कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 8 के संपूर्ण नोट्स में समय मापन के साधन, सरल लोलक, आवर्ती गति, दोलनकाल, चाल, औसत चाल और दूरी-समय आलेख समझिए।
इस अध्याय में हम सीखते हैं कि समय और गति का मापन हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। दौड़ प्रतियोगिता, रेलगाड़ी की चाल, वाहन की गति, घड़ी से समय देखना आदि सभी में समय और गति का मापन किया जाता है।
प्राचीन समय में लोगों के पास आधुनिक घड़ियाँ नहीं थीं। वे सूर्य, चंद्रमा, ऋतुओं और छाया जैसी प्राकृतिक घटनाओं के आधार पर समय का अनुमान लगाते थे। धीरे-धीरे धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी और मोमबत्ती-घड़ी जैसे उपकरण बनाए गए। आज हमारे पास कलाई घड़ी, मोबाइल फोन, विराम घड़ी, डिजिटल घड़ी और परमाणु घड़ी जैसे बहुत सटीक उपकरण हैं।

8.1 समय का मापन

समय का मापन मनुष्य के लिए बहुत पुराने समय से महत्वपूर्ण रहा है। प्रकृति में कई घटनाएँ नियमित समय अंतराल पर दोहराई जाती हैं, जैसे—
सूर्य का उदय और अस्त होना। चंद्रमा की कलाओं का बदलना। ऋतुओं का परिवर्तन।
इन्हीं घटनाओं के आधार पर पहले लोगों ने कैलेंडर बनाए। बाद में दिन के छोटे-छोटे समय अंतरालों को मापने के लिए अलग-अलग घड़ियाँ बनाई गईं।
पुराने समय में समय मापने के उपकरण
1. धूप-घड़ी
धूप-घड़ी में सूर्य के प्रकाश से बनने वाली छाया की स्थिति के आधार पर समय का अनुमान लगाया जाता था। जैसे-जैसे सूर्य की दिशा बदलती है, छाया की स्थिति भी बदलती है।
2. जल-घड़ी
जल-घड़ी में समय मापने के लिए पानी के बहाव का उपयोग किया जाता था। पानी एक पात्र से दूसरे पात्र में धीरे-धीरे गिरता था और उसके स्तर से समय का पता लगाया जाता था।
3. रेत-घड़ी

रेत-घड़ी में एक भाग से दूसरे भाग में रेत के गिरने से समय मापा जाता था। आज भी कभी-कभी खेलों या छोटे समय मापन में इसका उपयोग देखा जाता है।
4. मोमबत्ती-घड़ी
मोमबत्ती-घड़ी में मोमबत्ती पर निशान बने होते थे। मोमबत्ती के जलने पर यह पता चलता था कि कितना समय बीत चुका है।
8.1.1 सरल लोलक
सरल लोलक में एक छोटी भारी गेंद या धातु का गोलक होता है, जो एक लंबे धागे से किसी दृढ़ आधार से लटका होता है।

जब लोलक को थोड़ा-सा एक ओर खींचकर छोड़ा जाता है, तो वह इधर-उधर झूलने लगता है। इस गति को दोलन गति कहते हैं।
सरल लोलक के मुख्य भाग
दृढ़ आधार लंबा धागा गोलक
माध्य स्थिति
जब लोलक स्थिर अवस्था में होता है, तो वह जिस स्थिति में रहता है उसे माध्य स्थिति कहते हैं।
चरम स्थिति
लोलक झूलते समय दोनों ओर जहाँ तक जाता है, उन स्थितियों को चरम स्थिति कहते हैं।
एक दोलन
जब लोलक एक स्थिति से चलकर दूसरी ओर जाता है और फिर वापस अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाता है, तो इसे एक दोलन कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि लोलक एक चरम स्थिति से दूसरी चरम स्थिति तक जाए और फिर वापस पहली चरम स्थिति पर आ जाए, तो यह एक पूरा दोलन होगा।
दोलनकाल
लोलक को एक दोलन पूरा करने में जितना समय लगता है, उसे उसका दोलनकाल कहते हैं।
सरल लोलक की विशेषताएँ
किसी निश्चित लंबाई के सरल लोलक का एक ही स्थान पर दोलनकाल लगभग समान रहता है। सरल लोलक का दोलनकाल उसकी लंबाई पर निर्भर करता है। सरल लोलक का दोलनकाल गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। लोलक के इसी गुण का उपयोग पुरानी लोलक घड़ियों में समय मापने के लिए किया जाता था।
8.1.2 समय का SI मात्रक
समय का SI मात्रक सेकंड है। इसका प्रतीक s है।
बड़े मात्रक—
60 सेकंड = 1 मिनट 60 मिनट = 1 घंटा
सही प्रतीक
सेकंड का सही प्रतीक: s मिनट का सही प्रतीक: min घंटा का सही प्रतीक: h
ध्यान रखने योग्य बात—
सेकंड के लिए “से.” या “sec” लिखना सही नहीं है। घंटे के लिए “घं.” या “hrs” लिखना सही नहीं है। संख्या और मात्रक के बीच थोड़ा रिक्त स्थान छोड़ना चाहिए।
उदाहरण: 10 s 5 min 2 h
8.2 धीमा या तेज
जब कोई वस्तु कम समय में अधिक दूरी तय करती है, तो हम कहते हैं कि वह तेज चल रही है। जब कोई वस्तु अधिक समय में कम दूरी तय करती है, तो हम कहते हैं कि वह धीमी चल रही है।
उदाहरण के लिए, यदि दो धावक एक साथ दौड़ना शुरू करते हैं और कुछ समय बाद एक धावक दूसरे से आगे निकल जाता है, तो आगे वाला धावक अधिक तेज माना जाएगा।
मुख्य बात
समान समय में जो वस्तु अधिक दूरी तय करती है, उसकी चाल अधिक होती है। समान दूरी को जो वस्तु कम समय में तय करती है, उसकी चाल अधिक होती है।
8.3 चाल
किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को उस वस्तु की चाल कहते हैं।
सरल शब्दों में—
चाल बताती है कि कोई वस्तु कितनी तेज या धीमी चल रही है।
चाल का सूत्र

चाल का SI मात्रक
चाल का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड है। इसे m/s लिखा जाता है।
यदि दूरी किलोमीटर में और समय घंटे में हो, तो चाल का मात्रक km/h होता है।
उदाहरण
यदि कोई साइकिल 3.6 km दूरी 15 मिनट में तय करती है, तो उसकी चाल m/s में निकाली जा सकती है।
दूरी = 3.6 km = 3600 m समय = 15 min = 15 × 60 = 900 s
चाल = दूरी / समय चाल = 3600 / 900 चाल = 4 m/s
इसलिए साइकिल की चाल 4 m/s है।
8.3.1 चाल, दूरी एवं समय में संबंध
चाल, दूरी और समय आपस में जुड़े हुए हैं।
1. चाल ज्ञात करने का सूत्र
चाल = दूरी / समय
2. दूरी ज्ञात करने का सूत्र
दूरी = चाल × समय
3. समय ज्ञात करने का सूत्र
समय = दूरी / चाल
उदाहरण 1
एक बस 50 km/h की चाल से चल रही है। यदि वह 2 h चलती है, तो दूरी होगी—
दूरी = चाल × समय दूरी = 50 × 2 दूरी = 100 km
अतः बस ने 100 km दूरी तय की।
उदाहरण 2
एक रेलगाड़ी 90 km/h की चाल से 360 km दूरी तय करती है। समय होगा—
समय = दूरी / चाल समय = 360 / 90 समय = 4 h
अतः रेलगाड़ी को 4 घंटे लगेंगे।
औसत चाल
कई बार कोई वस्तु पूरी यात्रा में समान चाल से नहीं चलती। कभी वह तेज चलती है और कभी धीमी। ऐसी स्थिति में हम औसत चाल निकालते हैं।
औसत चाल = कुल चली गई दूरी / कुल लिया गया समय
इस अध्याय में जहाँ “चाल” शब्द का प्रयोग किया गया है, वहाँ कई स्थानों पर उसका अर्थ औसत चाल भी है।
चालमापी और पथमापी
वाहनों में चाल और दूरी मापने के लिए विशेष यंत्र लगे होते हैं।
चालमापी
चालमापी को स्पीडोमीटर भी कहते हैं। यह वाहन की चाल बताता है। यह चाल को प्रायः km/h में दिखाता है।
पथमापी
पथमापी को ओडोमीटर भी कहते हैं। यह बताता है कि वाहन ने कुल कितनी दूरी तय की है।
8.4 एकसमान एवं असमान रेखीय गति
जब कोई वस्तु सीधी रेखा में गति करती है, तो उसकी गति को रेखीय गति कहते हैं।
एकसमान रेखीय गति
जब कोई वस्तु सरल रेखा में नियत चाल से चलती है, तो उसकी गति को एकसमान रेखीय गति कहते हैं।
इसमें वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरी तय करती है।
उदाहरण—
यदि कोई रेलगाड़ी हर 10 मिनट में 20 km दूरी तय करती है, तो उसकी गति एकसमान रेखीय गति कहलाएगी।
असमान रेखीय गति
जब कोई वस्तु सरल रेखा में चलते हुए अपनी चाल बदलती रहती है, तो उसकी गति को असमान रेखीय गति कहते हैं।
इसमें वस्तु समान समय अंतराल में अलग-अलग दूरी तय करती है।
उदाहरण—
रेलगाड़ी स्टेशन से चलना शुरू करती है, फिर धीरे-धीरे तेज होती है, कुछ समय तक समान चाल से चलती है और फिर अगले स्टेशन पर रुकने से पहले धीमी हो जाती है। यहाँ शुरू और अंत में उसकी गति असमान होती है।
एकसमान और असमान रेखीय गति में अंतर
एकसमान रेखीय गति में वस्तु की चाल नियत रहती है। असमान रेखीय गति में वस्तु की चाल बदलती रहती है।
एकसमान रेखीय गति में समान समय में समान दूरी तय होती है। असमान रेखीय गति में समान समय में अलग-अलग दूरी तय होती है।
महत्वपूर्ण सूत्र
चाल = दूरी / समय
दूरी = चाल × समय
समय = दूरी / चाल
औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय
महत्वपूर्ण मात्रक
समय का SI मात्रक = सेकंड समय का प्रतीक = s
चाल का SI मात्रक = मीटर प्रति सेकंड चाल का प्रतीक = m/s
चाल का अन्य सामान्य मात्रक = किलोमीटर प्रति घंटा प्रतीक = km/h
परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु
- समय का SI मात्रक सेकंड है।
- सरल लोलक का दोलनकाल एक दोलन पूरा करने में लगने वाला समय है।
- किसी निश्चित लंबाई के लोलक का एक ही स्थान पर दोलनकाल लगभग समान रहता है।
- लोलक का दोलनकाल उसकी लंबाई पर निर्भर करता है।
- लोलक का दोलनकाल गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
- चाल वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी है।
- चाल = दूरी / समय।
- चाल का SI मात्रक m/s है।
- km/h भी चाल का एक सामान्य मात्रक है।
- स्पीडोमीटर वाहन की चाल बताता है।
- ओडोमीटर वाहन द्वारा तय की गई दूरी बताता है।
- एकसमान रेखीय गति में वस्तु समान समय में समान दूरी तय करती है।
- असमान रेखीय गति में वस्तु समान समय में अलग-अलग दूरी तय करती है।
संक्षेप में
इस अध्याय में हमने समय और गति के मापन के बारे में सीखा। पुराने समय में लोग समय मापने के लिए धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी और मोमबत्ती-घड़ी का उपयोग करते थे। बाद में लोलक घड़ी का विकास हुआ। सरल लोलक का दोलनकाल उसकी लंबाई पर निर्भर करता है और निश्चित लंबाई के लोलक का दोलनकाल एक ही स्थान पर लगभग समान रहता है।
समय का SI मात्रक सेकंड है और इसका प्रतीक s है। चाल किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी होती है। चाल का सूत्र है—चाल = दूरी / समय। चाल का SI मात्रक m/s है। दूरी, चाल और समय के बीच संबंध को सूत्रों से समझा जा सकता है। यदि कोई वस्तु सीधी रेखा में नियत चाल से चलती है, तो उसकी गति एकसमान रेखीय गति कहलाती है। यदि उसकी चाल बदलती रहती है, तो उसकी गति असमान रेखीय गति कहलाती है।
यह अध्याय हमें बताता है कि समय और गति का सही मापन विज्ञान, खेल, यात्रा, चिकित्सा, परिवहन और दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी है।
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