Class 6 · व्यावसायिक शिक्षा · Hindi Medium · Question Answers

परियोजना 1: विद्यालयी रसोई उद्यान

पुस्तक की गतिविधियों, तालिकाओं और प्रश्नों के संपूर्ण विद्यार्थी-अनुकूल उत्तर नीचे पढ़ें।

Kaushal Bodh | कौशल बोधभाग 1— जीव रूपों के साथ कार्य करनाQuestion Answers
Class
6
Subject
व्यावसायिक शिक्षा
Book
Kaushal Bodh | कौशल बोध
Medium
Hindi
संपूर्ण प्रश्न-उत्तर

विद्यालयी रसोई उद्यान की सभी गतिविधियों, अवलोकन तालिकाओं और चिंतन प्रश्नों के विद्यार्थी-अनुकूल उत्तर।

गतिविधि 1 — कृषि फार्म, नर्सरी या उद्यान के भ्रमण पर आधारित उत्तर

1. कौन-कौन से पौधे उगाए जा रहे हैं? भ्रमण के दौरान हमने कई प्रकार के पौधे देखे। वहाँ पालक, धनिया, पुदीना, मेथी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, मूली और गाजर जैसे पौधे उगाए जा रहे थे। कुछ स्थानों पर फूलों और औषधीय पौधों को भी उगाया जा रहा था। अलग-अलग पौधे अलग क्यारियों और गमलों में लगाए गए थे।

2. क्या सभी पौधे एक ही समय पर लगाए गए थे? यदि नहीं, तो क्यों? नहीं, सभी पौधे एक ही समय पर नहीं लगाए गए थे। अलग-अलग पौधों का बोने और उगने का समय अलग होता है। कुछ पौधे जल्दी तैयार हो जाते हैं, जबकि कुछ को बढ़ने में अधिक समय लगता है। मौसम, तापमान और पानी की आवश्यकता के अनुसार भी पौधे अलग समय पर लगाए जाते हैं।

3. क्या रसोई उद्यान में सभी पौधे उगाए जा सकते हैं? (हाँ या नहीं) नहीं। रसोई उद्यान में केवल वही पौधे आसानी से उगाए जा सकते हैं जिन्हें कम जगह में, घर या विद्यालय के पास, क्यारियों या गमलों में उगाना संभव हो। बहुत बड़े पेड़ या बहुत अधिक जगह और समय लेने वाले पौधे सामान्य रसोई उद्यान में नहीं उगाए जा सकते।

4. बुवाई या रोपण के लिए मिट्टी कैसे तैयार की जाती है? बुवाई या रोपण से पहले मिट्टी को अच्छी तरह खोदा और भुरभुरा किया जाता है। उसमें से पत्थर, कंकड़, घास-फूस और कचरा हटाया जाता है। इसके बाद मिट्टी में खाद या कंपोस्ट मिलाई जाती है ताकि वह उपजाऊ बन सके। फिर क्यारियाँ या गमले तैयार करके बीज बोए या पौधे लगाए जाते हैं।

5. पौधों को मिट्टी से मिलने वाले पोषण के अतिरिक्त पोषण किस प्रकार प्रदान किया जाता है? पौधों को अतिरिक्त पोषण खाद, कंपोस्ट, वर्मीकंपोस्ट और जैविक उर्वरक देकर प्रदान किया जाता है। कभी-कभी गोबर की खाद या पत्तों की खाद भी दी जाती है। ये पदार्थ पौधों को बढ़ने के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व देते हैं और मिट्टी को भी बेहतर बनाते हैं।

6. पौधों को पशुओं और कीटों से किसी भी प्रकार के नुकसान से कैसे बचाया जा सकता है? पौधों को पशुओं से बचाने के लिए उनके चारों ओर बाड़ लगाई जा सकती है। कीटों से बचाव के लिए नीम की पत्तियों या नीम के तेल से बना जैविक कीटनाशक उपयोग किया जा सकता है। नियमित निराई-गुड़ाई, साफ-सफाई, सूखी पत्तियाँ हटाना और पौधों की निगरानी करना भी बहुत जरूरी है। इससे पौधे सुरक्षित और स्वस्थ रहते हैं।

7. अपने भ्रमण के दौरान आपने कौन-सी दो सबसे रोचक बातें सीखीं? पहली रोचक बात यह सीखने को मिली कि पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए केवल पानी ही नहीं, बल्कि सही मिट्टी, खाद, धूप और देखभाल भी आवश्यक होती है। दूसरी रोचक बात यह थी कि रसोई के बचे हुए जैविक कचरे से वर्मीकंपोस्ट बनाकर पौधों के लिए उपयोगी खाद तैयार की जा सकती है।

भ्रमण के पश्चात आपने पौधे उगाने के विषय में जो सीखा भ्रमण के बाद मैंने सीखा कि पौधे उगाना एक जिम्मेदारी का काम है। इसके लिए सही मिट्टी, अच्छे बीज, समय पर पानी, खाद, धूप और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। मैंने यह भी जाना कि छोटे स्थान में भी किचन गार्डन बनाया जा सकता है और उससे ताजी व पौष्टिक सब्जियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। पौधों की नियमित देखभाल करने से वे स्वस्थ रहते हैं और अच्छी उपज देते हैं।

गतिविधि 2 — विद्यालय के रसोई उद्यान की योजना तैयार करना

1. क्या आप अपने विद्यालय में उपलब्ध भूमि या गमलों या दोनों में रसोई उद्यान तैयार करने जा रहे हैं? हम अपने विद्यालय में उपलब्ध भूमि और गमलों, दोनों में रसोई उद्यान तैयार करने जा रहे हैं। भूमि में क्यारियाँ बनाकर सब्जियाँ उगाई जाएँगी और छोटे पौधों तथा शाक को गमलों में लगाया जाएगा। इससे कम जगह का भी अच्छे से उपयोग हो सकेगा।

2. आप अपने रसोई उद्यान के क्षेत्रफल की गणना कैसे करेंगे? हम पहले उद्यान की लंबाई और चौड़ाई मापेंगे। उसके बाद लंबाई × चौड़ाई करके क्षेत्रफल निकालेंगे। यदि स्थान आयताकार होगा, तो यह विधि आसानी से काम करेगी। अलग-अलग क्यारियों का क्षेत्रफल निकालकर कुल क्षेत्रफल भी ज्ञात किया जा सकता है।

3. उद्यान के लिए स्थान का चयन करते समय आपने किन कारकों पर विचार किया? उद्यान के लिए स्थान चुनते समय हमने सूर्य की रोशनी, पानी की उपलब्धता और जल निकासी का ध्यान रखा। हमने यह भी देखा कि जगह खुली हो और पौधों तक आसानी से पहुँचा जा सके। पौधों के बीच उचित दूरी रखने और उनकी देखभाल करने के लिए पर्याप्त स्थान होना भी जरूरी है। पाठ्यपुस्तक में भी सूर्य की रोशनी, जल निकासी और पौधों के बीच दूरी पर विचार करने की बात कही गई है।

गतिविधि 3 — वर्मीकंपोस्ट तैयार करना

1. वर्मीकंपोस्ट बनाने के लिए आपने किन सामग्रियों का उपयोग किया? वर्मीकंपोस्ट बनाने के लिए हमने एक कूड़ेदान या डिब्बा, तिरपाल या पुराना मोटा कपड़ा, सूखे पत्ते, रसोई का जैविक कचरा, पानी और लाल केंचुओं का उपयोग किया। डिब्बे में छोटे-छोटे छिद्र भी किए गए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। पुस्तक में वर्मीबेड, जैविक अपशिष्ट और केंचुओं के उपयोग का वर्णन दिया गया है।

2. आपने कूड़ेदान में किस प्रकार के खाद्य अवशेष डाले? हमने कूड़ेदान में फलों और सब्जियों के छिलके, चाय/कॉफी के अवशेष, अंडे के छिलके और अन्य गैर-चिकनाई वाले जैविक खाद्य अवशेष डाले। हमने मांस, डेयरी पदार्थ और बहुत तैलीय या खट्टे पदार्थ नहीं डाले, क्योंकि वे कीटों को आकर्षित कर सकते हैं।

3. समय के साथ आपने कंपोस्ट डिब्बे में क्या परिवर्तन देखे? समय के साथ डिब्बे में डाला गया कचरा धीरे-धीरे सड़कर गलने लगा। उसकी मात्रा कम होने लगी और वह गहरे रंग का, भुरभुरा तथा मिट्टी जैसा दिखने लगा। उसमें से खाद जैसी गंध आने लगी। अंत में वह उपयोगी वर्मीकंपोस्ट में बदल गया। पुस्तक में बताया गया है कि तैयार वर्मीकंपोस्ट काला, भुरभुरा और मिट्टी जैसा हो जाता है।

गतिविधि 4 — रोपण के लिए रसोई उद्यान तैयार करना

1. आपने रोपण के लिए मिट्टी कैसे तैयार की? हमने सबसे पहले मिट्टी से कंकड़-पत्थर, घास-फूस और अन्य अवांछित चीजें हटाईं। फिर मिट्टी को खोदकर भुरभुरा बनाया और उसमें खाद मिलाई। इसके बाद क्यारियाँ और गमले रोपण के लिए तैयार किए। पुस्तक में भी मिट्टी से मलबा, कंकड़-पत्थर और अवांछित पौधों को हटाकर मिट्टी तैयार करने की बात कही गई है।

2. क्या आपने जैविक खाद का उपयोग किया? यदि हाँ, तो आपने मिट्टी में जैविक खाद मिलाने के लिए किस अनुपात का उपयोग किया? हाँ, हमने जैविक खाद का उपयोग किया। हमने लगभग 3 भाग मिट्टी और 1 भाग जैविक खाद मिलाई। इससे मिट्टी उपजाऊ बनी और पौधों को बढ़ने के लिए आवश्यक पोषण मिला। शिक्षक के निर्देशानुसार यह अनुपात थोड़ा बदल भी सकता है।

गतिविधि 5 — बीज बोना और पौधे रोपना

1. तालिका 1.1 — बीज बोने की गहराई का विवरण

क्र.सं.पौधे का नामबीज बोने की गहराई (सेंटीमीटर)
1.धनिया1 से 1.5 सेमी
2.पालक1 से 2 सेमी
3.मेथी1 से 1.5 सेमी
4.मूली2 से 3 सेमी

पुस्तक में बताया गया है कि बीजों को सुझाई गई गहराई पर बोना चाहिए और हल्के से मिट्टी से ढकना चाहिए।

2. तालिका 1.2 — पौधे से पौधे के बीच की दूरी

क्र.सं.पौधे का नामपौधे से पौधे के बीच की दूरी (सेंटीमीटर)
1.धनिया5 से 7 सेमी
2.पालक8 से 10 सेमी
3.मेथी5 से 8 सेमी
4.मूली10 से 15 सेमी

पुस्तक में बीज बोते समय उचित अंतराल रखने और पौधों के बीच दूरी का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।

3. क्या आपके द्वारा उगाए गए सभी पौधों के लिए पौधों से पौधे के बीच की दूरी समान थी?

नहीं। सभी पौधों की वृद्धि, जड़ों के फैलाव और आकार अलग-अलग होते हैं, इसलिए उनके बीच की दूरी भी अलग रखी जाती है।

गतिविधि 6 — पौधों की देखभाल करना

1. बाड़ लगाने के लिए आप कौन-सी सामग्री का उपयोग करेंगे?

हम बाड़ लगाने के लिए बाँस, पुरानी लकड़ी की छड़ियाँ, पुराने पाइप और मजबूत रस्सी का उपयोग करेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो जाली या तार का भी उपयोग किया जा सकता है। पुस्तक में बाँस, पुराने पाइप या लकड़ी की छड़ियों और रस्सी से बाड़ बनाने का सुझाव दिया गया है।

2. बाड़ लगाने के लिए आपको कितने डंडों और कितनी लंबी रस्सी की आवश्यकता होगी?

यदि हमारे रसोई उद्यान की क्यारी आयताकार है, तो हमें चारों कोनों के लिए कम से कम 4 मुख्य डंडे और बीच-बीच में सहारे के लिए 4–6 अतिरिक्त डंडे चाहिए होंगे। इस प्रकार कुल लगभग 8 से 10 डंडों की आवश्यकता होगी। रस्सी की लंबाई उद्यान की परिमाप पर निर्भर करेगी। उदाहरण के लिए, यदि क्यारी 4 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी है, तो परिमाप 14 मीटर होगी। इसलिए लगभग 14 से 16 मीटर रस्सी चाहिए होगी।

3. आपको कैसे पता चलता है कि पौधे को पानी की आवश्यकता है?

जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी दिखाई देती है, पौधे की पत्तियाँ थोड़ी मुरझाई हुई लगती हैं, या मिट्टी में नमी कम महसूस होती है, तब समझ में आता है कि पौधे को पानी चाहिए। पुस्तक में मिट्टी को नम रखने, लेकिन जलभराव न होने देने की बात कही गई है।

4. आपको अपने पौधों को कितनी बार पानी देने की आवश्यकता है?

अधिकांश पौधों को मौसम के अनुसार रोज़ या एक दिन छोड़कर पानी देना पड़ सकता है। नए लगाए गए पौधों को अधिक बार पानी देने की आवश्यकता होती है। पुस्तक में भी नए पौधों को अधिक बार पानी देने की बात कही गई है।

5. पौधों को पानी देने का सबसे अच्छा समय क्या है?

पौधों को पानी देने का सबसे अच्छा समय प्रातःकाल या दोपहर के बाद/शाम होता है। इससे पानी जल्दी नहीं सूखता और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है। पुस्तक में भी वाष्पीकरण कम करने के लिए यही समय बताया गया है।

6. कौन-से कारक पानी देने की मात्रा और आवृत्ति को प्रभावित करते हैं?

पानी देने की मात्रा और आवृत्ति पर कई बातें प्रभाव डालती हैं, जैसे— मौसम, मिट्टी का प्रकार, पौधे का प्रकार, पौधे की आयु, धूप की मात्रा और वर्षा। गर्मियों में अधिक पानी और सर्दियों में कम पानी की आवश्यकता हो सकती है।

गतिविधि 7 — पौधों की वृद्धि का अवलोकन

पुस्तक में सप्ताहवार अवलोकन करने, जैसे अंकुर निकलना, पौधों की लंबाई, पत्तियों का रंग, कीट और फूल आदि लिखने के लिए कहा गया है।

तालिका 1.3 — रसोई उद्यान में उगाए गए पौधों का अवलोकन

अवलोकन तिथिअवलोकन
सप्ताह 1 (तिथि — 01/07/2026)बीजों से छोटे-छोटे अंकुर निकलने लगे। पौधों की लंबाई लगभग 2 से 4 सेमी थी। पत्तियाँ हल्के हरे रंग की थीं। कोई बड़ा कीट दिखाई नहीं दिया।
सप्ताह 2 (तिथि — 08/07/2026)पौधे पहले से अधिक बढ़ गए। उनकी लंबाई लगभग 5 से 8 सेमी हो गई। पत्तियाँ अधिक हरी और बड़ी दिखीं। कुछ खरपतवार दिखाई दिए, जिन्हें हटा दिया गया।
सप्ताह 3 (तिथि — 15/07/2026)पौधे स्वस्थ दिखाई दिए और उनकी लंबाई लगभग 8 से 12 सेमी हो गई। कुछ पौधों में नई पत्तियाँ निकलीं। एक-दो पत्तियों पर हल्का कीट-प्रभाव दिखा, इसलिए नीम का छिड़काव किया गया।

सप्ताह 1/माह 1 — रेखाचित्र/चित्र के लिए क्या दिखाएँ

इस भाग में आप छोटा-सा चित्र बना सकते हैं जिसमें क्यारी में छोटे अंकुर निकलते हुए दिखें। आप यह भी लिख सकते हैं: “इस सप्ताह बीजों से अंकुर निकल आए थे। पौधे छोटे थे और उनकी पत्तियाँ हल्के हरे रंग की थीं।”

सप्ताह 2/माह 2 — रेखाचित्र/चित्र के लिए क्या दिखाएँ

इस भाग में आप थोड़ा बड़े पौधे, अधिक पत्तियाँ और क्यारी की साफ-सफाई दिखा सकते हैं। आप यह लिख सकते हैं: “इस सप्ताह पौधे पहले से ऊँचे हो गए थे। पत्तियाँ अधिक हरी थीं और पौधों की अच्छी वृद्धि दिखाई दी।”

गतिविधि 8 — फसल की कटाई

1. आपने कौन-सी फसल की कटाई की? (क) पालक (ख) मूली (ग) टमाटर

2. आपको यह कैसे ज्ञात हुआ कि फसल कटाई के लिए तैयार थी? (क) पालक की पत्तियाँ बड़ी, हरी और ताजी हो गई थीं। (ख) मूली की जड़ पर्याप्त मोटी और अच्छी आकार की हो गई थी। (ग) टमाटर हरे से लाल होने लगे थे और आकार में पूरे विकसित हो गए थे।

3. पौधों की कटाई के लिए आपने किन उपकरणों का उपयोग किया? हमने फसल की कटाई के लिए बागवानी कैंची, हाथ और छोटी खरपी का उपयोग किया। हरी पत्तेदार सब्जियों को सावधानी से हाथ या कैंची से काटा। मूली जैसी जड़ वाली सब्जियों को मिट्टी ढीली करके निकाला। पुस्तक में भी पत्तेदार सब्जियों, जड़ वाली सब्जियों और टमाटर/बैंगन जैसी फसलों की कटाई के अलग तरीके बताए गए हैं।

4. कटाई के दौरान पौधों को नुकसान से बचाने के लिए आपने क्या सावधानियाँ बरतीं? हमने पौधों को धीरे-धीरे और सावधानी से पकड़ा। कटाई करते समय केवल तैयार फसल को ही निकाला। जड़ों को नुकसान न पहुँचे, इसलिए मिट्टी को पहले हल्का ढीला किया। कैंची का सही उपयोग किया और पौधे की बाकी शाखाओं तथा पत्तियों को सुरक्षित रखा।

5. रसोई उद्यान से कटाई के पश्चात आपने उपज का क्या किया? कटाई के बाद हमने उपज को साफ किया और अच्छी तथा खराब उपज को अलग किया। कुछ सब्जियाँ विद्यालय के मध्यान्ह भोजन के लिए दी गईं। कुछ उपज को सहपाठियों और शिक्षकों को दिखाया गया। पुस्तक में भी उपज को विद्यालय की रसोई में उपयोग करने या उसके आगे के उपयोग पर चर्चा करने की बात कही गई है।

गतिविधि 9 — सब्जी मंडी का भ्रमण

तालिका 1.4 — विक्रय स्थल पर सब्जियों की उपज की मूल्य सूची

सब्जी का नामकीमत (`)सब्जी का नामकीमत (`)
1. पालक30 प्रति किलो5. बैंगन40 प्रति किलो
2. टमाटर35 प्रति किलो6. मिर्च60 प्रति किलो
3. मूली25 प्रति किलो7. धनिया20 प्रति गुच्छा
4. लौकी30 प्रति किलो8. मेथी25 प्रति गुच्छा

यह तालिका एक उदाहरण के रूप में भरी गई है। स्थानीय मंडी के अनुसार कीमतें बदल सकती हैं।

गतिविधि 10 — मूल्य निर्धारित करना

तालिका 1.5 — रसोई उद्यान की उपज का अनुमानित व्यय

आपने क्या उगाया? (1)बीज/पौधे और अन्य सामग्री पर कितनी राशि व्यय की? (2)आपने कितनी मात्रा में फसल/उपज की कटाई की है? (3)उपज का बाजार मूल्य क्या है? (4)आपको अपनी फसल/उपज के लिए कितनी राशि मिलेगी? (5)
पालक`202 किलो`30 प्रति किलो`60
मूली`253 किलो`25 प्रति किलो`75
टमाटर`302 किलो`35 प्रति किलो`70
धनिया`155 गुच्छे`20 प्रति गुच्छा`100
बैंगन`352 किलो`40 प्रति किलो`80

इन उदाहरणों से विद्यार्थी समझ सकते हैं कि कम खर्च में भी अच्छी उपज ली जा सकती है।

मैंने दूसरों से क्या सीखा?

  • मैंने सीखा कि पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए सही समय पर पानी, धूप और खाद देना बहुत जरूरी है।
  • मैंने सीखा कि मिल-जुलकर काम करने से रसोई उद्यान की देखभाल आसान और अच्छी तरह हो सकती है।
  • मैंने सीखा कि पौधों को कीटों और पशुओं से बचाने के लिए बाड़ और जैविक कीटनाशक उपयोगी होते हैं।

सोचिए और उत्तर दीजिए

1. आपको क्या करने में आनंद आया? मुझे बीज बोने, पौधों को बढ़ते हुए देखने और फसल की कटाई करने में सबसे अधिक आनंद आया। रसोई उद्यान में काम करना रोचक और सीखने योग्य अनुभव था।

2. गतिविधियों के दौरान आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? हमें मिट्टी तैयार करने, खरपतवार हटाने, पौधों को नियमित पानी देने और कीटों से बचाने में कुछ कठिनाइयाँ आईं। कभी-कभी मौसम के कारण भी पौधों की देखभाल करना मुश्किल हुआ।

3. आप अगली बार क्या नया या अलग करेंगे? अगली बार मैं अधिक प्रकार की सब्जियाँ उगाऊँगा/उगाऊँगी। मैं पौधों के लिए नियमित समय-सारणी बनाऊँगा/बनाऊँगी। मैं मल्चिंग और जैविक खाद का अधिक अच्छे से उपयोग करूँगा/करूँगी।

4. वे कौन-सी स्थितियाँ थीं जिनसे आपके पौधों की वृद्धि में सहायता प्राप्त हुई? यदि आपके पौधे अच्छी प्रकार से विकसित नहीं हुए तो आपको अगली बार क्या-क्या करना चाहिए? पौधों की वृद्धि में अच्छी मिट्टी, पर्याप्त धूप, समय पर पानी, खाद और नियमित देखभाल से सहायता मिली। यदि पौधे अच्छे से विकसित नहीं हुए, तो अगली बार मिट्टी को और अच्छी तरह तैयार करना चाहिए, सही मात्रा में पानी देना चाहिए, कीटों से बचाव करना चाहिए और पौधों के बीच उचित दूरी रखनी चाहिए।

5. परियोजना से संबंधित कौन-सी नौकरियाँ हैं? इस परियोजना से संबंधित कई नौकरियाँ हैं, जैसे— किसान, माली, नर्सरी कार्यकर्ता, कृषि वैज्ञानिक, जैविक खाद बनाने वाला कार्यकर्ता, कृषि सलाहकार, सिंचाई कार्यकर्ता और कृषि उपकरण मैकेनिक। पुस्तक में भी किसान, माली, कृषि वैज्ञानिक और कृषि उपकरण मैकेनिक के उदाहरण दिए गए हैं।

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