Class 7 · विज्ञान · Hindi Medium · नोट्स / व्याख्या

Chapter 7: प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण

इस अध्याय के संपूर्ण नोट्स, सरल व्याख्या, प्रमुख अवधारणाएँ, उदाहरण, चित्र और सारांश नीचे पढ़ें।

जिज्ञासाहिंदी माध्यमनोट्स / व्याख्या
Class
7
Subject
विज्ञान
Book
जिज्ञासा
Medium
Hindi
संपूर्ण नोट्स एवं सारांश

कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 7 के संपूर्ण नोट्स में ऊष्मा के चालन, संवहन और विकिरण, समुद्र समीर, स्थल समीर, जल चक्र, जल रिसाव, जलभृत और हिम-स्तूप समझिए।

Introduction – परिचय

पहाड़ी क्षेत्र में अलाव से ऊष्मा प्राप्त करते लोग
अलाव से ऊष्मा प्राप्त करते लोग

हमारे चारों ओर ऊष्मा का स्थानांतरण लगातार होता रहता है। सूर्य पृथ्वी पर ऊष्मा और प्रकाश का मुख्य स्रोत है। अलग-अलग स्थानों का तापमान अलग होता है, क्योंकि वहाँ सूर्य का प्रकाश अलग-अलग मात्रा में पहुँचता है और वहाँ की भौगोलिक स्थिति भी अलग होती है।

जैसे—केरल, गंगटोक की तुलना में भूमध्य रेखा के अधिक पास है और वहाँ समुद्र-तट भी लंबा है, इसलिए वहाँ का मौसम अधिक उष्ण और आर्द्र होता है।

इस अध्याय में हम सीखते हैं कि ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे पहुँचती है। ऊष्मा के स्थानांतरण की तीन मुख्य विधियाँ हैं—

  1. चालन
  2. संवहन
  3. विकिरण

7.1 ऊष्मा का चालन

चालन क्या है?

किसी वस्तु के गरम भाग से ठंडे भाग की ओर ऊष्मा के स्थानांतरण की प्रक्रिया को चालन कहते हैं।

चालन में पदार्थ के कण अपने स्थान से नहीं हटते। वे केवल अपने पास वाले कणों को ऊष्मा देते जाते हैं। इस प्रकार ऊष्मा एक कण से दूसरे कण तक पहुँचती रहती है।

उदाहरण

जब धातु की पट्टी के एक सिरे को गरम किया जाता है, तो कुछ समय बाद पट्टी का दूसरा सिरा भी गरम हो जाता है। इसका कारण चालन है।

धातु के पात्रों में भोजन क्यों पकाते हैं?

धातुएँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं। इसलिए धातु के बर्तन में ऊष्मा जल्दी फैलती है और भोजन आसानी से पक जाता है।

ऊष्मा के सुचालक

जो पदार्थ ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से गुजरने देते हैं, उन्हें ऊष्मा के सुचालक कहते हैं।

उदाहरण: लोहा, ऐलुमिनियम, ताँबा, स्टील आदि।

ऊष्मा के कुचालक

जो पदार्थ ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से नहीं गुजरने देते, उन्हें ऊष्मा के कुचालक कहते हैं।

उदाहरण: लकड़ी, काँच, मिट्टी, चीनी मिट्टी, वायु आदि।

ऊनी कपड़े हमें गरम क्यों रखते हैं?

ऊनी कपड़ों के रेशों के बीच वायु फँस जाती है। वायु ऊष्मा की कुचालक होती है। इसलिए यह हमारे शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकती है और हमें गरम रखती है।

दो पतले कंबलों के बीच फँसी वायु शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकती हुई
चित्र 7.2 — दो पतले कंबलों के बीच स्थिर वायु

दो पतले कंबल एक मोटे कंबल से अधिक गरम क्यों रखते हैं?

दो पतले कंबलों के बीच वायु की परत फँस जाती है। यह वायु ऊष्मा की कुचालक होती है और शरीर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती। इसलिए दो पतले कंबल अधिक गरम रखते हैं।

खोखली ईंटों का उपयोग क्यों किया जाता है?

खोखली ईंटों में वायु भरी होती है। वायु ऊष्मा की कुचालक होती है। इसलिए ऐसी दीवारें घर को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गरम रखने में सहायता करती हैं।

7.2 संवहन

संवहन क्या है?

द्रवों और गैसों में कणों की वास्तविक गति के कारण ऊष्मा के स्थानांतरण को संवहन कहते हैं।

संवहन में गरम द्रव या गैस हल्की होकर ऊपर उठती है और ठंडी द्रव या गैस नीचे आती है। इस प्रकार एक चक्र बनता है और ऊष्मा फैलती है।

गरम हवा ऊपर क्यों उठती है?

जब हवा गरम होती है, तो वह फैलती है। फैलने पर उसका घनत्व कम हो जाता है और वह हल्की हो जाती है। इसलिए गरम हवा ऊपर उठती है।

धुआँ ऊपर क्यों उठता है?

जल में संवहन देखने के लिए मोमबत्ती और रंगीन क्रिस्टल वाली प्रयोग व्यवस्था
चित्र 7.5 — संवहन हेतु प्रायोगिक व्यवस्था

अगरबत्ती या आग से निकलने वाला धुआँ गरम गैसों और सूक्ष्म कणों का मिश्रण होता है। यह आस-पास की हवा से गरम होता है, इसलिए ऊपर उठता है।

जल में संवहन

जब बीकर में पानी को नीचे से गरम किया जाता है, तो नीचे का पानी गरम होकर हल्का हो जाता है और ऊपर उठता है। ऊपर का ठंडा पानी नीचे आ जाता है। यह प्रक्रिया बार-बार चलती है और पूरा पानी गरम हो जाता है।

7.2.1 स्थल समीर और समुद्र समीर

दिन में समुद्र से स्थल की ओर बहती ठंडी समुद्र समीर
चित्र 7.7 (क) — समुद्र समीर

स्थल और जल समान गति से गरम और ठंडे नहीं होते। स्थल जल की तुलना में जल्दी गरम होता है और जल्दी ठंडा भी होता है। जल धीरे-धीरे गरम और धीरे-धीरे ठंडा होता है।

समुद्र समीर

दिन के समय स्थल जल्दी गरम हो जाता है। स्थल के ऊपर की गरम हवा ऊपर उठती है। उसकी जगह लेने के लिए समुद्र से ठंडी हवा स्थल की ओर आती है।

समुद्र से स्थल की ओर चलने वाली ठंडी हवा को समुद्र समीर कहते हैं।

रात में स्थल से समुद्र की ओर बहती ठंडी स्थल समीर
चित्र 7.7 (ख) — स्थल समीर

स्थल समीर

रात के समय स्थल जल्दी ठंडा हो जाता है, जबकि समुद्र का जल अपेक्षाकृत गरम रहता है। समुद्र के ऊपर की गरम हवा ऊपर उठती है और स्थल से ठंडी हवा समुद्र की ओर चलती है।

स्थल से समुद्र की ओर चलने वाली ठंडी हवा को स्थल समीर कहते हैं।

याद रखने योग्य बात

दिन में हवा समुद्र से स्थल की ओर चलती है — समुद्र समीर। रात में हवा स्थल से समुद्र की ओर चलती है — स्थल समीर।

7.3 विकिरण

विकिरण क्या है?

जिस प्रक्रिया में ऊष्मा बिना किसी माध्यम के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती है, उसे विकिरण कहते हैं।

विकिरण द्वारा ऊष्मा के स्थानांतरण के लिए किसी ठोस, द्रव या गैस माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

उदाहरण

सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक विकिरण द्वारा पहुँचती है। आग के पास बैठने पर हमें गरमी विकिरण द्वारा महसूस होती है।

सभी वस्तुएँ विकिरण करती हैं

हर वस्तु अपने आसपास ऊष्मा का विकिरण करती है। कोई गरम बर्तन कुछ समय बाद ठंडा हो जाता है, क्योंकि वह अपनी ऊष्मा वातावरण में विकिरित कर देता है।

गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े क्यों पहनते हैं?

हल्के रंग के कपड़े सूर्य की अधिकतर ऊष्मा को परावर्तित कर देते हैं। इसलिए गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े आरामदायक होते हैं।

सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े क्यों पहनते हैं?

गहरे रंग के कपड़े अधिक ऊष्मा को अवशोषित करते हैं। इसलिए सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े पहनने से गरमी महसूस होती है।

एक ही उदाहरण में तीनों विधियाँ

जब हम बर्तन में पानी गरम करते हैं—

बर्नर से बर्तन तक ऊष्मा चालन द्वारा पहुँचती है। बर्तन में पानी संवहन द्वारा गरम होता है। बर्नर और गरम बर्तन के आसपास की गरमी हमें विकिरण द्वारा महसूस होती है।

7.4 जल चक्र

जल चक्र क्या है?

पृथ्वी पर जल का लगातार वाष्पन, संघनन और वर्षण के रूप में घूमते रहना जल चक्र कहलाता है।

जल की तीन अवस्थाएँ

प्रकृति में जल तीन अवस्थाओं में पाया जाता है—

  1. ठोस अवस्था – बर्फ, हिम, ग्लेशियर
  2. द्रव अवस्था – नदियाँ, झीलें, समुद्र
  3. गैसीय अवस्था – जलवाष्प

जल चक्र की प्रक्रिया

वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा और जल संग्रह दर्शाता जल चक्र
चित्र 7.9 — जल चक्र

सूर्य की ऊष्मा से समुद्र, नदियों और झीलों का जल वाष्पित होकर जलवाष्प बनता है। पेड़-पौधों से भी जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है, इसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। जलवाष्प ऊपर जाकर ठंडी होती है और संघनित होकर बादल बनाती है। बादलों से जल वर्षा, हिम या ओलों के रूप में पृथ्वी पर वापस आता है। इसे वर्षण कहते हैं। फिर यह जल नदियों, झीलों, समुद्रों और भूमि में चला जाता है।

जल चक्र का महत्व

जल चक्र पृथ्वी पर जल का पुनर्वितरण करता है। यह नदियों, झीलों और समुद्रों में जल की पुनः पूर्ति करता है। यह पृथ्वी पर जल की कुल मात्रा को बनाए रखने में सहायता करता है।

7.4.1 जल का धरती में अंत:स्यंदन

अंत:स्यंदन क्या है?

पृथ्वी की सतह से जल का मिट्टी और चट्टानों के बीच से नीचे रिसना अंत:स्यंदन कहलाता है।

बजरी और महीन मृदा में जल रिसाव की तुलना
चित्र 7.11 — जल के रिसाव की दर

जल कहाँ जल्दी रिसता है?

जल बजरी में सबसे जल्दी रिसता है, क्योंकि बजरी के कणों के बीच बड़े-बड़े खाली स्थान होते हैं। बालू में जल धीरे रिसता है। मृदा में जल बहुत धीरे रिसता है, क्योंकि मिट्टी के कणों के बीच खाली स्थान कम होते हैं।

भौम जल क्या है?

जो जल पृथ्वी की सतह से नीचे रिसकर मिट्टी, अवसादों और चट्टानों के रिक्त स्थानों में जमा हो जाता है, उसे भौम जल कहते हैं।

जलभृत क्या है?

वर्षा का जल भूमि में रिसकर जलभृत में संग्रहित होता हुआ
चित्र 7.12 — जलभृत

भूमि के नीचे अवसादों और चट्टानों की वे परतें, जिनमें जल संग्रहित रहता है, जलभृत कहलाती हैं।

कुएँ और हैंडपंपों से हमें इसी भौम जल से पानी मिलता है।

भौम जल की कमी क्यों हो रही है?

जनसंख्या बढ़ने से जल की आवश्यकता बढ़ रही है। भौम जल का अधिक दोहन हो रहा है। शहरों में कंक्रीट की सतहें बढ़ रही हैं, जिससे वर्षा का जल भूमि में कम रिसता है। पेड़-पौधों की कमी भी जल के अंत:स्यंदन को घटाती है।

समाधान

वर्षा जल संचयन करना चाहिए। पुनर्भरण गड्ढे बनाने चाहिए। जल का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। पेड़-पौधे लगाने चाहिए।

हिम-स्तूप

लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्र में शंकु के आकार का हिम-स्तूप
चित्र 7.13 — हिम-स्तूप

लद्दाख जैसे ठंडे और शुष्क क्षेत्रों में जल की कमी होती है। वहाँ सर्दियों में जल को पाइपों द्वारा नीचे लाकर ठंडी हवा में फुहारों की तरह गिराया जाता है। कम तापमान के कारण यह जल जम जाता है और शंकु के आकार की बर्फ की संरचना बनाता है। इसे हिम-स्तूप कहते हैं।

वसंत और गर्मियों में यह हिम-स्तूप धीरे-धीरे पिघलता है और खेती तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल प्रदान करता है।

संक्षेप में

इस अध्याय में हमने सीखा कि ऊष्मा का स्थानांतरण तीन तरीकों से होता है—चालन, संवहन और विकिरण।

चालन में ऊष्मा गरम भाग से ठंडे भाग की ओर कणों के माध्यम से जाती है, लेकिन कण अपनी जगह से नहीं हटते। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ठोसों में होती है।

संवहन में द्रव या गैस के कण स्वयं गति करते हैं और ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं। समुद्र समीर और स्थल समीर संवहन के उदाहरण हैं।

विकिरण में ऊष्मा बिना किसी माध्यम के स्थानांतरित होती है। सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक विकिरण द्वारा पहुँचती है।

जल चक्र के कारण जल पृथ्वी पर लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता रहता है। वाष्पन, संघनन और वर्षण जल चक्र की मुख्य प्रक्रियाएँ हैं।

अंत:स्यंदन द्वारा वर्षा का जल मिट्टी और चट्टानों से रिसकर भौम जल बनता है। जलभृतों में यह जल जमा रहता है। हमें भौम जल का संरक्षण करना चाहिए, क्योंकि यह असीमित नहीं है।

हिम-स्तूप जल संरक्षण की एक उपयोगी विधि है, विशेषकर लद्दाख जैसे क्षेत्रों में।

प्रश्न-उत्तर

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