Class 7 · विज्ञान · Hindi Medium · नोट्स / व्याख्या

Chapter 6: किशोरावस्था - वृद्धि एवं परिवर्तन की अवस्था

इस अध्याय के संपूर्ण नोट्स, सरल व्याख्या, प्रमुख अवधारणाएँ, उदाहरण, चित्र और सारांश नीचे पढ़ें।

जिज्ञासाहिंदी माध्यमनोट्स / व्याख्या
Class
7
Subject
विज्ञान
Book
जिज्ञासा
Medium
Hindi
संपूर्ण नोट्स एवं सारांश

कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 6 के संपूर्ण नोट्स में किशोरावस्था के शारीरिक, जैविक, संवेगात्मक और व्यवहारगत परिवर्तन, पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन समझिए।

परिचय

किशोरावस्था जीवन की वह अवस्था है जिसमें बच्चा धीरे-धीरे वयस्क बनने लगता है। इस अवस्था में शरीर, मन, व्यवहार और भावनाओं में कई परिवर्तन दिखाई देते हैं। लड़कों और लड़कियों दोनों में ये परिवर्तन होते हैं, लेकिन सभी बच्चों में बदलाव एक ही समय या एक ही गति से नहीं होते। इसलिए अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए।

6.1 आयु के साथ वृद्धि — किशोरवय के वर्ष

किशोरावस्था को किशोरवय भी कहा जाता है। यह सामान्य रूप से लगभग 10 से 19 वर्ष की आयु के बीच की अवस्था मानी जाती है। इस समय शरीर में तेजी से वृद्धि होती है और कई शारीरिक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं।

किशोरावस्था में लड़की की लंबाई बढ़ने का चित्र
किशोरावस्था में लंबाई का बढ़ना

1. लंबाई या कद का बढ़ना

किशोरावस्था में बच्चों की लंबाई तेजी से बढ़ती है। इसे वृद्धि की तीव्र अवस्था भी कहा जा सकता है।

मुख्य बातें —

  1. लड़कियों में लंबाई बढ़ना प्रायः लड़कों से थोड़ा पहले शुरू हो सकता है।
  2. लड़कों में भी किशोरावस्था के दौरान लंबाई तेजी से बढ़ती है।
  3. सभी बच्चों की लंबाई समान गति से नहीं बढ़ती।
  4. लंबाई पर भोजन, स्वास्थ्य, व्यायाम और आनुवंशिक गुणों का प्रभाव पड़ता है।

ध्यान रखने योग्य बात: यदि किसी बच्चे की लंबाई जल्दी बढ़ती है और किसी की देर से, तो यह सामान्य हो सकता है। हर व्यक्ति की वृद्धि की गति अलग होती है।

2. शरीर की संरचना में परिवर्तन, भार और बल में वृद्धि

किशोर लड़के में शारीरिक वृद्धि और मांसपेशियों का विकास
शरीर की संरचना और बल में वृद्धि

किशोरावस्था में शरीर का आकार और बनावट बदलने लगती है। शरीर का भार बढ़ता है और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।

लड़कों में सामान्य परिवर्तन —

  1. कंधे चौड़े हो सकते हैं।
  2. मांसपेशियाँ अधिक विकसित हो सकती हैं।
  3. शरीर में बल बढ़ सकता है।

लड़कियों में सामान्य परिवर्तन —

  1. शरीर की बनावट में परिवर्तन आता है।
  2. शरीर में वयस्कता से जुड़े परिवर्तन दिखाई देते हैं।
  3. शरीर का भार और आकार बदल सकता है।

महत्वपूर्ण बात: ये सभी परिवर्तन प्राकृतिक हैं। शरीर में बदलाव आने पर घबराना नहीं चाहिए।

गले में कंठमणि की स्थिति दिखाता रेखाचित्र
आवाज में परिवर्तन और कंठमणि

3. आवाज में परिवर्तन

किशोरावस्था में आवाज में भी बदलाव होता है।

लड़कों में — आवाज भारी या गहरी हो सकती है। कभी-कभी आवाज फटती हुई या बदलती हुई लग सकती है। यह सामान्य प्रक्रिया है।

लड़कियों में — आवाज में थोड़ा बदलाव होता है, लेकिन सामान्यतः लड़कों जितना स्पष्ट नहीं होता।

कारण: किशोरावस्था में कंठ का विकास होता है, इसलिए आवाज बदलती है।

किशोरावस्था में चेहरे पर बाल आने का चित्र
शरीर के विभिन्न भागों में बालों का दिखना

4. शरीर के विभिन्न भागों में बालों का दिखना

किशोरावस्था में शरीर के कुछ भागों में बाल उगने लगते हैं।

सामान्य परिवर्तन —

  1. लड़कों में चेहरे पर मूँछ और दाढ़ी के बाल आने लगते हैं।
  2. लड़कों और लड़कियों दोनों में बगल आदि स्थानों पर बाल उग सकते हैं।
  3. यह शरीर के विकास का सामान्य संकेत है।
किशोर के चेहरे पर मुँहासों का चित्र
किशोरावस्था में मुँहासे

5. चेहरे की त्वचा में परिवर्तन — मुहाँसे निकलना

किशोरावस्था में त्वचा में तेलीयता बढ़ सकती है। इसके कारण चेहरे पर मुहाँसे निकल सकते हैं।

मुहाँसों से बचाव के उपाय —

  1. चेहरा साफ रखें।
  2. अधिक तैलीय भोजन से बचें।
  3. मुहाँसों को बार-बार न छुएँ और न फोड़ें।
  4. साफ तौलिया और साफ पानी का उपयोग करें।
  5. समस्या अधिक हो तो डॉक्टर या बड़े व्यक्ति से सलाह लें।

स्मरण रखने योग्य प्रमुख तथ्य

  1. किशोरावस्था वृद्धि और परिवर्तन की अवस्था है।
  2. इस अवस्था में लंबाई, भार, आवाज और शरीर की बनावट में बदलाव आते हैं।
  3. लड़कों और लड़कियों में परिवर्तन अलग-अलग प्रकार से दिखाई देते हैं।
  4. सभी बच्चों में परिवर्तन एक साथ नहीं होते।
  5. मुहाँसे, आवाज का बदलना और शरीर पर बाल आना सामान्य परिवर्तन हैं।
  6. इन परिवर्तनों को लेकर शर्म या डर महसूस नहीं करना चाहिए।
  7. किसी भी शंका में माता-पिता, शिक्षक या डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

6.2 जनन क्षमता को इंगित करने वाले परिवर्तन

किशोरावस्था में शरीर इस प्रकार विकसित होने लगता है कि भविष्य में वह जनन यानी संतान उत्पत्ति की क्षमता प्राप्त कर सके। यह परिवर्तन शरीर में बनने वाले विशेष रसायनों, जिन्हें हार्मोन कहा जाता है, के कारण होते हैं।

लड़कियों में परिवर्तन

लड़कियों में किशोरावस्था के दौरान मासिक धर्म शुरू हो सकता है। यह एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। मासिक धर्म शुरू होना इस बात का संकेत है कि शरीर में वयस्कता से जुड़े परिवर्तन हो रहे हैं।

लड़कों में परिवर्तन

लड़कों में भी शरीर के भीतर ऐसे परिवर्तन होते हैं जो उन्हें भविष्य में जनन क्षमता प्राप्त करने योग्य बनाते हैं। साथ ही शरीर की बनावट, आवाज और बालों में परिवर्तन आते हैं।

मासिक धर्म के बारे में मिथकों को तोड़ना

मासिक धर्म को लेकर समाज में कई गलत धारणाएँ या मिथक पाए जाते हैं। इन्हें दूर करना आवश्यक है।

मिथक और सत्य —

  1. मिथक: मासिक धर्म कोई बीमारी है। सत्य: मासिक धर्म बीमारी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  2. मिथक: मासिक धर्म के दौरान लड़की अशुद्ध हो जाती है। सत्य: यह गलत धारणा है। मासिक धर्म शरीर की सामान्य क्रिया है।
  3. मिथक: मासिक धर्म में लड़की को पढ़ाई या सामान्य काम नहीं करना चाहिए। सत्य: यदि स्वास्थ्य ठीक हो तो लड़की सामान्य काम, पढ़ाई और हल्की गतिविधियाँ कर सकती है।
  4. मिथक: इस विषय पर बात करना गलत है। सत्य: यह स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। इसके बारे में सही जानकारी होना आवश्यक है।

स्वच्छता संबंधी बातें —

  1. साफ कपड़े या स्वच्छ सैनिटरी सामग्री का उपयोग करना चाहिए।
  2. समय-समय पर उन्हें बदलना चाहिए।
  3. हाथों को साबुन से धोना चाहिए।
  4. किसी समस्या या अधिक दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

6.3 किशोरावस्था में संवेगात्मक और व्यवहारगत परिवर्तन

किशोरावस्था में केवल शरीर ही नहीं बदलता, बल्कि मन और भावनाओं में भी बदलाव आते हैं।

संवेगात्मक परिवर्तन

  1. कभी-कभी गुस्सा जल्दी आ सकता है।
  2. मन जल्दी उदास या खुश हो सकता है।
  3. आत्मविश्वास में बदलाव आ सकता है।
  4. अपने रूप-रंग या शरीर को लेकर चिंता हो सकती है।
  5. दोस्तों के साथ अधिक समय बिताने की इच्छा हो सकती है।

व्यवहारगत परिवर्तन

  1. किशोर स्वतंत्र निर्णय लेना चाहते हैं।
  2. वे अपनी पसंद-नापसंद को अधिक महत्व देने लगते हैं।
  3. कभी-कभी वे माता-पिता या शिक्षकों से बहस कर सकते हैं।
  4. वे समाज और अपने भविष्य के बारे में सोचने लगते हैं।

महत्वपूर्ण बात: ये परिवर्तन सामान्य हैं। लेकिन अपनी भावनाओं को समझना और सही तरीके से व्यक्त करना सीखना आवश्यक है।

6.4 किशोरावस्था को एक सुखद अनुभव बनाना

किशोरावस्था को स्वस्थ और सुखद बनाने के लिए सही आदतें अपनाना बहुत आवश्यक है।

6.4.1 पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति

किशोरावस्था में शरीर तेजी से बढ़ता है, इसलिए संतुलित भोजन बहुत जरूरी है।

संतुलित आहार में शामिल होने चाहिए —

  1. कार्बोहाइड्रेट — ऊर्जा के लिए उदाहरण: चावल, रोटी, आलू
  2. प्रोटीन — शरीर की वृद्धि और मांसपेशियों के लिए उदाहरण: दाल, दूध, अंडा, पनीर, सोयाबीन
  3. वसा — ऊर्जा के लिए, लेकिन सीमित मात्रा में उदाहरण: घी, तेल, मेवे
  4. विटामिन और खनिज — शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उदाहरण: फल, हरी सब्जियाँ
  5. कैल्शियम — हड्डियों और दाँतों के लिए उदाहरण: दूध, दही, पनीर
  6. लोहा — रक्त के लिए उदाहरण: हरी पत्तेदार सब्जियाँ, गुड़, दालें
  7. जल — शरीर की क्रियाओं के लिए प्रतिदिन पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

जंक फूड से बचें: अधिक तला-भुना, पैकेट वाला भोजन और मीठे पेय कम मात्रा में लेने चाहिए।

6.4.2 व्यक्तिगत स्वच्छता

किशोरावस्था में शरीर में पसीना और तेलीयता बढ़ सकती है, इसलिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है।

स्वच्छता के उपाय —

  1. प्रतिदिन स्नान करें।
  2. साफ कपड़े पहनें।
  3. दाँतों की नियमित सफाई करें।
  4. नाखून काटकर रखें।
  5. बालों को साफ रखें।
  6. पसीना आने पर शरीर की सफाई का ध्यान रखें।
  7. लड़कियों को मासिक धर्म के समय विशेष स्वच्छता रखनी चाहिए।

6.4.3 शारीरिक गतिविधियाँ

स्वस्थ शरीर और मन के लिए शारीरिक गतिविधियाँ आवश्यक हैं।

उदाहरण —

दौड़, खेल और योग जैसी शारीरिक गतिविधियाँ
किशोरों के लिए शारीरिक गतिविधियाँ
  1. दौड़ना
  2. खेलना
  3. योग करना
  4. रस्सी कूदना
  5. साइकिल चलाना
  6. तैरना
  7. व्यायाम करना

लाभ —

  1. शरीर मजबूत बनता है।
  2. हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  3. मन प्रसन्न रहता है।
  4. आत्मविश्वास बढ़ता है।
  5. मोटापे से बचाव होता है।

6.4.4 संतुलित सामाजिक जीवन

साथ मिलकर गतिविधि करते किशोरों का समूह
संतुलित सामाजिक जीवन

किशोरावस्था में परिवार, मित्रों और समाज के साथ अच्छा व्यवहार करना जरूरी है।

संतुलित सामाजिक जीवन के लिए —

  1. अच्छे मित्र बनाएँ।
  2. माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करें।
  3. गलत संगति से बचें।
  4. दूसरों का सम्मान करें।
  5. पढ़ाई, खेल और आराम के बीच संतुलन रखें।
  6. मोबाइल और इंटरनेट का सीमित और सही उपयोग करें।

6.4.5 हानिकारक पदार्थों से बचना — ‘ना’ कहना सीखें

किशोरावस्था में कुछ लोग दबाव डालकर गलत आदतें अपनाने को कह सकते हैं। ऐसे समय में स्पष्ट रूप से “ना” कहना सीखना चाहिए।

धूम्रपान से पहले और बाद के श्वसन तंत्र की तुलना
हानिकारक पदार्थों का श्वसन तंत्र पर प्रभाव

हानिकारक पदार्थ —

  1. तंबाकू
  2. शराब
  3. नशीले पदार्थ
  4. धूम्रपान

इनसे हानि —

  1. शरीर को नुकसान पहुँचता है।
  2. पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  3. आदत लग सकती है।
  4. मानसिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो सकता है।

क्या करें? गलत दबाव आने पर तुरंत “ना” कहें और किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को बताएं।

6.5 किशोरावस्था के संदर्भ में ‘क्यों’ प्रश्न

किशोरावस्था में बच्चों के मन में कई प्रश्न आते हैं। इन प्रश्नों को दबाना नहीं चाहिए, बल्कि सही स्रोत से उत्तर जानना चाहिए।

कुछ सामान्य ‘क्यों’ प्रश्न

प्रश्न 1. किशोरावस्था में लंबाई तेजी से क्यों बढ़ती है? उत्तर: क्योंकि इस अवस्था में शरीर में वृद्धि से जुड़े हार्मोन सक्रिय होते हैं और हड्डियाँ तेजी से बढ़ती हैं।

प्रश्न 2. किशोरावस्था में आवाज क्यों बदलती है? उत्तर: क्योंकि कंठ का विकास होता है। लड़कों में यह परिवर्तन अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।

प्रश्न 3. चेहरे पर मुहाँसे क्यों निकलते हैं? उत्तर: त्वचा की तेल ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं, जिससे त्वचा तैलीय हो सकती है और मुहाँसे निकल सकते हैं।

प्रश्न 4. शरीर पर बाल क्यों आने लगते हैं? उत्तर: किशोरावस्था में हार्मोन के प्रभाव से शरीर के कुछ भागों में बाल उगने लगते हैं।

प्रश्न 5. मासिक धर्म क्यों होता है? उत्तर: यह लड़कियों के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो किशोरावस्था में शुरू होती है और जनन क्षमता से संबंधित परिवर्तन को दर्शाती है।

प्रश्न 6. किशोरावस्था में मन जल्दी बदलता क्यों है? उत्तर: शरीर और मन में तेजी से बदलाव होने के कारण भावनाएँ भी बदल सकती हैं। यह सामान्य है।

महत्वपूर्ण शब्दावली

  1. किशोरावस्था — बचपन और वयस्कता के बीच की अवस्था।
  2. किशोर/किशोरी — किशोरावस्था में पहुँचने वाला लड़का या लड़की।
  3. वृद्धि — शरीर के आकार, लंबाई और भार का बढ़ना।
  4. हार्मोन — शरीर में बनने वाले रसायन जो वृद्धि और परिवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
  5. मासिक धर्म — लड़कियों में होने वाली प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया।
  6. व्यक्तिगत स्वच्छता — शरीर और कपड़ों को साफ रखने की आदत।
  7. संतुलित आहार — ऐसा भोजन जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व हों।

अध्याय का सारांश

किशोरावस्था जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है। इस अवस्था में शरीर तेजी से बढ़ता है और कई परिवर्तन दिखाई देते हैं। लड़कों और लड़कियों दोनों में लंबाई, भार, शरीर की बनावट, आवाज और त्वचा में बदलाव आते हैं। शरीर के विभिन्न भागों में बाल उगने लगते हैं और चेहरे पर मुहाँसे भी हो सकते हैं। लड़कियों में मासिक धर्म शुरू होना एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है।

इस अवस्था में भावनाएँ और व्यवहार भी बदलते हैं। कभी-कभी गुस्सा, उदासी, चिंता या उत्साह अधिक महसूस हो सकता है। इन बदलावों को समझना और सही तरीके से संभालना आवश्यक है। किशोरावस्था को सुखद बनाने के लिए संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता, शारीरिक गतिविधियाँ, अच्छा सामाजिक जीवन और हानिकारक पदार्थों से दूरी बहुत जरूरी है।

किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन प्राकृतिक हैं। इनके बारे में सही जानकारी रखना चाहिए और किसी भी समस्या या शंका में माता-पिता, शिक्षक या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

संक्षेप में

  1. किशोरावस्था बचपन से वयस्कता की ओर बढ़ने की अवस्था है।
  2. इस अवस्था में लंबाई, भार और शरीर की बनावट में परिवर्तन आते हैं।
  3. लड़कों में आवाज भारी हो सकती है और चेहरे पर बाल आने लगते हैं।
  4. लड़कियों में मासिक धर्म शुरू हो सकता है, जो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  5. मुहाँसे, बालों का उगना और भावनात्मक बदलाव सामान्य हैं।
  6. संतुलित भोजन, स्वच्छता और व्यायाम जरूरी हैं।
  7. गलत संगति और हानिकारक पदार्थों से बचना चाहिए।
  8. अपनी समस्याओं और शंकाओं पर विश्वसनीय बड़े लोगों से बात करनी चाहिए।
प्रश्न-उत्तर

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