जैव विविधता, आवास, फसलों, खरपतवारों, फसली कीटों और संरक्षण से जुड़े संपूर्ण नोट्स एवं सारांश।
1. परिचय
हमारे आसपास अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, पशु, पक्षी, कीट और सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं। ये सभी प्रकृति का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। किसी स्थान पर पाए जाने वाले जीवों की इसी विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
अपने आसपास की जैव विविधता का अवलोकन करके उसकी जानकारी एकत्र करना और उसे व्यवस्थित रूप से लिखना जैव विविधता विवरणिका बनाना कहलाता है।
2. जैव विविधता क्या है?
किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं, पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
उदाहरण
विद्यालय के बगीचे में पाए जाने वाले—
- नीम, पीपल, गुलाब और घास जैसे पौधे
- गौरैया, कबूतर और मैना जैसे पक्षी
- तितली, मधुमक्खी और चींटी जैसे कीट
- गिलहरी, छिपकली और केंचुए जैसे जीव
उस बगीचे की जैव विविधता का भाग हैं।
3. जैव विविधता का महत्त्व
जैव विविधता हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है। इससे हमें—
- भोजन मिलता है।
- औषधियाँ प्राप्त होती हैं।
- लकड़ी, कपास और अन्य कच्चा माल मिलता है।
- पशुओं के लिए चारा मिलता है।
- मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
- पौधों का परागण होता है।
- पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।
- शुद्ध वायु और जल प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
प्रकृति में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका होती है। इसलिए छोटे से छोटा जीव भी पर्यावरण के लिए महत्त्वपूर्ण हो सकता है।
4. आवास क्या है?
वह प्राकृतिक स्थान जहाँ किसी जीव को भोजन, जल, वायु, आश्रय और प्रजनन की सुविधा मिलती है, उसका आवास कहलाता है।
उदाहरण
- तालाब मछली और मेंढक का आवास है।
- जंगल शेर, हिरण और अनेक पक्षियों का आवास है।
- मिट्टी केंचुए और कई छोटे जीवों का आवास है।
- पेड़ पक्षियों, गिलहरियों और अनेक कीटों को आश्रय देते हैं।
यदि किसी जीव का आवास नष्ट हो जाता है, तो उसके लिए जीवित रहना कठिन हो जाता है।
5. जैव विविधता विवरणिका
किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों, पशुओं, पक्षियों और कीटों की जानकारी का व्यवस्थित अभिलेख जैव विविधता विवरणिका कहलाता है।
विवरणिका में दर्ज की जाने वाली जानकारी
- जीव या पौधे का सामान्य नाम
- स्थानीय नाम
- वैज्ञानिक नाम
- मिलने का स्थान
- आवास
- आकार और रंग
- मुख्य विशेषताएँ
- उपयोग
- अवलोकन की तिथि
- मौसम
- चित्र, रेखाचित्र या फोटो
विवरणिका का महत्त्व
- स्थानीय जीवों और पौधों की पहचान होती है।
- जैव विविधता में होने वाले परिवर्तनों का पता चलता है।
- कम होती प्रजातियों की पहचान की जा सकती है।
- संरक्षण योजनाएँ बनाने में सहायता मिलती है।
- विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति रुचि और जिम्मेदारी बढ़ती है।
6. स्थानीय और वैज्ञानिक नाम
स्थानीय नाम
किसी जीव या पौधे को स्थानीय भाषा में जिस नाम से जाना जाता है, वह उसका स्थानीय नाम कहलाता है। यह अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकता है।
वैज्ञानिक नाम
वैज्ञानिकों द्वारा किसी जीव को दिया गया निश्चित और विश्वभर में स्वीकार किया गया नाम उसका वैज्ञानिक नाम कहलाता है।
उदाहरण
| पौधा | सामान्य नाम | वैज्ञानिक नाम |
|---|---|---|
| धान | धान | Oryza sativa |
| गेहूँ | गेहूँ | Triticum aestivum |
| सरसों | सरसों | Brassica juncea |
| टमाटर | टमाटर | Solanum lycopersicum |
| बैंगन | बैंगन | Solanum melongena |
वैज्ञानिक नाम की सहायता से अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोग भी एक ही जीव की सही पहचान कर सकते हैं।
7. जैव विविधता का अवलोकन कैसे करें?
जैव विविधता के अध्ययन के लिए विद्यार्थी विद्यालय परिसर, बगीचे, खेत, तालाब या आसपास के सुरक्षित प्राकृतिक स्थान का भ्रमण कर सकते हैं।
आवश्यक सामग्री
- नोटबुक और पेंसिल
- आवर्धक काँच
- दूरबीन
- कैमरा या मोबाइल
- फील्ड गाइड
- पानी की बोतल
- टोपी और आरामदायक जूते
अवलोकन के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- पौधों और जीवों को नुकसान न पहुँचाएँ।
- पक्षियों के घोंसलों को न छुएँ।
- किसी अनजान पौधे को न चखें।
- कीटों को न पकड़ें और न मारें।
- काँटेदार या एलर्जी उत्पन्न करने वाले पौधों से दूर रहें।
- शिक्षक या किसी बड़े व्यक्ति के साथ ही भ्रमण करें।
- केवल देखकर और फोटो लेकर जानकारी एकत्र करें।
8. अलग-अलग मौसमों में अवलोकन
एक ही स्थान का अलग-अलग मौसमों में अवलोकन करना चाहिए क्योंकि मौसम बदलने पर जैव विविधता में भी परिवर्तन दिखाई देता है।
मौसम के अनुसार होने वाले परिवर्तन
- कुछ पौधों पर विशेष मौसम में फूल और फल आते हैं।
- कुछ पक्षी मौसम के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं।
- वर्षा ऋतु में मेंढक और कई कीट अधिक दिखाई देते हैं।
- गर्मी में जल की उपलब्धता कम हो सकती है।
- सर्दी में कुछ विशेष फसलें और खरपतवार उगते हैं।
नियमित अवलोकन से यह पता लगाया जा सकता है कि किन जीवों की संख्या बढ़ रही है और किनकी घट रही है।
फसल पौधों का अध्ययन
9. फसल पौधे
जिन पौधों को मनुष्य भोजन, तेल, रेशा, चारा या अन्य उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने के लिए खेतों में उगाता है, उन्हें फसल पौधे कहते हैं।
फसलों को मुख्य रूप से दो ऋतुओं में बाँटा जाता है।
खरीफ की फसलें
ये फसलें वर्षा ऋतु में बोई जाती हैं।
उदाहरण: धान, मक्का, बाजरा और सोयाबीन।
रबी की फसलें
ये फसलें सर्दी के मौसम में बोई जाती हैं।
उदाहरण: गेहूँ, सरसों, चना और मटर।
10. प्रमुख फसलें
गेहूँ
- गेहूँ रबी की फसल है।
- इसे सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है।
- इसके दानों से आटा, रोटी, ब्रेड और दलिया बनाया जाता है।
- इसका वैज्ञानिक नाम Triticum aestivum है।
धान
- धान खरीफ की फसल है।
- इसे सामान्यतः जून-जुलाई में लगाया जाता है।
- इसकी खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
- धान से चावल प्राप्त होता है।
- इसका वैज्ञानिक नाम Oryza sativa है।
सरसों
- सरसों रबी की फसल है।
- इसके पौधे पर पीले फूल आते हैं।
- इसके बीजों से तेल निकाला जाता है।
- इसकी पत्तियों से साग बनाया जाता है।
- इसका वैज्ञानिक नाम Brassica juncea है।
टमाटर
- टमाटर के बीज पहले पौधशाला में बोए जाते हैं।
- मजबूत पौधों को बाद में खेत या क्यारी में रोपा जाता है।
- इसका उपयोग सब्जी, सलाद, सूप, चटनी और सॉस बनाने में होता है।
11. फलदार पौधे
जिन पौधों से खाने योग्य फल प्राप्त होते हैं, उन्हें फलदार पौधे कहते हैं।
उदाहरण
- आम
- अमरूद
- केला
- पपीता
- नींबू
- अनार
फल हमें विटामिन, खनिज पदार्थ और रेशा प्रदान करते हैं। ये हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं।
12. चारा फसलें
पशुओं को खिलाने के लिए उगाई जाने वाली फसलें चारा फसलें कहलाती हैं।
प्रमुख चारा फसलें
बरसीम
- यह हरे चारे की पौष्टिक फसल है।
- गाय और भैंस इसे आसानी से खाती हैं।
- एक ही मौसम में इसकी कई बार कटाई की जा सकती है।
चारा ज्वार
- यह तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है।
- इसका तना और पत्तियाँ पशुओं को खिलाई जाती हैं।
चारा बाजरा
- यह कम पानी वाले क्षेत्रों में भी उग सकता है।
- यह पशुओं के लिए उपयोगी हरा चारा है।
लोबिया
- यह प्रोटीनयुक्त चारा प्रदान करता है।
- इसकी फलियाँ और दाने मनुष्यों के भोजन में भी उपयोग होते हैं।
- इसे हरी खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।
खरपतवारों का अध्ययन
13. खरपतवार क्या हैं?
खेत या बगीचे में मुख्य फसल के साथ बिना लगाए उगने वाले अनचाहे पौधे खरपतवार कहलाते हैं।
खरपतवारों से होने वाली हानियाँ
खरपतवार मुख्य फसल के साथ—
- जल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- मिट्टी के पोषक तत्त्व लेते हैं।
- प्रकाश और स्थान घेरते हैं।
- फसल की वृद्धि कम कर सकते हैं।
- कीटों और रोगों को आश्रय दे सकते हैं।
- फसल की उपज घटा सकते हैं।
14. प्रमुख खरपतवार
बथुआ
बथुआ सर्दी में गेहूँ जैसी फसलों के बीच उगता है। यह खरपतवार है, लेकिन इसकी कोमल पत्तियाँ खाने योग्य होती हैं। इनसे साग और पराठे बनाए जाते हैं।
मोथा
मोथा भूमिगत गांठों और तनों द्वारा तेजी से फैलता है। मिट्टी में इसकी छोटी-सी गांठ रह जाने पर उससे नया पौधा उग सकता है। इसलिए इसे पूरी जड़ सहित निकालना चाहिए।
गाजर घास
गाजर घास तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है। इसके संपर्क में आने से त्वचा पर खुजली, लालिमा या एलर्जी हो सकती है।
सावधानी: इसे नंगे हाथों से नहीं छूना चाहिए। इसे हटाते समय दस्ताने, जूते और पूरे कपड़े पहनने चाहिए।
लैंटाना
लैंटाना तेजी से फैलने वाली झाड़ी है। यह घनी झाड़ियाँ बनाकर स्थानीय पौधों को जल, प्रकाश, स्थान और पोषक तत्त्व मिलने से रोक सकती है। इसलिए इसका अनियंत्रित फैलाव जैव विविधता के लिए हानिकारक हो सकता है।
15. खरपतवारों को नियंत्रित करने के उपाय
- समय-समय पर निराई करनी चाहिए।
- खरपतवारों को फूल और बीज बनने से पहले हटा देना चाहिए।
- उन्हें पूरी जड़ सहित निकालना चाहिए।
- खेत को साफ रखना चाहिए।
- हानिकारक खरपतवार हटाते समय सुरक्षा उपकरण पहनने चाहिए।
- खरपतवारनाशकों का प्रयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।
फसली कीटों का अध्ययन
16. फसली कीट क्या हैं?
जो कीट पौधों की जड़ों, तनों, पत्तियों, फूलों, फलों या बीजों को नुकसान पहुँचाते हैं, उन्हें फसली कीट कहते हैं।
कुछ कीट पौधे के भागों को खाते हैं, जबकि कुछ उनका रस चूसते हैं।
17. प्रमुख फसली कीट
टमाटर का फल छेदक
- इसकी इल्ली टमाटर के फल में छेद करती है।
- यह फल के अंदर जाकर उसका गूदा खाती है।
- प्रभावित फल सड़ सकता है।
- खराब फल खाने या बेचने योग्य नहीं रहता।
सरसों का माहू
- यह छोटा हरा या पीला-हरा कीट होता है।
- यह पत्तियों, तनों, फूलों और फलियों पर समूह में दिखाई देता है।
- यह पौधे का रस चूसता है।
- इससे पौधा कमजोर हो जाता है और उपज कम हो सकती है।
बैंगन का तना एवं फल छेदक
- इसकी इल्ली तने और फल के अंदर प्रवेश करती है।
- प्रभावित शाखाएँ मुरझाने लगती हैं।
- फलों पर छेद दिखाई देते हैं।
- फल खराब हो जाते हैं और उत्पादन घटता है।
धान का पीला तना छेदक
- इसकी इल्ली धान के तने में घुस जाती है।
- यह तने के अंदरूनी भाग को खाती है।
- पौधे की बीच वाली पत्ती सूख जाती है।
- सूखा मध्य भाग इसके आक्रमण का प्रमुख लक्षण है।
18. सभी कीट हानिकारक नहीं होते
कुछ कीट फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।
लाभकारी कीट
- मधुमक्खी: फूलों का परागण करती है और शहद देती है।
- तितली: परागण में सहायता करती है।
- लेडीबर्ड बीटल: माहू जैसे हानिकारक कीटों को खाती है।
- रेशम का कीट: रेशम प्राप्त करने में उपयोगी है।
इसलिए कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे हानिकारक कीटों के साथ लाभकारी कीट भी मर सकते हैं।
जैव विविधता का संरक्षण
19. जैव विविधता को होने वाले खतरे
जैव विविधता में कमी के प्रमुख कारण हैं—
- पेड़ों और वनों की कटाई
- जीवों के आवासों का नष्ट होना
- जल, वायु और मिट्टी का प्रदूषण
- कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग
- जलाशयों को गंदा करना या भरना
- जीवों का अवैध शिकार
- बाहरी और तेजी से फैलने वाली प्रजातियाँ
- जलवायु में परिवर्तन
20. संरक्षण के उपाय
जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए हम—
- स्थानीय पेड़-पौधे लगा सकते हैं।
- पुराने पेड़ों को बचा सकते हैं।
- तालाबों और जलाशयों को साफ रख सकते हैं।
- पक्षियों के लिए पानी रख सकते हैं।
- पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले लगा सकते हैं।
- कीटनाशकों का सीमित उपयोग कर सकते हैं।
- प्लास्टिक और कचरे को खुले में नहीं फेंक सकते।
- जीवों और उनके आवासों को नुकसान पहुँचाने से बच सकते हैं।
- लोगों को संरक्षण के प्रति जागरूक कर सकते हैं।
21. स्थानीय समुदाय की भूमिका
जैव विविधता संरक्षण केवल सरकार का कार्य नहीं है। इसमें विद्यालय, विद्यार्थी और स्थानीय समुदाय भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्थानीय समुदाय के कार्य
- सामूहिक पौधारोपण करना
- पुराने पेड़ों और जलाशयों की रक्षा करना
- सफाई अभियान चलाना
- पक्षियों के लिए दाना और पानी रखना
- कीटनाशकों का कम उपयोग करना
- स्थानीय प्रजातियों की जानकारी सुरक्षित रखना
- संरक्षण संबंधी जागरूकता फैलाना
समुदाय के बुजुर्ग यह बता सकते हैं कि पहले कौन-से पेड़, पक्षी और जीव अधिक दिखाई देते थे। इस जानकारी से जैव विविधता में आए परिवर्तनों को समझा जा सकता है।
जैव विविधता से जुड़े व्यवसाय
22. प्रमुख व्यवसाय और उनके कार्य
| व्यवसाय | मुख्य कार्य |
|---|---|
| वन अधिकारी | वनों और वन्यजीवों की रक्षा एवं प्रबंधन |
| कृषि वैज्ञानिक | फसलों, मिट्टी, बीज, सिंचाई और कृषि तकनीकों का अध्ययन |
| कीट विज्ञानी | विभिन्न प्रकार के कीटों का अध्ययन |
| वनस्पति विज्ञानी | पौधों की संरचना, वृद्धि और विविधता का अध्ययन |
| प्राणी विज्ञानी | पशुओं और अन्य जीवों का अध्ययन |
| माली | पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना |
| संरक्षणवादी | संकट में पड़े जीवों और उनके आवासों की रक्षा करना |
| वन्यजीव फोटोग्राफर | जीवों के चित्र लेकर प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाना |
| पर्यावरण शिक्षक | लोगों को पर्यावरण और संरक्षण की जानकारी देना |
इन क्षेत्रों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी भविष्य में प्रकृति और जीवों से संबंधित व्यवसाय अपना सकते हैं।
महत्त्वपूर्ण शब्दावली
- जैव विविधता: किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की विविधता।
- आवास: वह स्थान जहाँ जीव को जीवन की आवश्यक सुविधाएँ मिलती हैं।
- विवरणिका: जानकारी का व्यवस्थित अभिलेख।
- फसल: उपयोग के लिए खेत में उगाया गया पौधा।
- चारा: पशुओं को खिलाया जाने वाला पौधा या भोजन।
- खरपतवार: फसल के साथ उगने वाला अनचाहा पौधा।
- फसली कीट: फसल को नुकसान पहुँचाने वाला कीट।
- परागण: परागकणों का फूल के एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचना।
- संरक्षण: प्रकृति और जीवों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।
- प्रजाति: समान विशेषताओं वाले जीवों का समूह।
अध्याय का सारांश
जैव विविधता का अर्थ किसी स्थान पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं, पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों से है। प्रत्येक जीव अपने आवास में रहता है, जहाँ उसे भोजन, जल, वायु, आश्रय और प्रजनन की सुविधाएँ मिलती हैं।
जैव विविधता विवरणिका में स्थानीय जीवों और पौधों के नाम, आवास, विशेषताएँ, उपयोग, अवलोकन का समय और चित्र जैसी जानकारी दर्ज की जाती है। अलग-अलग मौसमों में अवलोकन करने से प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों का पता चलता है।
खेतों में खाद्य फसलों के साथ फलदार पौधे और चारा फसलें भी उगाई जाती हैं। फसल के साथ उगने वाले अनचाहे पौधे खरपतवार कहलाते हैं। कुछ खरपतवार उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर फसल से जल, प्रकाश और पोषक तत्त्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
टमाटर का फल छेदक, सरसों का माहू, बैंगन का तना एवं फल छेदक तथा धान का पीला तना छेदक फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं। दूसरी ओर, मधुमक्खी, तितली और लेडीबर्ड जैसे कीट लाभकारी होते हैं। इसलिए कीटनाशकों का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।
पेड़ों की कटाई, प्रदूषण, अत्यधिक कीटनाशक और आवासों का नष्ट होना जैव विविधता के लिए प्रमुख खतरे हैं। स्थानीय पौधे लगाकर, जलाशयों को स्वच्छ रखकर, पुराने पेड़ों को बचाकर और पक्षियों के लिए पानी तथा घोंसलों की व्यवस्था करके हम जैव विविधता का संरक्षण कर सकते हैं।
एक पंक्ति में सार
अपने आसपास के जीवों को पहचानना, उनकी जानकारी दर्ज करना और उनके आवासों की रक्षा करना ही जैव विविधता विवरणिका परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
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