Class 7 · विज्ञान · Hindi Medium · नोट्स / व्याख्या

Chapter 4: धातुओं और अधातुओं का संसार

इस अध्याय के संपूर्ण नोट्स, सरल व्याख्या, प्रमुख अवधारणाएँ, उदाहरण, चित्र और सारांश नीचे पढ़ें।

जिज्ञासाहिंदी माध्यमनोट्स / व्याख्या
Class
7
Subject
विज्ञान
Book
जिज्ञासा
Medium
Hindi
संपूर्ण नोट्स एवं सारांश

कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 4 के संपूर्ण नोट्स में धातुओं और अधातुओं के गुण, आघातवर्धनीयता, तन्यता, चालन, जंग, धातु विज्ञान और दैनिक उपयोग समझिए।

परिचय

हम अपने दैनिक जीवन में बहुत-सी वस्तुएँ देखते हैं, जैसे तवा, बाल्टी, चिमटा, कील, तार, बर्तन, गहने, कृषि उपकरण आदि। इनमें से कई वस्तुएँ धातुओं से बनी होती हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि धातुएँ और अधातुएँ क्या होती हैं, उनके गुण क्या हैं, वे एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं, और हमारे जीवन में उनका क्या महत्व है। अध्याय की शुरुआत एक लोहार के काम से होती है, जहाँ गर्म लोहे को पीटकर औज़ारों का आकार दिया जाता है। इससे धातुओं के विशेष गुणों का परिचय मिलता है।

4.1 सामग्रियों के गुण

कुछ पदार्थ चमकीले होते हैं, कुछ नहीं। कुछ को पीटकर चपटा किया जा सकता है, कुछ टूट जाते हैं। कुछ से तार बनाए जा सकते हैं, कुछ से नहीं। इन गुणों के आधार पर धातुओं और अधातुओं की पहचान की जाती है। सामान्यतः धातुएँ द्युतिमय, कठोर, आघातवर्धनीय, तन्य तथा ऊष्मा और विद्युत की चालक होती हैं। इसके विपरीत अधिकतर अधातुएँ द्युतिहीन, भंगुर और कुचालक होती हैं।

4.1.1 आघातवर्धनीयता

जब ताँबा, ऐलुमिनियम और लोहे जैसी वस्तुओं को हथौड़े से पीटा जाता है, तो वे चपटे हो जाते हैं। इस गुण को आघातवर्धनीयता कहते हैं। आघातवर्धनीयता वह गुण है जिसके कारण किसी पदार्थ को पीटकर पतली चादर में बदला जा सकता है। अधिकतर धातुओं में यह गुण पाया जाता है। उदाहरण:

  • ऐलुमिनियम फॉइल
  • मिठाइयों पर चाँदी का वर्क
  • सोने और चाँदी की पतली चादरें

इसके विपरीत सल्फर और कोयला पीटने पर टूट जाते हैं। ऐसे पदार्थ भंगुर कहलाते हैं। लकड़ी न तो चपटी चादर बनती है और न ही उसी प्रकार भंगुर व्यवहार दिखाती है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • सभी धातुएँ बहुत कठोर नहीं होतीं।
  • सोडियम और पोटैशियम जैसी धातुएँ इतनी नरम होती हैं कि चाकू से काटी जा सकती हैं।
  • पारा धातु है, लेकिन कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में रहता है।

भारत की सभ्यता की उन्नति में लोहे का प्रभाव

प्राचीन समय में ताँबा और सोना पहले से उपयोग में थे, लेकिन बाद में लोहे का प्रयोग बढ़ा। लोहे ने भारत की सभ्यता की प्रगति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोहे से बने कृषि उपकरण, जैसे हल, फावड़ा, कुल्हाड़ी आदि, पहले के उपकरणों से अधिक मजबूत और उपयोगी थे। इससे खेती और अन्य कार्य आसान हुए। इसलिए लोहे के उपयोग ने मानव जीवन और सभ्यता के विकास को तेज किया।

4.1.2 तन्यता

धातुओं का एक महत्वपूर्ण गुण है कि उन्हें खींचकर तार बनाया जा सकता है। इस गुण को तन्यता कहते हैं। तन्यता वह गुण है जिसके कारण किसी पदार्थ को खींचकर तार में बदला जा सकता है। यह गुण मुख्य रूप से धातुओं में पाया जाता है। उदाहरण:

  • ताँबे के तार विद्युत फिटिंग में
  • ऐलुमिनियम के तार
  • गहनों के तार
  • वीणा, सितार, गिटार आदि में धातु के तार

सोना अत्यंत तन्य धातु है। इससे बहुत लंबा महीन तार बनाया जा सकता है। कोयला और सल्फर तन्य नहीं होते।

4.1.3 ध्वानिकता

धातु की वस्तुएँ गिरने या टकराने पर एक विशेष निनाद ध्वनि उत्पन्न करती हैं। धातुओं के इस गुण को ध्वानिकता कहते हैं। उदाहरण:

  • स्कूल की घंटी
  • मंदिर की घंटी
  • घुँघरू
  • धातु का चम्मच या सिक्का

जबकि कोयला और लकड़ी जैसी वस्तुएँ ऐसी स्पष्ट निनाद ध्वनि नहीं करतीं। इसलिए कहा जाता है कि धातुएँ ध्वानिक प्रकृति की होती हैं।

4.1.4 ऊष्मा का चालन

धातुएँ ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती हैं। इस गुण को ऊष्मा का चालन कहते हैं। यदि गरम पानी में एक धातु का चम्मच और एक लकड़ी का चम्मच रखा जाए, तो कुछ समय बाद धातु का चम्मच अधिक गरम हो जाता है। इससे पता चलता है कि धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं, जबकि लकड़ी कुचालक होती है।

दैनिक जीवन में उपयोग

  • खाना पकाने के बर्तन धातुओं से बनते हैं क्योंकि वे जल्दी गरम होते हैं।
  • बर्तनों के हैंडल लकड़ी या प्लास्टिक के बनाए जाते हैं ताकि हाथ न जले।

4.1.5 विद्युत का चालन

धातुएँ विद्युत धारा को अपने भीतर से गुजरने देती हैं, इसलिए वे विद्युत की सुचालक होती हैं। जैसे:

  • ताँबा
  • ऐलुमिनियम
  • लोहा

जबकि सल्फर, लकड़ी, पत्थर, रबर, नायलॉन आदि विद्युत का चालन नहीं करते, इसलिए ये विद्युत के कुचालक होते हैं।

दैनिक जीवन में उपयोग

  • विद्युत तार ताँबे या ऐलुमिनियम से बनाए जाते हैं।
  • पेचकस पर प्लास्टिक का आवरण होता है।
  • बिजली का काम करने वाले लोग रबर के दस्ताने और जूते पहनते हैं।

4.2 धातुओं पर वायु और जल का प्रभाव — लोहा

लोहे की वस्तुओं को कुछ दिनों तक नम वायु में खुला छोड़ देने पर उन पर भूरे रंग की परत जम जाती है। इस परत को जंग कहते हैं। लोहे पर जंग तब लगती है जब वह वायु और जल दोनों के संपर्क में आता है। केवल सूखी वायु या केवल जल से जंग नहीं लगती।

जंग लगना

लोहे पर भूरे रंग का निक्षेप बनने की प्रक्रिया को जंग लगना कहते हैं।

जंग से बचाव

  • रंग करना
  • तेल लगाना
  • ग्रीस लगाना
  • जिंक की परत चढ़ाना (गैल्वेनाइजेशन)

जंग लगने से लोहे की वस्तुएँ कमजोर हो जाती हैं और धन की हानि भी होती है।

प्राचीन भारत का अद्भुत धातु विज्ञान

दिल्ली का लौह स्तंभ प्राचीन भारत के उत्कृष्ट धातु विज्ञान का उदाहरण है। लगभग 1600 वर्ष पुराना होने के बाद भी उसमें जंग नहीं लगा है। यह बताता है कि प्राचीन भारत में धातुओं के बारे में गहरा ज्ञान था और धातु-निर्माण की उन्नत तकनीकें विकसित थीं।

4.3 वायु और जल का अन्य धातुओं पर प्रभाव

मैग्नीशियम रिबन को जलाने पर वह चमकीली सफेद लौ के साथ जलता है और मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। जब इसे जल में घोला जाता है, तो उसका विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है। इससे पता चलता है कि:

  • धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
  • धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारीय होते हैं।

अध्याय में यह भी बताया गया है कि सोडियम बहुत क्रियाशील धातु है। यह वायु और जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करती है, इसलिए इसे मिट्टी के तेल में रखा जाता है।

4.4 पदार्थ जो वायु और जल में धातुओं से भिन्न व्यवहार करते हैं

सल्फर को जलाने पर सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनती है। जब यह गैस जल में घुलती है, तो अम्लीय विलयन बनता है। यह धातुओं से अलग व्यवहार है। इससे पता चलता है कि:

  • अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऐसे ऑक्साइड बनाती हैं जो प्रायः अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
  • सल्फर जैसे पदार्थ जल के साथ वैसे व्यवहार नहीं करते जैसे धातुएँ करती हैं।

अधातुओं के सामान्य गुण

अधातुएँ सामान्यतः:

  • द्युतिहीन होती हैं
  • नरम या भंगुर होती हैं
  • आघातवर्धनीय नहीं होतीं
  • तन्य नहीं होतीं
  • ध्वानिक नहीं होतीं
  • ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं

उदाहरण:

  • ऑक्सीजन
  • नाइट्रोजन
  • हाइड्रोजन
  • कार्बन
  • सल्फर
  • फॉस्फोरस

4.5 क्या अधातुएँ दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं?

हाँ, अधातुएँ भी हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

कुछ प्रमुख अधातुएँ और उनके उपयोग

ऑक्सीजन

  • श्वसन के लिए आवश्यक

कार्बन

  • सभी जीवों की निर्माण इकाई
  • प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का मुख्य घटक

नाइट्रोजन

  • उर्वरकों के निर्माण में उपयोग
  • पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक

क्लोरीन

  • जल शोधन में उपयोग

आयोडीन

  • रोगाणुरोधक के रूप में घावों पर उपयोग

इसलिए यह कहना गलत होगा कि केवल धातुएँ ही उपयोगी हैं। धातुएँ और अधातुएँ दोनों ही जीवन के लिए आवश्यक हैं।

संक्षेप में — Summary

  1. धातुओं और अधातुओं को उनके गुणों के आधार पर पहचाना जाता है।
  2. धातुएँ सामान्यतः चमकीली, कठोर, आघातवर्धनीय, तन्य, ध्वानिक तथा ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।
  3. अधातुएँ प्रायः द्युतिहीन, भंगुर, अतन्य, अध्वानिक तथा ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं।
  4. धातुओं को पीटकर चादर बनाया जा सकता है, इसलिए वे आघातवर्धनीय होती हैं।
  5. धातुओं को खींचकर तार बनाया जा सकता है, इसलिए वे तन्य होती हैं।
  6. धातुएँ निनाद ध्वनि उत्पन्न करती हैं, इसलिए वे ध्वानिक होती हैं।
  7. लोहा वायु और जल दोनों के संपर्क में आने पर जंग खाता है।
  8. धातुओं के ऑक्साइड प्रायः क्षारीय होते हैं।
  9. अधातुओं के ऑक्साइड प्रायः अम्लीय होते हैं।
  10. धातुएँ और अधातुएँ दोनों ही दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

बहुत छोटा सारांश

यह अध्याय हमें बताता है कि धातुएँ और अधातुएँ पदार्थों के दो महत्वपूर्ण वर्ग हैं। धातुएँ चमकीली, तन्य, आघातवर्धनीय तथा ऊष्मा और विद्युत की चालक होती हैं, इसलिए उनसे बर्तन, तार, औज़ार और गहने बनाए जाते हैं। अधातुएँ प्रायः भंगुर और कुचालक होती हैं, लेकिन ऑक्सीजन, कार्बन, नाइट्रोजन, क्लोरीन और आयोडीन जैसी अधातुएँ जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। लोहा नम वायु में जंग खाता है, जबकि कुछ धातुएँ और अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके अलग-अलग प्रकृति के ऑक्साइड बनाती हैं। इस प्रकार, धातुएँ और अधातुएँ दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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