Class 6 · व्यावसायिक शिक्षा · Hindi Medium · Chapter Notes

परियोजना 3: निर्माता कौशल (मेकर स्किल्स)

इस परियोजना के संपूर्ण नोट्स, मुख्य अवधारणाएँ, उदाहरण, शब्दावली और सारांश नीचे पढ़ें।

Kaushal Bodh | कौशल बोधभाग 2— मशीनों और उपकरणों के साथ कार्य करनाChapter Notes
Class
6
Subject
व्यावसायिक शिक्षा
Book
Kaushal Bodh | कौशल बोध
Medium
Hindi
संपूर्ण नोट्स एवं सारांश

सरल मशीनों, खिलौना निर्माण, साइकिल के भागों, देखभाल और मरम्मत से जुड़े संपूर्ण नोट्स एवं सारांश।

1. परिचय

हमारे आस-पास साइकिल, बस, खिलौने, रिक्शा, दरवाजे और खिड़कियाँ जैसी अनेक मशीनें हैं। ये बड़ी या जटिल मशीनें कई छोटी-छोटी सरल मशीनों से मिलकर बनी होती हैं।

सरल मशीनें ऐसे उपकरण हैं जो हमारे कार्य को आसान बनाते हैं। इनकी सहायता से हम कम बल लगाकर किसी वस्तु को उठा, काट, खिसका या चला सकते हैं।

इस परियोजना में विद्यार्थी—

  • सरल मशीनों की पहचान करना सीखते हैं।
  • अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने बनाते हैं।
  • साइकिल में लगी सरल मशीनों को समझते हैं।
  • साइकिल की देखभाल और छोटी-मोटी मरम्मत करना सीखते हैं।
  • रचनात्मकता, समस्या-समाधान और तकनीकी कौशल विकसित करते हैं।

2. सरल मशीन क्या है?

सरल मशीन ऐसा उपकरण है जो—

  • काम को आसान बनाता है।
  • लगाए गए बल की दिशा बदल सकता है।
  • कम बल से भारी वस्तु उठाने में सहायता करता है।
  • वस्तु को काटने, घुमाने या एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सहायता करता है।

उदाहरण के लिए, पहियों वाली गाड़ी की सहायता से भारी सामान को कम बल लगाकर खिसकाया जा सकता है।

3. सरल मशीनों के प्रमुख प्रकार

सरल मशीनआसान अर्थउदाहरण
उत्तोलक या लीवरस्थिर बिंदु के चारों ओर घूमने वाली छड़झूला, कैंची, बोतल खोलने वाला
पहिया और धुरीधुरी से जुड़ा घूमने वाला पहियासाइकिल, कार, दरवाजे का हैंडल
घिरनीरस्सी और पहिये की सहायता से भार उठाने वाली मशीनकुएँ की चरखी, क्रेन
आनत तलढलान वाली सतह जिससे वस्तु ऊपर ले जाना आसान होरैंप, ढलान वाली सड़क
पच्चरनुकीले किनारे वाली वस्तु जो काटती या चीरती हैचाकू, कुल्हाड़ी, कील
पेंचघुमाकर कसने या वस्तुओं को जोड़ने वाला उपकरणबोतल का ढक्कन, बल्ब का आधार

4. सरल और जटिल मशीन में अंतर

सरल मशीन

  • इसका निर्माण कम भागों से होता है।
  • यह किसी एक कार्य को आसान बनाती है।
  • उदाहरण—चाकू, पेंच, घिरनी और लीवर।

जटिल मशीन

  • यह कई सरल मशीनों से मिलकर बनी होती है।
  • इसके अलग-अलग भाग मिलकर एक बड़ा कार्य करते हैं।
  • उदाहरण—साइकिल, बस, कार और सिलाई मशीन।

5. प्राचीन समय में सरल मशीनें

सरल मशीनों का उपयोग प्राचीन काल से होता आया है। भारत में बड़े पत्थरों से मंदिर और अन्य इमारतें बनाने के लिए श्रमिक—

  • आनत तल,
  • उत्तोलक,
  • घिरनी,
  • हथौड़े और
  • छेनी

का उपयोग करते थे। इनकी सहायता से भारी पत्थरों को उठाना, ले जाना और उचित स्थान पर रखना आसान होता था।

गतिविधि 1— हमारे आस-पास की सरल मशीनें

हमारे घर, विद्यालय और बाजार में अनेक सरल मशीनें मिलती हैं।

वस्तुउपयोगइसमें प्रयुक्त सरल मशीन
चाकूफल और सब्जियाँ काटनापच्चर
सब्जी छीलनीछिलका उतारनापच्चर
कैंचीकागज या कपड़ा काटनाउत्तोलक और पच्चर
दरवाजे का हैंडलदरवाजा खोलनापहिया और धुरी
बोतल खोलने वालाढक्कन खोलनाउत्तोलक
सीढ़ी या रैंपऊपर चढ़नाआनत तल
कुएँ की चरखीपानी की बाल्टी उठानाघिरनी
साइकिलएक स्थान से दूसरे स्थान तक जानाकई सरल मशीनों का संयोजन

6. आवश्यक सामग्री और उपकरण

खिलौने बनाने के लिए अनुपयोगी या दोबारा प्रयोग की जा सकने वाली वस्तुओं का उपयोग किया जा सकता है।

आवश्यक सामग्री

  • कार्डबोर्ड
  • खाली प्लास्टिक की बोतलें
  • बोतलों के ढक्कन
  • आइसक्रीम स्टिक
  • प्लास्टिक का चम्मच
  • स्ट्रॉ या प्लास्टिक पाइप
  • रबड़ बैंड
  • धागा
  • कागज और चार्ट पेपर
  • गुब्बारा
  • गोंद और टेप
  • कपड़े की क्लिप
  • टूथपिक या चॉपस्टिक

आवश्यक उपकरण

  • कैंची
  • कटर
  • मीटर स्केल
  • स्पैनर
  • रेंच
  • चेन ब्रश
  • टायर लीवर
  • एयर पंप

7. सुरक्षा संबंधी सावधानियाँ

  • कैंची, कटर और नुकीले उपकरणों का प्रयोग शिक्षक या बड़े व्यक्ति की देखरेख में करना चाहिए।
  • खिलौने चलाते समय स्वयं या दूसरों को चोट नहीं पहुँचानी चाहिए।
  • गोंद और ग्लू गन का सावधानी से उपयोग करना चाहिए।
  • काम पूरा होने के बाद कार्यस्थल साफ करना चाहिए।
  • सामग्री और उपकरणों को उचित स्थान पर रखना चाहिए।
  • घूमते हुए पहिये, प्रोपेलर या पवनचक्की में उँगली नहीं लगानी चाहिए।
  • इंटरनेट का उपयोग शिक्षक या माता-पिता की देखरेख में करना चाहिए।
  • इंटरनेट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

गतिविधि 2— उत्तोलक से खिलौने बनाना

8. उत्तोलक या लीवर

उत्तोलक एक कठोर छड़ या हैंडल होता है, जो एक स्थिर बिंदु के चारों ओर घूमता है। इस स्थिर बिंदु को आलंब या फुलक्रम कहते हैं।

उदाहरण—

  • खेल के मैदान का झूला
  • टिन का ढक्कन खोलने के लिए चम्मच
  • कैंची
  • बोतल खोलने वाला उपकरण

उत्तोलक के तीन मुख्य भाग

  • आलंब: वह स्थिर बिंदु जिसके चारों ओर उत्तोलक घूमता है।
  • प्रयास: मशीन पर लगाया गया बल।
  • भार: वह वस्तु जिसे उठाया या चलाया जाता है।

9. आइसक्रीम स्टिक वाली गुलेल

गुलेल उत्तोलक के सिद्धांत पर काम करती है।

आवश्यक सामग्री

  • 7–8 आइसक्रीम स्टिक
  • रबड़ बैंड
  • प्लास्टिक का चम्मच

कार्य करने का सिद्धांत

जब चम्मच को नीचे दबाया जाता है, तो रबड़ बैंड और स्टिक में ऊर्जा जमा हो जाती है। चम्मच छोड़ने पर यह ऊर्जा गति में बदल जाती है और उसमें रखी हल्की वस्तु आगे चली जाती है।

सुरक्षा: गुलेल से पत्थर या नुकीली वस्तु नहीं चलानी चाहिए। इसका प्रयोग केवल हल्की कागज की गेंद से करना चाहिए।

10. रोबोटिक आर्म

रोबोटिक आर्म कई उत्तोलकों के संयोजन से बनता है।

आवश्यक सामग्री

  • आइसक्रीम स्टिक
  • बोतलों के पुराने ढक्कन
  • टूथपिक
  • गोंद
  • कटर

आइसक्रीम स्टिकों को छेद करके टूथपिक से जोड़ा जाता है। ये जोड़ स्टिकों को स्वतंत्र रूप से चलने देते हैं। ढक्कन इसके पकड़ने वाले भाग का काम करते हैं।

गतिविधि 3— खिलौनों में नोदक या प्रोपेलर का उपयोग

11. प्रोपेलर क्या है?

प्रोपेलर पंखों वाला घूमने वाला पहिया होता है। उसके पंख हवा या पानी को पीछे की ओर धकेलते हैं, जिससे खिलौना आगे बढ़ता है।

प्रोपेलर का उपयोग—

  • नावों,
  • हवाई जहाजों,
  • ड्रोन,
  • पंखों और
  • पवनचक्कियों में किया जाता है।

12. रबड़ बैंड प्रोपेलर नाव

आवश्यक सामग्री

  • आइसक्रीम स्टिक
  • स्ट्रॉ
  • बोतल के ढक्कन
  • रबड़ बैंड
  • गोंद

कार्य करने का सिद्धांत

प्रोपेलर को घुमाने से रबड़ बैंड में ऊर्जा जमा होती है। नाव को पानी में छोड़ने पर रबड़ बैंड खुलता है और प्रोपेलर घूमने लगता है। प्रोपेलर पानी को पीछे धकेलता है, इसलिए नाव आगे बढ़ती है।

इसमें ऊर्जा परिवर्तन इस प्रकार होता है—

रबड़ बैंड की स्थितिज ऊर्जा → प्रोपेलर की गतिज ऊर्जा → नाव की गति

गतिविधि 4— पहिये और धुरी से खिलौने बनाना

13. पहिया और धुरी

इस सरल मशीन में एक गोल पहिया एक छड़ से जुड़ा होता है। इस छड़ को धुरी कहते हैं। पहिया और धुरी एक साथ घूमते हैं।

इससे—

  • घर्षण कम होता है।
  • वस्तु आसानी से चलती है।
  • भारी भार को खिसकाना सरल होता है।

उदाहरण—साइकिल, कार, खिलौना गाड़ी, दरवाजे का हैंडल और पानी का नल।

14. रबड़ बैंड कार

रबड़ बैंड को पीछे की धुरी पर लपेटा जाता है। जब कार छोड़ी जाती है, तो रबड़ बैंड खुलता है और धुरी को घुमाता है। धुरी के साथ पहिये घूमते हैं और कार आगे बढ़ती है।

ऊर्जा परिवर्तन:

रबड़ बैंड की स्थितिज ऊर्जा → पहियों की गतिज ऊर्जा

15. हवा गुब्बारा कार

इस कार में गुब्बारे को स्ट्रॉ से जोड़कर हवा भरी जाती है। स्ट्रॉ से हवा पीछे की ओर निकलती है, जिसके कारण कार आगे बढ़ती है।

यह क्रिया और प्रतिक्रिया के सिद्धांत को दर्शाती है—

  • हवा पीछे की ओर निकलती है।
  • कार आगे की ओर चलती है।

कार के चारों पहियों और दोनों धुरियों का सीधा होना आवश्यक है। टेढ़े पहिये कार की गति को रोक सकते हैं।

गतिविधि 5— एक से अधिक सरल मशीनों का उपयोग

16. पवनचक्की

पवनचक्की हवा की गतिज ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। इसके पंखों पर हवा लगने से वे घूमते हैं। पंखों के साथ जुड़ी धुरी भी घूमने लगती है।

पवनचक्की के मॉडल में मुख्य रूप से—

  • प्रोपेलर,
  • पहिया,
  • धुरी और
  • अन्य जोड़ने वाले भाग

प्रयोग किए जाते हैं।

आवश्यक सामग्री

  • कार्डबोर्ड
  • चार्ट पेपर
  • स्ट्रॉ
  • गोंद
  • कटर

कार्य करने का सिद्धांत

हवा की गतिज ऊर्जा → पंखों की घूर्णन गति → धुरी की यांत्रिक ऊर्जा

बड़ी पवनचक्कियों की सहायता से बिजली भी बनाई जाती है।

17. इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग

खिलौने बनाने की नई विधियाँ इंटरनेट पर “DIY + खिलौने का नाम” लिखकर खोजी जा सकती हैं। DIY का अर्थ है—इसे स्वयं कीजिए।

चैटजीपीटी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों से अनुपयोगी वस्तुओं द्वारा खिलौने बनाने के नए विचार प्राप्त किए जा सकते हैं। परंतु इंटरनेट पर मिली प्रत्येक जानकारी को शिक्षक या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से जाँच लेना चाहिए।

गतिविधि 6— साइकिल में प्रयुक्त सरल मशीनें

18. साइकिल एक जटिल मशीन

साइकिल कई सरल मशीनों से मिलकर बनी होती है। इसमें—

  • पहिया और धुरी,
  • उत्तोलक,
  • गियर,
  • चेन और स्प्रोकेट

जैसे भाग मिलकर काम करते हैं।

साइकिल चलाते समय चालक द्वारा पैडल पर लगाया गया बल गति में बदल जाता है।

ऊर्जा परिवर्तन:

शरीर की पेशीय ऊर्जा → पैडल की गति → चेन की गति → पिछले पहिये की गति

19. साइकिल के प्रमुख भाग और उनके कार्य

साइकिल का भागकार्य
ब्रेक पैडपहिये या रिम को पकड़कर उसकी गति कम करते हैं।
ब्रेकसाइकिल को धीमा करते या रोकते हैं।
चेनपैडल की शक्ति को पिछले पहिये तक पहुँचाती है।
चेन रिंग और स्प्रोकेटचेन का मार्गदर्शन करते और शक्ति पहुँचाते हैं।
फ्रेमचालक को सहारा देता और सभी भागों को जोड़ता है।
हैंडलबारसाइकिल पकड़ने और दिशा बदलने में सहायता करता है।
हबपहिये का केंद्रीय भाग है, जिसके चारों ओर पहिया घूमता है।
किकस्टैंडसाइकिल को सीधा खड़ा रखता है।
साइकिल लाइटअँधेरे में दृश्यता और सुरक्षा बढ़ाती है।
पैडलचालक अपने पैरों से इन पर बल लगाता है।
रिमटायर को सहारा देता और ब्रेक लगाने की सतह प्रदान करता है।
सैडलचालक के बैठने का स्थान है।
सीट पोस्टसैडल को फ्रेम से जोड़ती है और ऊँचाई बदलने देती है।
स्पोक्सरिम को हब से जोड़कर पहिये को मजबूती देते हैं।
टायरसड़क पर पकड़ और सवारी में आराम प्रदान करते हैं।

20. साइकिल की सामान्य समस्याएँ और समाधान

1. भागों पर जंग लगना

रेगमाल से जंग साफ करके उचित स्थान पर तेल, ग्रीस या पेंट लगाया जा सकता है।

2. ढीले भाग

स्पैनर, रेंच, पेचकस या एलन-की की सहायता से ढीले पेंच और बोल्ट कसे जा सकते हैं।

3. पहियों का स्वतंत्र रूप से न घूमना

चलने वाले उचित भागों को साफ करके उनमें थोड़ी मात्रा में तेल लगाया जा सकता है।

4. टायर में कम हवा

टायर दबाने पर अधिक मुलायम लगे या नीचे से चपटा दिखाई दे, तो एयर पंप से हवा भरनी चाहिए।

5. चेन का सूखा होना

चेन को ब्रश से साफ करके उसमें उचित मात्रा में तेल लगाना चाहिए। अधिक तेल लगाने से धूल चिपक सकती है।

6. ब्रेक से कर्कश आवाज आना

ब्रेक पैड और रिम को साफ करना चाहिए। ब्रेक पैड की स्थिति ठीक करके बोल्ट कसने चाहिए। ब्रेक पैड या रिम पर तेल नहीं लगाना चाहिए।

7. पंक्चर होना

ट्यूब निकालकर उसमें हवा भरी जाती है और पानी में डालकर छेद खोजा जाता है। छेद वाली जगह पर सोल्यूशन और पैच लगाकर उसे ठीक किया जाता है।

8. पहिये का टेढ़ा होना

स्पोक्स को उचित मात्रा में कसकर या ढीला करके पहिये को सीधा किया जाता है। यह कार्य साइकिल मिस्त्री से करवाना चाहिए।

गतिविधि 7— साइकिल मरम्मत की दुकान का भ्रमण

साइकिल मिस्त्री से विद्यार्थी व्यावहारिक रूप से सीख सकते हैं—

  • साइकिल चलाने से पहले किन भागों की जाँच करनी चाहिए।
  • टायर में हवा कैसे भरी जाती है।
  • पंक्चर कैसे लगाया जाता है।
  • सैडल की ऊँचाई कैसे बदली जाती है।
  • चेन को साफ करके तेल कैसे लगाया जाता है।
  • ब्रेक कैसे ठीक किए जाते हैं।
  • पहिये का संरेखण कैसे किया जाता है।

यह गतिविधि विद्यार्थियों में विशेषज्ञों के कार्य के प्रति सम्मान और श्रम की गरिमा की भावना विकसित करती है।

गतिविधि 8— खिलौनों की प्रदर्शनी

विद्यार्थी अपने बनाए हुए खिलौनों की प्रदर्शनी आयोजित कर सकते हैं।

प्रदर्शनी आयोजित करने के प्रमुख चरण

  • प्रदर्शनी का उद्देश्य निश्चित करना।
  • विषय चुनना, जैसे—पर्यावरण-अनुकूल खिलौने।
  • प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान चुनना।
  • खिलौनों को सुरक्षित और आकर्षक ढंग से सजाना।
  • प्रत्येक खिलौने पर निर्माता का नाम और संक्षिप्त विवरण लिखना।
  • माता-पिता और समुदाय के सदस्यों को आमंत्रित करना।
  • आगंतुकों की सहायता के लिए स्वयंसेवक नियुक्त करना।
  • विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रतिक्रिया लेना।
  • प्रदर्शनी की तस्वीरें और वीडियो बनाना।
  • प्राप्त सुझावों के आधार पर खिलौनों में सुधार करना।

21. इस परियोजना से विकसित होने वाले कौशल

इस परियोजना से विद्यार्थियों में निम्नलिखित कौशल विकसित होते हैं—

  • रचनात्मकता
  • माप लेने और रेखाचित्र बनाने का कौशल
  • उपकरणों का सुरक्षित उपयोग
  • समस्या-समाधान
  • वैज्ञानिक सोच
  • समूह में मिलकर काम करना
  • समय प्रबंधन
  • अनुपयोगी वस्तुओं का पुनः उपयोग
  • मशीनों की देखभाल
  • विशेषज्ञों के कार्य के प्रति सम्मान

22. पर्यावरण और स्वास्थ्य में साइकिल का योगदान

स्वास्थ्य के लिए लाभ

  • साइकिल चलाने से शरीर का व्यायाम होता है।
  • मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  • हृदय स्वस्थ रहता है।
  • शरीर का संतुलन बेहतर होता है।
  • मोटापा कम करने में सहायता मिलती है।

पर्यावरण के लिए लाभ

  • साइकिल पेट्रोल या डीजल का उपयोग नहीं करती।
  • इससे वायु प्रदूषण नहीं होता।
  • यह बहुत कम ध्वनि उत्पन्न करती है।
  • यह ईंधन और धन दोनों बचाती है।
  • इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

23. पहिये के चक्करों की संख्या ज्ञात करना

किसी निश्चित दूरी को तय करते समय पहिया कितनी बार घूमेगा, यह जानने के लिए सूत्र है—

चक्करों की संख्या = कुल दूरी ÷ पहिये की परिधि

उदाहरण: यदि पहिये की परिधि 2 मीटर है और दूरी 10 मीटर है, तो—

चक्करों की संख्या = 10 ÷ 2 = 5 चक्कर

24. परियोजना से संबंधित व्यवसाय

  • खिलौना निर्माता
  • साइकिल मिस्त्री
  • मोटर मैकेनिक
  • मशीन ऑपरेटर
  • बढ़ई
  • औद्योगिक डिजाइनर
  • मैकेनिकल इंजीनियर
  • पवन ऊर्जा तकनीशियन
  • वेल्डर
  • उपकरण निर्माता

महत्त्वपूर्ण शब्दावली

शब्दअर्थ
सरल मशीनकाम को आसान बनाने वाला उपकरण
जटिल मशीनकई सरल मशीनों से बनी मशीन
उत्तोलकस्थिर बिंदु के चारों ओर घूमने वाली छड़
आलंबउत्तोलक का स्थिर बिंदु
धुरीवह छड़ जिस पर पहिया घूमता है
प्रोपेलरहवा या पानी में गति देने वाला पंखों का पहिया
गतिज ऊर्जाचलती हुई वस्तु में उपस्थित ऊर्जा
स्थितिज ऊर्जावस्तु में उसकी अवस्था के कारण संचित ऊर्जा
घर्षणगति का विरोध करने वाला बल
संरेखणकिसी भाग को सही और सीधी स्थिति में रखना
रखरखावकिसी वस्तु को अच्छी कार्यशील स्थिति में रखना
पुनः उपयोगपुरानी वस्तु का दोबारा उपयोग करना
क्रियात्मक प्रारूपऐसा मॉडल जो वास्तव में काम करता हो
DIYDo It Yourself अर्थात् इसे स्वयं कीजिए

अध्याय का सारांश

निर्माता कौशल परियोजना हमें सरल मशीनों के सिद्धांत समझाते हुए उपयोगी वस्तुएँ बनाना सिखाती है। उत्तोलक, पहिया और धुरी, घिरनी, आनत तल, पच्चर तथा पेंच प्रमुख सरल मशीनें हैं। अनेक सरल मशीनों से मिलकर साइकिल जैसी जटिल मशीन बनती है।

विद्यार्थी अनुपयोगी वस्तुओं से गुलेल, रोबोटिक आर्म, प्रोपेलर नाव, रबड़ बैंड कार, गुब्बारा कार और पवनचक्की बनाते हैं। इन गतिविधियों से वे बल, गति, ऊर्जा और घर्षण जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझते हैं।

परियोजना में साइकिल के भागों, उनके कार्य, रखरखाव और सामान्य समस्याओं के समाधान का ज्ञान भी मिलता है। खिलौनों की प्रदर्शनी आयोजित करने से योजना, प्रस्तुति, सहयोग और समय प्रबंधन के कौशल विकसित होते हैं। इस प्रकार यह अध्याय रचनात्मकता, तकनीकी समझ, सुरक्षित कार्य, पुनः उपयोग और श्रम के सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है।

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