कक्षा 7 जिज्ञासा अध्याय 3 के संपूर्ण नोट्स में विद्युत सेल, बैटरी, लैम्प, एल.ई.डी., स्विच, खुले-बंद परिपथ, परिपथ प्रतीक, चालक और विद्युतरोधी समझिए।
परिचय (Introduction)
हम अपने दैनिक जीवन में विद्युत का उपयोग बहुत-से कार्यों में करते हैं, जैसे—
- प्रकाश के लिए
- पंखा, हीटर, गीजर, रेफ्रिजरेटर जैसे उपकरण चलाने के लिए
- मोबाइल, रेडियो, टीवी, कंप्यूटर आदि के लिए
- परिवहन, संचार और उद्योगों में
विद्युत कई स्रोतों से प्राप्त की जाती है, जैसे जल, पवन, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और कोयला। घरों और कारखानों में विद्युत तारों द्वारा पहुँचती है, परंतु इस अध्याय में मुख्य रूप से छोटे और सुवाह्य स्रोतों, जैसे विद्युत सेल और बैटरी, का अध्ययन कराया गया है। साथ ही सुरक्षा पर भी बल दिया गया है कि घर या विद्यालय की मुख्य विद्युत आपूर्ति पर कभी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3.1 टॉर्च-लाइट
टॉर्च एक सामान्य विद्युत उपकरण है। इसमें सामान्यतः ये भाग होते हैं—

- लैम्प
- स्विच
- सेल या बैटरी
टॉर्च का स्विच दो स्थितियों में होता है—
- ऑन: लैम्प जलता है
- ऑफ: लैम्प नहीं जलता
टॉर्च को खोलने पर उसके अंदर एक या एक से अधिक विद्युत सेल मिलते हैं। यही सेल टॉर्च को ऊर्जा देते हैं। टॉर्च के माध्यम से हम समझते हैं कि विद्युत उपकरणों में सेल, लैम्प और स्विच मिलकर काम करते हैं।
3.2 एक सरल विद्युत परिपथ
सरल विद्युत परिपथ वह व्यवस्था है जिसमें किसी ऊर्जा स्रोत (सेल/बैटरी), तार, स्विच और लैम्प को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि धारा प्रवाहित हो सके और लैम्प जल उठे। अध्याय में आगे इसके प्रत्येक भाग को अलग-अलग समझाया गया है।

3.2.1 विद्युत सेल
विद्युत सेल विद्युत ऊर्जा का एक सुवाह्य स्रोत है।
विद्युत सेल के दो टर्मिनल होते हैं—
- धनात्मक टर्मिनल (+)
- ऋणात्मक टर्मिनल (–)
सेल में—
- उभरी हुई धातु की टोपी वाला सिरा = धनात्मक (+)
- चपटी धातु की डिस्क वाला सिरा = ऋणात्मक (–)
सेल से ही परिपथ में विद्युत ऊर्जा मिलती है।
3.2.2 बैटरी
जब दो या दो से अधिक सेल एक विशेष क्रम में जोड़े जाते हैं, तो उसे बैटरी कहते हैं।
बैटरी बनाने का सही तरीका
एक सेल का धनात्मक सिरा अगले सेल के ऋणात्मक सिरे से जोड़ा जाता है।

बैटरी की आवश्यकता क्यों?
- अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए
- अधिक समय तक उपकरण चलाने के लिए
- कुछ उपकरणों को एक से अधिक सेल चाहिए होते हैं
अध्याय में यह भी बताया गया है कि कई बार हम एक ही सेल को भी सामान्य बोलचाल में बैटरी कह देते हैं, जैसे मोबाइल फोन की बैटरी।

3.2.3 विद्युत लैम्प
विद्युत लैम्प मुख्यतः दो प्रकार के बताए गए हैं—
(क) तापदीप्त लैम्प
इस लैम्प के अंदर एक बहुत पतला तार होता है, जिसे तंतु (filament) कहते हैं।
तापदीप्त लैम्प की विशेषताएँ
- तंतु दो मोटे तारों से जुड़ा होता है
- यह काँच के बल्ब के अंदर रहता है
- जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो तंतु गर्म होकर प्रकाश देने लगता है
यदि तंतु टूट जाए, तो लैम्प फ्यूज हो जाता है और नहीं जलता।
(ख) एल.ई.डी. लैम्प
आजकल टॉर्च और कई उपकरणों में एल.ई.डी. (Light Emitting Diode) का उपयोग होता है।

एल.ई.डी. की विशेषताएँ
- इसमें तंतु नहीं होता
- इसके दो टर्मिनल होते हैं
- लंबा तार = धनात्मक
- छोटा तार = ऋणात्मक

एल.ई.डी. आकार में छोटी होती है, कम ऊर्जा खर्च करती है और अधिक उपयोगी होती है।
3.2.4 विद्युत सेल अथवा बैटरी का उपयोग करके किसी विद्युत लैम्प को दीप्तिमान करना
लैम्प को जलाने के लिए उसे सेल/बैटरी से सही प्रकार जोड़ा जाना आवश्यक है।
तापदीप्त लैम्प के लिए
यदि लैम्प का एक सिरा सेल के एक टर्मिनल से और दूसरा सिरा दूसरे टर्मिनल से जुड़ जाए, तो लैम्प जल उठता है।
महत्वपूर्ण बात
तापदीप्त लैम्प में सामान्यतः यह फर्क नहीं पड़ता कि उसका कौन-सा सिरा धन से और कौन-सा ऋण से जुड़ा है, बस परिपथ पूरा होना चाहिए।
एल.ई.डी. के लिए
एल.ई.डी. में धारा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित हो सकती है।
इसलिए एल.ई.डी. तभी जलेगी जब—
- उसका लंबा तार बैटरी के धनात्मक टर्मिनल से जुड़ा हो
- उसका छोटा तार बैटरी के ऋणात्मक टर्मिनल से जुड़ा हो
यदि उल्टा जोड़ दिया जाए, तो एल.ई.डी. नहीं जलेगी।
3.2.5 विद्युत परिपथ

जब सेल, तार और लैम्प इस प्रकार जुड़े हों कि विद्युत धारा के प्रवाह के लिए पूरा मार्ग बन जाए, तो उसे विद्युत परिपथ कहते हैं।
बंद परिपथ
जब परिपथ पूरा होता है, तब धारा प्रवाहित होती है और लैम्प जलता है।
खुला परिपथ
जब परिपथ कहीं से टूटा होता है, तब धारा प्रवाहित नहीं होती और लैम्प नहीं जलता।
धारा की दिशा

किसी विद्युत परिपथ में धारा की दिशा सेल के धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर मानी जाती है।
3.2.6 विद्युत स्विच
स्विच एक ऐसी युक्ति है जो परिपथ को पूरा या भंग कर सकती है।
स्विच की दो अवस्थाएँ
- ऑन स्थिति: परिपथ बंद, धारा प्रवाहित, लैम्प जलता है
- ऑफ स्थिति: परिपथ खुला, धारा नहीं प्रवाहित, लैम्प नहीं जलता
अध्याय में सेफ्टी-पिन, ड्राइंग-पिन और गत्ते की मदद से एक सरल स्विच बनाना भी बताया गया है। इससे यह समझ में आता है कि स्विच परिपथ में कहीं भी लगाया जा सकता है और उसका कार्य धारा को चलाना या रोकना है।
3.3 परिपथ आरेख

विद्युत परिपथ के विभिन्न घटकों को बार-बार चित्र के रूप में बनाना कठिन होता है। इसलिए उनके लिए मानक प्रतीक उपयोग किए जाते हैं।
प्रमुख प्रतीक
- विद्युत सेल
- बैटरी
- लैम्प
- एल.ई.डी.
- स्विच (ऑन/ऑफ)
- तार
इन प्रतीकों का उपयोग करके बनाए गए चित्र को परिपथ आरेख कहते हैं।
लाभ
- परिपथ को सरलता से समझा जा सकता है
- चित्र साफ और छोटा बनता है
- सभी लोग एक ही प्रकार के प्रतीकों से परिपथ समझ सकते हैं
अध्याय में यह भी बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक प्रतीक निर्धारित किए जाते हैं ताकि सभी जगह एक समान समझ हो।
3.4 विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी
जब हमने परिपथ बनाया, तो तार धातु के थे। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी पदार्थ विद्युत धारा को समान रूप से नहीं बहने देते।
विद्युत चालक
वे पदार्थ जिनमें से विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो जाती है, चालक कहलाते हैं।
उदाहरण
- ताँबा
- लोहा
- एल्युमिनियम
- चाँदी
- सोना
विद्युतरोधी
वे पदार्थ जिनमें से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो सकती, विद्युतरोधी कहलाते हैं।
उदाहरण
- रबर
- प्लास्टिक
- काँच
- लकड़ी
- मोम
- कागज
धातुएँ चालक होती हैं, इसलिए तार उनके बनाए जाते हैं। परंतु तारों पर प्लास्टिक या रबर का आवरण चढ़ाया जाता है ताकि हमें बिजली का झटका न लगे।
सुरक्षा
हमारा शरीर भी विद्युत का चालक है। इसलिए—
- गीले हाथों से स्विच या प्लग न छुएँ
- टूटे तार या खराब उपकरण का उपयोग न करें
- गीली जगह पर विद्युत उपकरण न चलाएँ
यह सावधानी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण अंतर
1. सेल और बैटरी में अंतर
- सेल: एक अकेला विद्युत स्रोत
- बैटरी: दो या दो से अधिक सेल का संयोजन
2. तापदीप्त लैम्प और एल.ई.डी. में अंतर
- तापदीप्त लैम्प में तंतु होता है
- एल.ई.डी. में तंतु नहीं होता
- एल.ई.डी. सही दिशा में जोड़ने पर ही जलती है
- तापदीप्त लैम्प में दिशा का विशेष प्रभाव नहीं पड़ता
3. चालक और विद्युतरोधी में अंतर
- चालक धारा को प्रवाहित करते हैं
- विद्युतरोधी धारा को नहीं बहने देते
परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु
- विद्युत सेल के दो टर्मिनल होते हैं—धनात्मक और ऋणात्मक।
- बैटरी कई सेल मिलकर बनती है।
- तापदीप्त लैम्प में तंतु होता है।
- एल.ई.डी. में लंबा तार धनात्मक और छोटा तार ऋणात्मक होता है।
- विद्युत धारा बंद परिपथ में ही प्रवाहित होती है।
- स्विच परिपथ को खोलता और बंद करता है।
- चालक पदार्थों में धारा बहती है।
- विद्युतरोधी पदार्थ धारा के प्रवाह को रोकते हैं।
- तारों पर प्लास्टिक/रबर का आवरण सुरक्षा के लिए होता है।
संक्षेप में – Summary
इस अध्याय में हमने सीखा कि विद्युत हमारे जीवन का बहुत महत्त्वपूर्ण भाग है। टॉर्च जैसे सरल उपकरण की सहायता से हमने जाना कि विद्युत सेल, बैटरी, लैम्प, तार और स्विच मिलकर एक विद्युत परिपथ बनाते हैं। जब परिपथ पूरा होता है, तब धारा प्रवाहित होती है और लैम्प जलता है। तापदीप्त लैम्प में तंतु होता है, जबकि एल.ई.डी. में धारा केवल एक दिशा में प्रवाहित होती है। परिपथ को प्रतीकों द्वारा भी दर्शाया जा सकता है, जिसे परिपथ आरेख कहते हैं। हमने यह भी समझा कि कुछ पदार्थ विद्युत के चालक होते हैं और कुछ विद्युतरोधी। विद्युत का उपयोग करते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है।
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