कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 9 के पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के संपूर्ण उत्तर पाचन, श्वसन, दाँत, लार, भोजन के पथ और प्रयोग-आधारित चित्रों सहित पढ़िए।
आइए, और अधिक सीखें — प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. रिक्त बक्सों को उपयुक्त भागों से भर कर आहार नाल के द्वारा भोजन की यात्रा को पूरा कीजिए।
भोजन → मुख → ______ → आमाशय → ______ → ______ → गुदा
उत्तर: आहार नाल में भोजन की यात्रा का सही क्रम है—
भोजन → मुख → ग्रासनली → आमाशय → क्षुद्रांत्र → बृहदांत्र → गुदा
भोजन मुख से प्रवेश करता है। इसके बाद वह ग्रासनली से होकर आमाशय, क्षुद्रांत्र और बृहदांत्र में पहुँचता है। अंत में अपचा भोजन मल के रूप में गुदा द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।
प्रश्न 2. साहिल ने परखनली ‘क’ में रोटी के कुछ टुकड़े डाले। नेहा ने परखनली ‘ख’ में रोटी के टुकड़ों को चबा कर डाला और संतुष्टि ने परखनली ‘ग’ में उबले हुए आलू मसल कर डाले। उन सभी ने क्रमशः परखनली ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ में आयोडीन विलयन की कुछ बूँदें डालीं। उनके क्या अवलोकन होंगे? कारण बताइए।
उत्तर: तीनों परखनलियों में निम्नलिखित अवलोकन होंगे—
परखनली ‘क’—रोटी के टुकड़े: रोटी का रंग नीला-काला हो जाएगा क्योंकि रोटी में मंड उपस्थित होता है। आयोडीन मंड के साथ अभिक्रिया करके नीला-काला रंग देता है।
परखनली ‘ख’—चबाई हुई रोटी: चबाई हुई रोटी का रंग नीला-काला नहीं होगा अथवा बहुत हल्का नीला-काला होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि चबाने के दौरान लार रोटी में उपस्थित मंड के अधिकांश भाग को सरल शर्करा में बदल देती है।
परखनली ‘ग’—उबला हुआ मसला आलू: उबले हुए आलू का रंग नीला-काला हो जाएगा क्योंकि आलू में भी मंड उपस्थित होता है।
अतः परखनली ‘क’ और ‘ग’ में स्पष्ट नीला-काला रंग दिखाई देगा, जबकि परखनली ‘ख’ में रंग परिवर्तन नहीं होगा या बहुत हल्का होगा।
प्रश्न 3. श्वास लेने में डायाफ्राम की क्या भूमिका है?
(i) वायु को निस्यंदित करना (ii) ध्वनि उत्पन्न करना (iii) अंतःश्वसन और उच्छ्वसन में सहायता करना (iv) ऑक्सीजन अवशोषित करना
उत्तर: सही विकल्प है—
(iii) अंतःश्वसन और उच्छ्वसन में सहायता करना
डायाफ्राम फेफड़ों के नीचे स्थित एक गुंबदाकार पेशी है।
- अंतःश्वसन के समय डायाफ्राम नीचे की ओर जाता है, जिससे वक्ष गुहा का विस्तार होता है और वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है।
- उच्छ्वसन के समय डायाफ्राम ऊपर की ओर अपनी पूर्व स्थिति में आ जाता है, जिससे वक्ष गुहा का विस्तार कम होता है और वायु फेफड़ों से बाहर निकलती है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित का मिलान कीजिए—
| भाग का नाम | प्रकार्य |
|---|---|
| (i) नासाद्वार | (क) बाहर से हवा प्रवेश करती है। |
| (ii) नासा पथ | (ख) गैसों का विनिमय होता है। |
| (iii) श्वासनली | (ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। |
| (iv) कूपिकाएँ | (घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा हमारे द्वारा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकने में सहायक हैं। |
| (v) पसली पिंजर | (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है। |
उत्तर: सही मिलान है—
- (i) नासाद्वार — (क) बाहर से हवा प्रवेश करती है।
- (ii) नासा पथ — (घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकते हैं।
- (iii) श्वासनली — (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है।
- (iv) कूपिकाएँ — (ख) गैसों का विनिमय होता है।
- (v) पसली पिंजर — (ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
प्रश्न 5. अनिल ने अपनी सहपाठी सान्वी से कहा कि श्वसन और श्वास लेना एक ही प्रक्रिया है। अनिल को यह समझाने के लिए कि यह कथन सही नहीं है, सान्वी उससे क्या प्रश्न पूछ सकती है?
उत्तर: सान्वी अनिल से यह प्रश्न पूछ सकती है—
“यदि श्वसन और श्वास लेना एक ही प्रक्रिया हैं, तो श्वास लेने में केवल वायु अंदर और बाहर जाती है, जबकि श्वसन में ग्लूकोस तथा ऑक्सीजन से ऊर्जा कैसे उत्पन्न होती है?”
श्वास लेना और श्वसन अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं—
- श्वास लेना एक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसमें वायु शरीर के अंदर ली और बाहर छोड़ी जाती है।
- श्वसन एक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन की सहायता से ग्लूकोस का विघटन होता है और ऊर्जा मुक्त होती है।
ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है और क्यों?
अनु—हम वायु को अंतःश्वसित करते हैं। शानू—हम ऑक्सीजन को अंतःश्वसित करते हैं। तनु—हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंतःश्वसित करते हैं।
उत्तर: तनु का कथन सबसे सही और वैज्ञानिक रूप से अधिक पूर्ण है—“हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंतःश्वसित करते हैं।”
हम केवल शुद्ध ऑक्सीजन को अंदर नहीं लेते, बल्कि वायु को अंदर लेते हैं। वायु कई गैसों का मिश्रण है, जिसमें लगभग—
- 21 प्रतिशत ऑक्सीजन
- 78 प्रतिशत नाइट्रोजन
- थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य गैसें होती हैं।
इसलिए यह कहना अधिक सही है कि हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंतःश्वसित करते हैं।
प्रश्न 7. जब हम श्वास के साथ धूल भरी वायु को अंदर लेते हैं तो प्रायः हम छींकते हैं। इसके संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
उत्तर: धूल भरी वायु के साथ धूल के छोटे-छोटे कण नासाद्वार और नासा पथ में प्रवेश कर जाते हैं। नासा पथ में उपस्थित सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा इन कणों को रोकने का प्रयास करते हैं।
धूल के कण नाक की भीतरी सतह में जलन उत्पन्न करते हैं। इसके कारण शरीर में छींकने की प्रतिक्रिया होती है।
छींक शरीर की एक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है, जिसके द्वारा धूल, गंदगी और अन्य बाहरी कणों को तेजी से बाहर निकाल दिया जाता है और उन्हें फेफड़ों तक पहुँचने से रोका जाता है।
प्रश्न 8. कक्षा 7 की छात्राएँ परिधि और अनुषा ने अपने प्रातःकालीन व्यायाम के लिए दौड़ना आरंभ किया। अपनी दौड़ पूरी करने के बाद उन्होंने प्रति मिनट ली जाने वाली श्वासों की गिनती की। अनुषा परिधि की अपेक्षा अधिक तेजी से श्वास ले रही थी। परिधि की अपेक्षा अनुषा द्वारा अधिक तेजी से श्वास लेने के कम से कम दो संभावित कारण बताइए।
उत्तर: अनुषा के अधिक तेजी से श्वास लेने के संभावित कारण निम्नलिखित हो सकते हैं—
- अनुषा ने परिधि की तुलना में अधिक तेजी से दौड़ लगाई होगी। इससे उसकी माँसपेशियों को अधिक ऊर्जा और ऑक्सीजन की आवश्यकता हुई होगी।
- अनुषा की शारीरिक क्षमता या सहनशक्ति परिधि से कम हो सकती है। नियमित व्यायाम न करने के कारण वह जल्दी थक गई होगी।
इसके अतिरिक्त—
- अनुषा ने अधिक दूरी तय की हो सकती है।
- वह पहले से थकी हुई हो सकती है।
- उसे सर्दी, साँस संबंधी परेशानी या कमजोरी हो सकती है।
व्यायाम के दौरान माँसपेशियों को अधिक ऊर्जा चाहिए होती है। इसलिए शरीर अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करने और अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने के लिए तेजी से श्वास लेता है।
प्रश्न 9. यदु ने अपने एक विचार के परीक्षण के लिए एक प्रयोग किया। उसने दो परखनलियाँ ‘क’ और ‘ख’ लीं। परखनलियों को पानी से आधा भरकर और उनमें एक चुटकी चावल का आटा मिला कर उन्हें अच्छी तरह हिलाया। परखनली ‘ख’ में उसने कुछ बूँदें लार की मिलाईं। दोनों परखनलियों को उसने 35–40 मिनट के लिए यथावत रहने दिया। उसके बाद उसने दोनों परखनलियों में आयोडीन विलयन डाला। प्रयोग के परिणाम चित्र 9.15 में दर्शाए गए हैं। आपके विचार से वह क्या परीक्षण करना चाहता है?
उत्तर: यदु यह परीक्षण करना चाहता है कि—
क्या लार चावल के आटे में उपस्थित मंड को सरल शर्करा में बदलती है।

चावल के आटे में मंड होता है। आयोडीन विलयन मंड की उपस्थिति में नीला-काला रंग देता है।
परखनली ‘क’ में:
इसमें लार नहीं मिलाई गई थी। इसलिए मंड उपस्थित रहा और आयोडीन डालने पर मिश्रण नीला-काला हो गया।
परखनली ‘ख’ में:
इसमें लार मिलाई गई थी। 35–40 मिनट में लार ने मंड को सरल शर्करा में बदल दिया। इसलिए आयोडीन डालने पर यह नीला-काला नहीं हुआ अथवा इसका रंग बहुत हल्का रहा।
इस प्रयोग से सिद्ध होता है कि लार मंड के पाचन में सहायता करती है और उसे सरल शर्करा में बदलती है।
प्रश्न 10. रक्षिता ने दो स्वच्छ परखनलियाँ ‘क’ और ‘ख’ लेकर एक परीक्षण अभिकल्पित किया। उसने दोनों परखनलियों को चित्र में दर्शाए अनुसार चूने के पानी से भर दिया। परखनली ‘क’ में अंतःश्वसित वायु को नली द्वारा चूषित करके प्रवाहित किया गया। परखनली ‘ख’ में नली के द्वारा उच्छ्वसित वायु को फूँक कर प्रवाहित किया गया। (चित्र 9.16) आपके विचार से वह क्या जाँचना चाहती है? वह कैसे अपने निष्कर्षों की पुष्टि कर सकती है?

उत्तर:रक्षिता यह जाँचना चाहती है कि—
अंतःश्वसित वायु और उच्छ्वसित वायु में से किसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है।
चूने का पानी कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके दूधिया हो जाता है।
संभावित अवलोकन:
- परखनली ‘क’ में अंतःश्वसित वायु प्रवाहित करने पर चूने के पानी में बहुत कम परिवर्तन होगा या वह धीरे-धीरे दूधिया होगा।
- परखनली ‘ख’ में उच्छ्वसित वायु प्रवाहित करने पर चूने का पानी जल्दी और अधिक स्पष्ट रूप से दूधिया हो जाएगा।
निष्कर्ष:
उच्छ्वसित वायु में अंतःश्वसित वायु की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
निष्कर्ष की पुष्टि:
रक्षिता निम्न सावधानियाँ रखते हुए प्रयोग को दोबारा कर सकती है—
- दोनों परखनलियों में चूने के पानी की समान मात्रा ले।
- दोनों में समान समय तक वायु प्रवाहित करे।
- वायु प्रवाहित करने की गति लगभग समान रखे।
- दोनों परखनलियों में दूधियापन आने में लगने वाले समय की तुलना करे।
जिस परखनली का चूने का पानी जल्दी दूधिया होगा, उसमें प्रवाहित वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होगी। परखनली ‘ख’ में चूने का पानी जल्दी दूधिया होने से निष्कर्ष की पुष्टि होगी।
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