचारों के अंतर से झगड़े भी हो सकते हैं। एकल परिवार में स्वतंत्रता अधिक होती है और निर्णय जल्दी लिए जाते हैं, पर इसमें अकेलापन अधिक हो सकता है। मुझे संयुक्त परिवार का अपनापन और एकल परिवार की स्वतंत्रता पसंद है, लेकिन संयुक्त परिवार के झगड़े और एकल परिवार का अकेलापन नापसंद है।

प्रश्न 2. कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

उत्तर

लगातार बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भर सकता है, फसलें खराब हो सकती हैं और कच्चे मकानों को नुकसान पहुँच सकता है। गाँवों की सड़कें टूट सकती हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। शहरी क्षेत्रों में जलभराव, ट्रैफिक जाम, बिजली की समस्या, गंदगी और बीमारियाँ फैल सकती हैं। इसलिए उचित जल-निकासी और सफाई व्यवस्था आवश्यक है।

प्रश्न 3. कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।

उत्तर

पुराने समय में पत्र, दूत, कबूतर, तार और मुनादी जैसे संचार माध्यमों का प्रयोग होता था। ये माध्यम धीमे थे, पर इनमें अपनापन और भावनात्मकता अधिक होती थी। आज मोबाइल फोन, इंटरनेट, ई-मेल, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया जैसे माध्यम हैं। ये बहुत तेज और सुविधाजनक हैं। पुराने माध्यमों में धैर्य और आत्मीयता थी, जबकि नए माध्यमों में गति और सुविधा है।

प्रश्न 4. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ विषय पर लेख लिखिए।

उत्तर

भारत का स्वतंत्रता संग्राम हमारे देश के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। अंग्रेजों के शासन से मुक्ति पाने के लिए भारतीयों ने लंबा संघर्ष किया। 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। बाद में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन चलाए। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई आदि वीरों ने देश के लिए बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता संग्राम हमें देशभक्ति, साहस, त्याग और एकता की प्रेरणा देता है।

सृजन

प्रश्न 1. कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?

उत्तर

प्रिय बेटे भवानी,

स्नेह और आशीर्वाद।

तुम्हारा ध्यान हर समय मन में बना रहता है। घर के सभी लोग तुम्हें बहुत याद करते हैं। तुम्हारे पिताजी बाहर से अपने को संभालते हैं, पर तुम्हारा नाम आते ही उनकी आँखें भर आती हैं। भाई-बहन भी तुम्हारी बातें करते रहते हैं। तुम्हारी बहन भी मायके आई है, पर तुम्हारे बिना घर का आनंद पूरा नहीं लगता।

बेटा, तुम चिंता मत करना। हम सब ठीक हैं। तुमने जो मार्ग चुना है, वह कठिन जरूर है, पर सही है। देश और सत्य के लिए कष्ट सहना गर्व की बात है। यदि तुम अपने कर्तव्य से पीछे हटते, तो मुझे दुख होता। तुम धैर्य रखना और अपना स्वास्थ्य सँभालना।

तुम्हें बरसात बहुत प्रिय थी। सावन आया है, तो तुम्हारी बचपन की बातें याद आती हैं। तुम बारिश में भीगते हुए बगीचे में घूमते थे और पौधे लगाया करते थे। तुम्हारी वही छवि आज भी आँखों के सामने है।

बेटा, दुख से घबराना मत। पढ़ते-लिखते रहना, अच्छा भोजन करना और अपने मन को मजबूत रखना। हम सब तुम्हारे साथ हैं। भगवान तुम्हारी रक्षा करें। जल्दी ही वह दिन आएगा जब तुम फिर घर आओगे और घर पहले की तरह हँसी-खुशी से भर जाएगा।

तुम्हारी माँ आशीर्वाद

प्रश्न 2. कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

माँ: आप इतने उदास क्यों बैठे हैं? आँखों में आँसू क्यों हैं?

पिताजी: कुछ नहीं, मैं रो कहाँ रहा हूँ? बस आज बारिश हो रही है, तो भवानी की याद आ गई।

माँ: मुझे भी उसकी बहुत याद आती है, पर हमें धैर्य रखना चाहिए।

पिताजी: बरसात उसे बहुत प्यारी थी। खुले सिर, नंगे बदन बारिश में घूमता रहता था। बगीचे में जाकर लौकी के बीज लगाता था।

माँ: हाँ, वह बचपन से ही अलग स्वभाव का था। जो बात उसे सही लगती थी, वह वही करता था।

पिताजी: पता नहीं जेल में कैसा होगा? कितना कष्ट सहता होगा!

माँ: आप चिंता मत कीजिए। वह वहाँ अच्छा होगा। उसने अपना रास्ता सोच-समझकर चुना है।

पिताजी: पर वह हमारा पाँचवाँ बेटा है। उसके बिना घर खाली-खाली लगता है।

माँ: यह बात सही है, लेकिन यदि वह कर्तव्य से पीछे हट जाता, तो मुझे अधिक दुख होता। देश के लिए कष्ट सहना गर्व की बात है।

पिताजी: मैं धीरज रखने की कोशिश करता हूँ, पर मन मानता नहीं।

माँ: आपको मजबूत रहना होगा। यदि आप रोएँगे, तो बच्चे भी रो पड़ेंगे।

पिताजी: तुम ठीक कहती हो। हमें उसे आशीर्वाद देना चाहिए।

माँ: हाँ, भगवान से प्रार्थना कीजिए कि वह स्वस्थ रहे, साहसी रहे और अपना काम पूरा करके लौटे।

प्रश्न 3. इस कविता में कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाया है। अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?

उत्तर

यदि मुझे किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से संदेश भेजना हो, तो मैं हवा को संदेशवाहक चुनूँगा। हवा हर जगह पहुँच सकती है और उसे कोई रोक नहीं सकता। मैं हवा से कहूँगा कि वह मेरे घरवालों तक मेरा प्रेम और सम्मान पहुँचा दे। हवा शीतलता और शांति देती है, इसलिए वह मेरे प्रियजनों को सांत्वना भी दे सकती है। इस कारण हवा मेरे लिए सबसे अच्छा संदेशवाहक होगी।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

प्रश्न 1. स्थानीय भाषा के शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।

1. “एक छिन सौ बरस है रे”

रेखांकित शब्द: छिन अर्थ: क्षण, पल, थोड़ा-सा समय

नया वाक्य: एक छिन के लिए भी माँ की याद मन से दूर नहीं होती।

2. “तुझे बतलाता कि बेला / ने फलानी फूल झेला”

रेखांकित शब्द: फलानी अर्थ: कोई अमुक व्यक्ति या वस्तु; जिसका नाम स्पष्ट न बताया गया हो।

नया वाक्य: वह फलानी किताब मुझे पुस्तकालय से मिली थी।

3. “और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला”

रेखांकित शब्द: भौजी अर्थ: भाभी

नया वाक्य: मेरी भौजी ने त्योहार पर स्वादिष्ट पकवान बनाए।

4. “मन कि बड़ का झाड़ जैसे”

रेखांकित शब्द: बड़ अर्थ: बरगद का पेड़ / वट वृक्ष

नया वाक्य: गाँव के मंदिर के पास एक बहुत पुराना बड़ का पेड़ है।

प्रश्न 2. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।

उदाहरण

“बहुत पानी गिर रहा है”

• ‘पानी’ शब्द है — संज्ञा • ‘बहुत’ शब्द है — विशेषण • ‘गिर रहा है’ है — क्रिया

(ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा”

• ‘बुढ़ापा’ शब्द है — भाववाचक संज्ञा • ‘व्यापा’ शब्द है — क्रिया • ‘जिनको’ शब्द है — सर्वनाम

(ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह”

• ‘खुले’ शब्द है — विशेषण • ‘वह’ शब्द है — सर्वनाम • ‘बदन’ शब्द है — संज्ञा • ‘फिरता’ शब्द है — क्रिया

(घ) “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए”

• ‘एक’ शब्द है — संख्यावाचक विशेषण • ‘फूट जाए’ है — क्रिया • ‘पत्ता’ शब्द है — संज्ञा

(ङ) “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन”

• ‘सजीले’ शब्द है — विशेषण • ‘मेरे’ शब्द है — सर्वनाम • ‘सावन’ शब्द है — संज्ञा

गतिविधियाँ

प्रश्न 1. कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर

मेरा परिवार वृक्ष

दादाजी ─── दादीजी

पिताजी ─── माताजी

┌──────────────┼──────────────┐

मैं भाई बहन

परिवार के सदस्यों का व्यक्तित्व

दादाजी: मेरे दादाजी शांत और अनुभवी व्यक्ति हैं। वे हमें जीवन के अच्छे संस्कार देते हैं। वे हमेशा परिवार को एक साथ रहने की सीख देते हैं।

दादीजी: मेरी दादीजी स्नेहमयी और धार्मिक स्वभाव की हैं। वे सबका ध्यान रखती हैं और घर में प्रेम का वातावरण बनाए रखती हैं।

पिताजी: मेरे पिताजी परिश्रमी, अनुशासनप्रिय और जिम्मेदार व्यक्ति हैं। वे परिवार की हर आवश्यकता का ध्यान रखते हैं। वे हमें मेहनत और ईमानदारी का महत्व समझाते हैं।

माताजी: मेरी माताजी प्रेममयी, धैर्यवान और समझदार हैं। वे घर के सभी सदस्यों की देखभाल करती हैं। कठिन समय में वे हमें साहस और धैर्य देती हैं।

मैं: मैं अपने परिवार से बहुत प्रेम करता/करती हूँ। मैं पढ़ाई में मेहनत करता/करती हूँ और अपने बड़ों का सम्मान करता/करती हूँ।

भाई: मेरा भाई चंचल, मददगार और मिलनसार है। वह पढ़ाई और खेल दोनों में रुचि रखता है।

बहन: मेरी बहन समझदार, स्नेही और रचनात्मक स्वभाव की है। वह घर के कामों में सहायता करती है और सबके साथ प्रेम से रहती है।

प्रश्न 2. कविता में प्रयुक्त ध्वनि-आधारित शब्द जैसे— झरा-झर, थर-थर, सर-सर को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए। बताइए कि ये शब्द कविता में कैसे वातावरण का निर्माण करते हैं?

उत्तर

मौखिक पाठ / ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए पंक्तियाँ

“गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर।”

वातावरण निर्माण

ये ध्वनि-आधारित शब्द कविता में वर्षा का जीवंत वातावरण बनाते हैं। “झरा-झर” से पानी गिरने की आवाज़ आती है, “सर-सर” से हवा के बहने का अनुभव होता है और “थर-थर” से भय, ठंडक तथा मन की बेचैनी प्रकट होती है। इन शब्दों के प्रयोग से पाठक को ऐसा लगता है जैसे वह स्वयं वर्षा, हवा और उदासी से भरे वातावरण में उपस्थित हो। इससे कविता का नाद-सौंदर्य और प्रभाव बढ़ जाता है।

भाषा संगम

प्रश्न 1. इनके अतिरिक्त यदि आप ‘घर’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर

‘घर’ शब्द को कुछ अन्य भाषाओं में इस प्रकार कहा जाता है—

भाषा‘घर’ के लिए शब्द
अंग्रेज़ीHome / House
फ्रेंचMaison
स्पेनिशCasa
अरबीBayt
जर्मनHaus

प्रश्न 2. उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

वाक्य है— “घर कि घर में सब जुड़े हैं।”

मेरी मातृभाषा हिंदी में: घर में सभी लोग आपस में जुड़े हुए हैं।

अंग्रेज़ी में: Everyone in the family is connected with one another.

खोजबीन

प्रश्न 1. शिक्षक की सहायता से ऐसी किसी अन्य कविता अथवा कहानी के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए जिसमें घर, परिवार की याद जैसी भावनाएँ चित्रित हों। साथ ही पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से उस रचना को कक्षा में पढ़कर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दीजिए।

उत्तर

रचना: राम का वनवास प्रसंग ग्रंथ: रामचरितमानस रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास

रामचरितमानस में राम के वनवास का प्रसंग घर, परिवार और वियोग की भावनाओं से भरा हुआ है। जब राम वन जाते हैं, तो माता कौशल्या, राजा दशरथ, सीता, लक्ष्मण और अयोध्या के लोग दुखी हो जाते हैं। यह प्रसंग बताता है कि घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि प्रेम, संबंध और अपनापन का केंद्र होता है।

प्रश्न 2. ‘घर की याद’ कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बनाकर अपने परिवार के पास संदेश ले जाने का आग्रह करता है। प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में बताइए और इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है।

उत्तर

साहित्य में प्रकृति को संदेशवाहक बनाने के कई उदाहरण मिलते हैं। कालिदास के ‘मेघदूत’ में बादल को संदेशवाहक बनाया गया है। कृष्ण-भक्ति काव्य के भ्रमरगीत में भ्रमर के माध्यम से विरह की भावना व्यक्त होती है। कई लोकगीतों में कोयल, पपीहा और हवा को संदेश ले जाने वाला माना गया है। इसी प्रकार ‘घर की याद’ कविता में सावन, बादल और हवा को कवि के परिवार तक संदेश पहुँचाने का माध्यम बनाया गया है।