Class 7 · विज्ञान · Hindi Medium · नोट्स / व्याख्या

Chapter 2: पदार्थों का अन्वेषण - अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन

इस अध्याय के संपूर्ण नोट्स, सरल व्याख्या, प्रमुख अवधारणाएँ, उदाहरण, चित्र और सारांश नीचे पढ़ें।

जिज्ञासाहिंदी माध्यमनोट्स / व्याख्या
Class
7
Subject
विज्ञान
Book
जिज्ञासा
Medium
Hindi
संपूर्ण नोट्स एवं सारांश

कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 2 के संपूर्ण नोट्स में अम्लीय, क्षारीय और उदासीन पदार्थ, लिटमस, प्राकृतिक सूचक, उदासीनीकरण और दैनिक जीवन के उपयोग समझिए।

अध्याय का परिचय

इस अध्याय की शुरुआत विज्ञान मेले की एक रोचक घटना से होती है, जहाँ अश्विन और कीर्ति को सफेद कागज पर छिड़काव के बाद छिपा हुआ संदेश दिखाई देता है। इससे उनकी जिज्ञासा बढ़ती है कि कुछ पदार्थ मिलाने पर रंग क्यों बदलता है। इसी जिज्ञासा से अम्ल, क्षार, उदासीन पदार्थ और सूचकों का अध्ययन शुरू होता है।

2.1 प्रकृति — हमारी विज्ञान प्रयोगशाला

हमारे आस-पास की बहुत-सी वस्तुएँ जैसे नींबू, इमली, साबुन, गुलाब, हल्दी आदि विज्ञान की प्रयोगशाला की तरह काम करती हैं। इनकी सहायता से हम पदार्थों की प्रकृति पहचान सकते हैं।

2.1.1 लिटमस एक सूचक के रूप में

लिटमस क्या है?

लिटमस एक प्राकृतिक सूचक है, जो लाइकेन से प्राप्त होता है। यह दो रूपों में मिलता है:

  • लिटमस विलयन
  • लिटमस पत्र

लिटमस पत्र दो रंगों के होते हैं:

  • नीला लिटमस पत्र
  • लाल लिटमस पत्र

सूचक क्या होता है?

जो पदार्थ अम्लीय और क्षारीय विलयनों में अलग-अलग रंग दिखाते हैं, उन्हें अम्ल-क्षार सूचक कहते हैं।

लिटमस से पहचान

  • जो पदार्थ नीले लिटमस को लाल कर दें, वे अम्लीय होते हैं।
  • जो पदार्थ लाल लिटमस को नीला कर दें, वे क्षारीय होते हैं।
  • जो पदार्थ किसी भी लिटमस का रंग न बदलें, वे उदासीन होते हैं।

उदाहरण

अम्लीय पदार्थ

  • नींबू का रस
  • आँवले का रस
  • इमली का पानी
  • सिरका

ये नीले लिटमस को लाल करते हैं।

क्षारीय पदार्थ

  • साबुन का विलयन
  • बेकिंग सोडा का विलयन
  • चूने का पानी
  • कपड़े धोने के पाउडर का विलयन

ये लाल लिटमस को नीला करते हैं।

उदासीन पदार्थ

  • नल का पानी
  • चीनी का विलयन
  • नमक का विलयन

ये दोनों लिटमस पत्रों पर कोई प्रभाव नहीं डालते।

स्वाद और स्पर्श से कुछ संकेत

  • अधिकतर अम्लीय पदार्थ खट्टे स्वाद के होते हैं।
  • कई क्षारीय पदार्थ छूने में चिकने लगते हैं।
  • क्षार सामान्यतः कड़वे भी हो सकते हैं, लेकिन हर कड़वी वस्तु क्षारीय नहीं होती। जैसे करेला कड़वा है, पर क्षारीय नहीं।

कुछ सामान्य खाद्य अम्ल

पुस्तक में दिए उदाहरणों के अनुसार:

  • नींबू में — सिट्रिक अम्ल
  • आँवला में — सिट्रिक अम्ल एवं एस्कॉर्बिक अम्ल
  • इमली में — टार्टरिक अम्ल
  • टमाटर में — सिट्रिक अम्ल एवं ऑक्सेलिक अम्ल

2.1.2 लाल गुलाब एक सूचक के रूप में

लाल गुलाब की पंखुड़ियों से अर्क बनाकर भी पदार्थों की प्रकृति जानी जा सकती है। इसके लिए पंखुड़ियों को पानी में भिगोकर, कुचलकर और छानकर रंगीन अर्क तैयार किया जाता है।

लाल गुलाब के अर्क का व्यवहार

  • अम्लीय विलयन में यह लाल हो जाता है।
  • क्षारीय विलयन में यह हरा हो जाता है।
  • उदासीन पदार्थों में प्रायः विशेष परिवर्तन नहीं दिखता।

महत्त्व

इससे यह सिद्ध होता है कि प्रकृति में कई पौधे और फूल सूचक का काम कर सकते हैं। पुस्तक में चुकंदर, लाल व बैंगनी पत्तागोभी, हल्दी, जामुन और लाल गुड़हल का भी उल्लेख है।

2.1.3 हल्दी एक सूचक के रूप में

हल्दी से पीले रंग का कागज बनाकर हल्दी-पत्र तैयार किया जाता है।

हल्दी-पत्र का व्यवहार

  • क्षारीय पदार्थों के संपर्क में हल्दी का पीला रंग लाल हो जाता है।
  • अम्लीय और उदासीन पदार्थों के साथ इसका रंग नहीं बदलता।

निष्कर्ष

हल्दी-पत्र से क्षारीय पदार्थों की पहचान की जा सकती है, लेकिन इससे अम्लीय और उदासीन पदार्थों में अंतर नहीं किया जा सकता।

दैनिक जीवन का उदाहरण

यदि हल्दी का दाग लगे कपड़े पर साबुन लगाया जाए, तो उसका रंग बदल सकता है क्योंकि साबुन क्षारीय प्रकृति का होता है।

घ्राण सूचक

कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है। इन्हें घ्राण सूचक कहते हैं। अध्याय में प्याज का उदाहरण दिया गया है।

2.2 क्या होता है जब अम्लीय पदार्थों को क्षारीय पदार्थों के साथ मिश्रित किया जाता है?

जब अम्ल और क्षार को उचित मात्रा में मिलाया जाता है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

प्रयोग से समझ

नींबू के रस में नीला लिटमस डालने पर विलयन लाल हो जाता है क्योंकि नींबू अम्लीय है। जब उसमें धीरे-धीरे चूने का पानी मिलाया जाता है, तो एक समय बाद रंग बदल जाता है। इसका अर्थ है कि चूने के पानी ने अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर दिया।

उदासीनीकरण अभिक्रिया

अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा

याद रखने योग्य बात

उदासीनीकरण में:

  • अम्ल और क्षार का प्रभाव समाप्त होता है
  • लवण बनता है
  • जल बनता है
  • ऊष्मा भी निकलती है

2.3 दैनिक जीवन में उदासीनीकरण प्रक्रिया

यह प्रक्रिया केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोज़मर्रा के जीवन में भी बहुत उपयोगी है।

1. चींटी के काटने पर

लाल चींटी काटने पर त्वचा में फॉर्मिक अम्ल छोड़ती है, जिससे जलन और दर्द होता है। इस अम्ल के प्रभाव को कम करने के लिए नम बेकिंग सोडा लगाया जा सकता है, क्योंकि बेकिंग सोडा क्षारीय होता है।

2. अम्लीय मृदा का उपचार

यदि खेत की मिट्टी बहुत अधिक अम्लीय हो जाए, तो पौधे अच्छी तरह नहीं बढ़ते। ऐसी स्थिति में मिट्टी में चूना मिलाया जाता है, क्योंकि वह क्षारीय होता है और अम्लीयता को कम करता है।

3. क्षारीय मृदा का उपचार

यदि मृदा क्षारीय हो, तो उसमें जैविक खाद और कम्पोस्ट मिलाया जाता है। कार्बनिक पदार्थ अम्ल छोड़ते हैं, जो मिट्टी की क्षारीयता को कम करते हैं।

4. औद्योगिक अपशिष्ट का उपचार

यदि कारखानों का अपशिष्ट अम्लीय हो और उसे सीधे झील या नदी में छोड़ दिया जाए, तो जलीय जीवों को हानि हो सकती है। इसलिए उसे पहले क्षारीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जाता है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

अम्लीय पदार्थ वे पदार्थ जो नीले लिटमस को लाल कर दें।

क्षारीय पदार्थ वे पदार्थ जो लाल लिटमस को नीला कर दें।

उदासीन पदार्थ वे पदार्थ जो किसी भी लिटमस पत्र का रंग न बदलें।

सूचक वे पदार्थ जो अम्लीय और क्षारीय विलयनों में अलग-अलग रंग दिखाकर उनकी पहचान कराते हैं।

उदासीनीकरण अभिक्रिया अम्ल और क्षार की ऐसी अभिक्रिया जिसमें लवण, जल और ऊष्मा बनती है।

परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • लिटमस एक प्राकृतिक सूचक है, जो लाइकेन से प्राप्त होता है।
  • अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं।
  • क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं।
  • उदासीन पदार्थ लिटमस का रंग नहीं बदलते।
  • लाल गुलाब का अर्क अम्ल में लाल और क्षार में हरा होता है।
  • हल्दी क्षारीय पदार्थों के साथ लाल हो जाती है।
  • उदासीनीकरण में लवण, जल और ऊष्मा बनते हैं।
  • चींटी के काटने, मृदा उपचार और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन में उदासीनीकरण उपयोगी है।

संक्षेप में – Summary

इस अध्याय में हमने सीखा कि पदार्थों को उनकी प्रकृति के आधार पर अम्लीय, क्षारीय और उदासीन वर्गों में बाँटा जा सकता है। उनकी पहचान के लिए लिटमस, लाल गुलाब का अर्क और हल्दी जैसे प्राकृतिक सूचकों का उपयोग किया जाता है। अम्ल और क्षार मिलकर एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं, जिसमें लवण, जल और ऊष्मा बनते हैं। यह प्रक्रिया हमारे दैनिक जीवन में भी बहुत महत्त्वपूर्ण है, जैसे चींटी के काटने का उपचार, मृदा की प्रकृति सुधारना और औद्योगिक अपशिष्ट को सुरक्षित बनाना।

प्रश्न-उत्तर

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